किसी अखबार ने नहीं छापी एमसीडी भर्ती घोटाले की खबर, एक अधिकारी ने सबको मैनेज किया

सभी खबर अगर समाचारपत्र और न्यूज चैनल में चलती तो शायद भड़ास की जरूरत न पड़ती। आखिरकार आज मुझे भी पत्रकार होते हुए अपनी वेदना को लोगों तक पहुंचाने के लिए भड़ास का सहारा लेना पड़ रहा है। दिल्ली नगर निगम (उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली) में प्रचार सहायक के छह पदों के लिए निकाली गई भर्ती में आरक्षित वर्ग का कोटा समाप्त करने वाले अधिकारी योगेन्द्र सिंह मान ने अपने रसकू और पद के दम पर पत्रकारों को मैनेज कर लिया है। कुछ पत्रकार इसलिए खबर नहीं लिख पाए कि उनके, उनसे ताल्लुकात है। जिन पत्रकारों ने खबर लिखने की हिम्मत दिखाई उन पत्रकारों को पहले तो स्वयं फोन कर खबर रोकने का प्रयास किया गया। जब बात नहीं बनी तो ऊपर (चीफ रिपोर्टर और एडिटर) से फोन कर मैनेज कर लिया गया।

जबकि कई समाचारपत्रों में ऊपर से भी बात नहीं बनने पर समाचारपत्र के मालिकों तक फोन करा कर खबर को रूकवा दिया गया। दिल्ली के किसी भी चैनल और समाचारपत्र ने इस खबर को दिखाने की हिम्मत नहीं दिखाई। यही निगम के इस अधिकारी की पहुंच इतनी उम्दा है कि एक निजी चैनल के वरिष्ठ संवाददाता (एसआईटी) तक के रिपोर्ट को रुकवा दिया गया। रिपोर्टर ने बस यही गलती कर दी कि भर्ती निकालने वाले का पक्ष जानने चले गए। इसके बाद क्या था ऑफिस पहुंचने से पहले ही खबर रोकने का फोन रिपोर्टर के पास पहुंच गया।

ऐसा भी नहीं है कि खबर चलाने के लिए पुख्ता सबूत नहीं है। जिन्दगी लाईव फाउंडेशन की शिकायत पर केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग, दिल्ली ओबीसी आयोग, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के भर्ती रोकने के आदेश होने के बाद भी यह किसी भी समाचारपत्र और न्यूज चैनल में खबर नहीं बनी। स्थायी समिति के पूरी तरह से भर्ती पर रोक लगाने से पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त के भर्ती में कोटा खत्म करने पर जांच के आदेश की खबर चुनिंदा समाचारपत्रों में थी। खबर छपने पर रिपोर्टरों की शिकायत चीफ रिपोर्टर और एडिटर यहां तक की मार्किटिंग मैनेजर से भी की गई। जबकि स्थायी समिति की बैठक में(दैनिक जागरण, हरीभूमि, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, देशबंधु, हिन्दुस्तान, हिंदुस्तान टाईम्स, इंडियन एक्सप्रेस, नवोदय टाईम्स, पंजाब केसरी, राष्ट्रीय सहारा, विराट वैभव, दिल्ली आजतक, सहारा समय और अन्य न्यूज चैनल भी मौजूद थे) 

मैं इस उम्मीद के साथ भड़ास पर यह खबर को भेज रहा हूं कि यहां पर तो अवश्य ही खबर चलेगी। यदि संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं है, वरना भड़ास में भी फोन आ सकता है। खैर मैं अपना काम कर रहा हूं, बाकी देखा जाएगा। 

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