यूपी : इस वहशीपने का न जाने अंत कब होगा, दरोगा की करतूत पर पत्रकारों में रोष

बाराबंकी :  एक महिला ने एसओ और एसआई पर खुद को जिंदा जलाने का आरोप लगाया है। पीड़ित महिला नीतू  (40) का आरोप है कि उसके पति को पुलिस ने किसी मामले में थाने में  बंद कर दिया था। वह पति को छुड़ाने कोठी थाने पहुंची थी। इसी दौरान एसओ राय सिंह यादव और एसआई अखिलेश ने उसे कमरे में बुलाया और रेप करने की कोशिश की। विरोध करने पर थाने में रखे मिट्टी का तेल उसपर उड़ेल दिया और आग लगा दी। आग से महिला करीब 86 फीसदी झुलस गई है। उसे लखनऊ रेफर किया गया है। मामले में आरोपी एसओ और एसआई पर आईपीसी की धारा 342, 504, 506, 511 के तहत मुकदमा दर्द कर लिया है। दोनों को फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस जांच-पड़ताल में जुट गई है। वही कोठी के अमर उजाला के पत्रकार की माँ के सात हुई इस घटना की गांधी सभागार में पत्रकारों ने बैठक कर कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तत्काल दरोगा की गिरफ़्तारी और चिकित्सा के लिए एक ज्ञापन जिलाधिकारी के ज़रिये मुख्यमंत्री को भेजा हैं।

जानकारी के मुताबिक कोठी थाना क्षेत्र की ग्राम गहा निवासी रामनरायन द्विवेदी को 5 जुलाई की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार करके हवालात में डाल दिया था। ऐसा चार जुलाई की रात्रि को श्री द्विवेदी के रिश्तेदार चन्दरावां निवासी नन्दकिशोर तिवारी व पुत्र दीपक तिवारी तथा एक अन्य की गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने के लिए किया गया था। दरअसल दोनों पिता पुत्र छेड़खानी के मामले में रहीमपुर गांव निवासी गंगाराम को गोली मार देने के आरोपी थे। पांच की शाम को रामनरायन की पत्नी 42 वर्षीय श्रीमती नीतू द्विवेदी जो आंगनबाड़ी कार्यकत्री भी है हवालात में बंद अपने पति से मिलने थाने पहुंची। जहां से कोठी थानाध्यक्ष राय साहब यादव व हल्का दरोगा अखिलेश राय ने उसे गालियां देकर भगा दिया। 

इसके उपरान्त आज सुबह लगभग 9 बजे नीतू फिर थाने पहुंची। उसने कहा कि जिसने गोली मारी आप लोग उसे पकडे़। रिश्तेदार होने के नाते मेरे पति व बच्चों तथा हमको क्यों परेशान किए हुए हैं। पीड़िता नीतू दिवेदी एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री के रूप में बच्चों को पढ़ाने का काम करती है। महिला का आरोप है कि कोठा थाने के एसओ राय सिंह यादव और एसआई अखिलेश उसके प्रति गलत नियत रखते थे। वे राह चलते कई बार उसे आपत्तिजनक कमेंट करते थे। इसका वह लगातार विरोध करती थी। जब वे अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाए, तो रविवार को फर्जी मामले में उसके पति को थाने उठा लाए। महिला जब अपने पति को छुड़ाने थाने पहुंची, तो एसओ और एसआई उससे बदतमीजी करते हुए उसके जेवर लूट लिए और छेड़छाड़ करने लगे। विरोध करने पर उसे आग के हवाले कर दिया। गंभीर रूप से जली नीतू को बाराबंकी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उसने मजिस्ट्रेट को बयान दिया। इसके बाद हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया।

पीड़िता नीतू दिवेदी ने बताया, ‘मुझे जलाने में थाने का पूरा स्टाफ मिला हुआ था। दरोगा ने आग लगाई है। दोनों काफी समय से मुझे छेड़ रहे थे। उन्होंने मेरे पति को भी फर्जी केस में फंसाया है।’ मामले में अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया है। पुलिस ने महिला के पति को भी रिहा कर दिया है। एसआई और एसओ को निलंबित कर दिया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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