संकट की इस घड़ी में मीडिया न करे सोशल पुलिसिंग

संजय सक्सेना, लखनऊ

लखनऊ। एक तरफ कोरोना का खौफ बढ़ता जा रहा है तो दूसरी तरफ कुछ समाचार चैनलों के एंकर स्टूडियों में बैठकर पुलिस को सोशल पुलिसिंग का पाठ पढ़ाने में लगे हैं। वह पुलिस को बता रहे हैं कि उन्हे लाक डाउन का उल्लंघन करने वालों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।

यह वही मीडिया है जो आज पुलिस की सख्ती पर सवाल खड़ा कर रहा है तो कल अगर हालात जरा भी ज्यादा खराब हुए तो मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराने लगेगा। ऐसा लगता है कि इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनलों के रिपोर्टरों और एंकरों ने यह भ्रांति पाल रखी है कि देश चलाने की जिम्मेदारी जनता ने मोदी को नहीं उन्हें दे रखी है। इसी लिए तो यह लोग न मौके की नजाकत भांप पा रहे हैं, ना ही यह समझने की कोशिश करना चाहते हैं कि जब देश पर इतना बढ़ा संकट आया हो तो सरकार के साथ-साथ उनकी भी जिम्मेदारी है कि वह जनता को जागरूक करें।

जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ),तमाम राज्यों की सरकारें केन्द्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हों यहां तक की कांगे्रस और राहुल गांधी जैसा धुर मोदी विरोधी नेता तक मोदी सरकार के कोरोना को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की सराहना कर रहा है तो मीडिया को जरा-जरा सी बात पर ‘मंथरा’ की तरहा विलाप नहीं करना चाहिए। न जाने किस मजबूरीवश मीडिया यह समझने की कोशिश ही नहीं कर रहा है कि जब चुनौती बड़ी है तो उससे निकलने के रास्ते भी उतने ही कठिन होंगे। किसी व्यक्ति विशेष की समस्या को उठाकर ढ़िंढोरा पीटना, त्राहिमाम करने लगना इस समय मीडिया के किसी वर्ग को शोभा नहीं देता है।

अब मीडिया को कौन समझाए कि लाकडाऊन का उल्लंघन करके जो लोग बेवजह सड़क पर घूम रहे हैं वह पूरे मानव समाज के लिए खतरा हैं। पुलिस ऐसे ही किसी पर लाठी नहीं चलाने लगती है। पुलिस फील्ड पर काम कर रही है। वह पहले लाकडाउन में बाहर निकलने वालों से निकलने का कारण पूछती है,जब कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाता है तो फिर उसके साथ सख्ती तो बनती ही है।

बहरहाल, कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश में भी पूरे देश के साथ-साथ लॉकडाउन है, लेकिन कुछ लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे सभी लोगों पर कार्रवाई तेज कर दी है,जो जरूरी भी है। गत दिवस उत्तर प्रदेश भर में बिना वजह लाॅकडालन का उल्लंघन करके बाहर सड़क पर घूम रहे लोगों पर बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए गए, वहीं लोगों के वाहनों का चालान करने के साथ कई जगह वाहन जब्त भी किए गए।

अच्छी बात यह है कि लॉकडाउन के दौरान पुलिस गड़बड़ी करने वालों से पूरी सख्ती से निपट रही है। डीजीपी हितेशचंद्र अवस्थी की ओर से दिए गए कड़ी कार्रवाई के निर्देश के तहत पुलिस ने धारा 188 के तहत 2941 मुकदमे दर्ज किए हैं। लॉकडाउन का पालन कराने के लिए प्रदेश में 6193 स्थानों पर नाकाबंदी की गई है, जहां वाहनों की सघन जांच की जा रही है। पुलिस ने 76,241 वाहनों का चालान किया है और 6461 वाहन सीज किए गए हैं। संकट के इस दौर में लॉकडाउन के दौरान अपने जिलों में फंसे रह गए पुलिसकर्मियों की भी सेवाएं ली जा रही हैं। ऐसे पुलिस कर्मियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा रही है।

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना लाकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश के बार्डर पर पैदल आ रहे मजदूरों और कर्मकारों के लिए मानवीय आधार पर विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव परिवहन और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को निर्देशित किया है कि मानवीय आधार पर ऐसे व्यक्तियों के लिए भोजन व पानी की व्यवस्था की जाए और स्वास्थ्य संबंधी पूरी सावधानी बरतते हुए इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।

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