अजय राय-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का यह हाल है! BHU अस्पताल के ICU में 85 वर्षीय पद्मश्री और प्रख्यात चिकित्सक प्रो. टी.के. लहरी जी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की घटना अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है।
जिस महान विभूति ने सेवानिवृत्ति के बाद भी पूरा जीवन बिना एक पैसा लिए मरीजों की सेवा में लगा दिया, उन्हें भाजपा सरकार की नाक के नीचे अस्पताल के भीतर लहूलुहान कर दिया गया।
जब विश्वविद्यालयों को शिक्षा और सेवा का केंद्र बनाने के बजाय RSS का अड्डा बनाया जाएगा, तो वहां ऐसे ही गुंडागर्दी और अराजकता का यही हाल होगा।
जब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और अस्पतालों का यह हाल है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
भाजपा सरकार की इस बदहाल व्यवस्था और तानाशाही का यह जीता-जागता सबूत है!

यह कलंक बहुत बड़ा है, जो बनारस के माथे पर लगा है।
बीएचयू के डॉक्टर तपन कुमार लाहिड़ी (टी के लाहिड़ी) के साथ मारपीट और अभद्रता की घटना सुनकर स्तब्ध हूं। कैसे कोई इतने वरिष्ठ और कर्मठ व्यक्ति के साथ इस तरह का बर्ताव कर सकता है। डॉ लाहिड़ी वसूल और सिद्धांत के एकदम पक्के व्यक्ति हैं, जीवन में वसूलों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। बिना तनख्वाह और पेंशन लिए बीएचयू अस्पताल में मरीजों की पिछले कई दशक से सेवा कर रहे हैं।
डॉ लाहिड़ी के साथ इस तरह की घटना बीएचयू प्रशासन की ही विफलता नहीं बल्कि मानवीय, सामाजिक मूल्यों और महामना के आदर्शों के सामूहिक पतन की कहानी को बयां कर रही है।
इस घटना की जितनी मजम्मत की जाए कम है। आप सभी से इस बात का आह्वान करता हूं कि इस तरह के नैतिक, मानवीय और सामाजिक पतन के खिलाफ सबलोग मिलकर सामूहिक प्रतिकार करें।
-विकास सिंह
सुरेश गांधी-
- योगी के संज्ञान पर बीएचयू पहुंचे मंत्री, डॉ. लहरी ने कहा- कोई अप्रिय घटना नहीं हुई
- पद्मश्री डॉ. टीके लहरी से मिले रविंद्र जायसवाल, इलाज में लापरवाही न बरतने के निर्देश
वाराणसी। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लहरी के बीएचयू में उपचार के दौरान कथित अप्रिय घटना की सूचना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश सरकार के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल रविवार को बीएचयू पहुंचे और अस्पताल में भर्ती डॉ. लहरी से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।
बीएचयू की नई बिल्डिंग के पांचवें तल स्थित वार्ड में पहुंचे मंत्री ने डॉ. लहरी से उनके स्वास्थ्य और उपचार की जानकारी ली। इस दौरान चिकित्सकों से भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति और उपचार की प्रगति के बारे में जानकारी ली गई। मंत्री ने बीएचयू प्रशासन एवं चिकित्सकों को निर्देश दिया कि डॉ. लहरी के इलाज में हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए और उनकी देखभाल में किसी स्तर पर कमी न रहने पाए।
डॉ. लहरी ने घटना से किया इनकार
मुलाकात के दौरान डॉ. लहरी ने मंत्री से बातचीत में अपने साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने से साफ इनकार किया। इसके बावजूद मामले की सूचना और सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

मंत्री ने बीएचयू के चीफ प्राक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी की तीन सदस्यीय टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराने को कहा। टीम से पूरे मामले की जानकारी जुटाकर तथ्यात्मक स्थिति सामने लाने को कहा गया है।
‘इलाज में कोई कमी न रहने पाए’
रविंद्र जायसवाल ने चिकित्सकों से कहा कि डॉ. लहरी जैसे वरिष्ठ चिकित्सक और पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी होती रहे।
मंत्री ने डॉ. लहरी को आश्वस्त किया कि उनके उपचार और स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं में शासन स्तर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
डॉ. टीके लहरी चिकित्सा क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित हैं। उनके बीएचयू में उपचाराधीन होने की जानकारी के बाद चिकित्सा जगत और उनके शुभचिंतकों में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
इस दौरान बीएचयू के चीफ प्राक्टर, डीसीपी, लंका थाना प्रभारी, पार्षद रोहित मिश्रा समेत क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अमरेंद्र पांडेय-
BHU में पद्मश्री प्रो. टी.के. लहरी से जुड़े मामले में अधिवक्ता ने थाने में दी तहरीर, सख्त कार्रवाई की मांग… नेताओं के भी पहुंचने का सिलसिला शुरू
वाराणसी के BHU में भर्ती पद्मश्री प्रो. टी.के. लहरी से जुड़े मामले को लेकर अब मामला थाने तक पहुंच गया है। घटनाक्रम को लेकर बढ़ते जनआक्रोश के बीच वाराणसी के अधिवक्ता दीपक राय कान्हा ने निकटतम थाना लंका में तहरीर देकर मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला सामने आने के बाद से ही लोगों के बीच लगातार चर्चा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं, अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों का प्रो. टी.के. लहरी से मिलने पहुंचना भी शुरू हो गया है। लोग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस उम्र में किसी बुजुर्ग और वरिष्ठ व्यक्ति को सम्मान, संवेदना और सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में उनके साथ ऐसा व्यवहार होने की बात सामने आना आखिर किस ओर इशारा करता है?
पद्मश्री प्रो. टी.के. लहरी कोई सामान्य नाम नहीं हैं। चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में उनका लंबा योगदान रहा है। ऐसे सम्मानित और वरिष्ठ चिकित्सक से जुड़े किसी भी मामले को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए।
आज लोगों का आक्रोश सिर्फ एक घटना को लेकर नहीं है, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जिसमें उम्र, अनुभव और योगदान का सम्मान पीछे छूटता दिखाई देता है।
अगर मामले में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जिम्मेदार लोगों को इस बात का एहसास नहीं था कि वे किस व्यक्ति के साथ व्यवहार कर रहे हैं?
क्या एक ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक, जिन्होंने अपना जीवन मरीजों की सेवा और चिकित्सा शिक्षा को समर्पित किया, उनके सम्मान और गरिमा की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है?
अब अधिवक्ता द्वारा थाना लंका में दी गई तहरीर के बाद लोगों की नजरें पुलिस की कार्रवाई और जांच पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच होगी, तथ्यों को सामने लाया जाएगा और यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला सिर्फ प्रो. टी.के. लहरी का नहीं, बल्कि समाज में बुजुर्गों, शिक्षकों, चिकित्सकों और उन सभी लोगों के सम्मान का सवाल है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा में लगा दिया।
सम्मान उम्र देखकर नहीं, योगदान देखकर होना चाहिए। और अगर किसी के सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंची है, तो न्याय होना चाहिए।
अब सवाल है—तहरीर के बाद पुलिस क्या कार्रवाई करती है?
जनता जवाब चाहती है। परिजन जवाब चाहते हैं। और सबसे बढ़कर, समाज यह जानना चाहता है कि क्या इस मामले में वास्तव में न्याय होगा?
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