यशवंत सिंह-
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के टेक ज़ोन 4 क्षेत्र में रहने वाले नागरिक इन दिनों एक भयावह वातावरण में जीने को मजबूर हैं। लेज़र पार्क और गोल्डन आई के समीप NBCC द्वारा किए जा रहे भारी निर्माण कार्य के चलते क्षेत्र में धूल, शोर और प्रदूषण ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
दिन हो या रात, लगातार चल रहे जेसीबी, डंपर और ट्रकों की आवाज़ और उनके द्वारा उड़ाई जा रही धूल की परतों ने पूरे क्षेत्र को धुंध में लपेट दिया है। सांस लेना मुश्किल हो गया है। सड़कें धूल से पट गई हैं और बच्चों, बुज़ुर्गों, वयस्कों – सभी की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि ना नोएडा अथॉरिटी को कोई फर्क पड़ रहा है, ना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को। NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) तक को कई बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
“यहाँ जीना अब नरक जैसा हो गया है,” एक स्थानीय निवासी ने कहा, “धूल इतनी ज्यादा है कि बालकनी तक खुली नहीं रख सकते। रात को भी ट्रक और मशीनें चलती रहती हैं। नींद हराम हो गई है।”
सवाल यह है कि क्या निर्माण कंपनियों को किसी नियम-कायदे का पालन करने की ज़रूरत नहीं? क्या पर्यावरणीय नियमों और मानव जीवन की कोई कीमत नहीं बची?
लोगों की माँग है कि रात 10 बजे के बाद सभी निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे निर्माण स्थल पर पानी का नियमित छिड़काव किया जाए वाहनों के लिए तय रूट और गति सीमा लागू हो धूल नियंत्रण के सभी नियमों का पालन अनिवार्य हो
अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह मुद्दा केवल प्रदूषण का नहीं रहेगा — यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा बन सकता है।
NBCC की तरफ़ से इस इलाक़े का कामकाज सुयश पांडेय नामक अधिकारी देखते हैं जिनकी कार्यशैली बहुत अराजक और जनविरोधी है। स्थानीय निवासियों से लगातार झूठ बोलकर उन्हें बरगलाया जाता है। रात के वक्त भी निर्माण कार्य कराया जाता है। वहीं गोल्डन आई साइड की तरफ़ निर्माण कार्य एनबीसीसी के अलावा कुछ प्राइवेट बिल्डर भी कर रहे हैं जिनकी मनमानी से लोगो का जीना मुहाल हो गया है।
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