लेबर इंस्पेक्टर के सामने सीना तानकर खड़े हुए जागरण कर्मी, अखबार को 30 दिन की मोहलत

धर्मशाला। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक जागरण की हिमाचल प्रदेश में स्थित धर्मशाला यूनिट के कर्मचारियों की  शिकायत पर लेबर इंस्पेक्टर के पास पहली सुनवाई में जागरण प्रबंधन ने जवाब देने के बजाय तीन दिन का समय देने की गुहार लगाई है। 

सोमवार को सभी कर्मचारी एकता  दिखाते हुए धर्मशाला स्थित लेबर इंस्पेक्टर के कार्यालय पहुंचे। इनकी संख्या डेढ़ दर्जन के करीब थी। वहीं प्रबंधन की ओर से एचआर हैड महेश मिश्रा अपने साथ सीटी आफिस के हैड राकेश पठानिया को लेकर पहुंचे। पहले तो वे काफी समय तक लेबर आफिसर के कमरे में बैठे रहे। इसके बाद जब सुनवाई शुरू हुई तो लेबर इंस्पेक्टर ने उन्हें अपने कमरे में बुलाया। उन्होंने आते ही यूनिट हैड की ओर से लिखा एक पत्र थमाते हुए कहा कि नोटिस को मिले बहुत कम समय हुआ है, लिहाजा  प्रबंधन ने जवाब के लिए एक माह का समय मांगा है। 

दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं ने लेबर इंस्पेक्टर के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवाई और सभी ने इस पर हस्ताक्षर भी किए। इस दौरान माहौल बिल्कुल शांत रहा। उन्होंने प्रबंधन पर मजीठिया वेज बोर्ड लागू न करने के साथ ही अगस्त 2008 से देय 30 फीसदी अंतरिम राहत की राशि न देने और डिटेल्ड सैलरी स्लीप न देने के आरोप लगाए हैं। साथ ही प्रबंधन पर आरोप लगाया कि मजीठिया वेज बोर्ड न लेने की बात गलत है। इसके लिए प्रबंधन ने दीवाली की मिठाई की रिसिविंग पर करवाए गए हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल किया है। 

कुल मिलाकर दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने पहली ही पेशी में एकता का परिचय देकर अपने इरादे जाहिर  कर दिए हैं। यहां खास बात यह है कि सुनवाई के दौरान वहीं लोग आगे आए हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में केस दायर कर चुके हैं। इसके अलावा बाकी कई साथी भी इस मामले में उनके साथ हैं। फिलहाल इन्हें पीछे ही रखा गया है। प्रबंधन की ओर से शांत रवैया अपनाए जाने के चलते सारा मसला शांति पूर्वक निपटाया जा रहा है। अगर प्रबंधन ने किसी एक को भी परेशान किया तो यहां स्थिति खराब होते देर नहीं लगेगी। उधर, लेबर इंस्पेक्टर ने जागरण प्रबंधन की मांग पर जवाब देने के लिए 22 जून तक  का समय दिया है। 

इस दौरान एक और मामले की सुनवाई भी हुई। यह मामला था दैनिक जागरण के धर्मशाला में तैनात रहे सीनियर फोटो जर्नलिस्ट देशराज मोहन का। प्रबंधन ने पिछले साल उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा मांग लिया था। देशराज ने श्रम विभाग को दी शिकायत में  लिखा है कि उनका इस्तीफा दबाव में लिया गया है। लिहाजा उनकी नौकरी बहाल की जाए। इस मामले में भी प्रबंधन ने जवाब देने के लिए तीस दिन का समय मांगा है। 

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