‘दैनिक जागरण’ की प्रकाशक कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड (JPL) में प्रबंधन स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कंपनी की 29 मई 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों ने 8 पदाधिकारियों को उनके पदों से हटाने संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। हालांकि, इन प्रस्तावों का प्रभाव तत्काल नहीं होगा, क्योंकि राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने इनके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा रखी है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में सात निदेशकों और एक पूर्णकालिक निदेशक को हटाने से जुड़े प्रस्ताव मतदान के लिए रखे गए थे। मतदान में सभी प्रस्तावों को आवश्यक बहुमत प्राप्त हुआ। कई प्रस्तावों को लगभग 90 प्रतिशत तक समर्थन मिला, जिससे शेयरधारकों की राय स्पष्ट रूप से सामने आई।
जिन पदाधिकारियों के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुए उनमें-
- दिव्या करणी
- शैलेन्द्र स्वरूप
- अनीता नय्यर
- केमिशा सोनी
- प्रमोद अग्रवाल
- शालिन टंडन
- अरुण अनंत
- सतीश चंद्र मिश्रा के नाम शामिल हैं।
इनमें सतीश चंद्र मिश्रा को पूर्णकालिक निदेशक पद से हटाने का प्रस्ताव साधारण प्रस्ताव के रूप में लाया गया था, जबकि अन्य प्रस्ताव विशेष प्रस्ताव की श्रेणी में थे।
हालांकि, 26 मई 2026 को NCLAT की प्रधान पीठ द्वारा दिए गए आदेश के कारण इन निर्णयों को फिलहाल लागू नहीं किया जा सकेगा। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इलाहाबाद स्थित NCLT में लंबित कंपनी याचिका संख्या 64/2023 पर अंतिम निर्णय आने तक यथास्थिति बनी रहेगी।
कंपनी के अनुसार, रिकॉर्ड डेट 22 मई 2026 तक उसके 73,563 शेयरधारक थे। EGM में प्रमोटर समूह और सार्वजनिक शेयरधारकों ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। मतदान प्रक्रिया की निगरानी स्क्रूटिनाइजर के रूप में कंपनी सचिव आदेश टंडन ने की और उनकी रिपोर्ट कंपनी को सौंप दी गई है।
जागरण प्रकाशन ने मतदान परिणाम, स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट, NCLAT के आदेश और संबंधित बोर्ड प्रस्ताव को शेयर बाजारों के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। ऐसे में शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बावजूद अब सभी की निगाहें NCLT में लंबित मामले के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि निदेशकों की वास्तविक स्थिति उसी निर्णय से तय होगी।



