यादव सिंह ने समाजवादी नेता मुलायम और दलित नेता मायावती दोनों का साध लिया था

Nadim S. Akhter : असली शेर तो -यादव सिंह- निकले. एक साथ बहन मायावती और समाजवादी नेताजी मुलायम सिंह यादव, दोनों को साध लिया. अनेकता में एकता का -सूत्र- यादव सिंह जी से सीखिए. उनसे जानिए कि सरकार -दलितों- की हो, या -समाजवादियों- की या फिर किसी भी -वाद- वाले की, सबकी आंखों का तारा कैसे बना जाता है. आपके पास क्वालिफेकेशन हो ना हो, डिग्री हो ना हो, वैधानिक योग्यता हो ना हो, लेकिन अगर -जुगाड़ योग्यता- और -लक्ष्मी योग्यता- है तो इस सठिया चुके लोकतंत्र में और Media bombardment के युग में भी आप सबकी नाक के नीचे आराम से मलाई काट सकते हैं.

जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार कैसे जनता के पैसों को हड़पने के लिए -रंगे सियार- तैनात करती है, इसका मुलाहिजा फरमाइए. वो तो -भला- हो आईटी वालों का कि उसने देख लिया यादव सिंह करप्ट हैं. वैसे आईटी यानी इनकम टैक्स वालों अर्थात आयकर विभाग वालों की नजर विरले ही टेढ़ी होती है. वे इतनी देर से जगे, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए और बहनजी-नेताजी के -सुशासन- मैं तैनात -ईमानदार ब्यूरोक्रेसी- ने कैसे यादव सिंह को अर्श से फर्श पर चढ़ाया, इसकी भी जांच हो जाए.

वैसे पड़ताल और जांच में कुछ रखा नहीं है. investigation तो होता ही इसलिए है कि ये चलता रहना चाहिए. कई लोगों को अपनी सरकारी सैलरी justify करने का मौका मिलता रहता है. सुनंदा पुष्कर मामले से लेकर भोपाल गैस त्रासदी और फिर गोधरा तक, सब जांच की जद में आते रहते हैं और देश चलता रहता है. आगे भी चलता रहेगा. Tension not. आप ये देखिए कि इस महीने की सैलरी एकाउंट में आई है या नहीं. बच्चे की फीस, दाल-चावल, ईएमआई और अस्पताल का बिल भरने के लिए पैसे बचे हैं या नहीं. अगर हां, तो जाके किसी थिएटर में कोई मैटिनी शो देखिए और मटन खाकर आराम से सो जाइए.

और अगर नहीं, तो खर्चे पूरे करने के लिए और ज्यादा पैसे कमाने की जुगत लगाइए. यादव सिंह अकेले थोड़े हैं. हम सब उसके साथ हैं. यही तो है अघोषित एकता. जो पकड़ा गया वो चोर, बाकी सब राजा हरिश्चंद्र. ऐसे ही तो बढ़ेगा भारत. अच्छे दिन तो 1947 में ही आ गए थे, आप लोग खामोख्वाह बात का बतंगड़ बनाए रहते हैं. जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे !!!

…..”His stars shone bright after that. Singh, a Jatav, had found a staunch backer in Mayawati. He subsequently became chief maintenance engineer in 2002, and then in 2011, was made engineer-in-chief of Noida Authority. When the SP government came to office in 2012, he was suspended for his alleged involvement in a Rs 954-crore scam, but was reinstated in 2013. In November this year, he was made the chief engineer of all three authorities: Noida, Greater Noida and Yamuna Expressway.”……(TOI)

पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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