जिंदगी बनाम कमीशन : गोरखपुर की घटना पर एक कविता

गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में आक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत से शोकग्रस्त मन कल (12 अगस्त) सो न सका उन मासूम बच्चों की आवाज मेरे कानों गूंजती रही, एक कविता शहीद बच्चों को श्रद्धाजंलि…

जिंदगी बनाम कमीशन

तुम आए थे
धरती के उस कोने में
इंसानियत को जिंदा रखने
तुम में ही कोई बनता नेता सुभाष गांधी-
पर तुम जान गए थे
पूरी उम्र लडना है
भ्रष्ट सफेदपोश, खाकी से
तुम लड रहे थे नन्ही जान
इस बडी दुनिया के हैवानों से
बेशरम हुक्मरानों से।

कल रात सपनों में तुम आए
कह रहे थे तुम सब
हम बच्चे आए थे तुम्हारी दुनिया में ।
देने खूब खुशियां
पर लालची तेरा मन
तेरे जैसे बहुत मन
हवा का भी सौदागर
बन गए कमीशनबाज
और तेरा हुक्मरान
नहीें है  नहीें है इंसान।
इतना कहकर तुम सब चले गए
नई दुनिया की खोज मेें।

तुम्हारे जाने के बाद
कुछ नही बदल रहा
कमीशन सत्ता भ्रष्टाचार।
उन बेशर्म आंखों में आंसू नहीें,
जो भाषणों में सपने बेचा करते थे
मन की बातें करनेवालों का मन पसीजा क्यों नहीें।
ये हुक्मरान जा झांक देख  अपने बच्चों की आंखों में
उन बच्चों की शहादत दिखेगी।
हे! कमीशनखोर दैत्य
तू कई रूप में है
तू नेता, तू डाक्टर, तू भ्रष्ट सरकारी।
मत  छूना हत्यारे अपने पापी हाथों से
मेरे देश का तिरंगा।

अभिषेक कांत पाण्डेय भड्डरी
8577964903
abhishekkantpandey@gmail.com

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