कटिहार जिले के मनिहारी से निकली यह खबर न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि पत्रकारिता के स्तर पर भी गहरे सवाल खड़े कर रही है। मामला इतना गंभीर है कि एक ओर राजद नेता और नगर परिषद के मुख्य पार्षद लाखों यादव पर बीजेपी नेता को सरेआम पीटने और पिस्टल सटाकर धमकाने का मुकदमा दर्ज होता है, वहीं दूसरी ओर कटिहार की पत्रकारिता का चेहरा बेनकाब हो जाता है। क्योंकि इस घटना पर न किसी अखबार ने एक शब्द लिखा, न ही स्थानीय यूट्यूबरों ने वीडियो बनाया।
घटना क्या है?
21 सितंबर 2025 की शाम वार्ड संख्या 14 के निवासी गुद्दू यादव मेही दास कुटी की ओर जा रहे थे। तभी बगीचा के पास अचानक मुख्य पार्षद और राजद नेता लाखों यादव अपने 10 से अधिक समर्थकों के साथ पहुंचे और रास्ता रोक लिया। गुद्दू यादव का आरोप है कि आते ही लाखों यादव ने गालियां देनी शुरू कर दीं और हमला बोल दिया। उन्हें जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटा गया और इसी दौरान राजद नेता ने उनके सीने पर पिस्टल सटा दी। धमकी दी – “ज्यादा बोलोगे तो जान से मार देंगे, चाहे कुछ भी कर लो कोई मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकता।”

गुद्दू यादव ने लिखित शिकायत मनिहारी थाना में दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने केस नंबर 244/25, दिनांक 21/09/2025, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 115(2), 126(2), 352, 351(2), 353(5) में प्राथमिकी दर्ज की। जांच की जिम्मेदारी एसआई अजीत कुमार चौधरी को दी गई है।
मीडिया की चुप्पी – सवालों के घेरे में कटिहार की पत्रकारिता
अब बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी घटना पर स्थानीय मीडिया और यूट्यूबर खामोश क्यों रहे? न किसी अखबार में रिपोर्ट छपी, न किसी चैनल पर डिबेट हुई। आरोप है कि लाखों यादव जैसे नेता कटिहार की मीडिया पर पूरी तरह हावी रहते हैं। खबर है कि यह नेता अपनी गाड़ी में कटिहार के 99% पत्रकारों को लेकर घूमता है और उन्हें पैसे, सुविधा और रसूख का लालच देकर खबरों को अपने हिसाब से दबा देता है।
लोगों का कहना है कि बिहार में अगर पत्रकारिता की हालत सबसे बत्तर है तो वह कटिहार में है। यहां पत्रकार जनता की आवाज बनने के बजाय नेताओं और अपराधियों के दलाल बन चुके हैं। जनता चाहे कितना भी अन्याय झेले, लेकिन खबर तभी छपेगी जब नेता की इजाज़त होगी।
स्थानीय यूट्यूबरों की भूमिका भी संदिग्ध
कटिहार में कई यूट्यूबर खुद को पत्रकार बताते हैं और रोज़ाना छोटी-मोटी घटनाओं पर वीडियो बनाते हैं। लेकिन जब बीजेपी नेता को सरेआम पीटने और पिस्टल तानने जैसी संगीन घटना हुई, तो सबने आंख मूंद ली। आरोप है कि इन यूट्यूबरों को भी पैसे खिलाकर या दबाव बनाकर चुप करा दिया गया। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इस घटना की गूंज दबा दी गई।
जनता में गुस्सा
मनिहारी और आसपास के लोगों में गुस्सा है। उनका कहना है कि जब पत्रकार और मीडिया बिक जाएंगे तो न्याय की उम्मीद कौन करेगा? जब पत्रकारिता नेताओं की गाड़ी और जेब से चलेगी, तो आम जनता की आवाज कौन बनेगा? यही कारण है कि इलाके में तनाव का माहौल है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कटिहार की राजनीति और मीडिया – एक खतरनाक गठजोड़
यह घटना सिर्फ एक हमले या FIR तक सीमित नहीं है। यह कटिहार की राजनीति और मीडिया के खतरनाक गठजोड़ को उजागर करती है। नेता अपराध करेंगे, पुलिस केस दर्ज करेगी, लेकिन मीडिया चुप रहकर उन्हें बचाएगी। यह व्यवस्था लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों पर कलंक है।



