प्रियंका ओम-
इन दिनों आलिंगन चिकित्सा तेजी से प्रचलित हो रही है, मेरे यहाँ छोटे से शहर में तीन केंद्र हैं।
शिफा का यह नुस्खा ग़ैर यौनिक एवं सैद्धांतिक हैं, इसमें प्रशिक्षित पेशेवर द्वारा हाथ पकड़ना, सहलाना, बालों में उँगलियाँ फिराना, गले लगाना जैसा शारीरिक स्नेह दिया जाता है। दरअसल चिकित्सा की यह प्रणाली मनोविज्ञान से जुड़ी है, इस पद्धति में मन की गांठें, गिरहें खुलती हैं, जिससे व्यक्ति हल्का महसूस करता है जैसे सिर से कोई भारी बोझ उतर गया हो, इसका उद्देश्य मनोदशा को बेहतर बनाना और जुड़ाव की भावना को उकसाना है। मानसिक स्वास्थ्य लाभ की इस युक्ति में उपयुक्त वातावरण महत्वपूर्ण कारक माना गया है!

इलाज की यह शैली नई है जरूर किंतु शरीर का विज्ञान कोई रहस्य नहीं, जब एक देह दूसरे देह के स्पर्श में आती है तो ऑक्सीटोसिन रिलीज़ होता है जो ठीक आपके भीतरी अनुभूति के अनुरूप होता है। ऑक्सीटोसिन को आम बोलचाल की भाषा में लव हॉर्मोन भी कहा जाता है। यह विशेषकर उनके लिए हैं जो स्पर्श सुख से वंचित, दुख में डूबे या मानवीय स्नेह की सामान्य कमी का अनुभव कर रहे हैं।
व्यस्त महानगरीय भागमभाग भरी ज़िंदगी में हम बेसिक ह्यूमन टच लगभग भूल गए हैं, ह्यूमैनिटी अब दिवा स्वप्न हैं ऐसे में कडल थेरेपी / आलिंगन चिकित्सा का तेजी से फलना – फूलना कोई आश्चर्य नहीं। अधिकतर मुहताज एकाकी हैं या फिर पोस्ट ट्रॉमेटिक विकार से संतप्त।
बहुत से पक्षकार वे भी हैं जिनके पास वैसे तो सबकुछ हैं लेकिन प्रेम से चुका जीवन है। ऐसा नहीं कि रीति में यौन आग्रह नहीं होता किंतु पेशेवर इस आग्रह को बढ़ावा नहीं देते, दरअसल कडलिंग थेरेपी सुकूँ हैं जैसे ठहरा हुआ कोई लम्हा।
कतई अपरंपरागत यह थेरेपी आपसी सहमति और निर्धारित सीमा पर आधारित है किंतु कई-कई मर्तबा आकांक्षी गहरी नींद में चले जाते हैं, सच तो ये भी है कि आज के वक्त में नींद बड़ी जरूरत हैं, 33% जनता अनिंद्रा से त्रस्त बेसुकून हैं, बेचैन है।
लोगों के बीच घटते पारस्परिक स्नेह, सद्भाव और समय की कमी से ऐसे चिकित्सा की जरूरत को जन्म दिया है। संवेदना की अनवरत क्षय मानवों को लगातार यांत्रिक बनाती जा रही है, ऐसे हालात में एक नितांत अनजान देह का निष्कलंक स्पर्श वही सुख हैं जिसकी ख़ातिर आत्मा तरस से भरी हुई होती है, मन ठीक वैसे ही महक जाता है जैसे बारिश में भीगकर सूखी धरती।
भारत में यह चिकित्सा पद्धति स्वीकृत है या नहीं मैं नहीं जानती, परंतु हमारे यहाँ एक घंटे की क़ीमत 200usd है, जिस तरह से लोग एक दूसरे से कटते जा रहे हैं, आत्ममुग्धता के मद में दूसरों से दूर होते जा रहे हैं ऐसा लगता है वह दिन दूर नहीं जब बात करने के लिए भी क़ीमत अदा करनी होगी।
यहाँ मैंने जरुरतमंद को रोगी लिखने से संकोच किया है!


