एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा : यूपी सरकार या तो बेकार है या फिर यहां सिर्फ भ्रष्टाचार है!

तीन-तीन बार परीक्षा की तिथि तय करने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग बिना अपने माथे पर प्रश्नचिह्न लगवाए एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा करा पाने में पूरी तरह अक्षम साबित हुआ है। साढ़े 7 लाख प्रतियोगियों के भविष्य को अधर में डालते हुए तीन बार परीक्षा की तिथि घोषित की। विज्ञान और बायोलॉजी विषय के संबंध में स्थिति स्पष्ट न कर पाए।

परीक्षा केंद्रों का अफरा-तफरी में आवंटन कर अव्यवस्था फैलाया गया जिससे अभ्यर्थियों के साथ ही उनके परिजन भी बेहद मानसिक दबाव और तनाव में हैं। प्रवेश पत्रों के आवंटन में अनेक त्रुटियाँ रहीं। परीक्षा से मात्र तीन दिन पहले परीक्षा केन्द्रों के स्थान में परिवर्तन कर दिया गया। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ठप्प हो गई। इन सभी बिन्दुओं पर विचार करने से आयोग की लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

बार-बार आरोप लगने और आयोग की तमाम खामियाँ दिखने के बाद भी मुख्यमंत्री महोदय और माननीय राज्य शिक्षा मंत्री कोई हस्तक्षेप इस विषय में नहीं कर रहे हैं। समझ नहीं आ रहा, इसे उनकी बेचारगी समझा जाये, अयोग्यता की विशेष योग्यता समझा जाये या शोषण का पर्याय समझा जाये?

सुशासन का ढोल पीटने से सुशासन स्थापित नही हो सकता उसके लिए प्रयास किये जाते हैं। जो शासक शासित के कष्ट नहीं समझ सकता वह या तो भ्रष्ट होता है या अयोग्य। सरकार अपना स्वयं तय करे। बाकि कष्ट नागरिकों का इन्हें दिखता नहीं। साढ़े 7 लाख अभ्यर्थी, नहीं साढ़े 7 लाख परिवार इस समय असमंजस की स्थिति में जी रहे हैं साहब। 5 महीने से परीक्षा की जी जान से तैयारी कर रहे हैं, कुछ अपने घरों को छोड़कर कोचिंग तक का सहारा ले रहे हैं, भले ही बेरोजगारी में आर्थिक स्थिति उन्हें ऐसा करने की अनुमति न दे।

मात्र एक सप्ताह पहले परीक्षा केंद्र आवंटित किए गये वो भी 100-1000 किलोमीटर तक दूर, बिना यह विचार किये कि अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेंगे आखिर कैसे? ट्रेन, बस, टैक्सी आपकी लचर व्यवस्था में मुहैय्या हो भी पाएगी कि नहीं। सबसे अधिक कष्ट महिलाओं और उन दिव्यांगों को झेलना पड़ेगा जिनको बचाने, पढ़ाने और व्हीलचेयर से आगे बढ़ने से सपने दिखाने की बातें और अभियान आपके द्वारा छेड़े जाते हैं।

कई दिन से बेहद तनाव में जी रहे हैं हम अभ्यर्थी। आप सम्भवतः इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते क्योंकि कोई तैयारी करके परीक्षा के संबंध में ऐसी असमंजस और यात्रा के तनाव का सामना शायद ही आपमें से किसी ने किया होगा। 2 करोड़ नौकरियाँ देने की बात करने वाले आप 10 हजार नौकरियाँ निष्पक्षापूर्वक, शान्तिपूर्ण और व्यवस्थित रूप में मुहैय्या नहीं करा पा रहे हैं, यह आपकी सरकार की विफलता का द्योतक है।

ऐसे में अभ्यर्थियों के दर्द को समझ उनके लिए लड़ने वाले उन समस्त अभ्यर्थियों का हृदय से आभार जिन्होंने सरकार के इस भेदभावपूर्ण रवैय्ये के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत की। साथ ही अधिवक्ताओं का भी आभार जिन्होंने अभ्यर्थियों के पक्ष में न्यायालय तक बात पहुँचाई। सबसे अधिक हम समस्त अभ्यर्थी आभारी हैं अमिताभ अग्निहोत्री जी के जिन्होंने समस्त अभ्यर्थियों के कष्ट के मर्म को समझते हुए सरकार और आयोग को सही मायने में कटघरे में खड़े करते हुए आईना दिखाया।

फिलहाल सोशल मीडिया पर एक मैसेज खूब वायरल हो रहा है जिसे आप लोग भी पढ़ें और सोचें कि योगी सरकार की अक्षम या सक्षम है…. क्या इनका मकसद बस युवाओं को परेशान करना रह गया है…

योगी सरकार का एक और ऐतिहासिक फैसला… 29 जुलाई को होने वाली LT GRADE परीक्षा से पहले एक अब परीक्षार्थियों को देनी होगी एक… इसका नाम है ‘यात्रा परीक्षा’… इसमें पास होने के बाद ही LT GRADE परीक्षा में शामिल होने के पात्र…. इस नेक काम के लिए योगी सरकार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को सभी परीक्षार्थियों की तरफ से कोटि कोटि धन्यवाद कि उन्होंने कम से कम इसी पृथ्वी पर सेंटर बनाया… कहीं अगर मंगल ग्रह, बुध ग्रह, बृहस्पति ग्रह या अन्य किसी ग्रह पर परीक्षार्थियों का सेन्टर भेज दिया होता तो हम लोगों को पुष्पक विमान की व्यवस्था करनी पड़ती! अधिकांश परीक्षार्थियों के सेंटर 600-800 किलोमीटर दूर हैं। मात्र एक सप्ताह पहले एडमिट कार्ड जारी करने के कारण होने वाली है भारी दिक्कत क्योंकि भारतीय रेलवे का हाल किसी से छुपा नहीं। अनेक परीक्षार्थी परीक्षा देने से वंचित भी रह सकते हैं।

रिसर्च स्कालर और अभ्यर्थी पूनम की एफबी वॉल से.

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Comments on “एलटी शिक्षक भर्ती परीक्षा : यूपी सरकार या तो बेकार है या फिर यहां सिर्फ भ्रष्टाचार है!

  • पूनम says:

    बहुत शुक्रिया Yashwant Singh सर, #एलटी_परीक्षा के सम्बन्ध में हम अभ्यर्थियों के सामने आ रही समस्याओं को साझा करते हुए अपने चैनल पर जगह देने के लिए।

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  • Mrityunjay prasad Mishra says:

    आज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने नौकरशाहों के आगे नतमस्तक है। शायद 2019 की चुनावी बाध्यता होगी। इन्हें लगता है कि ये नौकरशाह ही इनका बेड़ा पार करेंगे। सच तो ये है कि इन नौकरशाहों का चरित्र बड़ा विचित्र होता है ।

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