डॉ. एसबी निमसे यानि लखनऊ विश्वविद्यालय का निकम्मा कुलपति

Dayanand Pandey : लखनऊ विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे क्या एक निकम्मे कुलपति हैं? और कि परीक्षा विभाग उन की बिलकुल नहीं सुनता? बीएड का इम्तहान प्रैक्टिकल सहित जुलाई में खत्म हो गया। लेकिन रिजल्ट का अभी तक अता-पता नहीं है। अखबारों के जिम्मे ऐसी खबरें नहीं होतीं। अखबारों को नेताओं अफसरों के खांसी जुकाम से फुर्सत नहीं है। तो अखबार इन के ठकुर-सुहाती खबरों से लदे रहते हैं।

सब जानते हैं कि बरसों बाद शिक्षकों की बंपर भर्ती का वांट निकला है और बिना बीएड के परीक्षा परिणाम के बच्चे फ़ार्म नहीं भर सकते। 30 अक्टूबर फ़ार्म भरने की आख़िरी तारीख़ है। बीच में दीपावली की चार दिन की छुट्टियां हैं। कल इतवार है। कब रिजल्ट निकलेगा, कब मार्कशीट मिलेगी, कब बच्चे फ़ार्म भरेंगे, सोचा जा सकता है। विभाग से पता किया तो पता चला कि परीक्षा परिणाम बना कर परीक्षा विभाग को जुलाई में ही भेज दिया गया है।

मैंने कुलपति निमसे से इस बाबत 15 और 16 अक्टूबर को बात किया। कहा कि इतने सारे बच्चों की किस्मत से खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं? 16 अक्टूबर की रात निमसे ने खुद फोन कर मुझे सूचित किया कि 17 अक्टूबर को रिजल्ट आ जाएगा। लेकिन आज 18 अक्टूबर की शाम हो गई है अभी तक बीएड के रिजल्ट का पता नहीं है। निमसे से अभी फिर बात की तो वह बगलें झांकने लगे। बोले, बात करता हूं कंट्रोलर से। इतना ही नहीं, जुलाई में ही हुए एमएड के इंट्रेंस का रिजल्ट अभी तक लापता है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.



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