मुलायम अभी भी ‘पहलवान’, लेकिन घर के झगड़े से हैं परेशान!

अजय कुमार, लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति मे कभी धूमकेतु की तरह चमकने वाले समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को लेकर अंदरखाने में तमाम तरह की बातें चल रही हैं। कभी उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़ा किया जाता है तो कभी उनकी याद्दाश्त पर प्रश्न चिन्ह लगाया जाता है। यह स्थिति वर्ष 2017 में …

अस्तांचल की ओर ‘मुलायम’ समाजवाद!

अजय कुमार, लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले पांच वर्षो में कई बदलाव देखने को मिले। इस दौरान कई दोस्तियों में दरारें पड़ गईं तो कई दुश्मनों को दोस्त बनते भी भी देखा गया। सियासत की चकाचैंध में किसी ने नई पारी शुरू की तो मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं को उसी बेटे अखिलेश …

दिवाली पर भतीजे से चचा को मिला सियासी अंधेरा!

अजय कुमार, लखनऊ

दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है। हर तरफ खुशियांे का आदान-प्रदान देखा जा सकता है,लेकिन सियासी दुनियां यह सब बातें मायने नहीं रखती हैं। इसी लिये दीपावली के दिन एक भतीजे ने चाचा की जिंदगी में ‘सियासी अंधेरा’ कर दिया। बात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव की हो रही है। पिछले वर्ष तो भतीजे ने चाचा की दीवाली ‘काली’ की ही थी,इस बार भी ऐसा ही नजारा देखने को जब मिला तो लोग आह भरने को मजबूर हो गये।

पुत्रमोह में फंसे मुलायम अंतत: अखिलेश के ही हुए!

अजय कुमार, लखनऊ

आगरा में समाजवादी पार्टी का अधिवेशन अखिलेश यादव को नई उर्जा दे गया। वह न केवल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये बल्कि उन्हें पिता मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद भी मिल गया जिन्होंने ऐन वक्त पर अलग राजनैतिक दल बनाने का अपना इरादा बदल दिया। सूत्र बताते हैं कि जब आगरा में सपा को अधिवेशन हो रहा था, उसी समय लखनऊ में मुलायम के नेतृत्व में नई पार्टी बनाने की नींव एक तरह से रख ली गई थी, जिसकी रूपरेखा 25 सितंबर को तय कर ली गई थी, लेकिन अखिलेश की चतुराई से ऐसा हो नहीं सका। अन्यथा अखिलेश के लिये बड़ी मुश्किल खडी हो जाती।

मुलायम ने तो शिवपाल की सियासत पर ग्रहण लगा दिया!

अजय कुमार, लखनऊ


सियासत भी अबूझ पहेली जैसी है। यहां रिश्तों की अहमियत नहीं होती है ओर दोस्ती-दुश्मनी की परिभाषा बदलती रहती है। सियासत के बाजार जो दिखता है वह बिकता नहीं है और जो बिकता है वह दिखता नहीं है। इसी लिये समाजवादी पार्टी में बाप-बेटे के बीच के  झगड़ों को कोई गंभीरता से ले रहा है। तमाम लोंगो को तो लगता है कि दिग्गज मुलायम अपने बेटे अखिलेश के सियासी सफर को आसान बनाने के लिये एक तय स्क्रिप्ट पर काम कर रहे है, जिसमें भाई शिवपाल यादव की ‘सियासी आहूति’ दी जा रही है।

कांग्रेस का ये साथ, मुसलमानों के साथ घात

राजीव गांधी द्वारा जन्मभूमि का ताला खुलवाने से कांग्रेस से बिदके थे मुसलमान

अजय कुमार, लखनऊ
 

उत्तर प्रदेश की सियासत में भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या से जुड़ी तीन बातों ने पिछले 30 वर्षों में खूब सुर्खिंया बटोरी हैं। इन तीन बातों ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया तो कहीं न कहीं समाज को बांटने का भी काम किया। तीनों ही बातें भगवान राम की नगरी अयोध्या से ताल्लुक रखती हैं और इन तीनों बातों के पीछे तीन राजनैतिक दलों ने ही मुख्य किरदार निभाया। यह तीन बातें चुनावी मौसम में हमेशा ही सुर्खिंयों की वजह बन जाती हैं, जैसा कि इस बार भी देखने को मिल रहा है। इन बातों को क्रमशः समझा जाये तो कहा जा सकता है कि 1986 में रामजन्म भूमि स्थान का ताला खुलवाने में जहां कांग्रेस का अहम किरदार रहा थो तो अस्सी-नब्बे के दशक में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी की सोच के विपरीत अपनी सियासी गोटियां सेंकने के लिये अयोध्या मसले को खूब हवा दी।

किसने किया है मुलायम को नजरबंद!

अजय कुमार, लखनऊ
समाजवादी पार्टी में पिछले कुछ महीनों में जिस तरह का घटनाक्रम चला उसके बारे में सब जानते-समझते हैं। पारिवार की लड़ाई थी। सड़क पर आई तो कुछ लोगों ने इस पर दुख जताया तो ऐसे लोगों की कमी भी नहीं थी जो अखिलेश के पक्ष में माहौल बनाते घूम रहे थे। परिवार की लड़ाई में कभी अखिलेश पक्ष तो कभी मुलायम खेमा भारी पड़ता दिखा, परंतु जीत का स्वाद अखिलेश पक्ष ने ही चखा। फिर भी ‘पिटे मोहरे’ की तरह एक बाप का फर्ज निभाते हुए नेताजी अपने सीएम बेटे को लगातार रिश्तों की अहमियत और जातिपात के सियासी समीकरण समझाते रहे।

मुलायम कुनबे में झगड़े से जो बड़े खुलासे हुए, उसे आपको जरूर जानना चाहिए….

Nikhil Kumar Dubey : घर के झगड़े में जो बड़े ख़ुलासे हुए…

1: यादव सिंह घोटाले में रामगोपाल और अक्षय फँसे हैं, बक़ौल शिवपाल. 

2: अमर सिंह ने सेटिंग करके मुलायम को जेल जाने से बचाया था: ख़ुद मुलायम ने बताया.

3: शिवपाल रामगोपाल की लड़ाई में थानों के कुछ तबादले अखिलेश को जानबूझकर करने पड़े थे: ख़ुद अखिलेश ने कहा.

4: राम गोपाल नपुंसक है : अमर सिंह ने कहा.

5: प्रतीक काग़ज़ों में पिता का नाम एम एस यादव लिखते हैं लेकिन मुलायम के किसी हलफ़नामे में उनके दूसरे बेटे का नाम नहीं

6: प्रमुख सचिव बनने की योग्यता मुलायम के पैर पकड़ने से तय होती है : अखिलेश.

मुलायम फिर ‘मुल्ला’ बनने को बेताब

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की सियासत अब दिल की जगह दिमाग के सहारे परवान चढ़ रही हैै। सभी दलों के सूरमा ‘लक्ष्य भेदी बाण’ छोड़ रहे हैं। यही वजह है बसपा सुप्रीमों मायावती अपने दलित वोट बैंक को साधे रखने के लिये बीजेपी को दलित विरोधी और  मोदी की सरकार को पंूजीपतियों की सरकार बताते हुए कहती हैं कि यूपी में बीजेपी की हालत पतली है, इसलिये वह बसपा का ‘रिजेक्टेड मॉल’ ले रही है तो मुसलमानों को लुभाने के लिये बीजेपी को साम्प्रदायिक पार्टी करार देने की भी पूरजोर कोशिश कर रही हैं। आजमगढ़ की रैलीम में मायावती ने यूपी चुनाव जीतने के लिये बीजेपी पाकिस्तान से युद्ध करने की सीमा तक जा सकता है, जैसा बयान मुस्लिम वोटों को बसपा के पक्ष में साधने के लिये ही दिया गया था। वहीं भाजपा और सपा 30 के फेर में फंसे हैं। चुनावी बेला में हमेशा की तरह इस बार भी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिये  अयोध्या तान छेड़ दी हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह कह रहे हैं कि देश की एकता के लिये 16 के बजाये 30 जानें भी जाती तो वह पीछे नहीं हटते।

आईपीएस को फोन पर धमकाने के मामले में मुलायम की मुश्किलें बढ़ीं, पुलिस रिपोर्ट खारिज, आवाज़ मिलान के आदेश

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को मोबाइल फोन से दी गयी धमकी के सम्बन्ध में दर्ज एफआईआर में हजरतगंज पुलिस द्वारा लगाये गए अंतिम रिपोर्ट को अदालत ने ख़ारिज कर दिया है. सीजेएम लखनऊ संध्या श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से स्पष्ट है कि विवेचक ने कॉम्पैक्ट डिस्क में अंकित वार्तालाप की आवाज़ का नमूना परीक्षण नहीं कराया है और मात्र मौखिक बयान दर्ज कर के अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दिया है.

बोफोर्स फाइल छुपाने के बयान के बाद मुलायम सिंह से पूछताछ करे सीबीआई

मुलायम सिंह ने कहा है कि राजनेताओं पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलाये जाने चाहिये. उनके अनुसार इसीलिए भारत के रक्षामंत्री रहते उन्होंने बोफोर्स की फाइल छुपा दी थी. इस कथन से दो निष्कर्ष निकलते हैं. एक तो ये कि नेताजी की जानकारी में था कि कोई राजनेता बोफोर्स में शामिल है और वे उसे बचाना चाहते थे. अच्छा होगा वे उसका नाम देश को बताएं. वर्ना सीबीआई, जिसने इस मामले की जांच की थी, वह उनसे पूछताछ करे.

सपा परिवार में हालात नहीं सुधरे तो मुलायम सम्भाल लेंगे सत्ता की बागडोर

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के सामने 2017 का चुनाव जीतना मुख्य लक्ष्य है। मीडिया और राजनैतिक विश्लेषकों के सारे पूर्वानुमान ध्यस्त करने और विरोधियों को पटकनी देने में माहिर मुलायम इस मामले में अगर जरूरत हुयी तो अपने पुत्र को भी दर किनारे बिठा देने से भी नहीं चूकेंगे। उनकी पैनी निगाह चुनाव क्षेत्रवार उन क्षत्रपों पर गड़ी हुयी है, जिनका वर्चस्व उस क्षेत्र विशेष के जातीय वोटों को गोलबंद कर सकने में सक्रीय, महत्त्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिका हो सकती हैं। ऐसे क्षत्रपों की पहचान कर उनको अपने राजनैतिक हित साधने के लिए अपने पीछे लामबंद करने की जुगत बिठाने वे इनदिनों मशगूल हैं। फिर चाहे उसकी पृष्ठभूमि का इतिहास कितना ही मटमैला क्यों न हो।

जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।

यूपीएसएसीसी के पदाधिकारियों से मुलाकात के दौरान बोले मुलायम- ‘लखनऊ के पत्रकार सबसे अच्छे’ (देखें तस्वीरें)

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (UPSACC) के पदाधिकारियों ने बीते दिनों समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से उनके निवास पांच विक्रमादित्य मार्ग पर मुलाकात की. श्री यादव ने समिति के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह समिति पत्रकारों के हितों और पत्रकारिता के उद्देश्यों को पूरा करेगी. उन्होंने समिति के सभी सदस्यों से परिचय पूछा और उनके संस्थानों का नाम जाना. श्री यादव ने कहा कि यह बहुत अच्छा है कि समिति के सभी लोग योग्य हैं.

मुलायम के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने से दुखी आईपीएस अमिताभ ठाकुर थाने के सामने धरने पर बैठेंगे

Amitabh Thakur : श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा 10 जुलाई 2015 को फोन पर धमकी देने के मामले में कोर्ट द्वारा 14 सितम्बर को समुचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद भी लखनऊ पुलिस द्वारा अब तक उसका पालन नहीं किये जाने के प्रति अपना कष्ट प्रकट करने हेतु मैं 01 अक्टूबर से थाना हजरतगंज के सामने अनिश्चितकालीन रूप से बैठूँगा. I shall be sitting indefinitely before Hazratganj police station from 01 October to show my pain at non-registration of FIR against Sri Mulayam Singh Yadav for phone threat on 10 July, despite the Court order passed on 14 September to register an FIR under appropriate sections.

मुलायम को फेसबुक पर बुड्ढा लिख दिया तो कानपुर में दर्ज हो गई एफआईआर!

इमरोज़ खान युवा पत्रकार हैं. जनता की आवाज़ नामक ऑनलाइन पोर्टल चलाते हैं. उन्होंने फेसबुक पर अपने पोर्टल की एक स्टोरी शेयर करते हुए मुलायम की फोटो के साथ लिख दिया कि ”बुड्ढे का पागलपन बढ़ता हुआ”. बस, इसी पर उनके खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. इस बारे में इमरोज ने भड़ास को एक मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है, जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

मुलायम का अंत भी अब करीब आ गया है, वह भी अमिताभ ठाकुर के हाथों : दयानंद पांडेय

Dayanand Pandey : एक समय कंस और रावण जैसों को भी लगता था कि उन का कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। और वह अत्याचार पर अत्याचार करते जाते थे। लेकिन एक दिन उन का अंत हुआ। गोरी, गजनवी, चंगेज खां, बाबर, औरंगज़ेब आदि के हश्र भी हमारे सामने हैं। ब्रिटिश राज में तो एक समय सूरज भी नहीं डूबता था, पर एक दिन आया कि डूब गया। तो मुलायम सिंह यादव कौन सी चीज़ हैं? मुलायम सिंह यादव के पाप और कुकर्म का घड़ा भी अब भर जाने की राह पर है।

फिल्मी पर्दे पर उतरेंगे ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’, कास्टिंग 15 दिन में

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की जिंदगी अब रुपहले पर्दे पर उतरने वाली है. फिल्म में मुलायम के बचपन, उनके जीवन की जद्दोजहद तथा राजनीति संघर्ष को दिखाया जाएगा और वर्ष 1989 में सपा मुखिया द्वारा पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दृश्य के साथ फिल्म समाप्त हो जायेगी. ख़ास बात यह है कि अपने जीवन पर फिल्म बनाने की इजाजत मुलायम सिंह भी दे चुके हैं, जिसका मुहूर्त उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हो रहा है. इसमें मुलायम सिंह के बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शरीक होंगे. फिल्म का नाम है, ‘नेता जी – मुलायम सिंह यादव’। निर्देशन डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर विवेक दीक्षित करेंगे और फ़िल्म का निर्माण संदीप शुक्ला और सर्वजीत सिंह करेंगे.

रामगोपाल यादव बोले- आईएएस सूर्य प्रताप सिंह के दिमाग का स्क्रू ढीला!

Yashwant Singh : मुलायम ने आईपीएस Amitabh Thakur को सीधे फोन कर हड़काया तो रामगोपाल ने आईएएस Surya Pratap Singh के दिमाग का स्क्रू ढीला बताया. रामगोपाल ने सूर्य प्रताप सिंह के बारे में शर्मनाक बयान मीडिया के सामने दिया है, ऐसा यह वीडियो देखकर लगता है.

ठाकुर की तरह मैंने भी मुलायम से तंग आकर नौकरी छोड़ी थी : आईपीएस शैलेंद्र सिंह

वाराणसी : एसटीएफ के पूर्व डिप्‍टी एसपी रहे शैलेन्‍द्र सिंह ने कहा है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह की वजह से ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। मुलायम की सरकार गुंडों से बनी है और यही कारण है कि सबसे पहले पुलिस को कंट्रोल में लिया जाता है। वर्ष 2004 में बाहुबली मुख्तार अंसारी पर पोटा की कार्रवाई के कारण उन्हें मुलायम सिंह सरकार ने परेशान किया था। उसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

हर माह सपा के शीर्ष तक जाते हैं अवैध खनन के 500 करोड़ रुपए : अमिताभ ठाकुर

निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने एक मीडिया रिपोर्टर से विशेष बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव की फोन पर धमकी सीधे तौर पर अवैध खनन के मामले से जुड़ी है और इस खनन में हर माह लगभग 500 करोड़ की कमाई ‘टॉप’ तक जाती है।

सपा बन चुकी है गुंडों का गिरोह, मुलायम हैं सरगना – रिहाई मंच

लखनऊ : रिहाई मंच ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा आईजी नागरिक सुरक्षा अमिताभ ठाकुर को धमकी देने के बाद, सपा मुखिया पर एफआईआर दर्ज न कर उल्टा अमिताभ ठाकुर को ही निलंबित करने की कड़ी भर्त्सना की है। मंच ने अखिलेश यादव द्वारा अपने पिता मुलायम सिंह यादव का बचाव करने वाले बयान पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सूबे में अराजकता फैलाने वाले तत्वों का संरक्षण करने का ही नतीजा है सूबे में ध्वस्त कानून व्यवस्था। इस घटना ने साबित कर दिया कि खनन भ्रष्टाचार समेत सूबे में व्याप्त माफिया राज के सरगना मुलायम सिंह यादव हैं।

अमिताभ-मुलायम प्रकरण : वक्त है, संभल जाइए ‘सरकार’ !

सपा सरकार के साथ यह परेशानी शुरू से ही रही है कि जब-जब उसकी सरकार बनी है, तब-तब प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगड़ने व उनकी ही पार्टी के लोगों के निरंकुश हो जाने के आरोप उस पर लगे हैं। साथ ही ‘अपनों’ को ‘उपकृत’ करने के आरोप भी लगते ही रहे हैं। युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोगों को उम्मीद थी कि वे हालात को कुछ काबू कर पाएंगे किन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा हो न सका और उनका स्वागत भी प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर सिलसिलेवार तरीके से हुई हिंसक घटनाओं ने किया, जिसमें जान-माल का ख़ासा नुकसान हुआ। प्रदेश की स्थिति सुधारने को युवा मुख्यमंत्री ने कई अच्छे प्रयास किए किन्तु उनके अपनों ने ही उनके अच्छे कामों पर पलीता लगाने का काम किया और उन्हें मुसीबत में डाल दिया। 

मुलायम, अखिलेश और अमिताभ ठाकुर को अपनी हैसियत पहचाननी होगी

आज एक साथ तीन लोगों से बात करने का मान है..! इनमें से न तो कोई किसी सियासी जमात का वार्ड का अध्यक्ष है, न कोई किसी गांव प्रधान या नगर पालिका का मैंबर, न ही कोई पुलिस की वर्दी से मिलती जुलती वर्दी पहनने वाला होमगार्ड। और ये भी साफ करता चलूं, कि किसी सियासी पार्टी का वार्ड का अध्यक्ष, गांव का प्रधान या नगर पालिका का मेंबर और कोई होमगार्ड का पद। न तो किसी से कम होता है, न ही उसकी ज़िम्मेदारी को हल्का करके देखा जा सकता है, लेकिन मैं जिनसे मुख़ातिब हूं, उनमे से एक तो एक राजनीतिक दल के न सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं बल्कि अगर कहा जाए कि अपने आप में सियासत का चलता फिरता स्कूल भी हैं। इतना ही नहीं उनको देखकर लाखों नौजवानों ने न सिर्फ सियासत में क़दम रखा! बल्कि उनके नाम से जुड़ने में आज भी गर्व महसूस करते हैं। साथ ही देश के सबसे बड़े प्रदेश के कई बार ये मुखिया भी रह चुके हैं और देश के रक्षामंत्री तक की ज़िम्मेदारी भरा ओहदा संभाल चुके हैं।       

अमिताभ को नेता जी की धमकी पर 4pm की चुप्पी समझ से परे

आदरणीय संजय शर्मा भैया, आपके अख़बार ‘4पीएम’ की बेबाकी निष्पक्षता से परिपूर्ण लेखनी का मैं कायल था मगर मुलायम “नेता जी” के आई पी एस Amitabh Thakur जी के धमकी वाले मामले में आपकी और आपके 4pm अख़बार की चुप्पी ….मेरी समझ से परे है। आज फेसबुक पर आपके अख़बार का लिंक ढूढ़ते ढूढ़ते आँखें पथरा गयीं। खैर उम्मीद करूँगा, किसी चैनल पर अमिताभ ठाकुर वाले मामले में आपको उसी निष्पक्षता और बेबाकी से बहस करता देखूं। 

जनता परिवार के छह दलों का विलय, मुलायम अध्यक्ष, बोले – मीडिया नए दल की बात जनता तक पहुंचाए

छह दलो के विलय पर मंथन के समय परम प्रसन्नचित्त शरद यादव और मुलायम सिंह (फाइल फोटो)

दिल्ली : आज यहां मुलायम सिंह यादव के आवास पर हुई एक बैठक में जनता परिवार के छह दलों के आपस में विलय का फैसला लिया गया। इस साझा दल का नाम अभी घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इस गठबंधन के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे। जिन दलों का विलय हुआ है, उनमें सपा, राजद, जदयू, जेडीएस, आइएनएलडी और कमल मोरारका की पार्टी शामिल हैं। इस अवसर पर मुलायम सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की अहम भूमिका होती है। मीडिया को इस नये दल के संदेशों को जनता तक पहुंचाना चाहिए।

कारपोरेट हित में विकास पिता मोदी और धरती पुत्र मुलायम किसानों को खुदकुशी के लिए विवश करे रहे

लखनऊ : प्रदेश में लगातार हो रही बेमौसम बारिश से फसलों की बर्बादी के बाद रिहाई मंच ने सूबे की सरकार से कृषि संकट पर आपातकाल घोषित करने की मांग की है। मंच ने प्रमुख सचिव आलोक रंजन को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने असंवेदनशीलता दिखाते हुए सूबे में 35 किसानों की सदमे से हुई मौत का आकड़ा दिया है और इसे फसल बर्बादी की वजह नहीं माना है। जबकि मंच ने पिछले मार्च महीने में मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में 21 दिनों में 14 आत्महत्या व 49 दिल का दौरा व सदमे से हुई मौतों का ब्योरा दिया था, जो अब बढ़कर 400 से अधिक हो चुका है।

मुलायम को स्वाइन फ्लू, मेदांता में भर्ती

दिल्ली : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल के आईसीयू नंबर आठ में भर्ती कराए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक उनको स्वाइन फ्लू हो गया है। उन्हें एयर एंबुलेंस से गुड़गांव ले जाया गया। वह डॉ. नरेश त्रेहान की देख-रेख में हैं। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने …

समाजवाद बबुआ अब सैफई बुझाई

सैफई में मुलायम सिंह के पोते तेजप्रताप का तिलक हुआ जिसमेँ प्रधानमंत्री मोदी सरकारी विमान से शिरकत करने सैंफई पहुंचे। उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक सरकारी हेलीकाप्टर से सैंफई पहुंचे। लालू और उनका परिवार भी चार्टर्ड प्लेन से वहां पहुंचा। और अमिताभ बच्चन भी चार्टर्ड प्लेन से वहां पहुँच गए। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम उत्तरप्रदेश की सरकार द्वारा किए गए। करोंडो रूपये इस जश्न पर फूंके गए। यह समाजवाद का नायाब नमूना है। गरीब सर्दी, गर्मी और बारिश हर मौसम में भूख बीमारियों से मर रहा है और सैंफई में करोड़ों रुपये का जश्न हो रहा है बावजूद इसके कि देश में स्वाइन फ्लू से हजारों लोग मर चुके हैं और उसकी चपेट में हैं। यह भारतीय लोकतंत्र का वह रूप है जिससे राजतंत्र भी शरमा जाए और ऐसा समाजवाद जिसके आगे पूंजीवाद भी उन्नीस ही रह जाए।

2017 का विधानसभा चुनाव जातिवादी राजनीति के सहारे नहीं जीता जा सकेगा, अखिलेश यादव को अहसास हो गया

अजय कुमार, लखनऊ

एक वर्ष और बीत गया। समाजवादी सरकार ने करीब पौने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। 2014 सपा को काफी गहरे जख्म दे गया। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने धरती पुत्र मुलायम को हिला कर रख दिया। पार्टी पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। अगर जल्द अखिलेश सरकार ने अपना खोया हुआ विश्वास हासिल नहीं किया तो 2017 की लड़ाई उसके लिये मुश्किल हो सकती है। अखिलेश के पास समय काफी कम है। भले ही लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के पश्चात समाजवादी सरकार ने अपनी नीति बदली ली है, लेकिन संगठन वाले उन्हें अभी भी पूरी आजादी के साथ काम नहीं करने दे रहे हैं। सीएम अखिलेश यादव अब मोदी की तरह विकास की बात करने लगे हैं लेकिन पार्टी में यह बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। मुलायम अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं। निश्चित ही 2015 खत्म होते ही तमाम दलों के नेता चुनावी मोड में आ जायेंगे। भाजपा तो वैसे ही 2017 के विधान सभा चुनावों को लेकर काफी अधीर है, बसपा और कांग्रेस भी उम्मीद है कि समय के साफ रफ्तार पकड़ लेगी। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस ही नहीं सपा-बसपा भी 2014 में अर्श से फर्श पर आ गये।