नई दिल्ली। देश में पत्रकारिता की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ आंकड़ों के आधार पर टीवी न्यूज़ चैनलों के कई चर्चित एंकरों पर चुनिंदा मुद्दों पर ही सवाल उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोप है कि हाल में AI समिट के विरोध को लेकर कांग्रेस से सवाल करने के मामले में कई टीवी एंकरों ने सोशल मीडिया पर लगातार ट्वीट किए, लेकिन एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी से एक भी सवाल नहीं पूछा।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक एंकर रुबिका लियाकत ने AI समिट के विरोध को लेकर कांग्रेस पर 5 ट्वीट किए, जबकि चित्रा त्रिपाठी ने 7 ट्वीट किए। इसी तरह अमीश देवगन और अमन चोपड़ा ने 8-8 ट्वीट किए, जबकि रजत शर्मा ने 5 और अंजना ओम कश्यप, नविका कुमार और सुशांत सिन्हा ने 2-2 ट्वीट किए।
लेकिन जब बात एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी पर सरकार से सवाल करने की आई, तो इन सभी एंकरों के ट्विटर हैंडल पर इस मुद्दे को लेकर एक भी ट्वीट नहीं दिखा।
इसी विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर पत्रकार सत्ता से असहज सवाल पूछने से बचते हैं और केवल विपक्ष को निशाने पर रखते हैं, तो फिर उन पर “गोदी मीडिया” जैसे आरोप लगना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस में कई यूजर्स का कहना है कि अगर पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल करना है, तो फिर चुनिंदा मुद्दों पर आक्रामकता और बाकी मामलों में चुप्पी पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
इसी संदर्भ में कई लोगों ने तंज कसते हुए लिखा कि मौजूदा दौर में कुछ चैनलों में “पत्रकारिता 0% और प्रोपेगैंडा 100%” दिखाई देता है।
कांग्रेस समर्थित एक्स हैंडल आईएनसी न्यूज़ का ट्वीट-
AI समिट के विरोध पर कांग्रेस से सवाल करने के लिए पत्रकारों के ट्वीट्स की संख्या
रुबिका लियाकत : 05
चित्रा त्रिपाठी : 07
अजनना कश्यप : 02
अमीश देवगन : 08
अमन चोपड़ा : 08
नविका कुमार : 02
रजत शर्मा : 05
सुशांत सिन्हा : 02
LPG सिलेंडर पर ₹60 की बढ़ोतरी पर BJP से सवाल करने के लिए ट्वीट्स की संख्या
रुबिका लियाकत : 00
चित्रा त्रिपाठी : 00
अजनना ओम कश्यप : 00
अमीश देवगन : 00
अमन चोपड़ा : 00
नविका कुमार : 00
रजत शर्मा : 00
सुशांत सिन्हा : 00
और फिर जब विपक्ष के प्रवक्ता उन्हें गोदी मीडिया कहते हैं तो वे शिष्टाचार का रोना रोते हैं
पत्रकारिता : 00%, प्रोपेगैंडा : 100%



