अशोक कुमार पांडेय-
दिलीप मण्डल को तबसे ग़ौर से देखना शुरू किया जब इंडिया टुडे की संपादकी मिलने पर उन्होंने अपना फेसबुक अकाउंट उड़ा कर नया अकाउंट बनाया।
2014 के बाद के उनके कारनामे, समर्थन-विरोध देखकर समझ आया कि उन्हें दो काम मिले हैं।
पहला ग़ैरदलित लेकिन सामाजिक न्याय के समर्थक बुद्धिजीवियों/पत्रकारों को बदनाम करना और दूसरा दलितों-पिछड़ों तथा मुसलमानों के बीच दरार डालना। दोनों काम उन्होंने पूरी लगन से किये।
पहला काम सीधे भाजपा समर्थक बनकर नहीं किया जा सकता था, इसलिए सरकार विरोध की अदा अपनाए रखी। रवीश से लेकर शायद ही कोई उस दुष्प्रचार अभियान से बचा। हालाँकि लोग अपना काम करते रहे, कोई खास असर नहीं पड़ा।
दूसरे काम की समस्या थी कि इसमें अंततः सरकार की लाइन लेनी पड़ती। मुसलमानों के लिए आरक्षण में हिस्सेदारी के विरोध से जब यह खेल शुरू हुआ तो यहीं तक टिका नहीं रह सकता था। इसी खेल में वह मज़बूर होते गए खुल के आने के लिए।
फिर 2024 का मुश्किल चुनाव आया तो सिर्फ़ भाजपा समर्थक दलित/ओबीसी पार्टियों के समर्थन से काम नहीं चलना था। मायावतीजी के समर्थन से भी काम हो पाना मुश्किल था। इधर कांग्रेस जाति-जनगणना से लेकर आरक्षण तक पर रेडिकल स्टैंड ले रही थी तो खुल के आना पड़ा।
जो पद मिला है, वह कवर है। काम उनका सोशल मीडिया तक महदूद नहीं है। पार्टी के भीतर काम करना है उन्हें, पहले से भी कर रहे थे। आरक्षण का सवाल संघ सरकार के लिए गले की हड्डी बना हुआ है, तो उनकी ज़रूरत रहेगी और समय आने पर इसका ईनाम भी मिलेगा।
हमारे कुछ भोले अपोलोजेटिक पत्रकार और बुद्धिजीवी उनके इमोशनल ज़ाल में फँसे थे, अब भी फँसे हैं। सबका खेल देख पाने वाले लोग उनका खेल अनदेखा करते गए, अब भी कर रहे हैं।
दयानंद पांडेय-
दिलीप मंडल सर्वदा से ही बेजमीर , विषैले और गिरगिट को मात देने वाली कलाओं में प्रवीण रहे हैं। सफल भी। इन पर कोई चर्चा करना समय व्यर्थ करना है।
विचार का व्यवसाय नहीं होता। दिलीप मंडल लेकिन करते हैं। एक ट्रोल टीम है , इन के पास। उसी से अपनी दुकान चलाते हैं।
दिलीप मंडल भाजपा का सिर्फ़ नुक़सान करेंगे और अपना लाभ। जैसे जस्टिस कर्णन को जेल भिजवा दिया और अपनी कमाई की। लालू का भी पटरा बैठा दिया और मायावती का भी। अपनी कमाई की। अब भाजपा का नंबर है।
आर एस एस के रहते भाजपा को दिलीप मंडल जैसे डिस्ट्रक्टिव आदमी को सलाहकार बनने की सनक सवार है तो कोई क्या कर सकता है। दिलीप मंडल सनातन की मां-बहन करने के लिए कुख्यात हैं और भाजपा सनातन का बिगुल बजाती है। केर- बेर का संग है।
जैसे तमाम कांग्रेसी बुला कर भाजपा ने चुनाव में अपना पटरा किया है , वैसे ही दिलीप मंडल को बुला कर छीछालेदर की है। दिलीप मंडल अब दगे कारतूस हैं।


