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दिल्ली

आईआईएमसी बनेगा संचार विश्वविद्यालय

आईआईएमसी यानि भारतीय जनसंचार संस्थान को संचार विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए जल्द ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय कदम उठाएगा. संस्थान के 47वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी घोषणा की. केंद्रीय मंत्री ने इस बाबत युवा पीढ़ी से सलाह मांगते हुए कहा कि मंत्रालय इसके लिए जल्द ही रोडमैप तैयार करेगा.

आईआईएमसी यानि भारतीय जनसंचार संस्थान को संचार विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए जल्द ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय कदम उठाएगा. संस्थान के 47वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी घोषणा की. केंद्रीय मंत्री ने इस बाबत युवा पीढ़ी से सलाह मांगते हुए कहा कि मंत्रालय इसके लिए जल्द ही रोडमैप तैयार करेगा.

जावड़ेकर ने कहा कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर इसके लिए एक स्थान तय किया जाएगा, जहां लोग अपने विचार और सलाह दे सकेंगे. उन्होंने कहा, ‘संस्थान को संचार विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने का आइडिया प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन विजन का हिस्सा है. जिसके तहत सहभागिता आधारित संचार को बढ़ावा दिया जाना है. इस पूरी प्रक्रिया में मीडिया सहित सभी महत्वपूर्ण साझीदारों को शामिल किया जाएगा.

इसके साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता की जोरदार हिमायत करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कुछ टेलीविजन चैनलों पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर कुछ राज्य सरकारों की आलोचना की है. हालांकि प्रकाश जावडेकर ने पेड न्यूज का मुद्दा भी उठाया और कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में यह बुराई पूरे दमखम के साथ मौजूद दिखी.
 
राज्यों के नाम का जिक्र किए बगैर जावड़ेकर ने कहा कि ऐसा प्रतिबंध लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और प्रेस की आजादी को कम करता है. उन्होंने कहा, ‘ऐसे दो-तीन राज्य हैं, जिन्होंने ये प्रतिबंध लगाए हैं ताकि ये चैनल केबल नेटवर्क में उपलब्ध नहीं हो सकें. मीडिया घरानों को धमकी तक दी गई.’

मीडिया की आजादी की पैरोकारी करते हुए सूचना प्रसारण मंत्री ने कुछ टीवी चैनलों को प्रतिबंधित करने वाली राज्य सरकारों की आलोचना की है। जावड़ेकर ने ऐसे राज्यों का नाम न लेते हुए इन कदमों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों और प्रेस की आजादी के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “दो या तीन राज्य हैं जिन्होंने कुछ चैनलों को प्रतिबंधित कर दिया है, जिस कारण से उन्हें केबल पर नहीं देखा जा सकता है। इससे मीडिया घराने भयभीत हैं।”

जावड़ेकर ने सोमवार को यहां आईआईएमसी के 47वें दीक्षांत समारोह में प्रेस की आजादी को जरूरी बताया। उनकी टिप्पणी को तेलंगाना में दो तेलुगु चैनलों पर प्रतिबंध से जोड़कर देखा जा रहा है। पत्रकारों ने तेलंगाना सरकार के इस फैसले का तीखा विरोध करते हुए प्रतिबंध हटाने की मांग की थी।

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1 Comment

1 Comment

  1. arshil

    October 24, 2014 at 4:37 pm

    pichhli sarkar ki ghosna ko apna idea batane ka maha jhooth. nai sarkar me jhooth, barbolepan aur aatm mugdhta ki bimaari hai. ye sarkaar hamari hai, jo aane wale dino me dande k jor par dhamkayegi k kaho din bahoot achhe hain.

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