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जेएनयू स्टूडेंट यूनियन पर फिर वामपंथियों का कब्जा!

शीतल पी सिंह-

JNUSU में वामपंथियों ने सेंट्रल पैनल की सभी चारों सीटों पर लाल झंडा फहरा दिया है ।

अभी अभी ख़त्म हुई मतगणना के बाद ये नतीजे घोषित किए गए।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 4 नवंबर को हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजे आज (6 नवंबर 2025) जारी कर दिए गए। सेंट्रल पैनल की सभी चारों सीटों (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जनरल सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी) पर लेफ्ट यूनिटी के उम्मीदवारों की जीत हुई है। ABVP का सूपड़ा साफ हो गया है। पिछले साल एक सीट ABVP के खाते में गई थी, लेकिन इस बार सिर्फ जॉइंट सेक्रेटरी पोस्ट ही ऐसी थी जिस पर कांटे की टक्कर देखने को मिली। इस पोस्ट पर लेफ्ट के सुनील यादव ने मामूली वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है।

केंद्रीय सरकार, शिक्षा मंत्रालय, विश्वविद्यालय प्रशासन के असामान्य हस्तक्षेप और पिछले कई वर्षों में नियुक्तियों में लगे आरोपों (RSS से संबंधित लोगों की छाँट छांट कर भर्ती), शोध छात्रों की संख्या में बड़ी कटौती और दिल्ली पुलिस की मदद से मौजूदा सत्ता से असहमत छात्र संगठनों और सामान्य छात्रों के विरुध्द आतंक पैदा करने वाली हिंसक घटनाओं के बावजूद यह नतीजा आया है ।

फ़र्क़ की वजह यह है कि JNUSU के चुनावों का संचालन छात्रों की ही एक चुनी हुई सर्वसम्मत इकाई करवाती है । यदि यह कार्य हमारे देश के चुनाव आयोग के हाथ में होता तो नतीजे निश्चित ही कुछ और होते!

ज़िंदाबाद!

ज्ञात हो, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के लिए हुए चुनाव में इस साल, लगभग 9,043 स्टूडेंट्स वोट देने के लिए एलिजिबल थे। मंगलवार शाम को, यूनिवर्सिटी में 67% वोटिंग हुई थी। यह पिछले चुनाव में 70% वोटिंग से थोड़ी कम है और 2023-2024 में रिकॉर्ड की गई 73% की दशक की सबसे अधिक वोटिंग से भी कम है। प्रेसिडेंट के पद के लिए सात उम्मीदवार मैदान में थे। वाइस-प्रेसिडेंट के पद के लिए तीन उम्मीदवार लड़ रहे थे। जनरल सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी के पदों के लिए पांच-पांच उम्मीदवार मुकाबला कर रहे थे।

JNUSU Election Result 2025 : लेफ्ट उम्मीदवारों की जीत का पूरा ब्यौरा 

JNU छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनाव 2025 में लेफ्ट यूनिटी ने एक बार फिर जीत हासिल की है। लेफ्ट के उम्मीदवारों ने चारों सेंट्रल पोस्ट पर जीत दर्ज की है। ABVP का सूपड़ा साफ हो गया है।

अध्यक्ष:

लेफ्ट गठबंधन की अदिति मिश्रा ने 1,861 वोटों के साथ शीर्ष पद हासिल किया। उन्होंने एबीवीपी के विकास पटेल को हराया, जिन्हें 1,447 वोट मिले।

उपाध्यक्ष:

के. गोपिका ने 2,966 वोट हासिल करके लेफ्ट को निर्णायक जीत दिलाई, जबकि एबीवीपी की तान्या कुमारी 1,730 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।

महासचिव:

इस पोस्ट पर मुकाबला कांटे का रहा, लेकिन आखिर में लेफ्ट के सुनील यादव ने ABVP के राजेश्वर कांत दुबे को हरा दिया। सुनील यादव को 1915 वोट मिले और राजेश्वर कांत दुबे को 1,841 वोट मिले।

संयुक्त सचिव:

दानिश अली ने संयुक्त सचिव पद पर 1,991 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। उन्होंने ABVP के अनुज दमारा को हराया, जिन्हें 1,762 वोट मिले।


दूसरा पक्ष पढ़िए-

JNU में ABVP को तब से देख रही हूँ जब JNUSU में ABVP को 400 वोट आते थे और तब वामपंथ बड़े दंभ के साथ अकेले-अकेले चुनाव लड़ता था। AISA का एक वामपंथी भरे मंच से कहता नहीं थकता था कि AISA यदि JNUSU में एक कुत्ते को भी चुनाव लड़ाएगी तो जीत जाएगी। आज आए JNUSU परिणाम में ABVP ने अकेले 1900 मतों का आंकड़ा पार किया है जबकि JNU में अपने अस्तित्व बचाने के लिए जदोजहद्द करते वामपंथी संगठन AISA+SFI+DSF महागठबन्धन बनाने को मजबूर हैं। उसके बाद भी GS पर मात्र 100 मतों का अन्तर रहा। सह सचिव में मात्र 229 के करीब तो अध्यक्ष में मात्र सवा चार सौ। एक समय वामपंथ के लिए अभेध्य माने जाने वाला यह किला अब भरभराकर गिरने के लिए तैयार है। सम्भव है कि अग्रिम एक दो वर्षों में हमें यह देखने को मिल जाए।
बहरहाल हम चुनाव हार गए पर एक संगठन के तौर पर हम जीते हैं, एक विचार के तौर पर हम जीते हैं। ये लड़ाई विचारों की है। 400 -1900 का मार्ग तय किया है। वामी गठबंधन में डर है और यह सुनिश्चित है कि अब JNU में वामपंथी कभी अकेले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। न तब ABVP वामियों के समक्ष झुकी थी न कभी झुकेगी।

कभी थे अकेले हुए आज इतने
नहीं तब डरे तो भला अब डरेंगे?

-निधि त्रिपाठी

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