इनके बेशर्म फतवे से पूरा मुस्लिम समाज खुद को शर्मसार महसूस करता है

Asrar Khan : मतदान से एक दिन पहले मुसलमानों से किसी पार्टी विशेष को वोट देने की अपील करना जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी साहब के मजहबी धंधे का हिस्सा है… इनके बेशर्म फतवे से पूरा मुस्लिम समाज खुद को शर्मसार महसूस करता है लेकिन इनका यह पुश्तैनी धंधा बदस्तूर जारी है ….मेरा ख्याल है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी हार के भय से मतदान में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने के मकसद से इमाम साहब के आगे कुछ टुकड़े फेंक दिये होंगे और इमाम साहब ने मुसलमानों से आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान करने की अपील कर दिया ….? मित्रों जैसा की आप सभी को मालूम है कि दिल्ली के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी अपने वैचारिक दिवालियापन और मोदी के U-Turn की वजह से हारने जा रही है और आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल और आप की विश्वसनीयता की वजह से जीत की ऐतिहासिक चौखट पर खड़ी है, ऐसे में अहमद बुखारी जैसे बिकाऊ व्यक्तियों की बातों को तरजीह न देते हुए अपने क्रांतिकारी विचारों से प्रेरित होकर आम आदमी की इस लड़ाई को कामयाब बनाने के लिए मिलजुल कर भाईचारे के साथ जमकर मतदान करें और अपने सच्चे भारतवासी होने का परिचय देते हुए धर्म और जाति की राजनीति के किसी भी प्रयास को विफल कर दें ……!

Mohammad Anas : इमाम बुखारी इमामत ही करें तो बेहतर रहेगा। इमामत का मन नहीं है तो छोड़ दें। कुछ और करें। जैसे कि, अवैध रेहड़ी- ठेला लगवाएं, दुकान- मकान कब्जा करवाएं। आम आदमी पार्टी को उनके द्वारा दिया समर्थन ठुकराए जाने के बाद अचानक से आया ख्याल।

Nadim S. Akhter : आम आदमी पार्टी ने बुखारी के समर्थन को ठुकराकर सही समय पर उचित फैसला लिया. मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने वाले बुखारी जैसे लोगों को औकात बताना जरूरी है. लेकिन सवाल ये है कि कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी के इस साहसिक फैसले से कोई सबक लेंगे?? बीजेपी तो पहले ही डेरा सच्चा सौदा के राम-रहीम की गोद में बैठ चुकी है. यानी धर्म के नाम पर वोट मांगने की उसकी राजनीति इस दौर में भी जारी है. देखते हैं दिल्ली वाले किसका साथ देते हैं.

Wasim Akram Tyagi : इमाम साहब अहमद बुखारी ने AAP को वोट देने की अपील करके हारती हुई भाजपा को जितवाने की कोशिश की है । इसे ही ‘सियासत’ कहा जाता है जो आम आदमी के सर के ऊपर से गुजर जाती है अगर आप दस, पंद्रह, पच्चीस, साल पीछे जायेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि भारत के इस ‘शाही’ खानदान का भाजपा से कितना गहरा नाता रहा है । और उसी नाते को इन्होने मुस्लिम परस्ती का नाम दिया है जबकि सच्चाई यह है इस ‘शाही’ द्वारा कभी किसी मुस्लिम विधवा का राशन कार्ड तक नहीं बन सका हालांकि खुद के पास पैट्रोल पंप तक भी है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल भाजपा के इस दांव में घिर चुके हैं। वे न तो अब बुखारी की अपील नकारेंगे और न ही उस वोट बैंक से यह कहने का सासह कर सकेंगे (जो भाजपा से छिटककर उनके पास आ रहा था ) कि उन्हें बुखारी का समर्थन नहीं चाहिये। कुर्सी और दिल्ली की सत्ता संभालने का मोह उन्हें यह कहने नही देगा कि उनको बुखारी का समर्थन नहीं चाहिये। पहले आरएसएस द्वारा अरविंद केजरीवाल को लिखी गई चिठ्ठियां दिखाई जा रहीं थी और अब भाजपा पर्दे के पीछे से बुखारी को सामने ले आई है । केजरीवाल के नुकसान पहुंचाने के लिये दोनों ही काफी हैं । यह सियासत है साब यहां कभी प्यादे वजीरों से पिटते हैं तो कभी खुद को सच्चा कौम का हमदर्द साबित करने के लिये वजीर प्यादो से पिटता है । कुर्सी तू क्या क्या करवा देती है ।।।।

चार वरिष्ठ और युवा पत्रकारों असरार खान, मोहम्मद अनस, नदीम एस. अख्तर और वसीम अकरम त्यागी के फेसबुक वॉल से.

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ये हार बहुत भीषण है म्हराज!

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