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सुख-दुख

एक अजनबी बिल्ली से यशवंत यूं लगा बैठे दिल…. देखिए, बिल्ली- एक प्रेम कथा

Yashwant Singh : कल एक अजनबी बिलार आ गई। मच्छी-भात पका रहा था। वो भूखी होने वाली गुहार-आवाज़ लगा रही थी। उसको मच्छी के टुकड़े डालता खिलाता रहा। थोड़ी ही देर में परिचित सी हो गयी। शांत, स्निग्ध और सहज टाइप स्वभाव वाली दिखी। हम दोनों की दोस्ती हो जाने के बाद उसको ससम्मान कटोरी में खिलाया और विदा किया। लगा यूँ ही रास्ता भटक के आ गयी थी और पेट भर खा पीकर चली गयी।

Yashwant Singh : कल एक अजनबी बिलार आ गई। मच्छी-भात पका रहा था। वो भूखी होने वाली गुहार-आवाज़ लगा रही थी। उसको मच्छी के टुकड़े डालता खिलाता रहा। थोड़ी ही देर में परिचित सी हो गयी। शांत, स्निग्ध और सहज टाइप स्वभाव वाली दिखी। हम दोनों की दोस्ती हो जाने के बाद उसको ससम्मान कटोरी में खिलाया और विदा किया। लगा यूँ ही रास्ता भटक के आ गयी थी और पेट भर खा पीकर चली गयी।

पर महोदया आज दोपहर फिर पधार गईं। वही, भूखी वाली आवाज़ निकालने लगी। फटाफट कटोरी में दूध परोसा। वो खटाखट चट कर गयी। फिर दूध डाला। वो भी पी गयी। दूध पीते हुए शांत रहती। खत्म होते ही म्याऊं…. म्याऊं… शुरू। कल से पूरे हालात पर गहन नज़र रखे बीवी अचानक हड़काने लगीं- ”ये क्या नया रोग पाल लिया। भगाइए इसको। सब दूध यही पी जाएगी तो हम लोग क्या करेंगे।”

बिल्ली और मैं दोनों चुप होकर एक कोना पकड़ लिए।

गृह मंत्रालय का जब सर्कुलर जारी हो रहा हो, उस वक़्त नहीं बोलना चाहिए। बाद में आदेश का पालन करें या न करें, कोई ज्यादा फरक नहीं पड़ता।

बिल्ली को आंखों से शांत यहीं बैठने का इशारा कर मैं मार्केट निकल गया और डॉग शॉप पर जाकर बोला- ए भइया, बिलार खातिर फ़ास्ट फ़ूड बा?

दुकानदार ने 30-30 रुपए के दो पैकेट थमाए।

घर लाकर जब एक पैकेट का थोड़ा सा माल कटोरी में डाल कर बिलार जी को परोसा तो वो कुछ देर सूंघने-सांघने के बाद मेरी तरफ खून भरी आंख से देखने लगीं… जैसे लगा मुझे कह रही हो- ”एकदम्मे लड़बक हो का रे… ई का ले आए ससुर.. अरे मछरी दूध खिलाने के बाद ई टैबलेट टाइप का ज़हर खिलाओगे बे…”.

मैं माफी की मुद्रा में दांत चियारते हुए कहा- ”तुम्हारा टेस्ट डेवलप नहीं है साथी। ये बहुत प्रोटीन वाला माल है। देखो देखो इस बिलार फ़ास्ट फूड के पैकेट पर कितना सुग्घर बिलार का फोटू बना है। सब यम यम करके खाती हैं, पूंछ हिला हिला के।”

मेरी बात सुन के क्रोधित बिलार जी अपनी मूंछ फनफनाते हुए मौके से टसकने लगीं। थोड़ी दूर जाकर गर्दन पीछे मोडीं, फिर डपट पडीं- ”चुप्प बे। वो फोटू वाली बिलार सब गुलाम-रखैल होती हैं, घर में ही जन्मती पनपती हैं। हम उ नहीं हैं, समझे। औकात में रहकर बात करो चिरकुट।”

बिलार जी मुझे धिक्कार के चली गयीं।

मैं एक हाथ से बिलार फ़ास्ट फ़ूड का पैकेट और दूसरे हाथ से कपार पकड़ कर फिलहाल बैठा हूँ।

कल जो बिलार जी का वीडियो बनाया था, उसे नीचे दे रहा हूं… देखिए…

भड़ास के एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से.

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