रवि काना मामला नोएडा के पत्रकारों के लिए बवाल बना हुआ है।दैनिक जागरण से तीन, अमर उजाला से एक, हिंदुस्तान से एक रिपोर्टर के इस्तीफ़े के बाद अब नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज पाराशर ने इस्तीफ़े की पेशकश की है…
नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष पंकज ने ख़ुद इस्तीफे की पेशकश की है। जाँच कम्पलीट होने के बाद इस्तीफ़े को लेकर आख़िरी फ़ैसला लिया जाएगा।
पढ़िए नोएडा मीडिया क्लब के अनुशासन समिति के अध्यक्ष द्वारा जारी ये नोटिस-
आवश्यक सूचना
नोएडा मीडिया क्लब की अनुशासन समिति ने अध्यक्ष जी के अनुरोध पर जांच शुरू की है। जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष नहीं अपितु सभी पत्रकारों से जुड़ा है। जांच शुरू करने से पहले ही समिति ने स्पष्ट किया था कि किसी भी साथी के पास कोई जानकारी हो या कोई साक्ष्य हो अथवा कोई बात कहनी हो तो सीधे समिति से संपर्क कर सकते हैं।
इसके बावजूद कई सदस्य अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप पर अनर्गल बातें कर रहे हैं। पूरी प्रक्रिया संस्था के कॉन्स्टीट्यूशन के अनुसार प्रचलित है।
१. अध्यक्ष जी ने सर्वोच्च मानदंडों का पालन करते हुए अनुशासन समिति के समक्ष त्यागपत्र की पेशकश की। उन्होंने जांच पूरी होने तक कार्यमुक्त रहने का निर्णय लिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके त्यागपत्र पर कार्यकारिणी निर्णय लेगी। अतः इस दौरान महासचिव और कार्यालय अध्यक्ष दैनिक कामकाज करते रहेंगे।
२. इन परिस्थितियों में चुनाव या कोई दूसरी असंवैधानिक मांग रखना सर्वथा अनुचित है।
३. संस्था के समक्ष कोई संवैधानिक संकट नहीं है।
सार्वजनिक सोशल मीडिया ग्रुप्स पर आक्षेप लगाकर संस्था और पदाधिकारियों के ख़िलाफ आपराधिक मानहानि की जा रही है। यह पूरी तरह अनुशासन के विरुद्ध है। ऐसे मैसेज लिखने वाले सदस्यों को चेतावनी दी जाती है कि भविष्य में पुनरावृत्ति होने पर, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
धन्यवाद!
मोहम्मद आज़ाद
अध्यक्ष
अनुशासन समिति
नोएडा मीडिया क्लब
इस मसले पर भड़ास4मीडिया ने पंकज पाराशर से बात की। पंकज ने कहा, “ नोएडा मीडिया क्लब का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में काम कर रहे पत्रकारों के सामाजिक विकास से जुड़ा है। इस मामले में मुझे और कई दूसरे साथियों को लेकर अफ़वाहें प्रसारित की जा रही थीं। जिन पर पत्रकार साथी हमारे सामने बात नहीं कर रहे थे, लेकिन पीठ पीछे तमाम तरह की बातें कर रहे थे। पूर्व में अगर नोएडा मीडिया क्लब के किसी सदस्य के ख़िलाफ़ पुलिस, प्रशासन या आम आदमी से शिकायत मिली हैं तो उसकी जांच अनुशासन समिति करती रही है। अब अगर संस्था के अध्यक्ष के ख़िलाफ़ कोई शिकायत है, भले ही वह अफ़वाह के रूप में क्यों ना हो, तो अनुशासन समिति को ज़रूर जांच करनी चाहिए। इसी वजह से मैंने आगे बढ़कर कार्यकारिणी और अनुशासन समिति से जांच की मांग की। जांच के दौरान मेरा अध्यक्ष पद पर बने रहना उचित नहीं रहेगा, इसलिए मैंने अपना इस्तीफ़ा अनुशासन समिति के अध्यक्ष और कार्यकारिणी के महासचिव को भेज दिया। उनका मानना है कि रिपोर्ट आने तक इस्तीफ़े पर निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसलिए मैं कार्यालय नहीं जा रहा हूं, काम नहीं कर रहा हूं। अनुशासन समिति के सदस्यों और कार्यकारिणी के संपर्क में नहीं हूं।”
पंकज ने आगे कहा, “हम पत्रकार होने की हैसियत से तमाम लोगों से जुड़े भ्रष्टाचार और अपराध पर ख़बर लिखते हैं, सामाजिक जीवन में शुचिता बरतने का पाठ पढ़ाते हैं। ऐसे में अगर हमारे ऊपर कोई गंभीर आरोप है तो हमें भी उन्हीं बातों का पालन करना चाहिए, जिनका पालन करने की दूसरों से अपेक्षा रखते हैं। इस जांच प्रक्रिया से संस्था को निसंदेह मज़बूती मिलेगी। जब अनुशासन समिति संस्था के अध्यक्ष के खिलाफ़ जांच कर सकती है तो है तो भविष्य में किसी भी सदस्य या पदाधिकारी के खिलाफ़ जांच करने का नैतिक बल अनुशासन समिति में रहेगा।”


