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सुख-दुख

दीपेश जी ने टी-20 मैच देखने की योजना बनाई थी, लेकिन उससे पहले नियति ने अंतिम पटकथा लिख दी!

शंभू नाथ चौधरी-

हम सब कल की योजनाएं बनाते हैं। अगले हफ्ते की बातें करते हैं। शाम के कार्यक्रम तय करते हैं। लेकिन सांसों की गिनती कितनी है, यह किसी को नहीं मालूम।

मित्र दीपेश जी के जाने की खबर ने भीतर तक झकझोर दिया।

Man in white kneels in a shallow rooftop pool, hands in prayer, during a flower-decorated ceremony with onlookers in pink nearby.
दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार दीपेश कुमार

हिन्दुस्तान, खबर मंत्र और आईडीटीवी इंद्रधनुष में टुकड़ों-टुकड़ों में, लेकिन लंबे समय तक साथ काम करने का अवसर मिला। पेशेवर रिश्तों के बीच एक आत्मीयता भी थी। खबरों, डेडलाइन, भागदौड़ और रोजमर्रा की पत्रकारिता के बीच न जाने कितनी यादें जुड़ जाती हैं, जिनका एहसास ऐसे मौकों पर और गहरा हो जाता है।

आज वह दफ्तर में थे। अचानक सीने में दर्द उठा। उन्होंने कहा…आंखों के सामने अंधेरा छा रहा है। साथी उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर भागे, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। महज कुछ मिनटों में जीवन की डोर टूट गई।

उनके बेटे ने बताया, आज शाम वे दोनों झारखंड प्रीमियर लीग का टी-20 मैच देखने जाने वाले थे। सोचिए…एक तरफ शाम की खुशगवार योजना थी। दूसरी तरफ नियति की अंतिम पटकथा।

सच तो यह है कि हम सब अपनी-अपनी योजनाओं के साथ जी रहे हैं, लेकिन हमारी सांसें कितनी बची हैं, यह न हम जानते हैं, न कोई और।

इसलिए शायद जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है…जो लोग आपके साथ हैं, उन्हें समय दीजिए।

जो रिश्ते आपके पास हैं, उन्हें संजोकर रखिए। जो प्रेम है, उसे व्यक्त कर दीजिए। क्योंकि अगला पल किसके हिस्से में है और किसके नहीं…यह सिर्फ ऊपर वाला जानता है।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि। ऊं शांति।

मूल खबर…

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