विपक्ष के हर मुद्दे और आरोप पर जवाब देने के लिए न्यूज चैनल एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं!

Ashwini Kumar Srivastava : भाजपा को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती… विपक्ष के हर मुद्दे और आरोप पर जवाब देने के लिए मीडिया ही एड़ी-चोटी का जोर लगा देता है… अब देखिये, जैसे ही मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ईवीएम पर अपने आरोपों को दोहराया, ऐन उसी वक्त टीवी चैनलों पर ईवीएम को अभेद्य साबित करने के लिए होड़ मच गयी…

यानी विपक्ष को यह समझना होगा कि मीडिया भी भाजपा के बाकी सहयोगी संगठनों जैसे एबीवीपी आदि की तरह ही है। लिहाजा विपक्ष को अपना संघर्ष अब प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया के जरिये न करके सड़कों पर उतर के, धरना प्रदर्शन करके या क़ानूनी दांवपेंच अपना कर करना होगा। वरना विपक्ष एक दिन यूँ ही भाजपा से बिना लड़े मीडिया के हाथों ही ख़त्म कर दिया जाएगा।

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जब से सत्ता पाये हैं मोदी जी, वह भी कांग्रेस की ही तरह अड़ गए हैं- ‘चुनाव तो अब ईवीएम से ही होगा!’ अब देखिये जब कांग्रेस ने 10 साल तक छक्के छुड़ा रखे थे, तब आडवाणी-स्वामी समेत सारी भाजपा ईवीएम को लेकर हाय तौबा मचाती रही। आज भाजपा के प्रवक्ता बने बैठे नरसिम्हा ने तो तब एक मोटी सी किताब ही लिख मारी इस मसले पर कि कैसे कांग्रेस ने ईवीएम के जरिये देश पर कब्ज़ा कर लिया है। फिर भाजपा सुप्रीम कोर्ट भी चली गयी। अभी तक केस चल रहा है। अब जब सुप्रीम कोर्ट भाजपा वाले ही केस में केंद्र सरकार को कह रहा है कि आपका आरोप सही है और ईवीएम से सही चुनाव नहीं हो पा रहा इसलिए आप वीवीपीएटी सिस्टम भी लगाइये तो भाजपा सरकार ही तीन साल से बहानेबाजी कर रही है और कह रही है कि ईवीएम में कोई दिक्कत नहीं है। सब आरोप झूठे हैं।

बताइये खुद ही के किये मुक़दमे में खुद ही कई साल बाद कह रहे हैं कि सब आरोप झूठे हैं और ईवीएम सही है। दरअसल आडवाणी जी को लगता था कि कांग्रेस ईवीएम से धांधली करके सरकार बनाती है। जब से मोदी जी आये हैं, उन्होंने आडवाणी समेत सारी पुरानी भाजपा को गलत बताते हुए साबित कर दिया है कि बिना ईवीएम में धांधली किये ही यूपी में तकरीबन सारी लोकसभा की सीट और 325 विधानसभा की सीट भी जीती जा सकती है। भाई अडवाणी के मुकाबले मोदी ज्यादा बड़े और पॉपुलर नेता हैं इसलिए ऐसा चमत्कार कर ले रहे हैं।

लेकिन पता नहीं क्यों जब से सत्ता पाये हैं मोदी जी, वह भी कांग्रेस की ही तरह से अड़ गए हैं कि चुनाव तो अब ईवीएम से ही होगा। ईवीएम में न तो कोई खराबी है और न ही ईवीएम के साथ कोई नया सिस्टम भी लगाया जाएगा। हो सकता है मोदी जी ऐसा इसलिए कर रहे हों क्योंकि वह लुप्तप्राय ईवीएम को देश में बचाना चाहते हों। वह न चाहते हों कि 15 साल से इस पर आरोप लगाने वाले सभी दल मिलकर इसे भारत से गायब ही कर दें। ईवीएम के संरक्षण के लिए मोदी जी का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय ही माना जाएगा।

लखनऊ के पत्रकार और उद्यमी अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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