साहित्य गीतों की चांदनी में एक माहेश्वर तिवारी का होना गीतों की चांदनी में एक माहेश्वर तिवारी का होना दूब से भी कोमल मन का होना है । गीतों की चांदनी में चंदन सी... July 23, 2015
सियासत हिंदी के चंबल का एक बाग़ी मुद्राराक्षस अगर मुद्राराक्षस के लिए मुझ से कोई एक वाक्य में पूछे तो मैं कहूंगा कि हिंदी जगत अगर चंबल है तो मुद्राराक्षस इस चंबल... June 21, 2015
सुख-दुख तो क्या नीलाभ डूब जाएंगे भूमिका के इस भंवर में ? कभी राजेंद्र यादव-ज्योति कुमारी, कभी नीलाभ अश्क-भूमिका द्विवेदी....यह हिंदी वाले अंगरेजी वालों से रचना के स्तर पर प्रेरणा बहुत लेते हैं , जीवन के... May 20, 2015
सियासत अकबर का यह अकेलापन, यह गुस्सा, यह अवसाद आज अल्लसुबह पांच बजे हैदराबाद एयरपोर्ट पर अचानक एम जे अकबर से भेंट हो गई। वह दिल्ली आ रहे थे और मैं लखनऊ। एक... April 5, 2015
प्रिंट किसी पत्रकार ने कोई सवाल नहीं पूछा, सब के सब हिहियाते हुए सेल्फी लेते रहे… Dayanadn Pandey : लोकतंत्र क्या ऐसे ही चलेगा या कायम रहेगा, इस बेरीढ़ और बेजुबान प्रेस के भरोसे? कार्ल मार्क्स ने बहुत पहले ही... October 26, 2014
उत्तर प्रदेश डॉ. एसबी निमसे यानि लखनऊ विश्वविद्यालय का निकम्मा कुलपति Dayanand Pandey : लखनऊ विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे क्या एक निकम्मे कुलपति हैं? और कि परीक्षा विभाग उन की बिलकुल नहीं... October 19, 2014
सियासत अखबारी दुनिया के मालिकों व इस के कर्मचारियों की ज़िंदगी में झांकना हो तो ‘हारमोनियम के हज़ार टुकड़े’ उपन्यास ज़रूर पढ़ें दयानंद पांडेय मैं दयानंद जी के ‘बांसगांव की मुनमुन’ उपन्यास को भी पढ़ चुकी हूं जो एक सामाजिक उपन्यास है। समय के साथ हर... October 9, 2014