Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबारों में भाजपा का विज्ञापन मेरी इस पोस्ट को सही साबित करता है, चुनावी व्यवस्था की धज्जियां उड़ाता है पर खबर? 

संजय कुमार सिंह-

आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड है, “नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के मतदाताओं से कहा : बजट मध्यम वर्ग के लिए सबसे अनुकूल हैं”। अब आप पता लगाइये कि 1975 में इमरजेंसी क्यों लगी थी। तब क्या हालात थे और ‘संविधान विरोधी’ इमरजेंसी लग कैसे गई। उनके खिलाफ हाईकोर्ट में मुकदमा क्या था और फैसला क्या आया और सुप्रीम कोर्ट में उसका क्या हुआ। फिर आज की स्थिति से तुलना कीजिये कि और नोट कीजिये कि तब जजों में कोई लोया नहीं हुए थे। हालांकि, उसकी अलग कहानी है। आज खबर यह भी है कि अरविन्द केजरीवाल के अनुसार भाजपा घबराई हुई है तथा अमित शाह शक्ति का उपयोग कर रहे हैं। तथ्य यह है कि वैसे तो बजट के बाद मतदान ही गड़बड़ है और फिर बजट की घोषणाएं अपनी जगह, विरोध की खबरें गायब (या अदृश्य)। अखबारों में इसपर खबर छपनी चाहिये थी कि बजट दिल्ली के अधिकांश मध्यमवर्गीय मतदाताओं को प्रभावित करने वाला है। कितनी छपी आपने देखा होगा। मैंने कल अपनी टिप्पणी यहां नहीं लिखी थी। पर आज यह विज्ञापन और इंडियन एक्सप्रेस की खबर भाजपा की कथित रणनीति का पूरा खुलासा कर देती है। केजरीवाल ने कहा भी है हालांकि वह बजट के प्रचार की तुलना में बहुत कम छपा है लेकिन सब चंगा सी। ‘इमरजेंसी बहुत बुरी थी। इंदिरा गांधी तानाशाह थीं’।    

द हिन्दू में कल (02 फरवरी 2025) प्रकाशित एक चित्र और विवरण के साथ मैंने लिखा था, “मध्यम वर्ग के लिए घोषणाएं दिल्ली के मतदाताओं के लिए हैं आप जानते हैं कि बड़ी संख्या में इकट्ठे रहते हैं और सात की सात सीट भाजपा को दे चुके हैं। पांच फरवरी को वोट डालना है और दो को यह खबर। फिर चुनाव प्रचार बंद हो जायेंगे।” इसमें मैंने यह भी लिखा था, केंद्रीय बजट को रोकना (या मतदान बजट से पहले करा देना) वैसे ही मुश्किल है जैसे किसी को कुम्भ में मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा रखने और कोशिश करने से। नियमतः यह विज्ञापन शायद पांच को मतदान वाले दिन भी छप सकता है। अभी ट्वीटर पर प्रधानमंत्री के भाषण का एक अंश सुन रहा था उसमें वे कह रहे थे कि इंदिरा गांधी के जमाने में आप 12 लाख कमाते तो कितना टैक्स लगता। मैंने इसपर लिखा है, “इस भाषण से वोटर विशेष ही प्रभावित होंगे। ये होता तो वो होता में 15 लाख आ गये होते तो क्या होता भी बताना चाहिये…. हालांकि आये ही नहीं वो कम शर्मनाक नहीं है और काला धन था तो लाया क्यों नहीं और नहीं था तो झूठ क्यों बोला? राहुल गांधी जब तक नहीं पूछ रहे हैं तब तक बोलने दीजिये।”

निजी व्यस्तताओं और दाल रोटी के चक्कर में मैं यह कॉलम नियमित नहीं लिख पा रहा हूं लेकिन बिना लिखे रहा भी नहीं जा रहा है। इसलिए आज यही बताता हूं कि इंडियन एक्सप्रेस की लीड मेरे किसी और अखबार में है कि नहीं क्योंकि नहीं होने का मतलब है और आप उसे समझ सकते हैं। एक वोटर और पाठक के रूप आपको जानना भी चाहिये। अमर उजालामें चार कॉलम के विज्ञापन के साथ चार कॉलम की लीड का शीर्षक है, भारत के इतिहास में मध्य वर्ग के लिए सबसे अनुकूल बजट : मोदी। कहने के लिए कहा जा सकता है कि जो विज्ञापन है और वही खबर है। इसलिए खबर को प्रधानमंत्री का दावा होने के बावजूद कम महत्व दिया जा सकता था। यही नहीं, चुनाव के समय प्रधानमंत्री के ऐसे बजट और चुनाव प्रचार को रेखांकित करने की जरूरत है। कायदे से तो (जनहित में) सरकार के प्रचार वाली ऐसी खबरों का मतदान से पहले विरोध और बायकाट भी किया जाना चाहिये था और इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक अमर उजाता के शीर्षक से बहुत अलग है, हालांकि बात वही कहता है। उदाहरण के लिए, द ट्रिब्यून में भी यही खबर लीड है लेकिन शीर्षक है, अंतिम झटका देते हुए मोदी ने दिल्ली के मतदाताओं को ‘सबसे अनुकूल’ बजट से प्रभावित किया। 

नवोदय टाइम्स में भाजपा के विज्ञापन के साथ एक और विज्ञापन है इसलिए खबरों की जगह कम है और भाजपा का प्रचार खबर के रूप में पहले पन्ने पर तो नहीं है। द टेलीग्राफ ने इस खबर को सिंगल कॉलम में छापा है और शीर्षक है, मध्यम वर्ग का ‘मित्र’ दिल्ली के मतदाताओं के दरवाजे पर। यहां जोर मध्यम वर्ग का मित्र होने पर है जो बजट के जरिये दिखाने का प्रयास किया जा रहा है जबकि अपने काम से वे न सिर्फ तमाम अदाणियों, ब्रजभूषणों, माधवियों के साथ देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश तक का पारिवारिक मित्र होना दिखा चुके हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा था कि दिल्ली के लिए बजट में घोषणा नहीं होगी बीजेपी के विज्ञापन में बताया जा रहा है कि दिल्ली वालों के लिए बजट में क्या घोषणा हुई है

हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर विज्ञापन नहीं है और चार  कॉलम की लीड का शीर्षक है, दिल्ली रैली में मोदी ने अब तक के सबसे अनुकूल (मित्रवत) बजट की प्रशंसा की। टाइम्स ऑफ इंडिया में विज्ञापन के साथ वित्त मंत्री का बयान लीड है। शीर्षक है, हम आयकर कानून को इक्कीसवीं सदी के अनुकूल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बजट के मोदी प्रचार की खबर को शहरी खबरों के पन्ने पर तीन कॉलम में लीड बनाया है। यहां शीर्षक वही प्रचारक वाला है,  मध्यम वर्ग के लिए इतिहास का सबसे अनुकूल बजट। 

दि एशियन एज ने प्रधानमंत्री के प्रचार की खबरों को ही लीड बनाया है और इसमें मध्यम वर्ग, गरीबों को प्रभावित करने की सूचना फ्लैग शीर्षक के रूप में है जबकि मुख्य शीर्षक यह घोषणा है, “झुग्गियां नहीं गिराई जायेंगी : मोदी ने आप के ‘झूठ, घोटालों’ की निन्दा की”। द हिन्दू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव प्रचार को सेकेंड लीड बनाया है और शीर्षक है, राजधानी की अंतिम चुनाव रैली में मोदी ने आप पर हमला किया और जनता के बजट की प्रशंसा की। आप का हमला इंडियन एक्सप्रेस में सिंगल कॉलम में सिमट गया है और अखबारों से लगता है जैसे कांग्रेस ने कल मौन व्रत रखा था। अकेले नवोदय टाइम्स ने तीनों की बराबर में क्रम से छापा है। अमर उजाला में लीड, विज्ञापन के अलावा चार कॉलम की खबर है, “आयकर कटौती के लिए नौकरशाहों को समझाने में वक्त लगा : निर्मला”। उपशीर्षक है, पीएम मोदी पूरी तरह इसके समर्थन में थे। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा करने से पहले 2024 के चुनाव नतीजों के बाद वे पूछ चुके थे, ईवीएम जिन्दा है कि मर गया। सबको पता है कि ऐसा सीटें कम होने के बाद पूछा गया था और अब अगर वे बजट में इसके समर्थन में थे तो क्यों थे। विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के सबसे बड़े वर्ग को दी गई इस छूट का देश के राजस्व पर जो असर हो इसका उपयोग चुनाव प्रचार के लिए किया जा रहा है और इसमें कोई शक नहीं है। इसकी चर्चा अखबारों को करनी थी तो वो आपने देख लिया। चुनाव आयोग के बारे में आप जानते हैं कि नियुक्ति प्रधानमंत्री ने स्वयं कैसे की है। ऐसे में राहुल गांधी जब भाजपा मतलब स्टेट कहते हैं तो वह राष्ट्र हो जाता है और राष्ट्र पर कब्जे की यह (और ऐसी) खुली कोशिश गौण हो गई है। 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन