वैज्ञानिकों ने पाया है कि चंद्रमा धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है, जिससे उसकी सतह पर झुर्रियाँ (wrinkles) और दरारें (faults) बन रही हैं। यह प्रक्रिया उसकी आंतरिक ठंडक के कारण हो रही है, जो चंद्रमा के भूगर्भीय इतिहास का हिस्सा है।
चंद्रमा के सिकुड़ने के प्रमुख कारण:
1. आंतरिक ठंडक
• चंद्रमा जब बना था, तब वह एक गरम और पिघला हुआ पिंड था।
• समय के साथ उसका आंतरिक भाग ठंडा होकर ठोस बनता गया।
• जैसे अंगूर सूखकर किशमिश बन जाता है, वैसे ही चंद्रमा की सतह भी सिकुड़ने लगी।
2. लॉबस फॉल्ट्स (Lobate Scarps) का निर्माण
• सिकुड़न के कारण चंद्रमा की सतह पर पर्वत जैसी दरारें बनती हैं जिन्हें लॉबस फॉल्ट्स कहते हैं।
• नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने सैकड़ों ऐसी संरचनाएँ खोजी हैं।
• ये फॉल्ट्स कई किलोमीटर लंबे और सैकड़ों मीटर ऊँचे हो सकते हैं।
3. मूनक्वेक्स (Moonquakes)
• सिकुड़न से चंद्रमा की सतह में तनाव पैदा होता है, जिससे भूकंप जैसे झटके (मूनक्वेक्स) आते हैं।
• अपोलो मिशनों के दौरान लगाए गए उपकरणों ने इन कंपन को रिकॉर्ड किया।
• कुछ मूनक्वेक्स की तीव्रता 5.5 रिक्टर स्केल तक पाई गई है।
क्या चंद्रमा पृथ्वी से दूर जा रहा है?
• हाँ, चंद्रमा हर साल लगभग 3.8 सेमी (1.5 इंच) पृथ्वी से दूर जा रहा है।
• यह बहुत धीमी प्रक्रिया है, लेकिन लंबे समय में पृथ्वी के ज्वार-भाटों (tides) पर असर डाल सकती है।
क्या यह पृथ्वी के लिए खतरा है?
• वर्तमान में कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।
• भविष्य में, यदि दरारें और मूनक्वेक्स बढ़ते हैं तो ये मानव मिशनों के लिए चुनौतियाँ ला सकते हैं।
निष्कर्ष:
चंद्रमा का धीरे-धीरे सिकुड़ना एक प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया है। इससे उसकी सतह पर झुर्रियाँ, दरारें और मूनक्वेक्स जैसी गतिविधियाँ देखी जा रही हैं। यह फिलहाल खतरे की बात नहीं, बल्कि हमें चंद्रमा के विकास और भविष्य की संभावनाओं को समझने में मदद करता है।


