लखनऊ के इस महाघूसखोर ने डिप्टी सीएम का नाम लेकर पत्रकार से उद्यमी बने शख्स को धमका डाला!

योगी आदित्यनाथ का राज रहा हो या फिर इससे पहले अखिलेश राज, सत्ताधारी पार्टी का झंडा या सत्ताधारी पार्टी से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जुड़ाव ही यूपी में सबसे बड़ा कानून है। नेता और कार्यकर्ताओं का तो खैर पूछना ही क्या, सत्ताधारी दल के सरंक्षण में पल रहे भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के तेवर भी किसी राजा-महाराजा से कम नहीं …

जेल-थानों में मर्डर को जायज ठहराने वाली ‘भक्त’ मानसिकता की पड़ताल

Ashwini Kumar Srivastava मुन्ना बजरंगी के जेल में मारे जाने की घटना पर भाजपा समर्थक गजब प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्हें गुस्सा आ रहा है, जैसे ही भाजपा विरोधी यह पूछ रहे हैं कि बताओ जेल में मार डाला…तो अब यूपी में योगी राज में क्या लोग थानों और जेलों में भी मारे जाएंगे? इस …

अमृत चख कर लीडा की कुर्सी पर बैठे एसपी सिंह को योगी सरकार ने अब मृत्युलोक के तमाम आम प्राणियों की तरह नश्वर बना दिया

औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को कोई अफसर अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह नहीं चला पायेगा…

Ashwini Kumar Srivastava : प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में बरसों से कुंडली मारकर बैठे भ्रष्ट अफसरों-कर्मियों के लिए आज बड़ा ही बुरा दिन है। राज्यपाल ने आज आठ विधेयकों को अंतिम मंजूरी दी है, जिसमें वह संशोधन भी शामिल है, जिसके तहत अब औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अफसर-कर्मी भी प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों में ट्रांसफर करके भेजे जा सकेंगे।

रिश्वत के लिए फाइल पर कुंडली मार कर बैठ जाता है ये अफसर, कंप्लेन पर पीएमओ भी सक्रिय

Ashwini Kumar Srivastava : 2018 की तरफ बढ़ते हुए मुझे एक बेहद बड़ी खुशखबरी यह मिल रही है कि भ्रष्टाचार और एक भ्रष्टाचारी अफसर एसपी सिंह के खिलाफ चल रही मेरी लड़ाई को खुद प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में ले लिया है। दोनों ही जगहों से बाकायदा मेरी शिकायत पर न सिर्फ ताबड़तोड़ जांच आरंभ हो गई है बल्कि मेरी वह सितंबर में की गई सबसे पहली शिकायत को भी पीएमओ ने दोबारा जीवित करवा दिया है, जिसे इस भ्रष्टाचारी अफसर एसपी सिंह ने न जाने कैसे सांठ-गांठ करके निस्तारित करवा दिया था।

एक बिल्डर का आरोप- ”योगी जी के सजातीय एसपी सिंह निरंकुशता और भ्रष्टाचार की जीती जागती मिसाल बन चुके हैं”

Ashwini Kumar Srivastava : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक तरफ इस वक्त देश और दुनिया के उद्योगपतियों को यह बताने में व्यस्त हैं कि उत्तर प्रदेश में अब सारे अफसर सुधर गए हैं और भ्रष्टाचार कहीं नहीं है इसलिए आइये और यहां उद्योग-धंधे लगाइये तो ऐन इसी वक्त यहां के बेखौफ और भ्रष्ट अफसर उद्योगपतियों और उद्योगों की ही खटिया खड़ी करने में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री खुद और औद्योगिक विकास मंत्रालय के छोटे-बड़े हर अफसर समेत उप मुख्यमंत्री, कई वरिष्ठ मंत्री व कई अन्य विभाग इन दिनों राज्य में 2018 की फरवरी में होने वाले निवेश सम्मेलन की तैयारी में जीजान से जुटे हुए हैं।

यशवंतजी हमलावरों को अपनी कलम की ताकत से धूल चटा देंगे : अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

Ashwini Kumar Srivastava : दुनिया में कुछ लोग विलक्षण प्रतिभा के साथ आते हैं। जाहिर है, ऐसे लोग भीड़ और भेड़चाल से अलग होते हैं और अमूमन इसका खामियाजा भी भुगतते हैं…कभी रोजी-रोटी के बेहिसाब संघर्ष से जूझ कर तो कभी सभी तरह के आम इंसानों की आंख की किरकिरी बनकर। Yashwant Singh ने जब से भड़ास ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब ही से मैं उनका मुरीद रहा हूँ। उन्होंने बेबाकी और साहस से भड़ास फ़ॉर मीडिया का जो अद्भुत सफर तय किया, उस सफर में उनके साथ इस सफर की शुरुआत करने वाले तकरीबन सभी दोस्त उनके कोपभाजन का शिकार हुए और दुश्मन भी बने। उनके अलावा, यशवंत जी ने बेशुमार नए दुश्मन भी तैयार किये।

मोदी सरकार ने रियल एस्टेट उद्योग को सबसे बुरे दिनों के दर्शन करा दिए!

Ashwini Kumar Srivastava : अच्छे दिन लाने के नाम पर आई मोदी सरकार ने देश के साथ क्या सुलूक किया है, यह तो पता नहीं लेकिन कम से कम रियल एस्टेट उद्योग को तो जरूर ही उन्होंने मनमोहन सरकार के 10 बरसों के स्वर्णिम दौर से घसीट कर सबसे बुरे दिनों के दर्शन करा दिए हैं। पहले तो सरकार में आते ही काले धन के खिलाफ अभियान छेड़ने की धुन में न जाने कितने सनकी कानून बनाये या पुराने कानून के तहत ही नोटिस भेज-भेज कर देशभर को डराया….फिर बेनामी सम्पति कानून का ऐसा हव्वा खड़ा किया कि शरीफ आदमी भी दूसरा फ्लैट/मकान या प्लॉट लेने से कतराने लगा। ताकि कहीं उसकी किसी सम्पति को बेनामी करार देकर खुद सरकार ही न हड़प ले।

योगी के रूप में हिन्दू राज लौटने से कबीलाई नृत्य कर रहे सवर्णों, जरा ये भी सुनो

Ashwini Kumar Srivastava : हिन्दू राज की आड़ लेकर ऊंच-नीच, छुआ-छूत वाली वर्णव्यवस्था को लाकर भारत को तलवारों/तीरों और राजा-सामंतों के युग सरीखी मानसिकता में वापस ले जाने में लगे बुद्धिमानों… क्या तुम्हें यह भी पता है कि नासा के जरिये अमेरिका इन दिनों बहुत ही जोरों शोरों से इस संसार में सबसे तेज चलने वाले प्रकाश यानी लाइट से भी तेज गति से चलने वाले रॉकेट बनाने में जुटा हुआ है?

लखनऊ के पत्रकार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव को लगा चूना, डिजिटल बैंकिंग से किया तौबा

Ashwini Kumar Srivastava : 16-17 बरसों से क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग करते रहने के बाद कल जीवन में पहली बार किसी महापुरुष ने मुझे भी डिजिटल बैंकिंग के खतरों से रूबरू करा दिया।  सिटीबैंक के मेरे क्रेडिट कार्ड से किसी ने बहुत ही काबिलियत के साथ रकम उड़ा दी और मैं कुछ भी नहीं कर पाया। हालाँकि रकम बहुत ही छोटी सी है और अब मैंने वह कार्ड ही बंद कर दिया है लेकिन उस घटना ने मेरे मन में भी डिजिटल बैंकिंग को लेकर खासी दहशत पैदा कर दी है।

इस सीट पर ईवीएम से छेड़छाड़ न कर सके तो हार गई भाजपा!

Ashwini Kumar Srivastava : यह है मेरठ की उसी सीट से जुड़ी खबर, जिस पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस भयंकर मोदी तूफ़ान में भी हार गए थे। ईवीएम के साथ वीवीपीएटी की चाक चौबंद व्यवस्था में यहाँ 11 फ़रवरी को मतदान हुआ। इसके बाद जहाँ ईवीएम मशीन रखी गयी, वहां हर समय मौजूद रहने वाले व्यक्ति की लाश गटर में मिली। यानी इस बात की पूरी सम्भावना है कि मतदान के बाद यहाँ रखी ईवीएम से छेड़छाड़ की कोशिश की गयी, जिसे इस व्यक्ति ने देख लिया और इसी के चलते यह हत्या हो गयी।

विपक्ष के हर मुद्दे और आरोप पर जवाब देने के लिए न्यूज चैनल एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं!

Ashwini Kumar Srivastava : भाजपा को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती… विपक्ष के हर मुद्दे और आरोप पर जवाब देने के लिए मीडिया ही एड़ी-चोटी का जोर लगा देता है… अब देखिये, जैसे ही मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ईवीएम पर अपने आरोपों को दोहराया, ऐन उसी वक्त टीवी चैनलों पर ईवीएम को अभेद्य साबित करने के लिए होड़ मच गयी…

घबराइये कि आप उत्तर प्रदेश में हैं…

संक्रामक बीमारियों का मौसम है इसलिए मुस्कराइये नहीं, बल्कि घबराइये…. क्योंकि आप लखनऊ में हैं। मैं खुद भी तब से बहुत ज्यादा घबराने लगा हूँ, जब दो साल पहले मुझे एक रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। यहाँ समूची व्यवस्था चरमराई हुई है। जब तक आपका वास्ता यहाँ के अस्पताल, थाने, कोर्ट जैसी मूलभूत जरूरतों वाली संस्थाओं और उनके तथाकथित रखवालों यानी डॉक्टर, पुलिस या वकील से नहीं पड़ता तब तक आपको भी मेरी ही तरह शायद यही गुमान होगा कि हमारे लिए सरकार और प्रशासन ने बहुत कुछ इंतेजाम कर रखे हैं।