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सियासत

गए थे रक्षा सौदा करने, खरीद लाए पेगासस!

संजय कुमार सिंह-

जिसका कोई नहीं है और जिसका विकल्प नहीं है ने जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर पर गैर कानूनी रूप से 300 करोड़ रुपए फूंक दिए। गए थे रक्षा सौदा करने, पेगासस खरीद लाए। वर्षों मुंह सिले रहे। पत्रकारों को साथ ले जाना बंद किया था तो भक्तों ने खूब ताली बजाई थी। कहते थे पत्रकार इसीलिए नाराज हैं। अब विदेश घूमने को नहीं मिलता। पत्रकार तो अभी भी सेवा में दंडवत हैं।

आज कितने अखबारों में यह खबर है और पहले पन्ने पर है – देखकर तय कर लो। सुब्रमणियन स्वामी ने ट्वीट किया है, मोदी सरकार को न्यूयॉर्क टाइम्स के खुलासों का खंडन करना चाहिए कि उसने करदाताओं के 300 करोड़ रुपए का भुगतान पेगासस स्पाईवेयर खरीदने के लिए किया। पहली नजर में इस खुलासे का मतलब है, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और संसद को गुमराह किया। वाटरगेट?

वैसे, घलुआ लेने देने वालों के देश में घलुआ लिए होते तो भी गलत था। उसे घूस माना जाता जो अब सीधे पीएम केयर्स में जा सकता है। और इलेक्शन बांड से सबसे अमीर पार्टी को और अमीर बना सकता है। प्रधानसेवक सह चौकीदार जी – आपकी ईमानदारी तो रिकार्ड तोड़ है। जय श्री राम।

पुनःश्च : पुरानी खबर। ईमानदार प्रधानमंत्री ने विदेश यात्रा में पत्रकारों को ले जाना तो बंद ही कर दिया, उनका कार्यालय यह बताने के लिए भी तैयार नहीं था कि उनके साथ कौन लोग गए। 29 जनवरी 2018 को मैंने लिखा था, पत्रकारों को ले नहीं जाएंगे, जिसे ले जाएंगे उसके नाम नहीं बताएंगे। ईमानदारी चालू आहे।
अव्वल तो इसके लिए आरटीआई कानून की जरूरत ही नहीं थी। पर आरटीआई कानून लाने वाली पार्टी बेईमान है। ईमानदार पार्टी पत्रकारों से भी बचती है और आरटीआई से डरती है। जय जय। सत्यमेव जयते।

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