गोविंद प्रताप सिंह-
एक महिला वकील ने बालकृष्ण और रामदेव की आयुर्वेद कंपनी दिव्य फार्मेसी-पतंजलि को एक कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके दिव्य दंत मंजन नामक “टूथ पेस्ट” में जानवरों के अवशेषों की मौजूदगी है.
महिला वकील का कहना है कि इसे “शाकाहारी” उत्पाद बताकर प्रोडक्ट पर “Veg” लेबल किया गया है – लेकिन वास्तव में इसमें “कटल-फिश” के अवशेष हैं, ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ धोखा किया गया.




दरअसल, यह आश्चर्य की बात नहीं है। जड़ी-बूटियों के उत्पादों पर गलत लेबल लगाना एक फेमस टेक्नीक है, जिससे आयुर्वेद के नाम पर उद्यमी लोगों को मूर्ख बनाते हैं, वे कहते हैं कि ये “प्राकृतिक, सुरक्षित, विशुद्ध-हर्बल और पशु-मुक्त” है और लोग पूरी तरह से बेकार सामान खरीद लेते हैं.
ऐसा कोई एक उद्यमी नहीं कर रहा है बल्कि कई कंपनियों के ऐसे प्रोडक्ट हैं, जिनके बारे में आपने सोचा होगा कि वे “शाकाहारी” हैं, लेकिन हैं नहीं.
मयूर-चंद्रिका भस्म- मोरपंख के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर बनाया जाता है.
कोम्बंचडी गुलिका- गेंडे, हिरण, बकरी, भैंस और गाय सहित पांच जानवरों के सींगों के पाउडर से बनाई गई है.
गोरोचनम- मवेशियों के पित्त और पित्त की पथरी के चूर्ण से बनाया जाता है
हस्ती भस्म- बाल झड़ने की समस्या को रोकने के लिए हाथियों के दाँत के चूर्ण से बनाया जाता है.
शृंग भस्म- हिरण के सींगों के चूर्ण से बनाया जाता है.
कस्तूरीदि गुलिका- कस्तूरी मृग के ग्रंथियों के स्राव से युक्त होता है.
धनवंतराम गुलिका- जिसमें सिवेट बिल्ली का वीर्य और हाथी के बच्चे का मल है. हालांकि इसका उत्पादन अब बंद है.
अजमम्सा रसायन- बकरी के मांस को घी और जड़ी-बूटियों में उबाल कर बनाया जाता है.
श्याम सिंह रावत-
पतंजलि दंत मंजन में मछली की हड्डियां मिलाने का आरोप, जैन समुदाय की महिला वकील ने भेजा नोटिस… मांसाहार विरोधियों के दबाव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्त खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में चौकोर सी आकृति के अंदर डॉट का हरा निशान छापना अनिवार्य है। अगर पैकेट पर ऐसा निशान दिखाई नहीं देता है, तो इसका मतलब है कि वह खाद्य पदार्थ पूरी तरह से शाकाहारी नहीं है। ऐसी स्थिति में उसकी जगह पर हरे की बजाय लाल रंग का डॉट होना चाहिए।

इधर हाल ही में संन्यासियों जैसे कपड़े पहनने वाले कॉरपोरेट व्यवसाई रामदेव की कंपनी पतंजलि के दिव्य दंत मंजन को लेकर आई खबर ने सभी को हैरान कर दिया है।
पतंजलि को उसके दंत चिकित्सा उत्पादों में से एक दिव्य दंत मंजन में मछली की हड्डियों का इस्तेमाल करने को लेकर वकील शाशा जैन द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया है। उन्होंने अपने इस नोटिस में पतंजलि से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि कंपनी हरे रंग यानी शाकाहार का लेबल लगे उत्पाद में समुद्री फेन यानी Cuttlefish जैसे मांसाहारी घटक का उपयोग क्यों कर रही है?
शाशा जैन ने इस नोटिस और अपनी बात को प्रमाणित करने वाले सभी दस्तावेज ट्विटर पर शेयर किये हैं।
पतंजलि के उपरोक्त उत्पाद में सामग्री की सूची में ‘Samundra Fen’ (सेपिया ऑफिसिनैलिस) शामिल है, जिसे आम तौर पर कटलफिश के रूप में जाना जाता है।
जैन ने नोटिस में कहा कि उत्पाद में एक मांसाहारी घटक समुद्र फेन का उपयोग और इसे शाकाहारी उत्पाद के रूप में बेचने से उपभोक्ताओं के अधिकारों और उक्त श्रेणी के उत्पादों के लिए लेबलिंग नियमों का उल्लंघन होता है।
हालांकि आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं के अंगों का प्रयोग करने का प्रावधान है लेकिन इसके बावजूद भी पैकेजिंग के लिए निर्धारित नियम-क़ानूनों का पालन करना अनिवार्य है तो पतंजलि की कंपनी इन नियम-क़ानूनों का उल्लंघन कैसे कर सकती है।
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