मुस्लिम औरतों की बोली लगवाने के खेल में शामिल इस हिंदू लड़की के बारे में कितना जानते हैं आप!

विकास ऋषि-

देखिये उन्होंने आपके बच्चों को क्या बना दिया। 3 जनवरी को मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने बेंगलुरु से एक 21 वर्षीय इंजीनियरिंग स्टूडेंट को हिरासत में लिया था। इसका नाम है विशाल कुमार झा है, लेकिन विशाल इस मामले में सहआरोपी है। मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने उत्तराखंड से एक 18 वर्षीय युवती को भी हिरासत में लिया है जिसे मुख्य आरोपी बनाया गया है।

आरोपी विशाल झा
आरोपी श्वेता सिंह

युवती का नाम श्वेता सिंह है। वो उत्तराखंड के किसी मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है। विशाल कुमार झा और मुख्य आरोपी युवती एक दूसरे को जानते थे। बुल्ली बाई ऐप से संबंधित तीन अकाउंट ये युवती ही हैंडल कर रही थी। विशाल और श्वेता दोनों बिहार के निवासी हैं।

विशाल कुमार झा ने खालसा सुपरिमेसिस्ट नाम से एक अकाउंट बनाया था। 31 दिसंबर के रोज़ विशाल ने दूसरे अकाउंट्स के ऐसे नाम रख दिए, जिनसे लगे कि उन्हें सिख समुदाय के लोगों ने बनाया है। फर्ज़ी खातों को खालसा पंथ से जुड़ा दिखाया गया।

बुल्ली बाई एप पर गुरुमुखी में मुस्लिम महिलाओं के विरुद्ध बातें लिखी गईं और इस ऐप का दोष सिख समुदाय पर मढ़ने की कोशिश की गई। किसान आंदोलन के बाद सिख समुदाय किस तरह कथित राष्ट्रवादियों के निशाने पर है ये बात किसी से छिपी नहीं है।

इनमें से कई अकाउंट्स में पंजाबी सेलेब्रिटीज़ की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। इन अकाउंट्स से लगातार ऐसे ट्वीट और पोस्ट डाले जा रहे थे, जिनसे लगे कि किसान आंदोलन को खालिस्तानी समूहों द्वारा हाईजैक कर लिया गया है। इसके साथ ही सिख समुदाय से जुड़ी बातों को उग्रवाद से जोड़कर दिखाया जा रहा था। जो सिख इन बातों से असहमति जताते, उन्हें इन अकाउंट्स से फर्ज़ी सिख बताया जा रहा था।

पूरे ऑपरेशन में हिंदू राष्ट्रवाद और भारत सरकार के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई, वो भी सिख समुदाय के नाम के हैंडल्स से। ये पूरा षडयंत्र इसलिए भी परेशान करने वाला था, क्योंकि इन फेक अकाउंट्स में से कई को समाचार वेबसाइट्स ने अपनी खबरों तक में एम्बेड कर लिया था।

सुल्ली डील्स या बुल्ली बाई जैसे ऐप्स सिर्फ एक तरह का टार्गेट नहीं चुनते। ये एक तीर से दो निशाने लगाते हैं। जैसे बुल्ली बाई ऐप के मामले में मुस्लिम महिलाओं के साथ साथ सिख समुदाय को भी बदनाम करने की मंशा साफ नजर आती है।

कुछ वक्त पहले की ही बात है, टी20 वर्ल्ड कप के एक मुकाबले में भारत की मेन्स क्रिकेट टीम पाकिस्तान की टीम से हार गई। इसके बाद हार का दोष मोहम्मद शमी पर मढ़ दिया गया। क्यों, ये अलग से बताने की ज़रूरत नहीं है। तब क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने मुखर होकर मोहम्मद शमी का बचाव किया था।

इसके बाद विराट कोहली की 9 महीने की बेटी का रेप कर देने की ऑनलाइन धमकी मिली। तब इस बात का प्रचार किया गया कि ये धमकी पाकिस्तान से आई है। लेकिन 2 नवंबर 2021 को ऑल्ट न्यूज़ पर छपी मुहम्मद ज़ुबैर की खबर बताती है कि जिस अकाउंट से धमकी आई थी, वो पाकिस्तानी नहीं, भारतीय था।

11 नवंबर को इंडियन एक्सप्रेस में श्रीनिवास जनयाला की खबर छपी। इसमें उस भारतीय का नाम भी सामने आ गया जिसने धमकी दी थी। ये आईआईटी हैदराबाद से 2019 में पासआउट हुआ रामनागेश अकुबाथिनि था। जिसे एक फूड डिलिवरी ऐप द्वारा उस साल सबसे बड़े पैकेजेस में से एक पर हायर भी किया गया था। बावजूद इसके रामनागेश इस तरह की हरकतें करता पकड़ा गया।


दीपांकर-

हम लोग सोचते थे कि कम से कम नफ़रती मानसिकता से वो लोग तो निकलेंगे, जिनके करीबियों को इस महामारी ने निगला है, जिनके परिवार के लोगों को अस्पताल में बेड नहीं मिला ऑक्सीजन नहीं मिली, जिन्होंने अपनों को खोया.

लेकिन वो भी नहीं सुधरे.

अभी भी यक़ीन नहीं होता कि जिस लड़की ने पिछले ही साल अपने पिता को कोविड महामारी में खोया है वो दूसरी औरतों की बोली लगवाने के खेल में शामिल थी.


सत्येंद्र पीएस-

बुल्ली बाई श्वेता सिंह को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में गिरफ्तार कर लिया गया। श्वेता सिंह इंटर पास करके इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही हैं। 3 बहनों और एक भाई में दूसरे नम्बर पर हैं। इनके बाप पिछले साल कोरोना से मर गए थे। मां 2011 में कैंसर से मर गई थी। घर का खर्च उत्तराखंड सरकार द्वारा कोविड से अनाथ हुए बच्चों को दिए जा रहे 3,000 रुपये महीने से चलता है।

श्वेता और इनकी गिरोह ने जिन महिलाओं के खिलाफ अभियान चलाया था, वह उच्च शिक्षित, समाज में बहुत बेहतर तरीके से स्थापित, सहृदय और नेक महिलाएं हैं। शायद उनमें लखनऊ की Sadaf Jafar भी हैं। उनका पूरा परिवार ऐसा है कि अगर इस सरकार की विचारधारा और लम्पटगीरी के बजाय श्वेता सिंह सदफ जफर को अपना आदर्श बनातीं तो निश्चित रूप से न सिर्फ उनकी आर्थिक हालत बेहतर होती, बल्कि वह अच्छी मनुष्य भी बन पातीं।

इस सरकार ने देश का क्या हाल कर डाला, समझ में नहीं आता। Om Shankar के शब्दों में कहें तो यहाँ का समाज बजबजाते नाले में पड़ा है, नेता उन्हें उसी में और डुबाए रखना चाहते हैं। इस सरकार ने कहा कि यही तुम्हारे हिस्से का सुख है और इसी नाले में सुख महसूस करो, इसी पर गौरव करो। ध्यान रहे कि भाजपा आरएसएस का कोई अदना नेता भी हमारे जैसे लोगों से दुर्व्यवहार नहीं करता, लेकिन उन्होंने ड्रैकुला की एक फौज तैयार कर रखी है।

मेरे परिचित में भी जितने भी बच्चे योगी मोदी भक्त या इस सरकार के लिए गाली गलौज कर रहे हैं, ज्यादातर बेकार हैं। कुछ नौकरी खोज रहे हैं, कुछ घिसट पिसट कर सरकारी स्कूलों में कोई डिग्री बटोर रहे हैं, कुछ 20-30 हजार रुपये महीने की छोटी नौकरी कर रहे हैं और धूमिल के शब्दों में कहें तो ग्राहक पटाने के लिए रोज 100 किलोमीटर बाइक यात्रा करने में उनकी वीर्यवाहिनी नलियां घिसट घिसटकर सूख चुकी है।

उनके जीवन में कोई प्रेम, संवेदना, आराम, सुख, भविष्य सोच पाने की क्षमता नहीं बची है। उनको लगता है कि आधे पेट भोजन की सेलरी के लिए अपने को सुखा डालना ही जीवन है। यूरोप अमेरिका तो छोड़िए, इन बच्चों /युवाओं/अधेड़ों ने तमिलनाडु केरल तक नहीं देखा है।

हम किस गौरव की तरफ बढ़ रहे हैं? चीन ने भारत के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया और भारत सरकार बर्फ में तिरंगा लेकर खड़े जवानों की फोटो जारी करवा रही है। चलिए अब इस पर गर्व कर लेते हैं।



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