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सुख-दुख

मार्मिक कहानी-कविता लिखने वाले लेखकों से आग्रह है, जनसत्ता की इस पीड़िता पर एक पोस्ट लिख दें

शालिनी श्रीनेत-

कुछ दिन पहले मैंने जनसत्ता सोसायटी की एक महिला द्वारा अपनी नाबालिग घरेलू सहायिका के साथ मारपीट करने को लेकर पोस्ट लिखी थी। अब महिला की क्रूरता की कहानियां धीरे धीरे बाहर आ रही हैं। कहा जा रहा है कि ये चौथी लड़की है जिसके साथ बेरहमी से उसने मारपीट की है। लड़की के शरीर में कई जगह फ्रैक्चर है। सिर में चोट के निशान और पैर में भी गहरी चोटें हैं। उसके पूरे शरीर पर डंडे और नाखून के निशान हैं। हाथ-पैर और चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ था।

अब ट्रीटमेंट और दो बोतल खून चढ़ने के बाद तबियत में बहुत सुधार आया। आंखों के नीचे इतनी सूजन थी कि उसकी आंखें ठीक से नहीं दिखती थीं। उसको दिखाई दे रहा था पर भयावह था ये सब।

इससे पहले की तीन लड़कियां भी दरवाजा खुला पाकर भाग गयीं।

अब इस चौथी लडकी ने बताया कि दरवाजे में हमेशा ताला बंद रहता था होलिका दहन के दिन कुछ देर के लिए दरवाजा खुला रह गया और मैं निकल गयी। बातचीत में ये भी बताया कि आदिवासी हूं और मुंडा भाषा बोलती हूँ।

मार्मिक कहानियाँ और कविताएं लिखने वाले लेखकों से आग्रह है कि इस लडकी पर एक पोस्ट लिख दीजिए और अपने दोस्तों को टैग करिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और लडकी को न्याय मिल सके. साथ ही उसे टॉर्चर करने वाली महिला को सजा।

पहले FIR फिर SC-ST एक्ट लगाने के लिए एप्लिकेशन और अब मेमोरेंडम। इंदिरापुरम थाने पहुंचे हम। कल लड़की के बयान का आश्वासन मिला।

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