वीआईपी स्टेटस के बहाने आप कोरोना की जांच से नहीं बच सकते : ममता बनर्जी

कोरोना वायरस से बचने में एहतियाती कदम उठा रहे लोग…

कोलकाता। बंगाल में कोरोना वायरस के एक के बाद एक तीन केस सामने आते ही हर जगह बस कोरोना की ही बातें हो रही हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी वीआईपी स्टेटस का दावा करने वालों द्वारा कोरोना वायरस की जांच न कराने को गैर जिम्मेदाराना ठहराया है। उन्होंने कहा कि कोई वीआईपी ही क्यों न हो, वह इस जांच से बच नहीं सकता है। ऐसी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मामले को लेकर ज्यादा सुगबुगाहट होने की वजह ये कि जो युवक कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है, उसकी मां आईएएस अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री ने पुलिस को भी कोरोना वायरस की झूठी खबर फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में आ रहे लोगों का तो स्वागत कर सकती हैं मगर बीमारी का स्वागत नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर हर किसी को जांच से गुजरना होगा। इस मामले में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

राज्य में कोरोना वायरस के तीन मामलों से लोग अचंभित दिखे। बस, ट्रेन, गली, मुहल्लों और घरों में बस कोरोना के ही चर्चे हैं। आखिर एक आईएएस अधिकारी जो सचिवालय में जिम्मेदार पद पर कार्यरत है, वह ऐसी लापरवाही कैसे कर सकती हैं। विदेश से पढ़ाई कर लौट रहे युवक से भी लोग ये उम्मीद नहीं कर पा रहे कि वो ये चूक कैसे कर सकता है। लोगों में इस मामले को लेकर चिंता भी दिखी और नाराजगी भी।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए राज्य सरकार ने स्कूलों, कालेजों में छुटिटयां बढ़ा दी हैं ताकि बच्चे इस बीमारी से बचे रहे। एहतियात के कदम उठाये जा रहे हैं।

लोकल ट्रेनों की भीड़ में रोजाना सफर करने वाले अधिकतर लोग भी इस वायरस से बचने के लिए अब मास्क का इस्तेमाल कर रहे। मास्क पहनने के साथ ही लोगों में सैनिटाइजर का प्रयोग करने का चलन बढ़ा है। इसके साथ ही लोग भीड़ भाड़ की जगहों पर इकट्ठा होने से बचने की कोशिश भी कर रहे। हालांकि अधिकतर लोगों का मानना है कि नौकरी और व्यवसाय के लिए बाहर निकलना उनकी मजबूरी भी है। एहतियात के रूप में लोग अब अनावश्यक रूप से एक दूसरे से हाथ मिलाने से बच रहे हैं। सफाई का ध्यान रखना अब प्राथमिकता बन गयी है। सही भी है, जान है तो जहान है।

कोलकाता से पत्रकार श्वेता सिंह की रिपोर्ट.

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