गुजरात मॉडल : करो जितना भी, नगाड़ा बजाओ जमकर

Anil Singh : यूपी व बंगाल में भी गुजरात मॉडल! गुजरात मॉडल का ‘चमत्कार’ दूसरे राज्यों की सरकारों को भी समझ में आ गया है तो वे भी इसे अपनाने लगी है। खासकर हाल में ही पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और अब उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने इसे अपना लिया है। असल में कुछ दिनों पहले गुजरात सरकार के एक रसूखदार आला अफसर से मुंबई में मुलाकात हो गई तो कई घंटे की अंतरंग बातचीत से पता चला कि गुजरात का मॉडल यह है कि करो जितना भी, नगाड़ा बजाओ जमकर।

पब्लिसिटी पर वहां पूरा ज़ोर रहता है। मीडिया ही नहीं, पब्लिसिटी स्टंट में भाग लेने वालों को भी अच्छा स्वागत-सत्कार करने के साथ जाते समय 1000-2000 नकद थमा दिया जाता है। अब अखिलेश और ममता सरकार ने इसी पब्लिसिटी ‘मॉडल’ को अपना लिया है। हां, एक बात गुजरात की राजनीतिक संस्कृति में वाकई अच्छी है कि वहां सड़क या पुल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में सत्ताधारी नेता का कमीशन 10-15% होता है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह राजनीतिक कमीशन 40-45% है। यही वजह है कि पिछले तीन-चार दशकों में गुजरात में सड़कों वगैरह की स्थिति बेहतर होती गई है, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य उत्तम के बजाय घटिया प्रदेश बनते जा रहे हैं। हां, एक बात और उस अधिकारी ने बताई कि वाइब्रैंट गुजरात में निवेश के जितने प्रस्ताव आते हैं, उनमें से बमुश्किल 5% ही फलीभूत होते हैं।

मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार और अर्थ कॉम डॉट कॉम के संपादक अनिल सिंह के फेसबुक वॉल से.

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