मई दिवस पर लगा विशाल मेला, हजारों लोगों ने की शिरकत

भीम, राजसमन्द, राजस्थान : आज मजदूर किसान शक्ति संगठन की स्थापना के 26 साल पूरे होने व अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजसमन्द जिले के भीम के पाटियों के चौड़ा में आयोजित मजदूर मेले में 5000 से भी अधिक मजदूरों और किसानों ने भाग लिया. मेले में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न भागों से मजदूर, किसान और उनके साथ काम करने वाले लोग आये. राजस्थान के कई जिले के लोगों ने भी इसमें हिस्सा लिया और अपनी पीड़ा भी बताई और संगठित होने पर बल दिया. मेले में आये मजदूरों और किसानों को संबोधित करते हुए सूचना के अधिकार और रोज़गार गारंटी जैसे कानूनों की जनक और मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापक अरुणा रॉय ने कहा कि “ हमें अब विचार करने पर मजबूर होना पड़ेगा और उन्होंने नारा दिया कि राजस्थान के मजदूरों एक हो जाओ” चाहे वे ग्रामीण मजदूर हों, नरेगा में काम करने वाले मजदूर हो या किसी कारखाने मेन काम करने वाले सभी को संगठित होकर सत्ता के दमन और शोषण का शामना करना चाहिये. 

मजदूरों और किसानों का दमन व शोषण
राजस्थान में मजदूरों और किसानों के हालत बहुत बुरे हो गए हैं, नरेगा मजदूरों को यूनियन नहीं बनाने दिया जा रहा है, नरेगा में पूरा काम करने वाले मजदूरों को भी पूरी मजदूरी नहीं दी जा रही है. अलवर जिले के टपूकड़ा में हौंडा मोटर साइकिल एवं स्कूटर में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि उन्होंने 6 महीने पहले अपने कंपनी में मजदूरों के हकों के लिए यूनियन बनाने की प्रक्रिया की क्योंकि वहां पर कंपनी प्रशासन द्वारा मजदूरों का बहुत शोषण किया जा रहा था जो आज भी जारी है.

इन मजदूरों का यूनियन तो पंजीकृत होने नहीं दिया उलटे इनके ऊपर कई झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए गए जिससे डरकर वे अपने हकों की आवाज नहीं उठायें. इसी प्रकार राज्य के स्कूलों मेन पोषाहार बनाने वाली महिलाओं ने कहा कि हम प्रत्येक स्कूल मेन 4 घंटे के लिए काम करते हैं और मजदूरी के तौर पर हमें केवल  महीने का 1000 रुपये ही दिया जाता है जो न्यूनतम मजदूरी से बहुत काम है. उन्होंने मांग भी रखी कि उन्हें कम से कम न्यूनतम मजदूरी दी जाये. इसी प्रकार राज्य में किसानों की आय की कोई गारंटी नहीं है उनके भी भूखे मरने के हालत पैदा हो गए हैं. कविता श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि इस गहन संकट के दौर में सभी मजदूरों और किसानों को एक होकर अधिकारों को कुचलने वाली इस कॉरपोरेट सरकार के खिलाफ एकजुट होना होगा.

अकाल के भयंकर हालत
राजस्थान में अकाल के बहुत बुरे हालत हैं जिसकी बजह से लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है और मवेशियों के लिए चारे और पानी की ही भयंकर समस्या है लेकिन अभी तक राज्य में किसी प्रकार के कोई इंतजाम राज्य सरकार द्वारा नहीं किये गए हैं. मेले में आये लोगों ने बताया कि हमें बड़ी मसक्कत बाद गेहूं तो 2 रुपये प्रति किलो मिल जाता है लेकिन मवेशियों के लिए चारा 8-10 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. ऐसी स्थिति में पशुओं को पालना बहुत मुश्किल हो रहा है. 

नरेगा के क्रियान्वयन की स्थिति बहुत ही ख़राब
राज्य में इतने भयंकर सूखे के हालातों में नरेगा के क्रियान्वयन की स्थिति बहुत ख़राब है लोगों को काम मांगने पर काम नहीं मिल रहा है और यदि काम दे भी दिया जाता है तो मजदूरी बहुत कम दी जा रही है. राज्य की औसत मजदूरी दर 119 रुपये प्रति दिन है जो नरेगा मजदूरी से भी बहुत कम है और राज्य की न्यूनतम मजदूरी तो दी ही नहीं जा रही है. इसलिए अभी नरेगा मेन कम से कम 150 दिन का रोज़गार in हालातों मेन दिया जाये और राज्य की न्यूनतम मजदूरी मिले और पूरी मिलनी चाहिये.

शराबबंदी का देश के लिए उदाहरण वोट के माध्यम
राजसमन्द के भीम ब्लॉक के काछबली गाँव की महिलाओं और अन्य लोगों ने भी इस मेले में भाग लिया. उल्लेखनीय है कि इस गाँव में पिछले लम्बे समय से शराब के ठेकों के विरोध में एक आन्दोलन चल रहा है और पिछले 29 मार्च को जिला प्रशासन को यहाँ एक वोट कराकर लोगों की राय के अनुसार गाँव के शराब के ठेकों को बंद करने का आदेश देना पड़ा था. काछबली की सरपंच गीता देवी ने इस अवसर पर कहा कि हालांकि शराब तो अक्सर मर्द लोग पीते हैं लेकिन उसकी कीमत महिलाओं को चुकानी पड़ती है. शराब की वजह से महिलाओं को घरेलु हिंसा, मार-पीट, असमय मृत्यु की वजह से परिवारों का बर्बाद होना और बहुत कुछ झेलना पड़ता है. उन्होंने उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि हम सबको अपने लोकतान्त्रिक हकों को समझकर अपने अपने इलाकों में ऐसे आन्दोलन चलने चाहिये और शराब जैसे इस अभिशाप से मुक्त कराना होगा.

जवाबदेही की उठी मांग
पिछले लम्बे समय से राजस्थान में सूचना रोज़गार अभियान के नेतृत्व में चल रहे जवाबदेही आन्दोलन की गूँज मेले में भी सुनाई दी. अभियान के निखिल डे ने कहा कि 1 दिसम्बर 2015 से 10 मार्च 2016 तक एक 100-दिवसीय राज्य स्तरीय यात्रा अभियान द्वारा चलाई गयी और जवाबदेही कानून का मसौदा भी सरकार को सौंपा गया है लेकिन आज तक कोई पुख्ता कार्यवाही इस पर नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार अब इस आवाज़ को अनसुना नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि आम व्यक्ति के रोज़मर्रा के जीवन में उनकी शिकायतें सुनने और उनके निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं है और उन्हें अपनी शिकायतों के लिए दर–दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं. उन्होंने मेले के मंच से राजस्थान सरकार से एक बार फिर मांग की कि वो अपने ‘गुड गवर्नेंस’ के वादे को पूरा करते हुए आम लोगों की शिकायतें सुलझाने के लिए एक पुख्ता व्यवस्था कायम करने और जवाबदेही कानून को पास करने की ओर कोई पुख्ता कदम उठाये वर्ना राजस्थान की जनता के पास आन्दोलन के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा.

इस अवसर पर आन्दोलनों के विभिन्न गाने गाये गए. आस-पास के कई गाँवों से हजारों लोगों ने इस मेले में शिरकत की, अपनी शिकायतें भी लिखवाईं और पारदर्शिता, जवाबदेही और मजदूरों के हकों के लिए आगे होने वाले आंदोलनों में अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया. 

शंकर सिंह, नारायण एवं अन्य सभी साथी
मजदूर किसान शक्ति संगठन की ओर से

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