जिस अखबार के प्रबंधन पर धोखाधड़ी के आरोप हैं, उस अखबार के सम्पादक को मोदी जी ने बनाया एनबीटी का चेयरमैन

नोएडा । नेशनल दुनिया प्रबंधतंत्र की धोखाधड़ी की जिस जांच के लिए पीएमओ ने चार सदस्य टीम गठित की थी, उस जांच में अब कोई प्रगति नहीं है। नेशनल दुनिया पीड़ित कर्मी शरद त्रिपाठी की पीएफ आदि से जुडी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए गत 4 नवंबर को पीएमओ ने जांच के लिए 4 सदस्यों की एक टीम गठित की थी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुयी है। जांच के आदेश जारी हुऐ भी दो माह से ज्यादा हो गये हैं।

इस जांच को दबवाने में नेशनल दुनिया दिल्ली के वरिष्ठ स्थानीय सम्पादक और नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा और इनके चाटुकार लगे हुए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस अखबार पर धोखाधड़ी और कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोपों की लम्बी फेहरिस्त हो, उस अखबार के सम्पादक को मोदी सरकार ने कैसे नेशनल बुक ट्रस्ट का चेयरमैन बना दिया। यह पद केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन आता है। चेयरमैन साहब को मिली गाड़ी को अखबार के पीआर कार्य और दर्ज मामलों की पैरवी के लिए भी जोता जाता है। सरकारी गाड़ी को नोएडा कार्यालय के मुख्य परिसर के अंदर अक्सर शाम के वक्त खड़ा हुआ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार ने जो बत्ती वाली गाड़ी बलदेव भाई शर्मा को दी है उसका प्रयोग वह अखबार के कार्यों में कैसे कर सकते हैं। सू़त्रों का कहना है कि जांच दल जब नोएडा कार्यालय में आया तो उसे यह कह कर टरका दिया गया कि हमारे सम्पादक जी खुद भाजपा के सिपाही हैं, यह घोड़ा गाड़ी इसीलिए सरकार ने उन्हें दी है।

अखबार का एबीसी सर्टिफिकेट भी रद्द हो चुका है। अखबार ने फर्जी ढंग से अखबार की प्रसार संख्या 2 लाख से ज्यादा दर्शायी थी। अखबार के मुख पृष्ठ पर श्लोगन लिखा है- देश का सबसे तेजी से बढता अखबार। बलदेव भाई और उनकी चाटुकार टीम अखबार की प्रसार संख्या तो नहीं बढा पायी, अपितु अखबार को फाइल कापी में जरूर समेट दिया। ताजा जानकारी मिली है कि अखबार को डीएवीपी दर की रिनीवल नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से बलदेव भाई ने अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए पूरे सम्पादकीय विभाग के बड़े खिलाड़ियों को खत्म कर दिया, अब अखबार को भी बर्फ में लगा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि कर्मियों के पीएफ एकाउंट में पिछले छह माह से कोई पैसा जमा नहीं किया गया है। इसके अलावा आयकर विभाग में भी टैक्स जमा नहीं किया गया है। ईएसआई में आजतक एक पैसा जमा नहीं किया गया है। दिवाली पर्व के दौरान नेशनल दुनिया के फोटोग्राफर ओमपाल का एक्सीडेंट हो गया था। वह इस समय भी कोमा में हैं और जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं। यदि ओमपाल ईएसआई में रजिस्टेशन होता तो उसका इलाज ईएसआई कराता। पैसे की दिक्कत के कारण ओमपाल का इलाज कारगर ढंग से नहीं हो पा रहा है। नेशनल दुनिया प्रबंधन का कोई पदाधिकारी उसका हाल लेने तक नहीं गया। सू़त्रों का कहना है कि शिकायत मिलने पर जब ईएसआई की टीम नेशनल दुनिया कार्यालय आती है तो अपनी जेब गर्म करके चली जाती है।

एक पीड़ित कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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