जब बड़े पत्रकार फंसते हैं तो एडिटर्स गिल्ड जाग जाता है, पढ़िए ताजा बयान

भारत में एक संस्था है एडिटर्स गिल्ड आफ इंडिया. ये बड़े पत्रकारों, बोले तो एलीट पत्रकारों की रक्षा की बॉडी है. देश में आए दिन पत्रकारों का जगह जगह उत्पीड़न होता रहता है पर इस संस्था के पदाधिकारी आराम से सोए रहते हैं. जब कोई बड़ा पत्रकार फंसता है तो अचानक इनकी नींद टूट जाती है और इन्हें प्रेस की आजादी व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले याद आने लगते हैं.

तो इसी एडिटर्स गिल्ड के पदाधिकारियों की नींद एक बार फिर टूटी है. द वायर के ए़डिटर सिद्धार्थ वरदराज के खिलाफ दो दो एफआईआर यूपी में हो जाने से एडिटर्स गिल्ड के खाए अघाए पदाधिकारियों को लगने लगा है कि ये तो गड़बड़ हो रहा है मीडिया के साथ. पर वहीं यूपी में मुसहर बच्चों के घास खाने की स्टोरी पर जब डीएम ने पत्रकार को धमकी दी तो ये एडिटर्स गिल्ड वाले बेवड़े सोए रहे. ऐसे दर्जनों घटनाक्रम है जब जमीनी पत्रकार सत्ता की मार खाता है, झेलता है, तो ये एडिटर्स गिल्ड वाले कान में तेल डाले अपनी एसी वाली दुनिया में लीन रहते हैं.

इस बार ए़डिटर्स गिल्ड ने जो बयान जारी किया है उसमें दो मामलों को समेटा है. एक तो वायर मुकदमा वाला मामला है ही. दूसरा है सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का यह कहा जाना कि विस्थापित मजदूरों में पैनिक के लिए मीडिया जिम्मेदार है.

पढ़ें इस खाए अघाए संस्था का ताजा वक्तव्य-






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One comment on “जब बड़े पत्रकार फंसते हैं तो एडिटर्स गिल्ड जाग जाता है, पढ़िए ताजा बयान”

  • Himanshu puri says:

    मीडिया को सुरक्षा का भरोसा देने वाली इन संस्थाओं को इस पर जरूर विचार करना चाहिए। छोटे जिलों के पत्रकारों के साथ हो रहे उत्पीड़न पर यदि बड़ा कदम यह संस्थाएं उठाएं तो पत्रकारिता के अस्तित्व पर बढ़ रहा खतरा कम हो सकता है।

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