प्रेस क्लब सारे पत्रकारों के लिए खोलने के प्रस्ताव का दीपक गिडवानी ने स्वागत किया

That’s a good initiative, something i have been fighting for, for a long time. After a sustained effort and a major struggle, we had managed to get temporary membership for 18 journalists. But even these members have not been made permanent members. The fear of those wielding power at UP Press Club (for indefinite terms) is that news members might tip the balance against the ‘thekedaars’ in the next Club election (whenever that happens!)

We will have to continue the pressure for opening up membership, though within the rules and norms of the Press Club.  There is no harm in or objection to the membership applications being screened by the Club’s screening committee. The point is that the applications should either be accepted or rejected (giving a valid reason). This state of limbo suits the powers-that-be but is totally unjustified and unacceptable, and needs to be condemned in the stongest terms.

We journalist who raise such a hue and cry about freedom of expression and democratic norms become a laughing stock when we ourselves make a mockery of elections and tenure of elected representatives within our fraternity, occupying  our seats and positions for years beyond our fixed term, deliberately or due to the power lust of others. Hope this renewed initiative bears fruit.

Best etc…

Deepak Gidwani
Lucknow
09838007255


मूल खबर :

OPEN PRESS CLUB FOR ALL JOURNALISTS

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OPEN PRESS CLUB FOR ALL JOURNALISTS

Lucknow, 11 February 2016 : The UP State Accredited correspondent committee has passed a resolution demanding Opening of doors of the UP Press Club, for all accredited and other working journalists. In the meeting of the Correspondent committee held at Press room of Vidhan Bhawan and presided by its President Pranshu Mishra, a resolution to this regard was moved by Senior journalist and member of the executive committee Mr Kazim Raza.

Mr Raza in his proposal said that a lot of journalists have a strong connect with the UP Press Club. Most of the accredited correspondents as well as non accredited ones working both in field or desk often visit the press club either due to professional reasons or else personal ones.

The UP Press Club has a glorious past in the struggle of journalist movement and freedom of speech and expression. Therefore every journalist feels proud to be associated with its legacy. For the past many years journalists have a genuine complaint that despite fulfilling the requisite qualification they have not been granted membership of the press club.

Hence it’s high time that all those accredited and non accredited journalists who are desirous of the membership of the press club and meet the prescribed criteria should be given the membership as per the By laws of the club. Member of the UPSACC’s executive committee Shri Deepak Gidwani and Shri Mudit Mathur agreed to this demand of democratisation  of the club and Journalistic organisations in general.

The proposal to this effect was passed unanimously by all present in the meeting including Vice president of the UPSACC Shri Narendra srivastava, Secretary Neeraj Srivastava, Joint secretary  Ajay srivastava, Members Abhishek Ranjan, Kashi Yadav, Juber Ahmad,, Ashish Srivastava, Faizal Fareed and others. The meeting authorised the UPSACC president Pranshu Mishra to communicate these feelings as expressed in the resolution to the President of the UP Press club to take necessary steps to pacify the resentment among the journalists.

Regards
Neeraj Srivsatava
secretary
UPSACC‎

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प्रांशु मिश्र ने हसीब सिद्दीकी को लेटर लिखकर किन किन सवालों का जवाब पूछा… पढ़ें पूरा पत्र

प्रिय मित्र,

उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष श्री हसीब सिद्दीकी को मैने एक पत्र लिखा है। दरअसल लंबे समय से मन में कई सवाल थे। शायद ये सवाल आप में से बहुतों के मन में भी हों। चूंकि हसीब भाई प्रदेश में संगठन के शीर्ष पद पर हैं, मुझे लगता है कि तमाम सवालों-आशंकाओं का जवाब वही दे सकते हैं।

मैं पत्र को आप तमाम साथियों को इसलिए प्रेषित कर रहा हूं क्योंकि जो सवाल मेरे मन में हैं, वो शायद आपके मन में भी हों। अगर वो आपके मन में भी हों तो संबंधित लोगों से सवाल करने में संकोच न करें। मुझे पूरी उम्मीद है कि हमें जवाब मिलेगा। पत्र नीचे संलग्न है।

आपका
प्रांशु मिश्र
अध्यक्ष
उ.प्र.मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति


ये रहा पत्र…

दिनांक 10-12-15

सेवा में

कामरेड हसीब सिद्दीकी

अध्यक्ष

उ.प्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन

प्रिय हसीब जी
संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के दौरान आप से मथुरा में मुलाकात हुई थी। सर्वप्रथम एक सफल आयोजन कराने के लिए आपको और आपकी पूरी टीम को बहुत बधाई। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के आचरण विषय पर परिचर्चा में आपने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया। राष्ट्रीय कार्यसमिति की अति महत्वपूर्ण बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होने का अवसर भी मुझे मिला। परिचर्चा और कार्यसमिति की बैठक, और देश के विभिन्न राज्यों से आए संगठन के तमाम वरिष्ठ साथियों से संवाद का जो अवसर मिला,उसने मुझे संगठन के कामकाज, उसके समक्ष चुनौतियों, विस्तार की योजनाओं आदि को समझने का एक मौका दिया। कार्यसमिति की बैठक में तमाम अहम मुद्दों पर खुली स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस अच्छी लगी।

पर लोकतंत्र की यह झलक शायद प्रदेश में संगठन के कामकाज में नहीं दिखती। आप को शायद याद हो कि इसी वर्ष सितंबर में मैं आपसे और यूपी प्रेस क्लब के सचिव श्री जोखू प्रसाद तिवारी जी से प्रेस क्लब में ही मिला था। उस वक्त भी मैने यह सवाल उठाया था कि क्लब की मेंबरशिप आम पत्रकारों के लिए क्यों नहीं खोली जाती। अगर इसके पीछे वजह प्रेस क्लब का आईएफडब्लूजे के आधीन होना है तो भी संगठन के प्रदेश में तकरीबन 3000 सदस्यों में से महज 150 लोगों को ही प्रेस क्लब की सदस्यता क्यों दी गई है। चर्चा है कि अकेले लखनऊ में संगठन के तकरीबन 400 सदस्य हैं। इसमें से कितनों को प्रेस क्लब की सदस्यता दी गई। वैसे प्रदेश में संगठन के तीन हजार सदस्य और लखनऊ में चार सौ सदस्य होने वाली बात भी मुझे चर्चाओं में ही पता चली है। हो सकता है यह संख्या गलत हो…क्योंकि कम से कम मैने सदस्यों की कोई सूची जिले या प्रदेश स्तर पर आज तक नहीं देखी है। जिन तमाम साथियों से मैने यह सूचना पुख्ता करने की कोशिश की वो भी आज तलक अंधेरे में हैं।

मुझे याद है कि प्रेस क्लब में हुई मुलाकात में आपने कहा था कि संगठन इतने कार्यक्रम कराता है, लोग उसमें नहीं आते..जुड़ना नहीं चाहते तो आप क्या करें। दरअसल लोगों को संगठन से जोड़ने का यह नजरिया ही शायद त्रुटिपूर्ण है। श्रोता के रूप में भी लोग आएंगे, लेकिन पहले कहीं न कहीं बुनियादी स्तर पर ही सही उन्हें संगठन की लोकतांत्रिक निर्णय लेने वाली प्रक्रिया का हिस्सा बनाना पड़ेगा। किसी भी संगठन के कामकाज में लोकतांत्रिक तौर तरीके और उनमें एक आम सदस्य की भागीदारी के जरिए होते हैं…जिला व राज्य सम्मेलन, जनरल बाडी मीटिंग आदि। संगठन की लखनऊ जिला इकाई का सम्मेलन आखिरी बार कब हुआ याद नहीं।

यही हाल यूपी प्रेस क्लब का है। सदस्यता पर अघोषित रोक तो है ही, न कोई जनरल बाडी मीटिंग बीते कई वर्षों में हुई है। एक सजग पत्रकार के तौर पर जो थोड़ा बहुत पता चला उससे तो यही लगता है कि जनरल बाडी मीटिंग तो दूर की बात है..अरसा हो गया प्रेस क्लब की गर्वनिंग काउंसिल की बैठक हुए। प्रेस क्लब के चुनाव को भी पांच साल हो गए हैं।

मथुरा बैठक के दौरान मुझे याद है कि संगठन के मुख्य चुनाव अधिकारी देवाशीष बोस जी ने खुले मंच से कहा था कि सभी राज्यों को 31 दिसंबर 2015 तक नेशनल काउंसिलर्स का चुनाव कर नाम केंद्रीय चुनाव अधिकारी को भेज देने हैं। प्रदेश से नेशनल काउंसिलर्स के चुनाव के लिए श्री टीबी सिंह को मुख्य चुनाव अधिकारी व श्री विनय कृष्ण रस्तोगी जी को सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय आपकी अध्यक्षता में हुई बैठक में ही लिया गया था।

जहां तक मेरी जानकारी है अभी तक चुनाव अधिकारियों की तरफ से नेशनल काउंसिलर्स के चुनाव के लिए कोई कार्यक्रम ही जारी नहीं किया गया। नामंकन पत्र कब मिलेंगे, नामंकन कब तक भरा जा सकता है…मतदान कब होगा। इस मार्फत कोई भी सूचना सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में निश्चय ही संगठन के कुछ पदाधिकारियों  की कार्यशैली पर सवाल उठता है। मथुरा बैठक के विजन और प्रदेश में संगठन के एक्शन प्लान में दूर दूर तक कोई साम्य नहीं दिखता।

मैने आपको यह पत्र इसलिए लिखा..क्योंकि प्रदेश में संगठन के सर्वेसर्वा आप हैं। ट्रेड यूनियन का दशकों पुराना अनुभव आपके पास है। मेरा मानना है कि तमाम अनुभवी,युवा पत्रकार-छायाकार संगठन के प्रति आदर का भाव रखते हैं। उन्हें मौका दिए जाने की जरूरत है। प्रेस क्लब से लेकर संगठन के स्तर पर थोड़ा सा दरवाजा खोलने की जरूरत है। लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की शुरुआत लखनऊ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन और प्रेस क्लब से होनी चाहिए। और अगर इस शुरुआत में मेरी कहीं भी जरूरत पड़े..मैं एक आम सदस्य के तौर पर पूरी मजबूती से तैयार मिलूंगा।

सादर
प्रांशु मिश्र
अध्यक्ष
उ.प्र.मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति
9415141305

प्रतिलिपि —  
श्री रवींद्र सिंह
अध्यक्ष (यूपी प्रेस क्लब)
श्री जोखू प्रसाद तिवारी
सचिव (यूपी प्रेस क्लब)

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यूपीएसएसीसी के पदाधिकारियों से मुलाकात के दौरान बोले मुलायम- ‘लखनऊ के पत्रकार सबसे अच्छे’ (देखें तस्वीरें)

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (UPSACC) के पदाधिकारियों ने बीते दिनों समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से उनके निवास पांच विक्रमादित्य मार्ग पर मुलाकात की. श्री यादव ने समिति के सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि यह समिति पत्रकारों के हितों और पत्रकारिता के उद्देश्यों को पूरा करेगी. उन्होंने समिति के सभी सदस्यों से परिचय पूछा और उनके संस्थानों का नाम जाना. श्री यादव ने कहा कि यह बहुत अच्छा है कि समिति के सभी लोग योग्य हैं.

समिति के सभी सदस्यों से बात करते हुए श्री यादव ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कई वरिष्ठ पत्रकारों के साथ अपने संस्मरण सुनाये. उन्होंने कहा कि वो कई मौकों पर कह चुके है कि लखनऊ के पत्रकार सबसे अच्छे हैं क्योकि वो मानवीय मूल्यों को समझते हैं. उन्होंने समिति के सभी सदस्यों से कहा कि समाज में अच्छा माहौल बनाने के लिए वो सार्थक पहल करें. अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा ने उन्हें पत्रकारों की समस्याओं के विषय में बताया. सपा मुखिया ने कहा कि वो इन समस्याओं का शीघ्र निदान करायेंगे. उन्होंने समिति के सभी सदस्यों से कहा कि आप लोग पत्रकारों की किसी भी समस्या के लिए उनसे कभी भी मिल सकते हैं.

श्री यादव ने डेढ़ घंटे तक समिति के सदस्यों से बात करते हुए पत्रकारिता के भिन्न-भिन्न मुद्दों पर बात की और बताया कि लोहिया जी कितना पढते थे और पत्रकारों का कितना सम्मान करते थे. इस अवसर पर वाह्य सहायतित परियोजना एवं एनआरआई विभाग के सलाहकार मधुकर जेटली भी थे. समिति के लोगों में अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा, उपाध्यक्ष नरेंद्र श्रीवास्तव, संजय शर्मा, संयुक्त सचिव अजय श्रीवास्तव, कोषाध्य्क्ष अशोक मिश्रा, सदस्य रूचि कुमार, काशी यादव, मनीष श्रीवास्तव, फैसल फरीद, एसएम पारी, आशीष श्रीवास्तव, अभिषेक रंजन, मुदित माथुर, अनूप श्रीवास्तव आदि मौजूद थे.

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यूपी मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में छह पत्रकार नामित, देखें नाम

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति द्वारा समिति में 6 सदस्यों को मनोनीत किया गया है। इनके नाम इस प्रकार हैं…

1. रुचि कुमार (ब्यूरो चीफ, इंडिया टीवी)

2. शलभ मणि त्रिपाठी (ब्यूरो चीफ, आईबीएन7)

3. फैज़ल फरीद (चीफ रिपोर्टर, इंडियन एक्सप्रेस)

4. मनीष श्रीवास्तव (चीफ रिपोर्टर, नवभारत टाइम्स)

5. एस. एम. पारी (चीफ फोटोग्राफर, वॉयस ऑफ़ लखनऊ)

6. मो. ज़ुबैर अहमद रिपोर्टर कबीर टाइम्

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यूपी के पत्रकारों ने अपने खानपान समारोह के लिए इकट्ठा पैसा बीमार पत्रकार को दे दिया

सभी मान्यता प्राप्त साथियों,

एक परंपरा इस बार टूट गई है। चुनाव में आपके 100 रुपए के आर्थिक अंशदान से एकत्र हुए फंड से इस बार नव निर्वाचित समिति आपके सम्मान में लंच का आयोजन नहीं कर सकेगी। साथ मिल बैठकर खाना फिर कभी किसी और मौके पर निश्चित ही होगा। लेकिन इस बार समिति के समक्ष दो विकल्प थे। एक तरफ चुनावी फंड से बचे तकरीबन 30 हजार रुपए से लंच के आयोजन तो दूसरी तरफ हम सब के साथी, पूर्व में मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सदस्य रहे सुरेंद्र सिंह व उनके परिवार की मदद का विकल्प।

मुझे खुशी और गर्व है कि समिति के सभी पदाधिकारियों ने दूसरे विकल्प का चुनाव किया। ऐसा नहीं है कि हम सभी नवनिर्वाचित सदस्य लंच नहीं चाहते थे। पर सवाल यह था कि क्या कोई और बेहतर तरीका है हमारे और आप सभी 475 लोगों के आर्थिक अंशदान के इस्तेमाल का। आप सभी को पता है कि श्री सुरेंद्र सिंह बीते 3 वर्षों से मोटर न्यूरोन डिसार्डर नामक लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं। मेडिकल साइंस में इस बीमारी का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। सुरेंद्र जी का शरीर लकवाग्रस्त है..वह बोल नहीं सकते, अपने आप हिल भी नहीं सकते। बीते दो वर्षों में समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों ने कभी भी उनकी सुध नहीं ली।

मान्यता समिति का अध्यक्ष निर्वाचित होने के तुरंत बाद इसी 31 अगस्त को मैं और हमारी समिति के कई साथी..सुरेंद्र जी के घर गए थे। उनकी और उनके परिवार की स्थिति देखकर हम सभी को बहुत तकलीफ हुई। हमने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। उसी के बाद समिति ने प्रमुख सचिव सूचना और फिर मुख्य सचिव से मुलाकात कर यह मांग की थी कि सुरेंद्र जी के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद की जाए।

हमें फिलहाल सरकार से जवाब का इंतजार है। सरकारी तंत्र किस रफ्तार से काम करता है इसका आपको अंदाजा है। इस बीच में हम उनके लिए कुछ कर सकें यह जरूरी था। ऐसे में यह फैसला किय गया कि चुनाव फंड में बजे 30 हजार रुपए में कुछ और अंशदान समिति के पदाधिकारी अपनी सुविधा के अनुरूप करें। हमारे बीच में पूल हुई धनराशि के बाद हमने फिलहाल 55 हजार रुपए श्री सुरेंद्र सिंह के परिवार को उपलब्ध कराए हैं।

अपना एक साथी इस कदर तकलीफ में हो और हम लंच करें यह हमें उचित नहीं लगा। हमें यह भी सोचना होगा कि क्या हम कोई ऐसा सिस्टम बना सकते हैं जिससे हर बार मदद के लिए हमें सरकार का मूंह न ताकना पड़े। समिति के पास कोई आर्थिक स्रोत है नहीं, इस बार कुछ फंड था तो उसका इस्तेमाल हो गया। भविष्य के लिए हमें कोई नीति निर्धारित करनी होगी। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

अभिवादन सहित
आपका
प्रांशु मिश्र

अध्यक्ष
मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति
09415141305

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संवाददाता समिति ने दी वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सिंह के परिजनों को 55 हजार की मदद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने लम्बे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सिंह के परिजनों से आज मुलाकात कर उनके इलाज के लिए 55 हजार की फौरी मदद प्रदान की। इसी के साथ समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह श्री सिंह के इलाज के लिए दस लाख रूपये देने की उसकी मांग पर शीघ्र निर्णय करे।

समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्र व सचिव नीरज श्रीवास्तव के नेतृत्व में समिति के सदस्यों ने आज गोमती नगर स्थित वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सिंह के आवास पर जाकर यह राशि प्रदान की। श्री सिंह लम्बे समय तक हिन्दी दैनिक आज से जुड़े रहे। दो वर्ष पूर्व वे नर्व की लाइलाज बीमारी के शिकार हो गये। इस समय उनका 80 फीसदी अंग काम नहीं कर रहा है। समिति ने कुछ दिन पूर्व उनकी हालात से प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल को अवगत कराते हुए उनसे मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दस लाख रूपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी।

अभी तक सहायता राशि न मिलने के कारण फौरी मदद के तौर पर समिति ने 55 हजार रूपये की राशि उनकी पत्नी पूनम सिंह को प्रदान की। इस राशि में राज्य मुख्यालय में मान्यता प्राप्त संवाददाता सदस्यों का 30 हजार रूपये का योगदान है। शेष राशि समिति के सदस्यों ने अपनी ओर से एकत्रित की है। इसी के साथ आज पुनः समिति ने सरकार से सुरेन्द्र सिंह को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। सहायता राशि देने के प्रतिनिधिमण्डल में समिति के उपाध्यक्ष नरेन्द्र श्रीवास्तव, संजय शर्मा, संयुक्त सचिव अजय श्रीवास्तव, अमितेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष अशोक मिश्र तथा सदस्य मुदित माथुर,काजिम रजा,आशीष श्रीवास्तव व वरिष्ठ पत्रकार आनन्द सिन्हा शामिल थे।

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UPSACC : रात भर चली मतगणना, आज सुबह आया रिजल्ट, प्राशु मिश्रा अध्यक्ष निर्वाचित (देखें लिस्ट)

उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता संवाददाता समिति का चुनाव हो गया. कल वोट पड़े और रात भर चली मतों की गिनती के बाद आज सुबह परिणाम घोषित कर दिया गया. राज्य मुख्यालय के 438 पत्रकारों ने अपने मतों का प्रयोग किया था. कल शाम से शुरू होकर आज सुबह 4 बजे तक चली मतगणना के बाद परिणाम आज सुबह घोषित हुआ. अध्यक्ष पद पर प्रांशु मिश्रा निर्वाचित घोषित किए गए हैं. नरेंद्र श्रीवास्तव और संजय शर्मा उपाध्यक्ष उपाध्यक्ष बने हैं.

नीरज श्रीवास्तव ने सचिव के पद पर बाजी मारी है. अजय श्रीवास्तव और अमितेश श्रीवास्तव संयुक्त सचिव निर्वाचित हुए हैं. अशोक मिश्रा को कोषाध्यक्ष के पद पर सफलता मिली है. कोषाध्यक्ष पद पर 8 वोट से अशोक मिश्रा की हुई जीत के बाद कोषाध्यक्ष पद के दूसरे प्रत्याशी एस.एम्. पारी ने कोषाध्यक्ष पद के लिए पुनर्मतगणना की मांग की है. इस मांग पर आज पुनः पुनर्मतगणना की जाएगी. कार्यकारिणी सदस्य के लिए हुए चुनाव में अभिषेक रंजन, मुदित माथुर, अनूप श्रीवास्तव, दीपक गिडवानी, हरीश कांडपाल, काशी प्रसाद यादव, काजिम रजा, आशीष श्रीवास्तव विजयश्री हासिल करने में सफल हुए.

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उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के चुनावी महाभारत में जीत गया अहंकार, खंडित हो गयी पत्रकार एकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनावी महाभारत के संग्राम में कोई अगर जीता तो वह है अहंकार। महाभारत की तरह उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के चुनावों में पत्रकारों की सेना दो खेमों में विभाजित हो गई। ऐसा सम्भवतःपहली बार हो रहा है जब एक ही समिति के लिए दो- दो जगह चुनाव आयोग का गठन होकर दो जगहों पर चुनाव सम्पन्न हुए। इन चुनावों में कोई गांधी जैसा भी सामने नही आया जिसने विभाजन को रोकने के लिए कोई व्रत, सत्याग्रह किया हो। इन घटनाओं से तटस्थ पत्रकार को झटका लगा है उनको लगता है पत्रकार एकता को गहरी चोट लगी है।

अब से पहले उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की एकता का दम भरने वाली मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति में दलीय निष्ठा से ऊपर रह कर विभिन्न ट्रेड यूनियन के सदस्य व अन्य एक ही पैनल से चुनाव लड़ते तथा सभी वर्गों का समर्थन हासिल करते थे, किन्तु इस बार 600 से अधिकार पत्रकारों की मतदाता सूची में सिर्फ एक ही खेमें का नेतृत्व करने की मानो होड़ मची थी। इतना भ्रम व असमंजस पत्रकारों में था कि कई पत्रकार तो दोनो ही खेमों में प्रत्याशी बन गए। कईयों ने तो दोनों ही तरफ दोनों दिन वोट भी दिये। सर्वमान्य नेतृत्व के आकांक्षी लोगों को तगड़ा झटका लगा है।

महाभारत की तरह पत्रकारों के इन चुनावों में लगभग सभी किरदारों ने अपनी-अपनी भूमिका अदा की, द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह भी विवश थे, क्योकि वे हस्तिनापुर की तरह सिंहासन के प्रति वफादार, मौन थे। कृष्ण भी थे, किन्तु कोई अर्जुन जैसा कायर योद्धा नहीं था जो महाभारत की तरह पत्रकारों इस चुनावी रण में अपनों को सामने देखकर रण छोड़ना चाहता हो। कोई यह मानने को तैयार न था कि अपनों से हार में असल विजय है।

पत्रकारों के इस विभाजन से अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान होगा तो वह है पत्रकारों का। यह चुनाव पत्रकारों के कल्याण कार्यक्रम के किसी एजेण्डे के बिना लड़ा गया। जानकारों का मानना है कि पत्रकारों के विभाजन से प्रदेश में पत्रकार उत्पीड़न की घटनाएं बढेंगी। पत्रकारों के विभाजन की पीड़ा भी कम कष्टकारी नहीं है। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने मुख्यमंत्रित्व काल में पत्रकारों के सभी संगठनों को एक मंच पर आने की अपील की थी किन्तु उसका असर नहीं दिखा था। उनकी पार्टी की ही सरकार में पत्रकारों का एक और विभाजन हो गया है। इस बार चुनावों में 29 व 30 अगस्त को दो दिन मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव सम्पन्न हुए। सरकार के सचिवालय प्रशासन ने पत्रकारों के एक गुट को सचिवालय एनेक्सी में चुनावों की तथा दूसरे गुट को विधान भवन प्रेस रूम में अनुमति देकर आग में घी का काम किया।  

इन चुनावों में पत्रकारों को विभाजित करने के सारे शिगूफे छोड़े गए असली बनाम नकली पत्रकार, लिख्खाड बनाम अण्डे बेचने वाले पत्रकार, प्रिंट मीडिया बनाम इलेक्ट्रानिक मीडिया आदि आदि। इसी बीच किसी ने प्रस्ताव रखा कि जब दो-दो पत्रकारों की कमेंटियां बन ही रहीं है तो फिर इलेक्ट्रानिक मीडिया, फोटोग्राफर, स्वतन्त्र पत्रकार व साइबर व सोशल मीडिया के लोग भी क्यों न अपनी-अपनी कमेटियां बना लें। जिस तरह पत्रकार विभाजन की तरफ बढ रहें है, ऐसे में आगे आने वाले दिनों में ऐसे दिन भी देखने को मिल सकते हैं कि अलग-अलग माध्यम के पत्रकार अपने गुट बना लें। समानान्तर समिति बन जाने से अब रोज-रोज नए विवाद सामने न आयेंगे, इसकी क्या गारण्टी! समिति के दो-दो अध्यक्ष, चार-चार उपाध्यक्ष, दो-दो सचिव व कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव के चार-चार, तथा कार्यकारिणी सदस्य के 8 व 11 पदाधिकारी अपनी अपनी कर सकते हैं।

कहीं असली -नकली का खेल न शुरू हो जाए। एक दूसरे पर कीचड उडेलने से परहेज क्यों करेगें। एक-दूसरे पर जालसाजी के आरोप मढे जा सकते हैं। एक दूसरे को नैतिकता की दुहाईं, यहां तक एक दूसरे की पोल-पट्टी खोलने का घिनौना खेल भी खेला जा सकता है। इसका अन्त कहां होगा कोई नही जानता। एक बात और किसी भी समिति का कार्यकाल क्या होगा यह तय किया जाना अभी भविष्य की गर्त में है….। यह भी शक्ति प्रर्दशन होगा कि आखिर सरकार किस समिति को मान्यता देती है।

चुनावों पूर्व समझा जा रहा था कि चुनावों तक विवाद का अंत हो जाएगा, चुनावों से पहले एकता के प्रयास किए गये किन्तु तब तक देर हो चुकी थी। रण के चुनावी मैदान में उन्मादी योद्धा बेताब थे उनको युद्धविराम का संदेश देना उल्टा पडा। आखिर सभी प्रयास असफल साबित हुए। जब कभी पत्रकार एका में बाधको का विश्लेषण होगा तो तब दोनो ही तरफ के चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा अवश्य होगी। जरूरत अब साक्षात् शिव की है जो समुद्र मन्थन की भांति पत्रकारों के चुनावों के मन्थन से निकले विष का पान कर लें।    

लेखक अरविन्द शुक्ला लखनऊ के पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 09935509633 के जरिए किया जा सकता है.


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लो जी, हेमंत-कलहंस ने फर्जी चुनाव करा के खुद को विजयी घोषित कर दिया

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लो जी, हेमंत-कलहंस ने फर्जी चुनाव करा के खुद को विजयी घोषित कर दिया

(आज हुए मतदान का एक दृश्य)


Yashwant Singh : लखनऊ में पत्रकारों ने अपना नेता चुनने के लिए कल भी वोट दिया और आज भी दे रहे हैं. जानते हैं क्यों? क्योंकि मान्यताप्राप्त पत्रकारों के दो गुट हो गए हैं और एक गुट जो बेहद बदनाम, लालची, सत्तापरस्त रहा है, किसी भी कीमत पर अध्यक्ष व सचिव पद नहीं जाने देना चाहता, वे चाहते हैं ताउम्र इस पद पर बने रहें. इसी से साबित हो जाता है कि ये कितने बड़े अलोकतांत्रिक और कितने बड़े लायजनर हैं. क्या इससे अलग भी कोई प्रमाण चाहिए. ये दो सज्जन हैं हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस.

इन दोनों यानि हेमंत और कलहंस ने कल अपने हिसाब से चुनाव करवाया जिसमें करीब दो सौ पत्रकारों का वोट डाक से आया वोट बताकर खुद के नाम पर डाला दिखाकर पूरा चुनाव फर्जी तरीके से अपने पाले में कर लिया. डाक से वोट? जी हां. मानों पत्रकार न हों, सीमा पर तैनात फौजी हों. असल में हेमंत और कलहंस की रणनीति यही थी कि डाक से वोट नामक कैटगरी क्रिएट कर इसके माध्यम से आए-लाए वोट को खुद के नाम मिला वोट दिखा कर खुद को जिता लेना है. ये सारी कार्यवाही गोपनीय, अलोकतांत्रिक और अपारदर्शी तरीके से की गई ताकि इसका कोई रिकार्ड न रहे. लोगों को कहा गया कि वो फोन पर ही बोल दें कि उनका वोट डाक कैटगरी का रहेगा, बस, वो वोट देने आएं या न आएं. उसके बाद तो उनका वोट हेमंत-कलहंस अपने पाले में दिया गया वोट दिखा ही लेंगे. 

उधर, आज जो चुनाव हो रहा है उसमें डाक से वोट की व्यवस्था बिलकुल नहीं की गई है. आइए और वोट डालिए. आज जो चुनाव हो रहा है वह वीडियो रिकार्डिंग के बीच हो रहा है ताकि कोई भी विवाद न हो और सब कुछ ट्रांसपैरेंट रहे. कल हुए चुनाव के बाद शाम को हेमंत तिवारी ने फिर से खुद को अध्यक्ष घोषित कर लिया और सिद्धार्थ कलहंस ने खुद को सचिव. आज हुए चुनाव का नतीजा देर रात आने की उम्मीद है. लखनऊ के जितने भी ठीकठाक पत्रकार हैं, वे सभी आज वोट देने गए.

देखना ये है कि उत्तर प्रदेश की सरकार की तरफ से किस कमेटी को मान्यता दी जाती है. हालांकि यूपी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव जानते हैं कि हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस मार्केट में पूरी तरह गंधा चुके हैं, फिर भी वे नौकरशाहों की सलाह पर इन्हें ही मान्य नेता घोषित कर शपथ दिला सकते हैं. वजह? आप देख ही रहे हैं कि यूपी में जंगलराज है. जो दागी है, जो दलाल है, जो रीढ़विहीन है, जो यसमैन है, वह सत्ता संरक्षित है. ये वही यूपी है जहां जेल से छूटा आईएएस मलाईदार पोस्टिंग पा जाता है और जो आईएएस-आईपीएस सत्ता की गलत नीतियों के बारे में बोल देता है उसे निलंबित कर दिया जाता है, उसे वीआरएस लेने को मजबूर कर दिया जाता है. ऐसे उलटबांसी भरे प्रदेश में होना तो उल्टा ही है.

यह भी सच है कि लखनऊ की जो असली मीडिया है, चैनल वाले हैं, अखबार वाले हैं, वो सब हेमंत व कलहंस के खिलाफ हैं और आज के चुनाव में वोट डालने गए. यानि हेमंत कलहंस अगर सरकारी समर्थन फिर से नेता आरोपित कर भी दिए गए तो जो लखनऊ की मीडिया है उसे कैसे आगे टैकल कर पाएंगे हेमंत और कलहंस. कुल मिलाकर बहुत रोचक मोड़ पर आ चुका है लखनऊ के मान्यता प्राप्त पत्रकारों का चुनाव. देखना है नौकरशाह नवनीत सहगल किस गुट पर वरदहस्त रखते हैं. हालांकि यह तय माना जा रहा है कि अगर हेमंत और कलहंस के गुट को सरकार ने मान्यता दी तो लखनऊ के बाकी सभी पत्रकार सड़क पर उतर जाएंगे. 

आज उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की नई कार्यकारिणी के लिए जो चुनाव हो रहा है, उसमें पंद्रह पदों के लिए कुल 43 उम्मीदवार हैं. लगभग 475 पत्रकारों ने निर्धारित सौ रुपये सदस्यता शुल्क देकर मतदान के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया हैं. ये चुनाव एक साल पहले ही हो जाने चाहिए थे. मगर पदाधिकारी हीलाहवाली कर रहे थे. इसलिए 14 अगस्त को जनरल बाडी ने चुनाव समिति गठित कर एक माह में चुनाव कराना का निर्देश दिया. मगर निवर्तमान पदाधिकारियों ने अपना अलग गुट बनाकर स्वयम को फिर से निर्वाचित घोषित कर दिया, जिससे पत्रकारों में भारी आक्रोश है. काफी रस्साकशी के बाद ये चुनाव हो रहे हैं. अत: देश भर के पत्रकारों, मीडिया से जुड़े लोगों में इस चुनाव की चर्चा है. पांच वरिष्ठ पत्रकारों की समिति पारदर्शी तरीके से इस चुनाव का संचालन कर रही है . समिति के सदस्य हैं सर्वश्री शिव शंकर गोस्वामी, विजय शंकर पंकज, किशोर निगम, संजय राजन एवं मनोज छाबड़ा.

उधर, हेमंत और कलहंस गुट ने कल जो चुनाव कराया, उसमें खुद ही को विजयी घोषित बताया, प्रेस रिलीज जारी कर. पढ़िए उनकी तरफ से कल जारी की गई प्रेस रिलीज….


राज्य मान्यता संवाददाता समिति का परिणाम घोषित : हेमंत अध्यक्ष, सिद्धार्थ सचिव चुने गए

लखनऊ, 30 अगस्त. उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में हेमंत तिवारी को अध्यक्ष और सिद्धार्थ कलहंस सचिव के पद पर दोबारा जीत हासिल हुई है. छायाकार इन्द्रेश रस्तोगी को नई कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष का पद हासिल हुआ है. एनेक्सी मीडिया सेंटर में आज संपन्न हुए मान्यता समिति के चुनाव में 435 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. अध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशियों प्रभात त्रिपाठी, शशि नाथ और हेमंत तिवारी ने अपना भाग्य आजमाया. हेमंत तिवारी सबसे ज्यादा 335 वोट पाकर निर्वाचित घोषित किये गए. शशिनाथ को 40 और प्रभात त्रिपाठी को मात्र 31 वोट पर ही संतोष करना पड़ा. उपाध्यक्ष पद के लिए 5 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया. 257 वोट पाकर अरुण त्रिपाठी और 184 वोट पाकर मोहम्मद ताहिर निर्वाचित घोषित किये गए. सचिव पद पर 223 वोट हासिल कर सिद्धार्थ कलहंस निर्वाचित हुए. कोषाध्यक्ष के एक पद के लिए 183 वोट पाकर इन्द्रेश रस्तोगी निर्वाचित हुए. इस पद के लिए चुनाव लडे संजय चतुर्वेदी 122 पाकर उपविजेता रहे. तीसरे नंबर पर आये अतुल शर्मा को 101 वोट पर संतोष करना पड़ा. संयुक्त सचिव के पद पर 221 वोट हासिल कर श्रीधर अग्निहोत्री और 145 वोट हासिल कर रूपेश सोनकर विजयी रहे. कार्यकारिणी सदस्य के 11 पदों के लिए 20 प्रत्याशी मैदान में थे. इनमें एकमात्र महिला उम्मीदवार तमन्ना फरीदी ने सबसे ज्यादा 278 वोट हासिल किये. अन्य कार्यकारिणी सदस्यों में टीबी सिंह (259), दिलीप सिन्हा (227), नवेद शिकोह (215), भारत सिंह (210), अनुभव शुक्ल (202), जितेन्द्र कुमार (196), सत्य प्रकाश त्रिपाठी (182), अब्दुल अज़ीज़ सिद्दीकी (130), अखिलेश कुमार सिंह (128) और शबीहुल हसन (124) निर्वाचित घोषित किये गए.


लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com

इसी प्रकरण पर लखनऊ के एक पत्रकार की लिखी रिपोर्ट पढ़ें…

उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के चुनावी महाभारत में जीत गया अहंकार, खंडित हो गयी पत्रकार एकता

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हेमंत और कलहंस ने मुझे तबाह-बर्बाद करने का संकल्‍प लिया… प्रभात त्रिपाठी भी मुझसे निपटेंगे…

दो गुटों में बंटे लखनऊ के पत्रकारों का एक चुनाव आज, दूसरा कल

Kumar Sauvir : पत्रकार समिति चुनाव में दलाल और प्रकाशक…. पत्रकार कहां हैं… गजब दौर है पत्रकारिता का, शर्म उन्‍हें बिलकुल नहीं आती… दोस्तों। सभी हमारे मित्र हैं और सभी लोग पत्रकार समिति की कार्यकारिणी पर कब्ज़ा करने की लालसा पाले हैं। गुड। वेरी गुड। इन सभी को जीत चाहिए। होनी भी चाहिए। गुड। वेरी गुड। लेकिन क्या किसी ने यह सोचा कि आपको और हम मित्रों को क्या चाहिये, जो मतदाता हैं। जिनके वोट से इन नेताओं की गिरी पीसने के सपने बुने जा रहे हैं। देखिये। इस सवाल का जवाब खुद में खोजिए कि हमारा नेता कौन होगा। कोई पक्का दलाल, झूठा, चाटुकार, दहशतगर्द, कोई मुनाफाखोर प्रकाशक, धंधेबाज, रैकेटियर, गिरोह की तरह कई कई अखबारों का धंधा करने वाला, विज्ञापन की खुली दलाली करने वाला या या या या फिर कोई, वाकई, पत्रकार। जिसके दिल में पत्रकारीय मूल्यों का जज़्बा हो, जूझने का दम हो, पत्रकार हितों के प्रति निष्ठां हो और सबसे बड़ी बात कि आप आदमी के प्रति समर्पण भी हो।

हमारे सामने हैं कई नेता जी येन-केन-प्रकारेण समिति पर कब्ज़ा करना चाहते हैं। सबसे बड़ा नाम है हेमंत तिवारी। रोज़ शराब में धुत्त, जुआ खेलना और हर हफ्ते सड़क पर मार खाना उनका शगल है। दलाली की हर सीमा पार कर चुके हैं हेमंत। पुलिस अफसरों के मुंहलगे हेमंत को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक दर्जन बार डांट चुके हैं। तीन साल से समिति पर कब्जाए हैं और इसी चक्कर में समिति का भी दो फाड़ कर दिया। पत्रकारों के लिए केवल हवा, काम कुछ नहीं।पत्रकारिता में उनका क्या योगदान है यह आप खुद पूछ लीजिये। हाँ पत्रकार जगेंद्र सिंह के आत्महत्या मामले में उन्होंने खुली दलाली की। ठीक उसी तरह जैसे गोमतीनगर के एक रेस्टोरेंट के बवाल पर तीन लाख रुपये उगाहे गए थे। यह कर्म है पत्रकार का। आप सरेआम गुंडागर्दी करेंगे और उसका दाग बर्दाश्‍त करेंगी पूरी पत्रकार बिरादरी। नहीं जनाब, अब यह नहीं होगा।

उनके चेले सिद्धार्थ कलहंस उनके पिछलग्गू। पूरा प्रेस क्लब पर जबरिया कब्ज़ा है कलहस का। इन दोनों का पत्रकारिता में क्‍या योगदान है, जरा खुद से पूछिये। जनवाद, वामपंथ और धर्मनिरपेक्षता का झंडा उठाने वाले कलहंस का योगदान सिर्फ है कि वे जितना भी हो सकते हैं, इन नारों को कुचल सकते हैं। वर्ना पूछिए कि मान्यताप्राप्त पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता क्यों नहीं दे रहे हैं कलहंस। क्‍यों प्रेसक्‍लब को बिरयानी और शराब की भट्ठी में तब्‍दील कर दिया गया है। क्‍यों वह पत्रकार कम, ठेकेदार और दलाल ज्‍यादा आते हैं। एक साल पहले सुरेश बहादुर सिंह पर हुआ हमला क्‍यों हुआ था, इसका खुलासा करने का जिम्‍मा किस पर था। खैर, अब बताइये कि आप किस को वोट करेंगे।

अब ताजा खबर यह है कि हेमन्‍त तिवारी और कलहंस ने मुझे तबाह-बर्बाद कर डालने का संकल्‍प ले लिया है। बोलेंगे कि मीडिया सेंटर और प्रेस रूम मे पीटे जाएंगे कुमार सौवीर। न जाने किस को मिलेगी इसकी सुपारी। कुछ भी हो , मेरे लिए यह हर्ष की बात है। जो दलाल हैं, वे दलाली करते रहें और जो पत्रकार हैं वे पत्रकारिता करते हुए सरेआम पिट जाएं, उससे ज्‍यादा गर्व की बात मेरे लिए और क्‍या हो सकती है। और आगे बढिए। अध्यक्ष प्रभात कुमार त्रिपाठी समाजवाद का उदय, समीर त्रिपाठी लखनऊ सत्ता, सतीश प्रधान नार्थ इंडिया स्टेट्समैन, सरोज चंद्रा खरी कसौटी। प्रभात त्रिपाठी ने तो अभी मुझे वाट्सपर धमकी दे डाली कि मैं किसके हाथों में खेल रहा हूं और मुझसे वे निपटेंगे भले ही अगला जन्‍म लेना पड़े।

खैर, अगली लिस्‍ट में उपाध्यक्ष संजय शर्मा 4 pm वीकेंड टाइम्स, जेड ए आज़मी स्पष्ट वकता, अध्यक्ष पद हेतु सरोज चंद्रा खरी कसौटी से। सचिव नीरज श्रीवास्तव नवसत्ता, राजेश शुक्ला संचार प्रकाश, संयुक्त सचिव अजय श्रीवास्तव रोज़ की खबर, अब्दुल वहीद वहीद भारत टाइम्स। सदस्य मोहम्मद क़तील शेख और केके विश्नोई खरी कसौटी। एक समाचार पत्र ही नही कई कई एडिशन छपते है और भारी सर्कुलेशन दिखाकर विज्ञापन का काम करने वाले प्रत्याशी पत्रकारों के संघठनों का नेतृत्व करेंगे या विज्ञापन मांगने मंगताई करेंगे। हैरत की बात यह है की लगभग सारे प्रत्याशी समाचार पत्र के अलावा अनेक व्यवसायों में भी लिप्त है। किसी का पेट्रोल पंप तो किसी का स्कूल, किसी की प्रिंटिंग प्रेस, तो किसी का कोई और व्यवसाय। अब तो बेहतर यह। होगा कि पत्रकार मतदाता ही तय करें कि ये उचित है कि धनबली लोगों को पत्रकारों के संवेदनशील संग़ठन का नेतृत्व दिया जाये? करीब करीब सभी प्रत्याशी सरकारी बंगलो पर भी कब्ज़ा जमाये है। लेखन की तमीज ज्यादार लोगों में हरगिज़ नहीं है। नैतिकता की बात करने वाले अनैतिक आचरण कर रहे है और चुनाव में नेतृत्व चाहते है पत्रकार के नाम पर।

लखनऊ के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.


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हेमंत तिवारी के आंसुओं पर मत जाना, चाहें दूसरे किसी को भी जिताना

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29 के चुनाव में हेमंत का अध्यक्ष और कलहंस का सचिव बनना फिक्स है!

लखनऊ के पत्रकार हिसाम सिद्दीकी ने एक पत्र के जरिए सभी को सूचित कर दिया है कि 29 अगस्त का चुनाव फिक्स है. इस चुनाव में हेमंत तिवारी का अध्यक्ष और सिद्धार्थ कलहंस का सचिव चुना जाना तय है. बाकी सब मतदान चुनाव वगैरह औपचारिकता है.

हिसाम ने यह भी कहा है कि हेमंत तिवारी खुद को फिर अध्यक्ष बनाए जाने के अलावा अन्य किसी शर्त पर पत्रकार एकता के पक्ष में नहीं हैं. पूरा पत्र उपर दिया गया है. पढ़ें और समझें कि आखिर किस स्तर पर कैसी कैसी साजिशें हो रही हैं.

हिसाम ने इसके पहले जो एक ओपन लेटर लिखा है, उसे पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें:

हिसाम सिद्दीकी का खुला पत्र : समिति पर हर हाल में कब्जा जमाए रखने की चाहत क्यों है?

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यूपी में मान्यता में खेल : अधूरी जानकारी मत दीजिए, ये है पूर्ण लिस्ट

उत्तर प्रदेश में मान्यता में खेल को लेकर जो खुलासा किया गया है, वह पूर्ण सच नहीं है. अधूरी जानकारी है. सूची में किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन अधूरी जानकारी घातक होती है. मैं भी लखनऊ का एक पत्रकार हूँ. मुझे भी इस बात की टीस है कि आखिर सही और ईमानदार पत्रकारों की पूछ क्यों नहीं हो रही है. आखिर क्या वजह है लखनऊ में दलाली और भोकाल के सहारे ही क्यों पत्रकारिता की जा रही है. इसी सदर्भ में मैं लिख रहा हूँ कि आखिर अधूरी सूची क्यों जारी की गयी है. यहाँ मैं साफ़ कर दूँ की सच कड़वा होता है. बहुतों को बुरा लगेगा, लेकिन ये ज़रूरी है. यह इसलिए भी ज़रूरी कि कहीं चंद नामों को जारी करने के पीछे कोई साजिश तो नहीं है.

१- श्रेय शुक्ल- एपीएन न्यूज़ चैनल के बाद लाइव इंडिया गए. लेकिन वहां से भी बाहर। फिलहाल कहीं नहीं हैं. 
२- फरमान अब्बास मंजुल- एपीएन न्यूज़ चैनल के बाद लाइव इंडिया गए. लेकिन वहां से भी बाहर। फिलहाल कहीं नहीं हैं.
३ – वासिंद्र मिश्रा – दिल्ली तबादला
४- अशुितोष श्रीवास्तव – a2z न्यूज़ चैनल – अस्तित्व में नहीं
५-  अलोक पाण्डेय – ज़ी न्यूज़ – हट चुके हैं.
६- अश्वनी मिश्रा- के न्यूज़- हट चुके हैं
७- अभिलाष भट्ट – खोज इंडिया –  अस्तित्व में नहीं
८- आशीष कुमार सिंह – खोज इंडिया –  अस्तित्व में नहीं
९- प्रदीप कुमार गौड़  – खोज इंडिया –  अस्तित्व में नहीं
१०- धीरेन्द्र बहादुर सिंह – खोज इंडिया –  अस्तित्व में नहीं
११- योगेश मिश्रा- न्यूज़ एक्सप्रेस- चैनल बंद
१२- अनुराग शुक्ल- न्यूज़ एक्सप्रेस- चैनल बंद
१३- आलोक श्रीवास्तव- न्यूज़ एक्सप्रेस- चैनल बंद
१४-महीप कुमार सिंह- न्यूज़ एक्सप्रेस- चैनल बंद
१५- आकाश शेखर वर्मा- टोटल टीवी- उत्तर प्रदेश में नहीं दिख रहा है.
१६- मनोज मिश्रा- टोटल टीवी- उत्तर प्रदेश में नहीं दिख रहा है.
१७-जीतेन्द्र कुमार दुबे-टीवी100-उत्तर प्रदेश में नहीं दिख रहा है.
१८- संजय कुमार सिंह- महुआ- चैनल बंद
१९-  रवि श्रीवास्तव- महुआ- चैनल बंद
२०-प्रकाश शर्मा- रफ़्तार टाइम्स न्यूज़- चैनल बंद 
२१- पृथ्वी राज अरोड़ा- रफ़्तार टाइम्स न्यूज़- चैनल बंद
२२- राघवेन्द्र सिंह- लाइव इंडिया- चैनल बंद
२३- मिथिलेश- लाइव इंडिया- चैनल बंद
२४- गिरीश चन्द्र- लाइव इंडिया- चैनल बंद
२५- मनोज द्धिवेदी- श्री न्यूज़ं- चैनल बंद
२६- अल्विना काज़िम- श्री न्यूज़- चैनल बंद
२७- प्रशांत द्धिवेदी- श्री न्यूज़- चैनल बंद
२८- पंकज वर्मा- श्री न्यूज़- चैनल बंद
२९- गोविन्द पंत राजू- श्री न्यूज़- चैनल बंद
३०- विशाल सिंह रघुवंशी- श्री न्यूज़- चैनल बंद
३१- पंकज निगम– श्री न्यूज़- चैनल बंद
३४-आशीष दिक्षित- चर्दिकला टाइम टीवी- चैनल दिख नहीं रहा
३५- सर्वेन्द्र सिंह– चर्दिकला टाइम टीवी- चैनल दिख नहीं रहा
३६- विजय कांत दिक्षित- आइबीसी२४- चैनल दिख नहीं रहा
३७ -रजत किशोर मिश्रा- सुदर्शन टीवी- चैनल दिख नहीं रहा
३८ –  सत्य नारायण दुबे- सुदर्शन टीवी- चैनल दिख नहीं रहा

प्रेषक
rajeev kumar
rajeevkumarrajeev007@gmail.com


मूल खबर:

वाह रे यूपी का सूचना विभाग : जो चैनल वर्षों से बंद हैं उनके भी लोगों को दे रखी है राज्य स्तरीय मान्यता… देखें लिस्ट

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हिसाम सिद्दीकी का खुला पत्र : समिति पर हर हाल में कब्जा जमाए रखने की चाहत क्यों है?

उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन के चुनाव को लेकर सिरफुटव्वल जारी है. हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसे ब्रोकर्स से आम पत्रकारों में जबरदस्त नाराजगी है. लेकिन हेमंत व कलहंस हर हाल में इस संगठन पर फिर काबिज होना चाहते हैं क्योंकि इस संगठन के नेता के बतौर उन्हें सत्ता से गलबहियां-हथबहियां करने के मौके ढेर सारे मिलते रहते हैं. हेमंत और कलहंस की लाख कोशिशों के बावजूद चुनाव की गाड़ी डिरेल नहीं हुई है.

इस बीच हेमंत और कलहंस की तरफ से घोषित चुनाव समिति के मुख्य चुनाव अधिकारी वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे हेमंत व कलहंस के मंसूबो को झटका लगा है. इस बारे में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर अपने एफबी वॉल पर लिखते हैं: ”यूपी मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति पर तीन साल से अवैध कब्ज़ा किये हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस की साजिशों को आज तब जोरदार ठोकर मिली जब खुद उनके ही गुट में मुख्य चुनाव अधिकारी बनाये गए एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपने पद को त्याग दिया। गौरतलब है कि सिर्फ साजिशों के चलते ही हेमंत-कलहंस की जोड़ी ने पत्रकारीय मूल्यों की हत्या करते हुए समिति और चुनाव को माखौल में तब्दील कर दिया था। लेकिन वीर बिक्रम बहादुर मिश्र ने इस गुट की कोशिशों से खुद को अलग कर लिया है।”

सबसे उपर वो पत्र है जो पत्रकार हिसाम सिद्दीकी ने सभी पत्रकारों के नाम लिखा है. पढ़िए और कोशिश करिए कि उत्तर प्रदेश के पत्रकारों का संगठन साफ सुथरे लोगों के हाथों में पहुंचे ताकि पत्रकारों के मर्डर, शोषण, दमन जैसे मसलों पर पत्रकार संगठनों का संघर्ष नेताओं मंत्रियों अफसरों को बैकफुट पर ला सकें और सरोकारी पत्रकारिका के राह को सुगम बनाए रख सकें.

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खुला पत्र लिखकर वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने खुद को यूपीएसएसीसी के मुख्य चुनाव अधिकारी पद से अलग किया

मेरे साथियों, राजनीति के क्षेत्र में न केवल हमारा प्रदेश उत्तर प्रदेश अगुआ है बल्कि पत्रकारिता जगत में भी यह अग्रणी रहा है। उत्तर प्रदेश ने देश को न केवल बड़़े-बड़े नेता दिए हैं बल्कि मूर्धन्य पत्रकार भी दिए हैं। पत्रकारिता की इस विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी  हम साथी पत्रकारों के ऊपर है। अब लगता है कि हम अपनी इन जिम्मेदारियों से कुछ भटक गए हैं। जब उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की ओर से मुझे मुख्य चुनाव अधिकारी नामित किया गया था तो मुझे विश्वास था कि मैं सभी पक्षों से बातचीत कर सर्वसम्मत  और एक साथ चुनाव करवा लूंगा। परंतु मेरी कई कोशिशों के बाद भी जो परिस्थितियां बनी हैं उससे मैं स्वयं को विफल होता देख रहा हूं।

मेरी पहल को कुछ वरिष्ठ साथियों ने स्वीकार करते हुए उत्साह पूर्वक समर्थन दिया था। परंतु कुछ साथियों की परस्पर टकराहट, उनमें पैदा हुई खटास से उपजे आक्रोश और उनके आरोप प्रत्यारोप सुनकर मैं बहुत व्यथित हूं। मेरी दृष्टि में कोई शरीर से अथवा आयु से बड़ा नहीं होता, बड़ा उसका बड़प्पन होता है। वरिष्ठ साथियों में क्षमाशीलता हो, कनिष्ठ साथियों में उनके प्रति सम्मान  की वृत्ति हो तभी कोई संगठन जीवित रह सकता है। मैं चाहता था कि भूत की बातों पर विराम दिया जाता और भविष्य को देखते हुए वर्तमान की चिंता की जाती तो मेरा प्रयास ज्यादा सार्थक साबित होता। परंतु आश्चर्य होता है कि मेरे कुछ साथियों के ऊपर भूत इतनी गहरी सवारी गांठ चुका है कि हम उससे पीछा रही नहीं छुड़ा पा रहे हैं। हम अगर बड़े हैं और सोच बड़ी नहीं है तो किस बात के लिए बड़े हैं। किसी की लाइनें हैं—‘‘रकवा हमारे गांव का मीलों हुआ तो क्या , रकवा हमारे दिल का दो इंच भी नहीं।’’

हमारा हृदय विशाल होना चाहिए। सभी साथी हमारे ही साथी हैं, हमारे कुटुक्वब के सदस्य हैं। कुटुक्वब के सदस्यों की सोच, उनकी जीवनशैली होती अलग-अलग जरूर है पर वे रहते एक ही कुटुंब में हैं। अपनों में अपना खोजने की प्रवृत्ति से ही कुटुंब में बिखराव होता है, इसी से समाज टूटता है। हमारी अपेक्षा थी कि इस वृत्ति  का परित्याग कर ‘हम सबके और सब हमारे’ की वृत्ति  प्रोत्साहित होगी। परंतु मुझे बड़ी पीड़ा है कि इस वृत्ति   को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। हमारा व्यन्न्तिगत अहम इसमें बाधक बन रहा है। किसी शायर की लाइनें हैं—- ‘‘आइने ने किसी सूरत को अपनाना नहीं सीखा, उसकी यही अकड़ उसे चकनाचूर करती है। ’’

किसने क्यों क्या किया, अबतक क्यों क्या नहीं हुआ, यह समय इसके विश्लेषण का नहीं है, बल्कि इस समय को अच्छे ढंग से सदुपयोग करने का है। हम जिस दोराहे पर खड़े हैं, हमारे निर्णय दूरगामी प्रभाव डालेंगे। हम एक से दो में बंटेंगे तो इसकी क्या गारंटी है कि आगे और टुकड़े नहीं होंगे। फिर हम अपने नए साथियों को क्या  संदेश देंगे? क्या   होगा इस पत्रकारिता के पवित्र पेशे का जिसके संरक्षण का दायित्व हम सबका ही है। हम प्रदेश की राजधानी की प्रतिष्ठिïत पत्रकार बिरादरी के सदस्य हैं। हमारे आचरण पर प्रदेश के जनमानस की नजर है। हमें अपनी मर्यादा पर ध्यान केन्द्रित करना होगा और इसकी गरिमा के संरक्षण के लिए हर तरह का प्रयास करना होगा। हमारे आपस के झगड़े चर्चा का विषय नहीं होने चाहिए थे। संभवत: बशीरबद्र का ही यह शेर है जिसकी कुछ लाइनें मैं पेश करता हूं– मैं अमन पसंद हूं मेरे शहर में दंगा रहने दो, मुझे धड़ों में मत बांटो मेरी छत पर तिरंगा रहने दो।

मैं बेचैन हूं। अपने जिन साथियों की पारस्परिक मुस्कान से मैं ऊर्जा ग्रहण करता रहा हूं, उनमें आपसी आक्रोश, परस्पर टकराहट देखकर मुझे बहुत पीड़ा हुई है। हम तो अपना समय बिता चुके। हमें चिंता अपनी युवा पीढ़ी की है जिनके हम स्वाभाविक रूप से मार्गदर्शक हैं। उनकी नजरें हमारे प्रयासों पर टिकी हुई हैं, वे बड़ी आतुरता से हमारी एकता की प्रतीक्षा कर रही हैं। हम अपने लिए नहीं, उनके भविष्य के लिए एकजुट हो जाएं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कोई बड़ा छोटा नहीं होता, सब बराबर होते हैं। कई बार बड़ों की अपेक्षा छोटे ज्यादा समझदार साबित होते हैं। हमारा भविष्य भी इसी में सुरक्षित है कि छोटे हमसे ज्यादा समझदार साबित हों। मैं सारी परिस्थितियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के मुख्य चुनाव अधिकारी की भूमिका से स्वयं को पृथक करता हूं। क्योंकि  मैं अपनों में अपना सोचने की वृत्ति नहीं रखता हूं। मेरे सब मेरे हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीमद रामचरितमानस में लिखा है— ‘‘उमा जे राम चरन रत विगत काम मद क्रोध। निज प्रभुमय देखहिं जगत केहिसन करहिं विरोध॥’’

सादर
दिनांक  
26 अगस्त, 2015                                                  
वीर विक्रम बहादुर मिश्र
3/8 कैसरबाग आफीसर्स कालोनी
लखनऊ।


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मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकारों, जाओ मूली उखाड़ो, पेट साफ हो जाएगा… हेमन्‍त-कलहंस को धरचुक्‍क दिया तो नया पांसा पड़ा… तू डाल-डाल, मैं पात-पात कहावत सच… हेमन्‍त-कलहंस धड़ाम… 

Kumar Sauvir : आयुर्वेद में मूली का अप्रतिम व्‍याख्‍यान है। मूली के जितने गुण आयुर्वेद, यूनानी और ऐलोपैथी सभी पैथियों ने पहचाने हैं, वह अनिर्वचनीय है। लेकिन दिक्‍कत यह है कि लखनऊ और आसपास के जिलों में खेतों की जगह अब मकान उग चुके हैं। अगर ऐसा न होता दोस्‍तों, तो मैं आज मैं अपने सभी मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकार भाइयों को ऐलानिया सुझाव देता कि:- दोस्‍तों। जाओ, जहां भी दिखे, मूली उखाड़ लो। पत्रकार नेताओं ने अपनी काली-करतूतों के चलते जो बदहजमी का माहौल किया है, उसे सिर्फ मूली ही निदान है।

यह सलाह उप्र के राज्‍य स्‍तरीय मान्‍यताप्राप्‍त समिति के सदस्‍यों के लिए बिलकुल मुफीद है। समिति को बिलकुल मजाक-माखौल बनाने पर आमादा समिति के कलमुंहे पत्रकार नेता। सिर्फ दलाली और नेताओं की चाटुकारिता पर आमादा इन पत्रकार नेताओं ने अब नया पैंतरा फेंका है, वह यह कि चुनाव अब 29 अगस्‍त को होगा। आपको बता दें कि पत्रकारों का गुस्‍सा हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसे नेताओं पर है, जो पिछले तीन साल से अवैध तरीके से समिति पर कब्‍जा किये हुए हैं। पत्रकारों ने नये चुनाव की गुजारिश की तो उसे हेमंत-कलहंस ने ठुकरा दिया, नतीजा पत्रकारों ने आम बैठक आहूत करके छह सितम्‍बर को चुनाव का ऐलान किया। यह फैसला हेमंत-कलहंस को हडबड़ा गया, तो उन्‍होंने चुनाव करने की तारीख पांच सितम्‍बर कर दिया।

हेमंत-कलहंस की इस करतूत पर जवाब देते हुए कल पत्रकारों ने तय किया कि यह मतदान की तारीख अब 30 अगस्‍त को होगी। इसके लिए इन लोगों ने अनेक कारण गिनाये, मसलन त्‍योहार वगैरह। लेकिन हकीकत यह थी कि यह लोग चाहते थे कि हेमंत-कलहंस की करतूत को जवाब दिया जा सके। लेकिन आज दोपहर अचानक हेमंत-कलहंस ने एक नया धामिन-दांव चलाया और खबर फैला दी कि चूंकि रक्षाबंधन समेत अनेक त्‍योहार सिर पर है, इसलिए अब नया चुनाव 29 अगस्‍त को ही होगा।

जाहिर है कि पत्रकारों की परस्‍पर यह लड़ाई अब चरम पर पहुंच गयी है। भले ही यह युद्ध हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसे पत्रकारों की दलाली और निकृष्‍टता के विरूद्ध विशुद्ध पत्रकारीय हितों को लेकर चल रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि हेमंत-कलहंस के इस दांव ने पत्रकारीय दायित्‍वों को कमजोर करने की कोशिश तो कर ही दी है। हकीकत यही है कि समिति को कब्‍जाने के खिलाफ पत्रकार नेताओं ने हेमंत-कलहंस की मनमानी के खिलाफ बिगुल बजा दिया था और जो खुद को शेर-ए-हिन्‍द बनते नहीं थकते थे, पत्रकारों ने उन्‍हें उनके ही पिंजरे में बंद कर दिया था, वह प्रयास फिलहाल कमजोर हो चुका है। हालांकि अब फैसला तो भविष्‍य के गर्भ में ही है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.

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‘लखनऊ के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के कारण पूरे देश में हमारे यूपी के पत्रकारों की भद्द पिट रही है’

मेरे प्रिय साथियों

प्रभात कुमार त्रिपाठी का अपने सभी 614 मान्यता प्राप्त भाई और बहनों को नमस्कार…

मैंने कल दिन भर लखनऊ एनेक्सी से लेकर अपने सभी साथियों के बीच एक प्रस्ताव रखा जो पत्रकार एकता के लिये अहम प्रस्ताव था जिसे भारी मतों से देर शाम साथियों ने स्वीकार भी किया। प्रस्ताव था कि मै इस बात को लेकर दुखी हूं कि मुट्ठी पर वरिष्ठ पत्रकारों के जिद्द के चलते 40 सालों से चली आ रही पत्रकार कमेटी का दो जगह अलग-अलग चुनाव कराया जा रहा है जो अनुचित है। कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के कारण पूरे देश में हमारे यूपी के पत्रकारों की भद्द पिट रही है। इसका लाभ नौकरशाह और राजनेता उठाने में लग गये हैं। चर्चाएं भी हो रही हैं।

कुछ समाचार पत्रों में चटकारे लेकर इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा मिर्च मसाला लगाकर की जा रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा एक प्रयास अभी तक है कि एक चुनाव हो और सभी 614 पत्रकार इस पर्व में एक साथ भाग ले। जिसका जनाधार हो वह फिर चुनाव लड़कर कमेटी का सदस्य, सचिव, उपाध्यक्ष संयुक्त सचिव व अध्यक्ष बन जाये। यह समिति सभी सम्मानित पत्रकार भाईयों के योगदान से चल रही है। इसमें कोई छोटा या कोई बड़ा नहीं है।  कुछ सीनियरों की इस बात की पहल करनी चाहिये कि अभी भी कमेटी नहीं बटें।

मैने हमेशा से यही प्रयास किया है कि सभी भाईयों को एक समान समझते हुये कमेटी के सीनियर सदस्य उनकी महत्वता को महत्व दे। लेकिन मैं पिछले 22 सालों से देख रहा हूं कि यूपी की पत्रकारित में सीनियर बनाम जूनियर की खाई बढती जा रही है। कुछ लोग लम्बी लकीर खींच कर छोटो को छोटा समझते है। और इस बात का फर्क डाल रहे है कि फलां पत्रकार चैनल का है फला फोटोग्राफर का है फला प्रिंट मीडिया से है। फला कथित पत्रकार है। इसी कारण आज यह स्थित आ गई है कि हम बुद्वजीवी वर्ग से होकर भी अपने आपको नीचे गिराते जा रहे है। और हम दोराहे पर आकर खड़े हो गये है। जो चिंता का विषय हम सभी 614 पत्रकारों के लिये है।

मैं कल एनेक्सी में मीडिया सेंटर में गया तो कुछ लोगों ने कहा आप फला कमेटी की तरफ से आये है अगर आपमें हिम्मत हो तो आप यहां पर्चा दखिल करो। मेरे कुछ साथियों में नावेद, भरत सिंह, अविनाथ शुक्ता, उमेश चन्द्र मिश्रा सहित कामरान और कई साथी इस बात के साक्षी हैं। मैंने कुछ लोगों द्वारा आरोपित होने के बाद सभी की भावना और पत्रकार एकता बनी रहे, उसके कारण दूसरी जगह भी अध्यक्ष के पद पर पर्चा भर दिया। मैं अपने साथियों को यह बताना चाहता हूं कि पर्चा भरने का यह मकसद था कि अभी भी दो कमेटी एक हो जाये और एक फोरम में आकर हमेशा की तरह चुनाव एकजुटता से कराये।

मुझे आप लोग भले पसंद न करते हों लेकिन मैं हमेशा आप सभी की बात को सच्चाई से रखता चला आया हूं। चुनाव जीतकर कोई मैं प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बन जाऊंगा। पत्रकार ही रहूंगा। आपके बीच रहूंगा उसी स्थित मे रहूंगा। मैं हमेशा सच का साथ देता आया हूं। अपनी बात को बेबाक रखता आया हूं। अब आप लोग पसंद करें या न करें। मैं पत्रकारिता के गिरते स्तर को सुधारना चाहता हूं। मैं अपने फोरम में अपने 614 साथियों के बीच अपनी बात रखना चाहता हूं। मेरे लिये कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं है। जिसका सम्मान करना है वह दिल में है। मैं दिल से बात करना और आपका सम्मान करना चाहता हूं। जो दिल में है वहीं दिमाक में है। मैं दोहरे मापदंड को अपना कर अपना उल्लू सीधा नहीं करना चाहता। एक मौका चाहता हूं कि आप लोगों की सेवा मन से कर सकूं। मैं अगर एक चुनाव और एकजुटता चाहता हूं तो इसमें सभी की भलाई है।

कुछ सीनियर पत्रकार अगर इस कमेटी को अपनी जिद्द से हाईजैक करके उन 605 लोगों को हक को मारना चाहते हैं तो मैं यह नहीं होने दूंगा। मै अपनी कुर्बानी देकर अगर सब एक हो जाये तो मैं अपना पर्चा जो मैंने अपने दोनों जगह से भरा है, वापस लेकर पत्रकार एकजुटता के लिये चुनाव मैदान से स्वेच्छा से हट जाउंगा। मेरे लिये चुनाव होना ही काफी है चुनाव लड़ना नहीं। सिर्फ मेरे लिये मेरे साथियों का सम्मान बड़ा है। आज जो चर्चाएं यूपी की पत्रकारिता को लेकर हो रही है, उससे मैं बहुत चिंतित हूं। मुझे कोई चुनाव जीतकर सूचना आयुक्त नहीं बनना है न ही अपनी पहचान में कोई इजाफा करना है।

प्रभात को आप सभी भाईयों का स्नेह मिलता रहे वही काफी है। मैं यह अपील इसलिये सभी भाईयों से कर रहा हूं कि अब आप लोग ही इस बात का फैसला करें कि कौन गलत है कौन सही है। क्यों कुछ सीनियर अपनी एक दूसरे से दुश्मनी इस फोरम में निकाल रहे हैं। दुश्मनी निकालनी है तो बाहर निकालें। उन सभी नये साथियों के हक पर डाका क्यों डाल रहे हैं जो अभी इस फोरम में नये
साथी के रूप मे जुड़े हैं। और हम सब के बीच में अपनी योग्यता और संघर्ष से आये हैं या फिर कई सालों से आपके बीच हैं। क्या आप लोगों की हठधर्मिता का शिकार वह अच्छे पत्रकार भी हों जो हमेशा से पत्रकारिता के लिये कुछ कर गुजरने की इच्छा रखते हैं।

चैनल से लेकर फोटोग्राफर हो या प्रिंट मीडिया के भाई बहन हों, सभी सम्मान के पात्र हैं, न कि असम्मान के। सभी के बारे में कुछ लोगों के कारण रोज कुछ कहा जा रहा है, लिखा जा रहा है जो पूरी तरह से निन्दनीय है। इसकी निंदा अपने फोरम में भाईयों के बीच होनी चाहिये और वह चेहरा सामने आना चाहिये जिसने इस पूरी स्थित को पैदा किया है। मैं ईश्वर और अल्ला से प्रार्थना करता हूं और अपने सीनियर भाईयों से निवेदन करता हूं कि अभी भी देर शाम तक या कल तक कुछ सीनियरों को सद्बुद्धि आ जाये कि वह इस कमेटी को टूटने से बचा लें और सभी को बैठकार एक चुनाव करा लें जिससे बाहरी तत्व इस बात का फायदा न उठा पायें कि यूपी की पत्रकारित बंटी हुई है।

आप सभी का अपना भाई
प्रभात कुमार त्रिपाठी
प्रत्याशी अध्यक्ष पद
राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता
संयोजक
पत्रकार एकता मंच
मो0 9450410050

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संवाददाता समिति चुनाव अब 30 अगस्त को, देखें प्रत्याशियों की लिस्ट

उ प्र मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव अब रविवार 30 अगस्त को होगा. चुनाव समिति के सदस्य किशोर निगम ने बताया कि आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए तारीख बदली गयी है. श्री निगम के अनुसार उम्मीदवारों ने समिति का ध्यान आकृष्ट किया है कि जन्माष्टमी का पर्व पॉंच सितंबर को है. उस दिन लोग उपवास रखेंगे और देर रात तक जागेंगे. इसलिए दूसरे दिन 6 सितंबर को मतदान कराना मुश्किल होगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए समिति ने अब 6 सितंबर के बजाय 30 तीस अगस्त को मतदान कराने का फैसला किया है. मतदान सुबह दस से शाम पॉंच बजे तक होगा. सोमवार को नाम वापसी के बाद पंद्रह पदों के लिए 39 उम्मीदवार बचे हैं.

Uttar Pradesh State Accredited Correspondents Committee, Election 2015

Correspondents Committee polling on Sunday 30th August

The Uttar Pradesh State Accredited Correspondents Committee (UPSAC )  Election Committee  has rescheduled polling date in view of the Shri Krishna Janmashtmi festival . A press release issued by the committee says now polling will be held on Sunday 30th August instead of 6th September.  A senior member of the election committee Kishor Nigam said several  candidates have pointed out that the most auspicious Shrikrishna Janmashtmi festival falls on 5th September . People observe fast .Festival continues till late night. So it will be difficult to conduct polling on the following day 6th September. Accordingly polling will be held on 30 th August 2015 from 10 am to 5 pm. Counting will be held soon after. A total 39 candidates are contesting for 15 posts.

Press release

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चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही हेमन्‍त-कलहंस की उछलकूद शुरू

Kumar Sauvir :  पहले दो महीने की मोहलत ली थी, अब बोले पांच को कराऊंगा चुनाव… मजाक बना दिया हेमन्‍त और कलहंस की जुगुलबंदी ने पत्रकरिता को… अभी दस दिन पहले ही हेमन्‍त तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस की साजिशों से ऊबे पत्रकारोें ने अवैध कार्यकारिणी की जगह नयी कमेटी के चुनाव के लिए चुनाव-कार्यक्रम का ऐलान कर दिया था। इस कार्यक्रम के तहत पिछले22 तारीख तक 60 से ज्‍यादा लोगों ने अपना नामांकन दर्ज कराया था जो अब तक का एक रिकार्ड है। इसके तहत सितम्‍बर की छह तारीख को नयी कमेटी के लिए मतदान शुरू होगा और उसी दिन चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी।

लेकिन जैसे ही हेमन्‍त तिवारी और कलहंस ने पाया कि गोटी उनके खिलाफ पहुंच चुकी हैं, आज देर शाम आनन-फानन इस जुगल-जोड़ी ने अपनी ओर से भी चुनाव की नयी तारीख का ऐलान कर दिया है। चुनाव के कार्यक्रम का ऐलान हो जाने से हकबकाये हेमंत और कलहंस की टोली ने अब नयी चाल फेंकी है कि अब पाचं सितम्‍बर को ही मतदान करा दिया जाए। कुछ भी हो, हेमंत और कलहंस की इन करतूतों के चलते उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति हास्‍य का विषय बन चुकी है। हेमंत-कलहंस टोली के अनुसार अब मान्यता प्राप्त संवाददाता सदस्यों की अंतिम कट आफ लिस्ट की तिथि 30 अगस्त होगी. अत: जिन सदस्यों ने सदस्यता शुल्क रू. 10/- न जमा किया हो वह 01 सितम्बर 2015 तक अपना शुल्क निम्न चुनाव अधिकारियों के पास जमा करा होगा। नामांकन 31 तक होगा और जांच पहली को। नामांकन दो को और मतदान छह को कराया जाएगा।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.

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हेमंत तिवारी की इतनी बुरी हालत होगी, यह खुद हेमंत ने नहीं सोचा था

लखनऊ : हेमंत तिवारी की इतनी बुरी हालत होगी, यह खुद हेमंत ने नहीं सोचा था. लखनऊ के राज्य मान्यता समिति के चुनाव न करने के लिए परसों हेमंत ने जो साजिश की थी, कल उसकी धज्जियाँ उड़ गई. कल साठ लोगों ने अपना नामांकन कराया जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. 490 लोगों ने अपना नामांकन शुल्क 100 रुपया जमा कर दिया है. कल की घटना से हेमंत और उसके गुर्गों की बोलती बंद हो गई है. चुनाव 6 सितम्बर को होना है. पत्रकारों में हेमंत के लुच्चेपन को लेकर भारी गुस्सा है.

राज्य मान्यता संवाददाता समिति के चुनाव पहले प्रत्येक वर्ष होते थे. फिर कार्यकाल दो वर्ष के लिए कर दिया गया. मगर हेमंत ने सोच लिया कि चुनाव कराने ही नहीं हैं. तीन साल होने पर भी हेमंत ने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. यही नहीं, पूरे तीन सालों में सिर्फ एक बार ही कमेटी की मीटिंग बुलाई. जब तीन साल पूरे होने पर भी हेमंत चुनाव कराने को तैयार नहीं हुए तो पत्रकारों में गुस्सा बढ़ गया. इन तीन सालों में हेमंत के ऐसे-ऐसे कारनामे सामने आ चुके थे कि पूरी पत्रकार बिरादरी शर्मिंदा थी. हेमंत तिवारी अकेले ऐसे पत्रकार होंगे जिन्हे मुख्यमंत्री ने एक दर्जन बार से ज्यादा सबके सामने बेइज्जत किया. दर्जनों ऐसी घटनाएं हैं जिसके बारे में लखनऊ का हर पत्रकार जानता है.

इन हरकतों के चलते जब हेमंत चुनाव कराने को राजी नहीं हुए तो पत्रकारों ने एनेक्सी में बैठक बुलाई और कहा कि अगर हेमंत ने एक हफ्ते में चुनाव नहीं कराये तो बैठक बुला कर चुनाव करा दिए जायेंगे. मगर हेमंत ने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकारों ने बैठक बुलाई और चुनाव कराने की घोषणा कर दी. इससे हेमंत तिवारी खेमे में खलबली मच गई. कल हेमंत तिवारी ने सब पत्रकारों की बैठक बुलाई और कहा यह बैठक चुनाव कराने के लिए बुलाई जा रही है. पत्रकारों को लगा कि शायद हेमंत भी अब चुनाव कराने को राजी हो गए. दूसरे खेमे ने भी कहा कि विवाद ठीक नहीं. जो तारीख तय हो, वो मान ली जाएगी और 6 सितम्बर को होने वाले चुनाव टाल दिए जायेंगे. मगर हेमंत ने यहाँ भी कलाकारी दिखाई और चुनाव कराने के लिए एक कमेटी बना दी और कहा यह कमेटी तय करेगी कि चुनाव कब हो. साथ ही कहा कि दो महीने बाद तारीख तय हो जाएगी. मजे की बात यह रही कि विधान सभा के प्रेस रूम जहाँ 70  से ज्यादा पत्रकार इकट्ठे नहीं हो सकते वहां हेमंत ने कहा कि 300 से ज्यादा पत्रकारों ने उनकी बात का समर्थन किया जबकि इस बैठक में बड़ी संख्या में जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार थे जो वोट नहीं डाल सकते थे. इसके अलावा जो समिति बनाई गई उसके कई पत्रकार बैठक में थे ही नहीं.

इन हरकतों के बाद साफ़ हो गया था कि हेमंत किसी भी कीमत पर चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उनकी दुकान चलती रहे. पत्रकारों ने कहा कि अब चुनाव होने ही चाहिए. हेमंत तिवारी खेमे ने पहले ही कह दिया कि अधिकतर पत्रकार तो उनके साथ हैं, लिहाजा इस चुनाव में 50 लोग भी भाग नहीं लेंगे. मगर कल चुनाव के लिए जिस तरह पत्रकारों का हजूम उमड़ा उसने सबको भौचक्का कर दिया. सभी पदों के लिए 60 नामांकन हुए जो अपने आप में रिकॉर्ड है. लगभग 600 पत्रकारों में से 490 पत्रकारों ने 100 रुपया चुनाव फीस जमा करके सन्देश दे दिया कि सभी चुनाव चाहते हैं. कल की बैठक से हेमंत के फर्जीवाड़े और झूठ बोलने की भी पोल खुल गई.

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. 


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यूपी राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की गरिमा का चीरहरण हो रहा है

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यूपी राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की गरिमा का चीरहरण हो रहा है

मुँह में राम बगल में छुरी… इस कहावत पर उत्तरप्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव बेहद खरा उतरता है। पहली बार ‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ और यूपी के सूचना विभाग के सौजन्य से राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त पत्रकार बनने का गौरव प्राप्त हुआ। अब इस जमात का नेतृत्व करने वाली मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव का बिगुल बज़ उठा है। चुनाव की इस म्यान में दो तलवारें हैं। कोई कहता है चुनाव खर्च 100 रुपइया जमा कराओ। आज समिति के चुने हुए नुमाइंदे बैठक कर दस रुपइया जमा करने का फरमान सुनाते हैं। हमारे जैसे पहली बार जमात के सदस्य बने बेचारे सिर्फ चुनावी जंग देख रहे हैं। समझ नहीं आ रहा इधर जाऊं या उधर जाऊं।

एक बात और नहीं समझ आ रही कि आखिर शीर्ष पत्रकार बिरादरी का नेतृत्व करने पर ऐसा कौन सा हड़प्पा की खुदाई में निकला खज़ाना मिला जा रहा है जो इतना सरफुटौअल हो रहा है। मेरी व्यक्तिगत राय है कि शीर्ष पत्रकार बिरादरी का जो रहा सहा सम्मान है वो भी इस चुनावी जंग में शहीद होने को बिलकुल तत्पर है। अरे भई चुनाव कितनी बार होंगे और कौन सा चुनाव अधिकारी मान्य है कोई बताएगा। खैर असल गलती सूचना विभाग की है। गंभीर अपराधों में फसे लोगों, अंडे का ठेला लगाने वालों को, कंप्यूटर ऑपरेटरों, मार्केटिंग मैनेजरों, मंत्रियों के पीआरओ, सूचना विभाग के कर्मचारियों की पत्नियों और रिश्तेदारों को, अफसरों के रिश्तेदारों सरीखे लोगों को कलम का सिपाही अर्थात पत्रकार होने का राज्य मुख्यालय पर दर्ज़ा दिया जायेगा तो ऐसी गद्दम पटखनी तो होना तय है।

खुद संवाददाता समिति के पदाधिकारी भी ऐसे कथित पत्रकारों का विरोध नहीं करते। जब इस सरकार में मैंने विधानसभा सत्र की कवरेज के लिए जाना शुरू किया तब देखा कि 80 फीसदी पत्रकारों के हाथों में न कागज़ और न डायरी होती है और न ही कलम। शायद उनका दिमाग ही कंप्यूटर है तभी सब कुछ उसमे रिकॉर्ड हो जाता है। विधानसभा गैलरी में मुख्यमंत्री से लेकर मत्रियों तक को चेहरा दिखाने की होड़ सी मच जाती है। अब होड़ चुनाव के सहारे पत्रकार बिरादरी में ताकत दिखाने की हो रही है। देखिये ये पब्लिक है सब जानती है। आप सब शीर्ष पत्रकारों के सम्मानित संघ का नेतृत्व करते हैं। मेरे जैसे छोटे सदस्य की राय आपको भले ‘छोटा मुँह बड़ी बात’ लगे पर ये तमाशा बंद कीजिये और समिति के सम्मान का चीरहरण होने से रोकिये। वर्तमान माहौल में, जहाँ कभी पत्रकार जलाकर मारे जा रहे हैं तो कहीं अखबार के दफ्तरों पर हमले हो रहे हैं, ये हमे शोभा नहीं देता।

खैर मैं तो सिर्फ इतना ही कर सकता हूँ कि चुनाव के नाम पर हो रही जंग का हिस्सा न बनूं और मेरे जैसे पहली बार राज्य मुख्यालय पर पत्रकार का दर्जा प्राप्त मित्रों से भी अनुरोध करूँगा- “सुनो सबकी, करो अपने मन की”।

मनीष श्रीवास्तव

ब्यूरो चीफ

निष्पक्ष प्रतिदिन, लखनऊ

manish.lbs.me@gmail.com


कुल 60 पर्चे हुए दाखिल

लखनऊः पत्रकारों ने मान्यता प्राप्त संवाददाता समित के पदों के लिए भरे पर्चे. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समित के लिए दाखिल हुए पर्चे कुल 60. अध्यक्ष पद के लिए आठ लोगों ने भरा पर्चा. प्रांशु, सरोज चंद्र, मनमोहन, नरेंद्र श्रीवास्तव और प्रभात त्रिपाठी और अन्य ने अध्यक्ष पद के लिए दाखिल किए पर्चे. उपाध्यक्ष पद के लिए 12 लोगों ने भरे पर्चे. सचिव पद के लिए चार लोगों ने दाखिए किए पर्चे. वरिष्ठ पत्रकार नीरज श्रीवास्तव ने सचिव पद के लिए भरा पर्चा. संयुक्त सचिव के लिए सात उम्मीदवार मैदान में. कोषाध्यक्ष के लिए पांच उम्मीदवारों ने भरे पर्चे. सदस्य बनने के लिए 24 लोगों ने किया नामांकन.

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वाह रे यूपी का सूचना विभाग : जो चैनल वर्षों से बंद हैं उनके भी लोगों को दे रखी है राज्य स्तरीय मान्यता… देखें लिस्ट

इसे कहते सैया भै कोतवाल तो डर काहें का। उत्तर प्रदेश का सूचना विभाग असल पत्रकारों को मान्यता देने में आनाकानी करता है लेकन जो चैनल बंद हो गए हैं और उनके पत्रकारों का उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता से कोई वास्ता भी नहीं है, उसे भी उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग से राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त है। काम न काज़ ढाई मन अनाज वाली कहावत है।

मान्यता मिलने से वीआईपी गेस्ट हाऊस में रूम बुक हो जाना, मुफ्त में इलाज़, मुफ्त में प्रदेश की सैर करना, विधानसभा और एनेक्सी में बेधड़क प्रवेश, दिल्ली के यूपी भवन में कमरा बुक करना… यही सब इन बेफज़ूल मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कारनामे रह गए हैं। एक नज़र ऐसे पत्रकारों और चैनलों पर जो बंद हो चुके हैं या उत्तर प्रदेश में अर्से से नहीं दिख रहे या ऐसे पत्रकारो का उस चैनल से कोई लेना देना नहीं जिससे उनकी मान्यता है… देखे लिस्ट…

काशी प्रसाद यादव- S1 न्यूज़ चैनल (अस्तित्व में नहीं)
प्रदीप विश्वकर्मा- MH-1 न्यूज़ चैनल (अस्तित्व में नहीं)
नवलकांत सिन्हा- CNEB (अस्तित्व में नहीं)  
तनवीर फातिमा – न्यूज़ टाइम 24*7 न्यूज़ चैनल, पुराना नाम, जनसंदेश (अस्तित्व में नहीं)
सबी हैदर –  न्यूज़ टाइम 24*7 न्यूज़ चैनल , पुराना नाम , जनसंदेश (अस्तित्व में नहीं)   
राहुल चौधरी  – न्यूज़ प्वाइंट (अस्तित्व में नहीं)
रवि श्रीवास्तव – महुआ न्यूज़ (अस्तित्व में नहीं)
संजय सिंह – महुआ न्यूज़ (अस्तित्व में नहीं)
रूबी परवीन सिद्दीकी – मौर्या टीवी  (अस्तित्व में नहीं)
मुखराम सिंह – यूपी न्यूज़  (अस्तित्व में नहीं)
विवेक अवस्थी –  यूपी न्यूज़  (अस्तित्व में नहीं)
शमीम हुसैन – यूपी न्यूज़  (अस्तित्व में नहीं)
प्रदीप कुमार गौड़ – खोज इण्डिया न्यूज़ चैनल (दो वर्षो से चैनल से बाहर)
अभिषेक पाटनी – सीएनएन – आईबीएन (तैनाती बाहर)
के०बिम्बाधर – सीएनएन – आईबीएन (तैनाती बाहर)
बृजमोहन सिंह –  चैनल वन न्यूज़ (चैनल छोडें छह माह से अधिक)    
मोहसिन हैदर –  इंडिया टीवी (चैनल से निकाले गए 10 माह से अधिक )
शरीब जाफरी- सी न्यूज़ (चैनल बंद हुए एक वर्ष)
किस्सा नकवी – सी न्यूज़ (चैनल बंद हुए एक वर्ष)
इमरान –  सी न्यूज़ (चैनल बंद हुए एक वर्ष)
खुर्रम निजामी – न्यूज़ 30 (चैनल ही नहीं खुला)
मधुर श्याम – न्यूज़ 30 (चैनल ही नहीं खुला )

यह लिस्ट सिर्फ इलेक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों की है। आपके सामने जल्द ही प्रिंट मीडियाकर्मियों की भी लिस्ट जारी होगी। हमारा मकसद पत्रकार और संस्थानों से विरोध दर्ज कराना नहीं। सूचना एक्ट के तहत पत्रकारों को राज्य सरकार दवारा उनकी उपयोगिता और मौजूदगी के आधार पर ही मदद मिलनी या दी जानी चाहिए। लेकिन वर्तमान में सूचना विभाग में कई ऐसी खामिया है जो क़ानून से बाहर है।

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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यूपी के मान्यता प्राप्त संवाददाताओं की आम सभा में चुनाव समिति घोषित, वीर विक्रम बहादुर मिश्र मुख्य चुनाव अधिकारी

: उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की आम सभा में 300 से ज्यादा सदस्यों की शिरकत : उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की आम सभा की बैठक आज दिनांक 21 अगस्त, 2015  को विधान भवन प्रेस रुम में आहूत की गयी. बैठक में राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त 300 से अधिक संवाददाताओं में हिस्सा लिया. बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने की जबकि संचालन सचिव सिद्धार्थ कलहंस ने किया.

हेमंत तिवारी ने अपने संबोधन में बीते तीन साल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए पत्रकारों के कल्याण की विभिन्न योजनाओं पर शासन को भेजे गए प्रतिवेदन की जानकारी देते हुए उनकी प्रगति के बारे में अवगत कराया. उन्होंने समिति के आगामी चुनाव के बारे में आम सभा के सभी सदस्यों व विशेष कर नए मान्यता प्राप्त संवाददाताओं से राय व सुझाव मांगे. आम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से आगामी चुनावों के लिए एक चुनाव संचालन समिति का गठन किया गया.

चुनाव संचालन समिति में निम्न लोगों को शामिल किया गया है.

1. श्री वीर विक्रम बाहदुर मिश्रा (मुख्य चुनाव अधिकारी)
2. श्री स्नेह मधुर (चुनाव अधिकारी)
3. श्री ज्ञानेंद्र शुक्ला (चुनाव अधिकारी)
4. श्री अनिल अवस्थी (चुनाव अधिकारी)
5. श्री मो. कामरान (चुनाव अधिकारी)

आम सभा ने सर्वसम्मति से 30 अगस्त तक राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त संवाददाताओं को मताधिकार व चुनाव लड़ने की सहमति प्रदान की है. आम सभा ने ने सबकी सहमित से चुनाव शुल्क 10 रुपये प्रति संवाददाता का निर्धारण किया है. आम सभा ने एक स्वर में कहा कि उपरोक्त के अतिरिक्त इस समिति के चुनाव संचालन की कोशिश  अवैध व असंवैधानिक है. आम सभा ने सर्वसम्मति से इस तरह के प्रयासों व इनमें शामिल लोगों की निंदा की है. बैठक की समाप्ति पर हेमंत तिवारी ने सभी मान्यता प्राप्त संवाददाताओं से आग्रह किया कि चुनाव कार्यक्रम, नामांकन, शुल्क जमा करने के लिए चुनाव समिति से संपर्क करें.

प्रेस रिलीज

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यूपीएसएसीसी चुनाव कराने को लेकर मुदित माथुर के पक्ष में प्रांशु मिश्रा भी बोले, पढ़िए पत्र

उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का नया चुनाव नहीं होने को लेकर मुदित माथुर ने आवाज उठाई. हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस पर आरोप लगाया कि ये लोग नया चुनाव कराने से भाग रहे हैं और इनकी कमेटी पूरी तरह असंवैधानिक हो चुकी है, फिर भी ये लोग लगातार पदाधिकारी बने हुए हैं. वरिष्ठ पत्रकार मुदित माथुर ने एक ग्रुप मेल भेजकर जब आवाज उठाई तो टाइम्स नाऊ, यूपी के पत्रकार प्रांशु मिश्रा ने मुदित का समर्थन किया और उनकी बात को मजबूती प्रदान की. पढ़िए, प्रांशु ने क्या लिखा है…

Dear Mudit ji,

Thx for bringing the facts out and nailing the canards being spread about the tenure of the “UP STATE accreditation correspondents committee”. Though on personal level many in our community knew what the truth was..your interference holds importance because its a voice from within the present committee, which is now clearly unconstitutional..because its tenure of 2 YEARS HAS EXPIRED.

I will appeal to all the office bearers to announce the new schedule for elections to the committee at the earliest. Senior members of the committee should stop shielding and continue being-in office in name of entirely fabricated false claims about extended tenure of the committee. And in case some of the much “:socially visible”: office bearers of the committee continue to do, others should themselves resign from the committee which is now clearly unconstitutional by having outlived the tenure of 2 years.

I think there’s still much scope of a respectable move coming in from within the committee itself.  Any further delay would only raise questions and possibly agitation

Regards
Pranshu Mishra
pranshu.mishraa@gmail.com

मुदित माथुर का पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें….

यूपी मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव को लेकर मुदित माथुर ने लिखा पत्र

 

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