ईरान, ईराक और हिंदी

Zaighaam Imam : जून में मैं ईरान में था। हिंदी फ़िल्मों के दीवानों का देश। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ऑफिसर ने मुस्कुराकर पूछा “अमिताभ बचन ठीक” मुझे हंसी आ गई, बोला एकदम फर्स्टक्लास। होटल के मैनेजर ने पूछा “हिंदी ऑर पाकिस्तानी”। मैंने कहा हिंदी वो खुश हो गया। मैंने अपने कमरे से पानी के लिए पूछा, ईरानी अंग्रेजी में कमजोर हैं। मैंने कहा “पानी” उसने कहा “कल चले जाएंगें” मैंने फिर कहा पानी चाहिए वाटर वाटर। उसने कहा “कल चले जाएंगें”। बाद में आब बोला तो पानी मिला साथ ही ये पता चला कि मैनेजर ने कल चले जाएंगें तकिया कलाम की तरह सीख रखा है कुछ भी पूछो यही बोलता है…कल चले जाएंगें।

ईरान के बाद इराक का नंबर था। इराक में तो हिंदी के ऐसे ऐसे आशिक मिले की बाप रे बाप। कई हैंडसम स्मार्ट टाइप के लड़के मिले सबने कहा “मैं सलमान खान”। मैंने कहा हां भाई बिल्कुल लगते हो। कुछ ने हिंदी फिल्मों के डायलाग तक सुना डाले..” मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगा”। ईरान के सीमावर्ती देश अज़रबैजान में भी आपको हिंदी सुनने का सुख मिल जाएगा। चेन्नई के समुद्र तट पर टहलते हुए, कलकत्ता के हावड़ा ब्रिज पर चलते हुए, त्रिवेंद्रम में नारियल पानी पीते हुए, कर्नाटक, आंध्र, कश्मीर, असम न जाने कहां कहां देखिए महसूस कीजिए और आप पाएंगें हिंदी भारत में आत्मा की तरह बसी है। भाषा नदी की तरह होती है और हिंदी तो समंदर है। हिंदी के नाम पर सियापा मत कीजिए, अपनी भाषा को बोलने सुनने के मज़े लीजिए।

हिंदी तब भी थी जब आप नहीं थे, तब भी है जब आप हैं, और तब भी रहेगी जब आप दोबारा नहीं होंगे।

इसमें तुलसी का संस्कार
इसमें कबीर की है पुकार
इसमें है प्रेम बिहारी का
मीरा सी राजकुमारी का
खुसरो ने इसमें रंग भरे
जायसी रहीम के संग भरे
इसमें नहीं कोई भेदभाव
क्या हिंदू है क्या मुसलमान।
सच है मेरी हिंदी महान।।

पत्रकार और फिल्मकार जैगम इमाम के फेसबुक वॉल से.



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