आखिर मनमोहन सिंह भी बोल पड़े- ”मोदी को खामोशी तोड़नी चाहिए”

Deepak Sharma : राजपथ के धुंधले आकाश पर सूरज उतर रहा था और कोई ५०० कदम दूर राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट पर नीली पगड़ी वाला एक बुजुर्ग पीछे चल रही एक महिला से अंग्रेजी में कह रहा था….मोदी को ख़ामोशी तोड़नी चाहिए. कैमरे वाले सोनिया और राहुल के आगे बाइट के लिए दौड़ रहे थे लेकिन उनसे एक बड़ी खबर पीछे छूट चुकी थी.

नीली पगड़ी वाले की साथ जो महिला थी वो सम्भवता किसी अंग्रेजी अखबार या साउथ इंडिया के किसी रीजनल अखबार की पत्रकार लग रही थीं. उनके पास कैमरा नही था कुछ लिख रही थी जैसा की पास खड़े एक पुलिस अफसर ने मुझे बताया.

शायद मोदी के डेढ़ साल के दिल्ली कार्यकाल का ये एंटी-क्लाइमेक्स था.

मनमोहन ये कह रहे थे कि मोदी खामोश हैं. मनमोहन बता रहे थे कि मोदी बोलते नही. मनमोहन को भी असहनशील होना पड़ गया. इससे बड़ी खबर आज क्या हो सकती है. बरखा या किसी बड़े बुद्धजीवी एंकर को मनमोहन से इंटरव्यू करना चाहिए …मोदी की ख़ामोशी पर.

आजतक न्यूज चैनल में लंबे समय से कार्यरत रहे और इन दिनों वेब जर्नलिज्म में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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