कायर न बनो, झूठे आंसू मत बहाओ, मुट्ठी तानो, लड़ने के लिए एकजुट हो जाओ

सहारा के पत्रकार अमित पांडेय की मौत इसलिए हो गयी क्योंकि उसे कई महीने से वेतन नहीं मिला था । फ़ाक़े कर रहा था। बिस्किट खाकर ख़बरें चला रहा था। कष्ट हो रहा है पर क्या कर सकते हैं।

हारे हुए लोगों से क्या उम्मीद करें। पत्रकार बनते हैं । दुनिया को बदलने का दम भरते हैं । अपने हालात बदल नहीं सकते । कायर लोग। झूठे आंसू। झूठी संवेदना । लड़ने के लिए इकट्ठे भी नहीं हो सकते ।

अरे हथेलियाँ खाली हैं तो मुट्ठी तान कर देखो। जो जिन्दा हैं अभी , जिनकी सांसें चल रही हैं उन्हें तो बचाओ। पर कुछ नहीं हो सकता। सुविधा भोगी पत्रकार आंदोलन थोड़े ही कर सकते हैं। बस खबर लिख सकते हैं । अमित पांडेय की मौत की सिंगल कॉलम खबर । तुम्हें तो खुश होना चाहिए मिस्टर अमित पांडेय मरने के बाद खबर तो बने।

वागीश सारस्वत  के फेसबुक वॉल से 



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