यशवंत सिंह –
एयरटेल वाले साठ हज़ार रुपये का लोन दे रहे हैं मुझे, मैंने माँगा नहीं, ख़ुद से दे रहे हैं।
देखिए ये क्या ले-दे रहे हैं!

आदमी क्यों न सुसाइड कर ले!
ये तब है जब गवर्नमेंट अप्रूव्ड हैं ये।
प्राइवेट कर्ज देने वाले कितने परम होते होंगे, इसकी कल्पना भर बस कर सकते हैं। बब्बर दंपति द्वारा सुसाइड प्राइवेट कर्जदाताओं की लूट के कारण ही हुई।
किसी भी क़िस्म के कर्ज से बचिए। नून रोटी खाइए। मस्त रहिए!
सुनें ये ऑडियो-
बजाज वाले बता रहे छत्तीस प्रतिशत तक ब्याज लगता है…
विजय यादव : 55 हजार देकर 72 हजार वसूलते हैं। यही हाल बजाज फाइनेंस का है। यहां 36% ब्याज लगा रहे हैं l गरीब आदमी मजबूरी जब फंस जाता है तब इनका दोहन शुरू हो जाता है। बजाज finance का बस चले तो बिल गेट्स को भी पर्सनल लोन दे देगा।
संजय कुमार सिंह : कर्ज नियमित खर्चों की भरपाई के लिए नहीं होता है। जो उसके लिए कर्ज लेता है वो फंसता है। कर्ज उसके लिए होता है जो अपने बचत का प्रयोग पहले करना चाहता है। उदाहरण के लिए कोई नवविवाहित कर्ज लेकर हनीमून मनाये – उसके पास दो विकल्प हैं। जब पर्याप्त पैसे हों तब जाये या समय पर हनीमून मनाये, जब पैसे हो तो चुकाये। जब चुकायेगा वह तबके हनीमून की कीमत होगी या समय पर हनीमून मनाने का ब्याज। जैसे देखिये। दोनों तरीके से ब्याज ज्यादा नहीं लगेगा।
जब पर्याप्त पैसे हो तब हनीमून मनाने का विकल्प मध्यमवर्गीय सोच है और तब तक बुढ़ापा आ जाता है। कुछ लोग बच्चों के साथ ही अपना हनीमून मना पाते हैं। इसलिए, जिसकी बचत ही नहीं है वह हनीमून मनायेगा तो मरेगा, तलाक हो जायेगा या दोनों खुदकुशी करेंगे। कर्ज धंधा करने के लिए होता है। पर तबजब कमाई गारंटीड हो। मैं जब नौकरी और फ्रीलंसिग दोनों से कमाता था ब्लैंक चेक देकर स्कूटर ले आया था, बिना नंबर। अगले दिन क्रेडिट कार्ड से पैसे दिये और चेक वापस ले लिया।
कमाता था इसलिए किस्तें भी चुकाया। कभी जोड़ा ही नहीं कि कितना लिया और कितना देना पड़ा। पांच हजार रुपये क्रेडिट कार्ड की तय राशि होती थी हर महीने। और मैंने लेख भी लिखा था कि इतना कम ईएमआई पर इतना पैसा कोई नहीं देगा। घर का लोन क्षमता से ज्यादा था। 15 साल बाद टॉप अप भी कराना पड़ा। लेकिन अंतिम कुछ लाख पैसे पापा ने दे दिये। नहीं मिलता तो फंसता। इसलिये कमाई नहीं हो तो नहीं लेना चाहिये। पर आश्वस्त कमाई हो तो कर्ज लेकर घी पीने में बुराई नहीं है।
दिनेश पाठक : ये सरकारी संरक्षण में चलने वाले साहूकार हैं। सब कुछ खुल्ला खेल, फर्रुखाबादी टाइप का मामला है। 36 फीसद सालाना ब्याज सोचकर ही आदमी काँप जाए
सुचेता शर्मा : 36% इन चोरों को देने से अच्छा थोड़े गहने बेच दो,करीबी रिश्तेदारों,मित्रों से उधार ले लो,और हां लोन कम से कम लो जैसे अपनी हैसियत अनुसार सस्ती लोकेलिटी में छोटा सा घर ले सकते हैं बजाय फैंसी कॉलोनी में बड़ा घर लेना और भारी EMI का बोझ ढोना सालों तक। दिखावे/सोशेबाजी के लिए महंगा फ्लैट,लग्जरी कार सब EMI पर मिल तो जाएगा लेकिन सेलरी का बड़ा हिस्सा किश्तों पर जायेगा। दिक्कत तब आती है जब व्यापार में घाटा हो जाए, जॉब चली जाए या कोई आकस्मिक मेडिकल खर्चा आ जाय तब कर्ज़ चुकाना मुश्किल हो जाता है और दुनिया को झूठी अमीरी दिखाने की आदत के चलते कोई मदद भी नहीं करेगा यही सोच के कि इतने बड़े मकान में सब महंगी सुख सुविधाएं हैं, महंगी गाड़ी, बेस्ट स्कूल जा रहे बच्चे तो कोई सीरियसली नहीं लेगा। ज्यादातर लोग इसलिए भी हेल्प नहीं करते कि पहले से ही कर्जदार आदमी को दे कर अपनी खून पसीने की कमाई भी न फंस जाए। वैसे भी बुद्धिमान लोग खुद किफायत से चलते और सही जगह इन्वेस्ट करने में विश्वास रखते हैं .
राकेश सिंह-
literally इन्होंने गुंडे पाल रखे हैं जो तरह तरह से आपको टॉर्चर करते हैं। जनवरी में ही इनसे टोटल dues amount का मेल पर confiramtion लेकर और payment करके card band करने का request किया था पर इन्होंने कार्ड बंद नहीं किया और payments भी पचा गए। अच्छा है payments सारे accounts से किए हैं और ये मुकर नहीं सकते। गलती से भी इनको कैश payments मत कीजिएगा अगर आप इनके चंगुल में फँसे हुए हैं तो!

मज़हर क़ुरैशी-
जीते जी कोई किसी के दर्द को नहीं समझ सकता, इस सुसाइड नोट में इस दंपती ने अपने परिवार के लिए कुछ न लिखकर भी बहुत कुछ लिख दिया, बाकि ब्याज़खोरों के लिए तो क्या ही लिखूं उन्हें तो लगता है जैसे वो अमर हैं….

जीते जी कोई किसी के दर्द को नहीं समझ सकता, इस सुसाइड नोट में इस दंपती ने अपने परिवार के लिए कुछ न लिखकर भी बहुत कुछ लिख दिया, बाकि ब्याज़खोरों के लिए तो क्या ही लिखूं उन्हें तो लगता है जैसे वो अमर हैं….



