हेमंत तिवारी की इतनी बुरी हालत होगी, यह खुद हेमंत ने नहीं सोचा था

लखनऊ : हेमंत तिवारी की इतनी बुरी हालत होगी, यह खुद हेमंत ने नहीं सोचा था. लखनऊ के राज्य मान्यता समिति के चुनाव न करने के लिए परसों हेमंत ने जो साजिश की थी, कल उसकी धज्जियाँ उड़ गई. कल साठ लोगों ने अपना नामांकन कराया जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. 490 लोगों ने अपना नामांकन शुल्क 100 रुपया जमा कर दिया है. कल की घटना से हेमंत और उसके गुर्गों की बोलती बंद हो गई है. चुनाव 6 सितम्बर को होना है. पत्रकारों में हेमंत के लुच्चेपन को लेकर भारी गुस्सा है.

राज्य मान्यता संवाददाता समिति के चुनाव पहले प्रत्येक वर्ष होते थे. फिर कार्यकाल दो वर्ष के लिए कर दिया गया. मगर हेमंत ने सोच लिया कि चुनाव कराने ही नहीं हैं. तीन साल होने पर भी हेमंत ने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. यही नहीं, पूरे तीन सालों में सिर्फ एक बार ही कमेटी की मीटिंग बुलाई. जब तीन साल पूरे होने पर भी हेमंत चुनाव कराने को तैयार नहीं हुए तो पत्रकारों में गुस्सा बढ़ गया. इन तीन सालों में हेमंत के ऐसे-ऐसे कारनामे सामने आ चुके थे कि पूरी पत्रकार बिरादरी शर्मिंदा थी. हेमंत तिवारी अकेले ऐसे पत्रकार होंगे जिन्हे मुख्यमंत्री ने एक दर्जन बार से ज्यादा सबके सामने बेइज्जत किया. दर्जनों ऐसी घटनाएं हैं जिसके बारे में लखनऊ का हर पत्रकार जानता है.

इन हरकतों के चलते जब हेमंत चुनाव कराने को राजी नहीं हुए तो पत्रकारों ने एनेक्सी में बैठक बुलाई और कहा कि अगर हेमंत ने एक हफ्ते में चुनाव नहीं कराये तो बैठक बुला कर चुनाव करा दिए जायेंगे. मगर हेमंत ने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक बुलाई और चुनाव कराने की घोषणा कर दी. इससे हेमंत तिवारी खेमे में खलबली मच गई. कल हेमंत तिवारी ने सब पत्रकारों की बैठक बुलाई और कहा यह बैठक चुनाव कराने के लिए बुलाई जा रही है. पत्रकारों को लगा कि शायद हेमंत भी अब चुनाव कराने को राजी हो गए. दूसरे खेमे ने भी कहा कि विवाद ठीक नहीं. जो तारीख तय हो, वो मान ली जाएगी और 6 सितम्बर को होने वाले चुनाव टाल दिए जायेंगे. मगर हेमंत ने यहाँ भी कलाकारी दिखाई और चुनाव कराने के लिए एक कमेटी बना दी और कहा यह कमेटी तय करेगी कि चुनाव कब हो. साथ ही कहा कि दो महीने बाद तारीख तय हो जाएगी. मजे की बात यह रही कि विधान सभा के प्रेस रूम जहाँ 70  से ज्यादा पत्रकार इकट्ठे नहीं हो सकते वहां हेमंत ने कहा कि 300 से ज्यादा पत्रकारों ने उनकी बात का समर्थन किया जबकि इस बैठक में बड़ी संख्या में जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार थे जो वोट नहीं डाल सकते थे. इसके अलावा जो समिति बनाई गई उसके कई पत्रकार बैठक में थे ही नहीं.

इन हरकतों के बाद साफ़ हो गया था कि हेमंत किसी भी कीमत पर चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उनकी दुकान चलती रहे. पत्रकारों ने कहा कि अब चुनाव होने ही चाहिए. हेमंत तिवारी खेमे ने पहले ही कह दिया कि अधिकतर पत्रकार तो उनके साथ हैं, लिहाजा इस चुनाव में 50 लोग भी भाग नहीं लेंगे. मगर कल चुनाव के लिए जिस तरह पत्रकारों का हजूम उमड़ा उसने सबको भौचक्का कर दिया. सभी पदों के लिए 60 नामांकन हुए जो अपने आप में रिकॉर्ड है. लगभग 600 पत्रकारों में से 490 पत्रकारों ने 100 रुपया चुनाव फीस जमा करके सन्देश दे दिया कि सभी चुनाव चाहते हैं. कल की बैठक से हेमंत के फर्जीवाड़े और झूठ बोलने की भी पोल खुल गई.

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. 


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Comments on “हेमंत तिवारी की इतनी बुरी हालत होगी, यह खुद हेमंत ने नहीं सोचा था

  • अच्छा तो गज़ब झूठ की मशीन लगाई है शर्त प्रधान मुदित प्रांशु और रामदत्त ने … जिन लोगों ने भी उस दिन प्रेस रूम की मीटिंग में हिस्सा लिया उन्हें जिलास्तरीय कह के फिर अपमानित किया जा रहा है . नए पत्रकारों को पहले ठेले वाले अंडे वाले कहते हो फिर जिला स्तरीय बताते हो ? खुद कही लिखे जमाना हो गया वो मुदित माथुर तय करेगा कि कौन पत्रकार है और कौन नहीं ? शर्म करो . और ये भी बता दो कि जिन 60 नामांकन की बात कर रहे हो तुम लोग उसमें एक एक व्यक्ति ने कई कई पदों के लिए नाम दिया है … दिलीप सिंह , तमन्ना फरीदी यहाँ भी हैं और वहां भी … कल ही एक पत्रकार शिकायत कर रहे थे कि मैंने तो 100 रुपये जमा नहीं किये मगर किशोर निगम ने बता दिया कि तुम्हारी फीस जमा हो गयी है .. ऐसे ही 40,००० रुपये खा जाओगे क्या ? नाम क्यों नहीं सार्वजनिक किया भाई कि कि किस पद के लिए किसने नामांकन किया है , सारी कलाई खुल जाएगी

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  • कुमार सौवीर says:

    सच कहने का दावा करने से पहले तो आपको पहले अपना चेहरा भी सच साबित करना पड़ेगा विद्रोही।
    आप जिस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रहे हैं, उसे कहने के लिए आपकाे चाहिए कि आप ताल ठोंक कर सामने आकर बात करें। छिपे-दुबके अंदाज में या किसी फर्जी नाम से चोरों की तरह मत कूदें। न तो शरत, रामदत्‍त, मुदित ने किसी को ऐसा कोई घटिया नाम दिया है और न ही मैंने ऐसा सुना है। रही बात रही किशोर निगम जैसे लोगों की, यह लोग टुच्‍चे नहीं हैं कि आपकी तरह झूठ बोलते घूमें।
    कुमार सौवीर
    लखनऊ
    9415302520

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  • Ashish Jalota says:

    दलाल द्वय हेमंत और कलहंस की दुकान बंद होने वाली है। हरामियों ने खूब माल अंदर किया है। समाचार प्लस वाले उमेश शर्मा के साथ गलबहियाँ कर के मुख्यमंत्री और नवनीत सहगल से करोड़ों रूपए ऐंठे हैं। उमेश की उत्तराखंड में दलाली और ब्लैकमेलिंग की दूकान को सीएम हरीश रावत ने जब से ठप्प किया है तभी से वो यूपी में घुसना चाह रहा था। हेमंत और कलहंस ने उसको अखिलेश यादव तक पहुंचाया। इसीलिए इन दलालों को जड़ से उखाड़ फेंकना ही उचित होगा। कुमार सौवीर सर और शरत प्रधान सर के हाथों में कमान सौंपनी चाहिए।

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