कृष्णन अय्यर-
~ अगर यही जूता नरिंदर मोदी पर चला होता
~ अगर यही जूता अमित शाह पर चलता
~ अगर यही जूता राष्ट्रपति पर चलता
~ अगर यही जूता आदित्यनाथ पर चलता
~ अगर यही जूता अदाणी/अंबानी पर चलता
◆ तब भी क्या पुलिस, सुप्रीम कोर्ट, मीडिया इतने रहमदिल होते? और भी बड़े बड़े नेता, मज़हबी ‘ओहदे वाले लोगों के नाम लिखे जा सकते हैं..मैंने सिर्फ़ कुछ मिसालें दी हैं..
◆ भारत में कौन सी क़ौम ख़ुश है? हर क़ौम परेशान है..हर भारतीय परेशान है..सब के पास जूता है..जूता नहीं तो चप्पल तो है..
◆ फ़र्ज़ कीजिए, CJI पर जूता चलाने वाले के हाथों में पिस्तौल होना भी मुमकिन था!! अगर गोली चलती और अनहोनी होती तो गोली चलाने वाला तो “धर्मरक्षक” बन जाता..एक और गोडसे बनता..
◆ CJI पर जूता चलाना एक मेसेजिंग है..सुप्रीम कोर्ट पर तो बुलडोज़र चला नहीं सकते..मगर जूता चला कर हदबंदी की गई है..अब कौन जज कितनी हिम्मत करेगा ये सब्जेक्टिव है मगर सब्जेक्ट तो बन गया..
◆ पूरी मीडिया में ख़ामोशी है..जूता चलाने वाले का परिचय/ता’र्रुफ़, सियासी बैकग्राउंड वग़ैरह पर कोई बात नहीं हो रही है..जैसे कि कोई था ही नहीं.
◆ पूरे नवरात्र के दौरान धार्मिक/सामाजिक परिचय बता कर आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश में जो किया है और CJI पर जूता : दोनों लगभग एक जैसा है..”धार्मिक आतंकवाद”
★ अब एक बहुत ही कड़वा सवाल : अगर CJI पर जूता चलाने वाला ‘अब्दुल होता तो क्या होता?
★ ‘अब्दुल के मज़हब के साथ भी तो ग़लत हो रहा है..क्या ‘अब्दुल को भी ग़ुस्सा आना लाज़िमी मान लिया जाता?
★ अब तक ‘अब्दुल के घर के सामने सैंकड़ों मीडिया वाले पाकिस्तान, ISIS और ना जाने क्या क्या बोल रहे होते!!
★ ‘अब्दुल के घर पर रात में ही बुलडोज़र चलता और हम सब चिप्स और कोक के साथ लाइव देख रहे होते..
★ ‘अब्दुल को बिहार के चुनाव के साथ जोड़ देते..राहुल गांधी और तेजस्वी यादव देश के दुश्मन ए’लान कर दिए जाते..
● भारत के CJI की सिक्योरिटी और ‘इज़्ज़त की यह हालत है तो हम ‘आम भारतीय कीड़े से भी बदतर हैं..
CJI साहब, आप बहुत महान हैं और रहमदिल इंसान हैं..कल सुब्ह ‘उमर ख़ालिद, शरजील इमाम और दिल्ली दंगों में बग़ैर ट्रायल के बरसों से क़ैद बेगुनाह लोगों की फ़ाइल मंगवा कर उन्हें ज़मानत दे दीजिए
CJI साहब, इंसाफ़ भी तो ख़तरे में हैं..प्लीज़ कुछ कीजिए


