राम दत्त त्रिपाठी-
के एम अग्रवाल यानी कृष्ण मोहन अग्रवाल नहीं रहे . बहुत अफ़सोस हुआ. आज ही लखनऊ के अस्पताल में गंभीर हालत में आये . थोड़ी देर वेंटिलेटर पर और फिर प्रस्थान कर गये , जहॉं कभी नहीं मिल सकते . इलाहाबाद में अमृत प्रभात में कुछ साथ काम किया . वह चीफ रिपोर्टर थे .

हम कई साथियों ने मिलकर उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान के माध्यम से इलाहाबाद लखनऊ में काफ़ी काम किया . के एम गौहाटी से हिंदी के पहले अखबार पूर्वांचल प्रहरी के संपादक हुए. उल्फा का आंदोलन हुआ तो सब कुछ छोड़कर गृहनगर महराजगंज में अपना बिज़नेस जमाया . पर लिखना पढ़ना जारी रखा .
अस्सी साल की उम्र में भी फ़िट थे . अचानक हृदयरोग उभरा . शुरू में गैस का इलाज हुआ. गोरखपुर में ऐंजियोप्लास्टी हुई पर निमोनिया ने जकड़ लिया जो जानलेवा हो गया . अंत में धीरे-धीरे सारे महत्वपूर्ण अंग जवाब दे गये . इतना समय भी नहीं मिला कि अस्पताल जाकर मिल आता . हार्दिक श्रद्धांजलि मित्र!
राम धनी द्विवेदी-
स्मृतियों में के एम अग्रवाल! मन बहुत दुखी है। मेरे ‘अमृत प्रभात’ के दिनों से मित्र केएम अग्रवाल नहीं रहे। आज दोपहर उन्होने लखनऊ मेदांता में आखिरी सांस ली। एक हफ्ते पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा था तो उन्हें महराजगंज से गोरखपुर लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों ने उनके दिल की नलियों में स्टंट डाला। सेहत कुछ सुधर रही थी। जब उनके पत्रकार मित्र मिलने गए तो वह उठ कर बैठे और बात भी की। डाक्टर शीघ्र ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की सोच रहे थे। लेकिन दो दिन पहले हालत अचानक बिगड़ी तो लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया गया। आज दोपहर वह सबको छोड़ अनंत या पर निकल गए।
केएम से मेरे 45 साल से संबंध थे लेकिन उनकी मित्रता में हमेशा ताजगी भरी रहती थी। इलाहाबाद के पुराने मित्रों में वह अकेले थे तो हर महीने दो महीने में हालचाल लेते रहते थे। इलाहाबाद से जब वह गोहाटी पूर्वांचल प्रहरी के संपादक बन कर गए तो भी बातचीत होती रहती थी। बाद में अखबारी नौकरी से मोहभंग होने पर वह अपने गृहनगर महराजगंज आ गए थे और पेंट का व्यवसाय शुरू किया था जिसे अपने श्रम और ईमानदारी से स्थापित किया। वह पिछले कई सालों से लेखन की दुनिया में रम रहे थे।
उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘जो झुका नहीं’ के बाद दो उपन्यास भी लिखे जो बहुत सराहे गए। इन दिनों वह महराजगंज के इतिहास और संस्कृति की पुस्तक पर काम रहे थे। वह कई सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे. लगभग 78 साल के थे लेकिन उम्र को अपने पर हावी नहीं होने देते थे।
उनकी सक्रियता लोगों के लिए मिसाल थी। पिछले दिनों वह जब नोएडा अपनी बेटी के यहां आए तो मेरे आवास पर आए और घंटों रहे और पुरानी बातों की,साथियों की चर्चा होती रही। वह किसी को नहीं भूलते थे और जिससे संबंध बने गए,उसे दिल से निबाहते थे। बहुत कुछ स्मृतियां हैं,उनकी। इस समय कुछ लिखते नहीं बन रहा। केएम आप इस तरह बिना बताये चले गए, स्मृतियों से नहीं जाने पाओगे मित्र।
अरविंद कुमार सिंह-
सादर नमन के एम अग्रवाल जी! अभी वरिष्ठ पत्रकार श्री केएम अग्रवालजी के निधन की सूचना बड़े भाई रामधनी द्विवेदी के फेसबुक वॉल से मिली। आज दोपहर उन्होने लखनऊ मेदांता में आखिरी सांस ली। इलाहाबाद में पढ़ाई के दिनों में छात्र राजनीति करते हुए 1981 82 से उनके संपर्क में आया था। बाद में पत्रकारिता में रहते हुए बड़े भाई की तरह उनका स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहा। नए पत्रकारों को वे प्रोत्साहित करते थे। उनके ही सानिध्य में मुझे पहला विद्या भास्कर पुरस्कार प्रोत्साहन के रूप में मिला था। उन्होंने कई मित्रो के साथ मिल कर उत्तर प्रदेश पत्रकारिता संस्थान बनाया। उसके कई बड़े लोग जुड़े हालांकि वह चल नहीं सका।
वे कहीं भी रहे, संवाद बना हुआ था। चिट्ठी पत्री भी उनके साथ चलती रही थी। तीन माह पहले उनका फोन आया तो विस्तार से खोज खबर ली थी।
एक खुद्दार पत्रकार, जिनको पत्रकारिता से मोहभंग हुआ तो महराजगंज में पेंट का व्यवसाय शुरू कर उसे मुकाम तक पहुंचाया। उनका लिखना जारी था। इस बीच भी वे कुछ लिख पढ़ रहे थे। उनका निधन पत्रकारिता जगत की भारी क्षति है। सादर नमन।


