नाकामी छुपाने के लिए 2019 चुनाव में राम मंदिर कार्ड खेलेगी भाजपा

राम मंदिर मुद्दे पर मोदी की गंभीरता को समझने में भारी भूल कर रहा मीडिया!  2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से मीडिया में राम मंदिर पर चर्चा होती रही है। यूपी में बीजेपी की भारी जीत के बाद ये चर्चा आम हो गई है। अक्सर टीवी स्टूडियो में बैठे एंकर, पत्रकार, मुस्लिम धर्मगुरू, बुद्धिजीवी जब खुले तौर पर  मंदिर कब बनेगा या निर्माण की तारीख बताने जैसे असहज सवालों पर सरकार के प्रवक्ताओ को घेरने की कोशिश करते हैं तो शायद इन सभी महानुभावों को ये समझ मे नहीं आता कि अगर वाकई में इन्हें तारीख बता दी गयी तो इन्हें न्यूज़रूम से सीधे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ेगा।

2019 के अंत तक बंद होंगे 90% छोटे और मध्यम अखबार बंद हो जाएंगे!

आज़ादी के 70 साल बाद अभी वर्तमान का यह समय छोटे और मध्यम अखबारो के लिए सबसे कठिन है। यदि सरकार के DAVP पॉलिसी को देखा जाय तो लघु समचार पत्रों को न्यूनतम १५ प्रतिशत रुपये के रूप में तथा मध्यम समाचार पत्रों को न्यूनतम ३५ प्रतिशत रुपये के रूप में विज्ञापन देने का निर्देश है। गौरतलब है कि भारत विविधताओं का देश है यहां विभिन्न भाषाएं हैं। ग्रामीण तथा कस्बाई इलाकों में भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। बड़े अखबार समूह की पहुंच वहां तक नहीं है। यदि विज्ञापन के आवंटन में भाषा और मूल्य वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया तो निश्चित ही उस विज्ञापन की पहुंच विस्तृत तथा व्यापक नहीं होगी और विज्ञापन में वर्णित संदेश का प्रसार पूरे देश के समस्त क्षेत्रों तक नहीं हो पायेगा। पूर्व मंत्री द्वारा राज्यसभा में एक प्रश्र के उत्तर में नीति के पालन की बात कही गयी थी। परन्तु आज वह बयान झूठ साबित हो रहा है।

मोदी पर मिमिक्री दिखाने में क्यों फटती है टीवी चैनलों की?

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने प्रेस क्लब आफ इंडिया में पत्रकार विनोद वर्मा की छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा की गई अवैधानिक गिरफ्तारी के खिलाफ बोलते हुए खुलासा किया कि टीवी चैनलों पर मोदी की मिमिक्री दिखाने पर पाबंदी है. इस वीडियो को सुनिए विस्तार से, जानिए पूरा प्रकरण क्या है… इसे भी देख सकते हैं>>

चार महीने पहले रेल टिकट कटाने वाले इंजीनियर का दिवाली पर घर जाने का सपना ‘वेटिंग’ ही रह गया!

Yashwant Singh : हरिद्वार में कार्यरत इंजीनियर गौरव जून महीने में तीन टिकट कटाए थे, दिल्ली से सहरसा जाने के लिए, अपनी बहनों के साथ। ट्रेन आज है लेकिन टिकट वेटिंग ही रह गया। चार्ट प्रीपेयर्ड। लास्ट मोमेंट में मुझे इत्तिला किया, सो हाथ पांव मारने के बावजूद कुछ कर न पाया। दिवाली अपने होम टाउन में मनाने की उनकी ख्वाहिश धरी रह गई। दिवाली के दिन अपने जिला-जवार में होने की चार महीने पहले से की गई तैयारी काम न आई।

मोदी को भगवान न बनाओ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की घोषणा क्रांति की जमीन मेरठ में एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने की है। सिचाई विभाग से रिटायर इंजीनियर जेपी सिंह की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में उनके नाम का मंदिर बनना चाहिए। ऊपरी तौर पर देखा जाए तो इस ऐलान के पीछे किसी की व्यक्तिगत इच्छा और भावना ही दिखाई देती है। पर रिटायर इंजीनियर की घोषणा एक लोकतांत्रिक देश में किसी नेता को भगवान बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है। मामले को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

अमित शाह की ओर से पीयूष गोयल ने ‘द वायर’ पर 100 करोड़ का आपराधिक मुकदमा ठोकने की बात कही

‘द वायर’ की पड़ताल ने कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक को हिला दिया है

Nitin Thakur : अमित शाह के बेटे की कमाई का हिसाब किताब जान लीजिए। जब आपकी नौकरियां जा रही थीं, तब कोई घाटे से 16 हज़ार गुना मुनाफे में जा रहा था। द वायर की पड़ताल ने कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक को हिला दिया है।

‘भक्तों’ से जान का खतरा बताते हुए पीएम को लिखा गया रवीश कुमार का पत्र फेसबुक पर हुआ वायरल, आप भी पढ़ें

Ravish Kumar : भारत के प्रधानमंत्री को मेरा पत्र…

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,

आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप सकुशल होंगे। मैं हमेशा आपके स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूं। आप असीम ऊर्जा के धनी बने रहें, इसकी दुआ करता हूं। पत्र का प्रयोजन सीमित है। विदित है कि सोशल मीडिया के मंचों पर भाषाई शालीनता कुचली जा रही है। इसमें आपके नेतृत्व में चलने वाले संगठन के सदस्यों, समर्थकों के अलावा विरोधियों के संगठन और सदस्य भी शामिल हैं। इस विचलन और पतन में शामिल लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

क्या वाकई नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है?

Dilip Khan : हार्ड वर्क वाले अर्थशास्त्री मोदी जी जब सत्ता में आए तो इन्होंने आर्थिक सलाह परिषद को ख़त्म कर दिया। जब अर्थव्यवस्था की बैंड बजने लगी तो दो दिन पहले यूटर्न लेते हुए परिषद को फिर से बहाल कर दिया। अर्थशास्त्री नरेन्द्र मोदी ने आंकड़ों को ‘खुशनुमा’ बनाने के लिए GDP गणना के पुराने नियम ही ख़त्म कर दिए। लेकिन गणना के नए नियमों के मुताबिक़ भी GDP दर तीन साल के न्यूनतम पर आ गई है। पुराना नियम लागू करे तो 3% का आंकड़ा रह जाता है।

मोदी राज में भी महंगाई डायन बनी हुई है!

अजय कुमार, लखनऊ
2014 के लोकसभा चुनाव समय बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी ने तत्कालीन यूपीए की मनमोहन सरकार के खिलाफ मंहगाई को बड़ा मुद्दा बनाया था। चुनाव प्रचार के दौरान सबसे पहले हिमाचल प्रदेश की रैली में महंगाई का मुद्दा छेड़कर मोदी ने आम जनता की नब्ज टटोली थी। मंहगाई की मार झेल रही जनता को मोदी ने महंगाई के मोर्चे पर अच्छे दिन लाने का भरोसा दिलाया तो मतदाताओे ने मोदी की झोली वोटों से भर दी। आम चुनाव में दस वर्ष पुरानी यूपीए सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने में मंहगाई फैक्टर सबसे मोदी का सबसे कारगर ‘हथियार’ साबित हुआ था, लेकिन आज करीब साढ़े तीन वर्षो के बाद भी मंहगाई डायन ही बनी हुई है।

मोदी और जेटली के ‘कुशल’ नेतृत्व के कारण विनिर्माण क्षेत्र भयंकर मंदी का शिकार!

Ashwini Kumar Srivastava : आठ साल पहले…यानी जब दुनियाभर में मंदी के कारण आर्थिक तबाही मची थी और भारत भी मनमोहन सिंह के नेतृत्व में वैश्विक मंदी से जूझ रहा था… हालांकि उस मंदी में कई देश रसातल में पहुंच गए थे लेकिन भारत बड़ी मजबूती से न सिर्फ बाहर आया था बल्कि दुनिया की …

मोदी जी! कब सुनोगे ‘बेरोजगारों’ के मन की बात

बेरोजगारों को रोजगार का सपना दिखाकर भारी बहुमत से सत्ता में आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अच्छे दिन के वादे शिक्षित बेरोजगारों के लिये शेखचिल्ली के ख्वाब साबित हुए हैं। चपरासी की 5 पास नौकरी के लिये जहां एमबीए, बीटेक, एमटेक, ग्रेजुएट युवा लाइनों में लगे हुए हैं वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी रिपोर्ट में मोदी सरकार को तो कटघरे में खड़ा ही किया गया है बल्कि भारत में बढ़ती बेरोजगारों की संख्या ने भी भयावह कहानी बयां की है। जो आने वाले दिनों में बड़े विवादों का कारण बन सकती है।

हिंदू और यहूदी सभ्यताओं ने अपने काम से काम रखने की बहुत कीमत चुकाई है!

Rajeev Mishra : प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा एक सरकारी दौरा नहीं है…एक राष्ट्र प्रमुख की दूसरे राष्ट्राध्यक्ष से मुलाक़ात भर नहीं है…यह दो प्राचीन सभ्यताओं का मिलन है… दो सभ्यताएं जिनमें बहुत कुछ कॉमन है…एक समय, इस्लाम की आपदा से पहले दोनों की सीमाएं मिलती थीं, पर दोनों में किसी तरह के टकराव की कहानी हमने नहीं सुनी. दोनों में से किसी को भी किसी और को अपने धर्म में शामिल करने की, अपने धर्म प्रचार की, मार्केटिंग की खुजली नहीं थी…

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखने की मोदी की दोगली नीति पर भाजपाई चुप क्यों हैं?

Yashwant Singh : ये तो सरासर मोदी की दोगली नीती है. देश को एक कर ढांचे में लाने की वकालत करने वाले मोदी आखिर पेट्रोल डीजल को जीएसटी से क्यों बाहर रखे हुए हैं. ये तर्क बेमानी है कि राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल से भारी टैक्स से काफी पैसा पाती हैं, जिसे वह खोना नहीं चाहतीं.

मोदी सरकार पर राजस्थान पत्रिका समूह के मालिक गुलाब कोठारी का हमला- ”झूठ बोलने के लिए मीडिया को खरीदने का काम चल रहा है”

राजस्थान पत्रिका समूह के मालिक गुलाब कोठारी ने मोदी सरकार पर हमला बोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि झूठ बोलने के लिए मीडिया और लोगों को खरीदने का काम चल रहा हैं. गुलाब कोठारी ने ये बात मुंबई में 14वें अंतरराष्ट्रीय कंसर्न्ड कम्यूनिकेटर अवॉर्ड (सीसीए) समारोह में कही. पत्रिका समूह को सामाजिक सरोकार के श्रेष्ठ रचनात्मक विज्ञापनों के लिए इस समारोह में पुरस्कृत किया गया. कोठारी ने कहा कि आजादी को 70 साल हो गए हैं लेकिन हम आज भी सच को सुनना ही नहीं चाहते हैं. सरकार मीडिया हाउस को शॉर्टलिस्ट कर जनता तक झूठी बातें पहुंचा रही है. झूठ को सच बताकर रखने की कोशिश में लोगों को दिग्भ्रमित किया जा रहा है. क्योंकि यदि झूठ को सौ बार बोला जाए तो वह सच मान लिया जाता है और आज यही हो रहा है.

किसानों की वायरल हुई ये दो तस्वीरें ‘मोदी गान’ में रत टीवी और अखबार वालों को न दिखेंगी न छपेंगी

Mahendra Mishra : ये तमिलनाडु के किसान हैं। दक्षिण भारत से दिल्ली पीएम मोदी के सामने अपनी फरियाद लेकर आये हैं। इनमें ज्यादातर के हाथों में ख़ुदकुशी कर चुके किसानों की खोपड़ियां हैं। बाकी ने हाथ में भीख का कटोरा ले रखा है। पुरुष नंगे बदन हैं और महिलाओं ने केवल पेटीकोट पहना हुआ है। इसके जरिये ये अपनी माली हालत बयान करना चाहते हैं। इन किसानों के इलाकों में 140 वर्षों बाद सबसे बड़ा सूखा पड़ा है।

पीएम मोदी के घर पर एसपीजी की महिलाएं रात में ड्यूटी क्यों नहीं करना चाहतीं?

Sanjaya Kumar Singh : प्रधानमंत्री के घर और निजता से संबंधित ये कैसी खबर? इस बार के “शुक्रवार” (24 फरवरी – 02 मार्च 2017) मैग्जीन में एक गंभीर खबर है। पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का शीर्षक है, “फिर विवादों में घिरी एसपीजी” लेकिन यह प्रधानमंत्री निवास से संबंधित विवाद खड़ा कर रही है। खबर के मुताबिक एसपीजी की महिला सुरक्षा कर्मियों ने अपने आला अफसरों से गुहार लगाई है कि उन्हें रात की ड्यूटी पर न रखा जाए।

सहारा समूह ने छह महीने में नौ बार दिए नरेंद्र मोदी को करोड़ों रुपये : राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरकार बम फोड़ ही दिया. उन्होंने आज मेहसाणा (गुजरात) में आयोजित एक रैली में कहा कि सहारा समूह पर पड़े छापे के बाद छह महीने में सहारा समूह के लोगों ने नरेंद्र मोदी को नौ बार करोड़ों रुपए दिए. मोदी को सहारा के बाद बिड़ला ग्रुप के लोगों ने भी पैसे दिए. इसकी पूरी जानकारी तारीख-दर-तारीख और विस्तार से मौजूद है.

नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल : इन दो नेताओं का घमंड तो देखो…

Sheel Shukla : ये घमंडी! अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि अभी नरेंद्र मोदी इतने शिक्षित नहीं है कि देश के अर्थ शास्त्र को समझ सके। अरविन्द केजरीवाल के ऐसा बोलते समय एक बू आ रही थी कि मैं तो IRS रहा हूँ और मेरी किताबी शिक्षा की कोई तुलना नरेंद्र मोदी की शिक्षा से नहीं है। यह कोई राष्ट्रहित या नोटबंदी के खिलाफ दिया गया बयान नहीं था बल्कि ये अरविन्द केजरीवाल का दम्भ था, घमंड था।

मोदी को मैदान में उतार बीजेपी ने जो रामबाण चलाया वह कितना कारगर साबित होगा

पिछले कुछ हफ़्तों में केंद्र सरकार की कई मोर्चों पर किरकिरी हुई है. पहला मामला बीजेपी की आतंरिक कलह से जुड़ा है. सुब्रमण्यम स्वामी ने अरुण जेटली पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले किये हैं. रघुराम राजन से लेकर वित्त मंत्रालय से जुड़े अन्य अधिकारियों तक उनके लगातार हमले बीजेपी को परेशान किये हुए हैं. मीडिया में इस मामले को जोरशोर से उछाला गया है. बीजेपी बैकफुट पर है.  दूसरा मामला है भारत की अंतर्राष्ट्रीय नीति से संबंधित. भारत को NSG की सदस्यता की कितनी आवश्यकता थी, थी भी कि नहीं, ये शायद हम अच्छे से नहीं जानते, पर ये अवश्य जानते हैं कि चीन ने हमारा खेल बिगाड़ दिया. यहाँ भी भारत सरकार की किरकिरी हुई. नरेन्द्र मोदी की एग्रेसिव अंतर्राष्ट्रीय छवि को धक्का पहुंचा है.

सियासत के मामले में मोदी की स्टाइल को कॉपी कर रहे हैं नीतीश कुमार!

अजय कुमार, लखनऊ

2014 के लोकसभा चुनाव के समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिये जो रास्ता चुना था, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिये उसी राह पर थोड़े से फेरबदल के बाद आगे बढ़ते दिख रहे हैं। मोदी ने जहां गुजरात मॉडल को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था, वहीं नीतीश कुमार संघ मुक्त भारत, शराब मुक्त समाज की बात कर रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय पूरे देश में मोदी और उनके गुजरात मॉडल की चर्चा छिड़ी थी, जिसका मोदी को खूब फायदा मिला था।

मोदी की आंबेडकर पर अशिष्टता

-आनंद तेल्तुम्ब्ड़े-

हाल में मोदी जी ने अपने आप को आंबेडकर भक्त कहा था और दलितों को यह भरोसा दिलाया था कि वह आरक्षण के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होने देंगें चाहे आंबेडकर ही आ कर इस की मांग क्यों न करें. मोदी की यह अशिष्टता यह दर्शाती है कि हिंदुत्व की ताकतों के लिए दलितों को पटाने के लिए आंबेडकर को गलत ढंग से पेश करने तथा शासक वर्गों की राजनीतिक रणनीति में आरक्षण की कितनी नाज़ुक भूमिका है. आरक्षण जो कि दलितों के लिए वरदान है वास्तव में उनकी गुलामी का औज़ार बन गया है.

चीन के दबाव में झुकी 56 इंच के सीने वाली सरकार!

Priyabhanshu Ranjan : तो क्या वाकई चीन के दबाव में झुक गई 56 इंच के सीने वाली मोदी सरकार? पिछले दिनों खबर आई कि UN में आतंकवादी मसूद अजहर पर पाबंदी लगाने के भारत के प्रस्ताव पर चीन की ओर से अड़ंगा (Veto) लगाए जाने के जवाब में मोदी सरकार ने चीन के विद्रोही उइगुर नेता Dolkun Isa को भारत आने का वीजा दिया है ताकि वो यहां चीन के विद्रोही नेताओं (Dissident Leaders) की बैठक में शिरकत कर सके।

जिस अखबार के प्रबंधन पर धोखाधड़ी के आरोप हैं, उस अखबार के सम्पादक को मोदी जी ने बनाया एनबीटी का चेयरमैन

नोएडा । नेशनल दुनिया प्रबंधतंत्र की धोखाधड़ी की जिस जांच के लिए पीएमओ ने चार सदस्य टीम गठित की थी, उस जांच में अब कोई प्रगति नहीं है। नेशनल दुनिया पीड़ित कर्मी शरद त्रिपाठी की पीएफ आदि से जुडी शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए गत 4 नवंबर को पीएमओ ने जांच के लिए 4 सदस्यों की एक टीम गठित की थी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुयी है। जांच के आदेश जारी हुऐ भी दो माह से ज्यादा हो गये हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा ने यह गंभीर आरोप मोदी पर लगाया या केजरीवाल पर, पढ़िए और बूझिए

Deepak Sharma : ब्रांड चाहे एक करोड़ की मर्सीडीज़ बेंज हो या 4 रूपए का विमल गुटखा , बाज़ार में बिकने के लिए उसे बाज़ार के उसूल स्वीकार करने ही होंगे. उसे लोगों के हाथ अगर बिकना है तो बाज़ार में दिखना होगा. मार्केटिंग के ये नियम कोका कोला ने बाज़ार में आज से कोई 129 साल पहले तय कर दिए थे. कोका कोला ने दुनिया को तब पहली बार बताया था कि बाज़ार में होने से कहीं ज्यादा बाज़ार में दिखना ज़रूरी है. दिखेंगे तो ब्रांड बनेंगे. ब्रांड बनेगे तो खुद ब खुद बिकेंगे.

छप्पन इंच का लिजलिजा सीना और केजरीवाल का हिम्मत भरा प्रयोग

Sanjaya Kumar Singh : 56 ईंची का लिजलिजा सीना… नई सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से सूचना के सामान्य स्रोतों और परंपरागत तरीकों को बंद करके सेल्फी पत्रकारिता और मन की बात जैसी रिपोर्टिंग शुरू की है। प्रधानमंत्री विदेशी दौरों में पत्रकारों को अपने साथ विमान में भर या ढो कर नहीं ले जाते हैं इसका ढिंढोरा (गैर सरकारी प्रचारकों द्वारा ही सही) खूब पीटा गया पर रिपोर्टर नहीं जाएंगे तो खबरें कौन भेजेगा और भेजता रहा यह नहीं बताया गया। प्रचार यह किया गया कि ज्यादा पत्रकारों को नहीं ले जाने से प्रधानमंत्री की यात्रा का खर्च कम हो गया है लेकिन यह नहीं बताया गया कि कितना कम हुआ? किस मद में हुआ? क्योंकि, विमान तो वैसे ही जा रहे हैं, अब सीटें खाली रह रही होंगी। जो जानकारी वेबसाइट पर होनी चाहिए वह भी नहीं है। कुल मिलाकर, सरकार का जनता से संवाद नहीं है।

Modi and his diplomacy

By Prasoon Shukla (CEO & Editor-in-Chief, News Express)

The diplomacy of Prime Minister Narendra Modi is paying dividends. Increasingly ostracized leader, Russian President Vladimir Putin met Modi at Hyderabad House, Thursday, marking the beginning of Annual India-Russia Summit. United States President Barrack Obama is arriving New Delhi on the occasion of Republic Day. In fact, both Moscow and the United States are looking to revitalize relations and foster economic ties with India. This is the Modi’s diplomatic success and such enthusiasm has probably never been witnessed earlier.

भाजपाई कब तक मुसलमानों और दलितों के लिए कुत्ता और कुत्ते के बच्चे जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहेंगे?

(मोहम्मद अनस)

Mohammad Anas : हरियाणा में दो दलित बच्चों को जिंदा जलाए जाने पर रक्षा राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा, ‘कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो सरकार ज़िम्मेदार नहीं होती।’ मंत्री जी कुत्ते के मारने पर किसी ने सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया, हम सब तो इंसानियत की हिफाजत करने में जानबूझ कर पीछे रहने वाली सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब खत्म होगा हिंसा का सिलसिला। आखिर कब तक मुसलमानों और दलितों के लिए कुत्ता और कुत्ते के बच्चे का शब्द इस्तेमाल करते रहेंगे भाजपाई?

मोदी और केजरी स्टाइल का ‘आदर्श’ मीडिया… जो पक्ष में लिखे-बोले वही सच्चा पत्रकार!

: मीडिया समझ ले, सत्ता ही है पूर्ण लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज! : मौजूदा दौर में मीडिया हर धंधे का सिरमौर है। चाहे वह धंधा सियासत ही क्यों न हो। सत्ता जब जनता के भरोसे पर चूकने लगे तो उसे भरोसा प्रचार के भोंपू तंत्र पर होता है। प्रचार का भोंपू तंत्र कभी एक राह नहीं देखता। वह ललचाता है। डराता है। साथ खड़े होने को कहता है। साथ खड़े होकर सहलाता है और सिय़ासत की उन तमाम चालों को भी चलता है, जिससे समाज में यह संदेश जाये कि जनता तो हर पांच बरस के बाद सत्ता बदल सकती है। लेकिन मीडिया को कौन बदलेगा? तो अगर मीडिया की इतनी ही साख है तो वह भी चुनाव लड़ ले… राजनीतिक सत्ता से जनता के बीच दो-दो हाथ कर ले… जो जीतेगा, उसी की जनता मानेगी!

दिल्ली में लोग डेंगू से मर रहे हैं, बिंदेश्वरी पाठक और उनके कर्मचारी मोदी के बर्थडे डांस में जुटे हैं!

नई दिल्ली : एमसीडी ने एक जमाने में सुलभ शौचालय वाले बिंदेश्वरी पाठक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था. भाजपा के ही एक नेता की शिकायत के बाद बिंदेश्वरी पाठक ब्लैकलिस्ट किए गए थे. अब भाजपा के ही जमाने में सुलभ शौचालय वाले पाठक जी ब्लैकलिस्ट से न सिर्फ बाहर आ चुके हैं बल्कि एमसीडी द्वारा संचालित किए जाने वाले अस्पतालों की हाउसकीपिंग का काम भी हथिया चुके हैं.

भूमि अधिग्रहण पर मोदी सरकार का पीछे हटना किसानों की जीत

: समग्र भूमि व किसान नीति बनने तक संघर्ष अपरिहार्य : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 29 अगस्त को आकाशवाणी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ में यह घोषणा की कि भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा तथा वह किसानों का हर सुझाव मानने को तैयार हैं। यह घोषणा देश भर के किसानों और जनता के प्रतिरोध की जीत है, जिसकी वजह से ही मोदी सरकार को अपने पांव पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा है। नहीं तो चंद रोज पहले तक श्रीमान मोदी, उनकी पार्टी भाजपा और उनके रणनीतिकार जिस तरह से इसे किसानों और देश के हित में बताकर शोर मचा रहे थे और इसे हर हाल में लागू करने के लिए ताल ठोंक रहे थे, यह बात किसी से छिपी नहीं है। भाजपा-विरोधी शासकवर्गीय पार्टियां इसका श्रेय लेने का चाहे जितना ढिंढोरा पीटें लेकिन आज जब मोदी सरकार ने अध्यादेश को आगे न बढ़ाने का फैसला ले लिया है तब एक राजनीतिक मुद्दा, जिसके नाम पर वे अपनी खोयी जमीन को वापस पाने के प्रयास में थे, उनके हाथ से चला गया है।

पत्रकारिता की जड़ों पर मोदी सरकार के प्रहार

याकूब मेमन की फांसी पर कवरेज को लेकर तीन बड़े समाचार चैनलों को नोटिस जारी करने, और त्रिपुरा का राज्यपाल तथागत राय द्वारा याकूब के जनाजे में शामिल लोगों को आतंकवादी कहने के बाद केंद्र सरकार ने पत्रकारिता की जड़ों पर ही प्रहार करना शुरू कर दिया है। अब सरकार चाहती है कि आतंकवाद से जुड़े मुद्दे पर कैसी रिपोर्टिग करनी है, यह सरकार पढ़ाए और मीडिया संस्थान उसके आज्ञाकारी शिष्य बनकर सरकार के आदेश मानें।

लो, कर लो जी साढ़े आठ करोड़ वाली ‘मन की बात’, मोदी मेहरबान तो मीडिया पहलवान

वाह रे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, ऐसी कौन सी बात कर देते हैं कि सरकारी खजाने को उसे सुनने पर इस तरह न्योछावर कर दिया जा रहा है। पता चला है कि ‘मन की बात’ का सबसे ज्यादा मजा मीडिया लूट रहा है। केंद्र सरकार इस रेडियो कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के लिए अब तक साढ़े आठ करोड़ रुपए फूंक चुकी है। इस कारस्तानी को आरटीआई के जरिए सार्वजनिक किया है आम आदमी पार्टी के मीडिया संयोजक मुल्कराज आनंद ने। 

‘मजीठिया’ पर पीएम की चुप्‍पी कर्मचारियों का खून पीने वाले मीडिया मालिकों के पक्ष में

DNA या यूं कहें Deoxyribonucleic acid, the molecule that carries genetic information about all living. अर्थात डीएनए वह अणु है जो सभी जीवधारियों की आनुवंशिक सूचनाओं का संवहन करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के बारे में डीएनए खराब होने की टिप्‍पणी करके एक नई बहस को हवा दे दी है। लेकिन अब तक प्रधानमंत्री ने जिन हरकतों को अंजाम दिया है, उससे उनका भी डीएनए सवालों के घेरे में आ गया है। वह अपने को चाय वाला बता कर गरीबों से निकटता का प्रदर्शन भले ही करें, लेकिन उनके डीएनए में गरीब विरोधी और कारपोरेट समर्थक व्‍यक्ति की पहचान उभर कर सामने आई है। यह अलग बात है कि उनके मनसूबों पर लगातार पानी फिर रहा है।

राहुलजी, आपकी बातें भी हवा-हवाई, वजन लाइये जनाब, कब तक करेंगे जुमलेबाजी

सालों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को आज तक विपक्ष का रोल अदा करना नहीं आया है, दूसरी तरफ भाजपा आज भी सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की पार्टी लगती है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी गायब होने के बाद अचानक प्रकट होते हैं और भाषण से लेकर टीवी कैमरों के सामने जुमलेबाजी करते नजर आते हैं। अभी राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हवा में बातें करते हैं और उनकी बातों में वजन होना चाहिए। ललित गेट और व्यापमं के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए मगर मोदीजी जहां इन मुद्दों पर चुप हैं, लेकिन उनकी पूरी पार्टी पलटवार करने में पीछे नहीं है। 

पीएम साहब, टी वी चैनलों पर बैठा आपका ‘चतुर गैंग’ काम न आएगा

सार्वजनिक जीवन में आप सवालों से मुँह चुराकर भाग नहीं सकते । सवाल अपने लिये माध्यम खोज लेते हैं अपने प्रियतम तक पहुँचने का , उसकी नींद चैन उड़ाने का ! फ़िलहाल हमारे प्रधानमंत्री जी यह सोच रहे हैं कि वे मीडिया की जद से बाहर रहकर इन सवालों को समय की गाद के नीचे दबाने में कामयाब हो जायेंगे जिन्होंने देश के आसमान में डेरा डाल दिया है ! ..और आप सोच रहे होंगे कि टी वी चैनलों पर बैठा आपका “चतुर गैंग” आदमी के मल से बैठक में लेप लगायेगा और परफ़्यूम छिड़क कर बदबू रोक लेगा ? पी एम साहेब ऐसा हो नहीं पाता !

एक तरफ ‘मेक इन इंडिया’ का नारा, दूसरी तरफ छंटनी से लेकर मंदी तक की परिघटनाएं

कांग्रेस की श्रम विरोधी व कारपोरेट परस्त नीतियों से त्रस्त जनता को मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया‘ और ‘कौशल विकास‘ के नारे से बहुत उम्मीद जगी थी। परन्तु आशा की यह किरण धुंधली पड़ने लगी है। उद्योगों  के निराशाजनक व्यवहार को साबित करते हुये देश की दूसरे नम्बर की ट्रैक्टर बनाने वाली कम्पनी ने अपने संयत्रों से 5 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। गनीमत यह रही कि एक प्रतिष्ठित दक्षिण भारतीय महिला की छत्रछाया में चलने वाले इस औद्योगिक समूह से निकाले जाने वाले कर्मियों के प्रति संवेदना दिखाते हुये प्रबन्धन ने उन्हें पहले से ही सूचना देने के साथ साथ न केवल तीन माह का ग्रोस वेतन दिया। बल्कि छंटनी ग्रस्त कर्मियों के लिये एक सुप्रसिद्व जॉब कन्सलटेंट की सेवायें दिलवाकर उन्हें दूसरी कम्पनियों में नौकरी दिलवाने की भी कोशिश की। 

पत्रकार वेद प्रताप वैदिक भी धुर मोदी विरोधी हो गए… पढ़िए उनका ताजा लेख

देश में मोहभंग का वातावरण जितनी तेज़ी से अब बढ़ता जा रहा है, उतनी तेज़ी से कभी नहीं बढ़ा। इंदिरा गाँधी से मोहभंग होने में जनता को 8-9 साल लगे,राजीव गाँधी के बोफोर्स का पिटारा ढाई साल बाद खुला और मनमोहन सिंह को इस बिंदु तक पहुँचने में 6-7 साल लगे लेकिन हमारे “प्रधान–सेवक” का क्या हाल है? प्रचंड बहुमत से जीतनेवाले जन—नायक का क्या हाल है? उसका नशा तो दिल्ली की हार ने एक झटके में ही उतार दिया था,और अब वसुंधरा राजे की रोचक कथाओं और सुषमा स्वराज की भूल ने सम्पूर्ण भाजपा नेतृत्व और संघ परिवार को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।

ललित मोदी से मिला, खबर से न समझौता होना था और न हुआ

मुझे याद है, राजस्थान में संपादकी कर रहा था। चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले हमारे अखबार की वजह से तिरंगा कांड हुआ और ललित मोदी के साथ शहर के एसपी के खिलाफ वारंट जारी हो गया। ललित ने मिलना चाहा और अपन मिलने से मना करने को लोकतंत्र विरोधी मानते हैं। ललित से छोटी सी मुलाकात रामबाग पैलेस होटेल के स्यूट में हुई, साफ था, खबर से ना समझौता होना था और ना हुआ। लेकिन जब और पड़ताल हुई तो शहर कलेक्टर के बारे में लोगों ने बताया किलैंड यूज चेंज के खेल में ललित के साथ कलेक्टर साहेब ने भी करीब 1200 करोड़ कमा लिए। 

‘सांध्यप्रकाश’ ने ताजा खबर में छापी मोदी और शिवराज की पुरानी फ़ोटो

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 44 वर्षों से प्रकाशित एक सांध्य दैनिक ‘सांध्यप्रकाश’ ने गुरुवार 4 जून को  प्रथम पेज पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी फ़ोटो छाप दी।

विदेश दौरों में खोए प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भारत वासी की चिट्ठी

सेवा में आदरणीय नरेंद्र मोदी जी,

प्रधान सेवक / चौकीदार / चीफ ट्रस्टी

भारत सरकार, नई दिल्ली,

विषय :- भारत के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के बावत ।

महोदय,  

आप दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं वहां कुछ न कुछ भारत के खजाने से देते हैं जो कि हम भारतीयों की खून पसीने की कमाई से इकठ्ठा  किया गया धन है, आप उसे इस तरह बाँट रहे हैं जैसे आपको ये धन पारिवारिक बंटवारे में मिला हो । आपने चुनाव के समय कहा था मुझे एक मौका दीजिये मैं भारत की संपत्ति दुनिया के लुटने नहीं दूंगा और उसकी चौकीदारी करूँगा,पर ये क्या आपको मौका मिलते ही अरबों खरबों डालर ऐसे बाँट डाले जैसे भारत को अब इस धन की जरूरत ही नहीं है। आपने तो सत्ता मिलते ही कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार ने देश का खज़ाना खाली कर दिया है फिर इतना पैसा जो आपने भूटान नेपाल श्रीलंका मंगोलिया सहित दर्जन भर देशों को दिया है ये कहाँ से आया या आपने रातों रात कमा लिए।

विकास के मनमोहन-मोदी मॉडल से तौबा !

साल भर पहले मनमोहन सिंह अछूत अर्थशास्त्री थे । साल भर पहले पहले जातीय राजनीति करने वाले बीजेपी के लिये अछूत थे । साल भर पहले कश्मीरी पंडितों की घरवापसी बीजेपी के लिये सबसे अहम थी । साल भर पहले किसानों के दर्द पर बीजेपी जान छिड़कने को तैयार थी । साल भर पहले सत्ता के दलालों के लिये बीजेपी में गुस्सा था । साल भर पहले बीजेपी को विश्व बैंक की नीतियों पर गुलाम बनाने वाली प्रतित होती थी।  साल भर पहले बीजेपी अपनी जीत पर इतराती हुई एकला चलो के नारे को लगा रही थी । और साल भर में सबकुछ बदल गया ।

रेडियो पर मन की बात और अंत: कक्ष में धन की बात

श्री नरायन यादव लिखते हैं- रेडियो पर मन की बात, अंत:कक्ष में धन की बात। डीडी – किसान चैनल पर किसान भाइयों के लिए ‘फिलम शो’ चल रहा है (8 PM)। खेती – किसानी की जानकारी नीचे स्क्रोल पर चल रही है। 

मथुरा में तो प्रदूषित यमुना मैया को भी निराश कर गए नरेंद्र मोदी

राज्य के किसी हिस्से में राजा के जाने के बाद खुशहाली और सौगातों के पदचिन्ह रह जाते हैं लेकिन अफसोस कि भरी दुपहरी में अपने प्रधामंत्री का इस्तकबाल करने को पहुंचे एक लाख से ज्यादा ब्रजवासियों को अपने ब्रज में एैसा कोई ‘चिन्ह’ दिखायी नहीं दिया। यमुना के लिये दिल्ली नाप आये पदयात्रियों के कान टी.वी. सेटों से यह सुनने को चिपके रहे कि शायद चुनाव से पहले वाले मोदी साहब एक बार बोल दें कि ‘पिछली बार यमुना माँ से सरकार की शक्ति मांगने आया था आज उस शक्ति से यमुना माँ का मैला आंचल धोने आया हूं।’’ लेकिन यमुना के हिस्से में मोदी जी का केवल यही वाक्य आया कि ‘गंगा और यमुना मेरी माँ है।’’

एक पाती पीएम के नाम : ऐसी क्यों मति मारी गई, मजीठिया पर कुछ तो बोलो महराज !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, आपको ठीक एक वर्ष पहले जनता जनार्दन का आशीर्वाद नहीं, ईश्‍वर की ओर से अवसर मिला, जिसे आप विदेश यात्राओं पर गंवा रहे हैं। आपके पास भावना नहीं, भाव प्रवण अभिनय है, जिसके मायाजाल में जनता को भटका रहे हैं। आशीर्वाद तो दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिला है, जो …

वह सुबह कभी तो आयेगी…..

ठीक साल भर पहले सुबह से दिल की धडकन देश की बढ़ी थी । हर की नजरें न्यूज चैनलों के स्क्रीन पर लोकसभा चुनाव परिणाम का इंतजार कर रही थी। ऐसे में न्यूज चैनल के भीतर की धड़कने कितनी तेज धड़क रही होंगी और जिसे न्यूज चैनल के स्क्रीन पर आकर चुनाव परिणाम की कमेंट्री से लेकर तमाम विश्लेषण करना होगा उसकी धडकनें कितनी तेज हो सकती हैं। यह सिर्फ महसूस किया जा सकता है। रिजल्ट सुबह आठ बजे से आने थे लेकिन हर चैनल का सच यही था कि उस रात रतजगा थी। और रिजल्ट से पहले वाली रात को देश सोया जरुर लेकिन एक नयी सुबह के इंतजार में। सुबह 5 बजे से गजब का शोर हर चैनल के दफ्तर में । एडिटर से लेकर चपरासी तक सक्रिय। सुबह साढे चार बजे घर से नोएडा फिल्म सिटी जाते हुये पहली बार यह एहसास अपने आप जागा कि आज सुबह वक्त से पहले क्यो नहीं। सुबह की इंतजार इतना लंबा। वही एहसास यह भी जागा कि जिस सुबह की आस में बीते कई बरस से देश छटपटा रहा है, वह सुबह आ ही गई ।

साहब! मीडिया पैसे खा रहा, नेता देश को और जनता भूखे मर रही

वाराणसी : अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या कहें कि मोदी सरकार ने अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपये किसी जनपद पर खर्च कर दिये गये होते तो वह दुनिया का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता। मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है, अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमो के कामों की बोलती बंद कैसे हो गयी।

गोएबल्स की संतानें बनाम ब्रांड मोदी का शोर

इतिहास अपने आपको दोहराने के साथ कुछ समानताएं भी लाता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमूमन उन्हीं की पार्टी के लोगों से लेकर मीडिया और तमाम विश्लेषकों द्वारा तानाशाह भी निरुपित किया जाता रहा है। हालांकि इसमें भी कोई शक नहीं कि भारत में जो कुव्यवस्थाएं हैं उसके लिए किसी आपातकाल या तानाशाह की जरूरत ही महसूस की जाती रही है। वैसे तो दुनिया भर में तानाशाह के रूप में जो व्यक्ति कुख्यात रहा उसका नाम अडोल्फ हिटलर है, जिसका प्रचार मंत्री गोएबल्स हुआ करता था। उसका कहना यह था कि किसी भी झूठ को 100 बार अगर जोर से बोला जाए तो वह अंतत: सच लगने लगता है…

मोदी सरकार पर अमेरिकी मीडिया ने साधा सीधा निशाना

अमेरिकी मीडिया ने मोदी सरकार की उपलब्धियों पर आलोचनात्मक रुख जाहिर करते हुए कहा है कि उनका महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ अभियान अब तक ज्यादातर सुर्खियों में ही रहा है और भारी अपेक्षाओं के बीच रोजगार में वृद्धि धीमी बनी हुई है।

सरकारें किसी की भी रही हों, भारतीय होने पर कभी शर्म महसूस नहीं हुई मोदीजी!

कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से विदेशी धरती पर कांग्रेस के बारे में सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि इस बारे में मैं सिर्फ भारत में ही बोलूंगा। यहां मुद्दा यह नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी धरती पर कांग्रेस की बुराई की। मुद्दा यह है कि प्रधानमंत्री शंघाई में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुये ये बोल गये कि पहले लोग भारतीय होने पर शर्म करते थे लेकिन अब देश का प्रतिनिधित्व करते हुए गर्व होता है।

बैंड, बाजा और मोदी : ओम थानवी

केंद्र सरकार के पहले वर्ष पर ब्रिटेन से प्रकाशित मशहूर पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ का क्या कहना है? कि देश में बदलाव का जबरदस्त मौका है, पर मोदी इसके लिए तैयार नहीं। कि मोदी सरकार एक अकेले शख्स का बैंड-बाजा है। मोदी इस तरह काम करते हैं मानो छोटे-छोटे सुधारों से बड़े बदलाव का जलवा हासिल कर लेंगे। मगर यह मुमकिन नहीं है।

मोदी के दो प्रिय ‘यौन शोषण के आरोपी’ पत्रकारों पर कार्रवाई क्यों नहींं!

देश के कई बड़े संस्‍थानों में कार्यस्‍थल पर महिलाओं के यौन शोषण की घटनाएं दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही हैं। सबसे खतरनाक और दुखद है, ऐसे मामलों में पीडि़ता को न्‍याय न के बराबर मिलता है। इससे इन संस्‍थानों में यौन शोषकों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। यहां तक कि महिलाओं के हितों की रक्षा करने वाला राष्‍ट्रीय महिला आयेाग या प्रदेश महिला आयोग का रुख भी बहुत ही नकारात्‍मक है। पुलिस की तरह वहां भी एक तरह से पीडि़ता को जलील होना पड़ता है। 

मजीठिया वेतनमान पर अखबारों के रवैये से नरेंद्र मोदी अनजान तो नहीं, फिर खामोश क्यों?

आप प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी की विदेश यात्राओं के चुंबकत्‍व से बाहर आ गए होंगे। उनकी मीठी-मीठी, चिकनी-चुपड़ी और गोल-मोल बातों से अपना दु:ख-दर्द भूल गए होंगे। अब जरा तंद्रा तोड़ें और सोचें कि मोदी की वजह से हमने क्‍या खोया और क्‍या पाया। खोने की जहां तक बात है तो हम अपना अधिकार खोते जा रहे हैं। जीने का अधिकार, अपनी भूमि पर खेती करने का अधिकार और शोषण के खिलाफ लड़ने का अधिकार। पाने की जहां तक बात है तो हमें मिली है महंगाई, बेरोजगारी और शोषण की अंतहीन विरासत। 

एक साल से सिर्फ सपने बेच रही मोदी सरकार, जनता के हाथ कुछ नहीं लगा

मोदी सरकार के एक साल पूरे हो गए। सब इस पर चिंतन कर रहे कि हमने क्या पाया क्या खोया, लेकिन जमीनी हकीकत यही है आम लोगों के हाथ में सपनों के अलावा कुछ नहीं आया। हां विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा लेकिन विदेशी निवेश से नहीं अपिंतु मोदी सरकार द्वारा खर्चों में बेतहाशा कटौतियों के कारण। वर्तमान हालात यह है कि मोदी जितना काम नहीं कर रहे है उससे ज्यादा प्रचार और प्रोपेगेंडा फैला रहे है जैसे सरकार ने बहुत बड़ी तीर मार ली हो और कुछ मीडिया के दलाल बड़े ठेके और जमीन पाने की लालच में प्रधानमंत्री का गुणगान कर रहे है। 

अब राजनीति में भड़ास, 7वें स्थापना दिवस पर लांच कर दी जाएगी नई राजनीतिक पार्टी

Yashwant Singh : अब राजनीतिक पार्टी मुझे बनाना ही पड़ेगा. देश चलाने के लिए हम सबों को आगे आना ही पड़ेगा. क्यों न भड़ास के सातवें स्थापना दिवस के मौके पर एक नई राजनीतिक पार्टी लांच कर दी जाए. कांग्रेस के खात्मे, मोदी के पतन, केजरी की चिरकुटई, क्षेत्रीय दलों के करप्शन आदि के कारण पूरे देश में फिर से निराशा का चरम माहौल है. नागनाथ और सापनाथ के बीच चुनने के मजबूरी के कारण हालात बहुत दूर दूर तक बदलते नहीं दिख रहे.

सबसे सफल मोदी का सोशल मीडिया मैनेजमेंट : शोध रिपोर्ट

वॉशिंगटन/ नयी दिल्ली : भारत में सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले नेताओं में सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया जाता है. अपने लगभग सभी कार्यक्रम की जानकारी नरेंद्र मोदी अपने ट्विटर हैंडल पर देते हैं इतना ही नहीं वे इसपर फोटो भी शेयर करते हैं.

मोदी और केजरी : आइए, दो नए नेताओं के शीघ्र पतन पर मातम मनाएं…

Yashwant Singh : यथास्थितिवाद और कदाचार से उबी जनता ने दो नए लोगों को गद्दी पर बिठाया, मोदी को देश दिया और केजरीवाल को दिल्ली राज्य. दोनों ने निराश किया. दोनों बेहद बौने साबित हुए. दोनों परम अहंकारी निकले. पूंजीपति यानि देश के असल शासक जो पर्दे के पीछे से राज करते हैं, टटोलते रहते हैं ऐसे लोग जिनमें छिछोरी नारेबाजी और अवसरवादी किस्म की क्रांतिकारिता भरी बसी हो, उन्हें प्रोजेक्ट करते हैं, उन्हें जनता के गुस्से को शांत कराने के लिए बतौर समाधान पेश करते हैं. लेकिन होता वही है जो वे चाहते हैं.

पीएम का दावा : मीडिया और सरकार से ज्‍यादा मजबूत मेरा सूचना तंत्र

नई दिल्ली : संसद भवन के अपने कक्ष में मध्य प्रदेश के पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि उनका अपना सूचना तंत्र मीडिया और सरकार के सूचनातंत्र से ज्यादा मजबूत है। वह चार दशक तक संघ प्रचारक के रूप में देशभर में घूमे हैं। उस दैरान हजारों लोग उनके सीधे संपर्क में रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को भी मेरे ट्वीट से भूकंप की जानकारी मिली। 

काले कानून से अरुणाचल के दिल में नफरत पैदा न करे मोदी सरकार

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के आवास के समक्ष कार से उतरा तो सामने एक सज्जन को खड़े देखा, जिन्होंने अपना जैकेट इस प्रकार पहन रखा था कि उसका एक छोर ऊँचा तथा दूसरा नीचा दिखाई दे रहा था। मेरे साथ खड़े एक पूर्व संसदीय सचिव ने उन्हें देखते ही नमस्कार किया तथा बोल पड़े-‘अरे आपका जैकेट तो ऊँचा-नीचा हो रखा है। उनकी बात सुनते ही वे झेंप गये और पुन: जैकेट के बटन खोलकर ठीक किया और उन्हें धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री के आवास में प्रविष्ट हो गये। उनके जाते ही पूर्व संसदीय सचिव ने कहा-‘ये यहाँ के गृहमंत्री हैं। उनकी बात सुनते ही मैं अचरज में पड़ गया। एक राज्य के गृहमंत्री और इतने सीधे-सादे, इतनी सादगी, न कोई ताम-झाम, न कोई हो-हल्ला?

इसी तरह गुजरात में ‘सीएम नरेंद्र मोदी’ को खत लिखकर एक और किसान ने की थी आत्महत्या

दौसा के किसान गजेन्द्र की आत्महत्या पर सभी दल अब अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने लगे हैं लेकिन ऐसे कई गजेन्द्र गुजरात में भी हैं. गुजरात के जामनगर जिले के कल्य़ाणपुरा तालुका के छिजवड़ गांव के अनिरुद्ध सिंह जाड़ेजा  ने भी ठीक गजेन्द्र की ही तरह 4 अक्टूबर 2012 को नरेन्द्र मोदी के नाम पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली थी. उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. 

फेकू मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल…

पीएम नरेंद्र मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा हुआ है कि सीमेंट की एक बोरी 120 रुपये में मिल रही है. एबीपी न्यूज द्वारा चलाई गई ऐसी खबर का स्क्रीनशाट लगाकर लोग लिख रहे हैं कि अब मोदी जी ही बता दें कि वो दुकान कहां है जहां पर इतने सस्ते रेट पर सीमेंट की बोरी मिल रही है.

इतना भी हवा-हवाई मत करो भाई, मोदीजी पर नजर हम भी रखते हैं : ओम थानवी

एक पत्रकार ने ट्वीट किया कि मोदी फ्रांस में हैडफोन के बिना फ्रेंच कैसे सुन रहे थे? बाद में साफ हुआ कि मोदी के पास एक कान वाला इयरपीस था जो दूसरी तरफ से ओझल था। फिर एक पत्रकारा ने लिखा कि मोदी लुई वीतों का शॉल ओढ़े हुए थे, हाथकरघे का शॉल पेरिस में ज्यादा फबता। हालांकि मोदी महंगे पहनावे के लिए जाने जाते हैं, पर जो नहीं था वह नहीं था। लुई वीतों ने इनकार करते कहा कि वे तो ऐसे शॉल बनाते ही नहीं। ऐसे ही उस शॉल पर मोदी के नाम वाला ‘एनएम-एनएम’ लिखा ट्वीट भी मैंने देखा जिसकी पुष्टि नहीं होती; बहुत संभव है कि वह भी फोटोशॉप का खेला हो।

ट्विटर : मोदी पर मजाकिया मैटर साझा करने वाले पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग

न्यूज एजेंसी एएनआई उस व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई करेगी, जिसने उसके ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने के लिए किया है। ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है, जिसमें नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाता हुआ ट्वीट किया गया है। इस बीच ट्विटर पर इस तस्वीर को शेयर करने वाले एक पार्टी के नेता और कई पत्रकारों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

कारपोरेट हित में विकास पिता मोदी और धरती पुत्र मुलायम किसानों को खुदकुशी के लिए विवश करे रहे

लखनऊ : प्रदेश में लगातार हो रही बेमौसम बारिश से फसलों की बर्बादी के बाद रिहाई मंच ने सूबे की सरकार से कृषि संकट पर आपातकाल घोषित करने की मांग की है। मंच ने प्रमुख सचिव आलोक रंजन को तत्काल हटाने की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने असंवेदनशीलता दिखाते हुए सूबे में 35 किसानों की सदमे से हुई मौत का आकड़ा दिया है और इसे फसल बर्बादी की वजह नहीं माना है। जबकि मंच ने पिछले मार्च महीने में मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में 21 दिनों में 14 आत्महत्या व 49 दिल का दौरा व सदमे से हुई मौतों का ब्योरा दिया था, जो अब बढ़कर 400 से अधिक हो चुका है।

शॉल पर नमो नाम मामले में फ्रेंच कंपनी की सफाई के बाद पत्रकार सागरिका घोष ने माफी मांगी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस यात्रा के दौरान जिस शाल को ओढ़ा था उस पर उनका नाम प्रिंट है. चर्चा है कि यह शाल फ्रेंच की प्रसिद्ध कंपनी लुई वितां ने बनाया है. इसके पहले मोदी का सूट विवादों में आया था जिस पर उनका नाम लिखा था. उन्होंने वह सूट अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान पहना था. सोशल मीडिया पर नरेन्द्र मोदी के नाम लिखी शाल को लेकर चर्चा छिड़ी हुई है. मीडिया ने भी शाल के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उछालना शुरू कर दिया है.

आरएसएस, एल्विन टॉफलर और मोदी

अगर आपने एल्विन टॉफलर को नहीं पढा है तो पढ़ लीजिये। शुरुआत थर्ड वेब से कीजिये। क्योंकि आने वाले दिनो में मोदी सरकार भी उसी तरह टेक्नालाजी को परिवर्तन का सबसे बडा आधार बनायेगी जैसे एल्विन टाफलर की किताबों में पढ़ने पर आपको मिलेगा। डिजिटल भारत की कल्पना मोदी यू ही नहीं कर रहे हैं बल्कि उनके जहन में भी एल्विन टाफलर है। दरअसल, यह संवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भीतर स्वयंसेवको का हैं। और पहली बार सरसंघचालक मोहन भागवत को लग रहा है कि नरेन्द्र मोदी भारत की दिशा को बदल सकते हैं।

अगर मोदी पद्मविभूषण शर्मा को इंटरव्यू देते, क्योंकि इंटरव्यू लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता

शर्मा- विकास? मोदी-हो गया। शर्मा- हां, वो तो हो गया। मोदी-गुड. शर्मा-किसान…सॉरी किसान नहीं, FDI.

दूरदर्शन अब भाजपा दर्शन, रेडियो पर ‘मन की बात’ पता नहीं किसके मन की : ममता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेडियो पर प्रधानमंत्री के संबोधन ‘मन की बात’ पर चुटकी लेते हुए कहा है कि हर समय लेक्चर देते रहते हैं। ‘मन की बात’ पता नहीं किसके मन की होती है। दूरदर्शन अब भाजपा दर्शन बन गया है । दिमाग ही नहीं है तो चलेगा कैसे। …

मोदी जी, आम आदमी के साथ इत्ता बड़ा “ब्लंडर” तो AAP वालों ने भी नही किया था जैसे आप कर रहे हो..

परम आदरणीय मोदी जी..

प्रणाम

ये आपको क्या हो गया है…

चुनाव के पहले और चुनाव के बाद आपकी स्थिति तो सस्ते अखबार में आने वाले
“शादी के पहले और शादी के बाद”
वाले विज्ञापन जैसी हो गयी है..

फसल ऊपरवाला ले गया, नौकरी अखिलेश और जमीन मोदी

सात रुपये का चेक। किसी किसान को मुआवजे के तौर पर अगर सात रुपये का चेक मिले तो वह क्या करेगा। 18 मार्च को परी ने जन्म लिया। अस्पताल से 3 अप्रैल को परी घर आई। हर कोई खुश । शाम में पोती के होने के जश्न का न्योता हर किसी को। लेकिन शाम में फसल देखने गये परी के दादा रणधीर सिंह की मौत की खबर खेत से आ गई। समूचा घर सन्नाटे में। तीन दिन पहले 45 बरस के सत्येन्द्र की मौत बर्बाद फसल के बाद मुआवजा चुकाये कैसे। आगे पूरा साल घर चलायेंगे कैसे। यह सोच कर सत्येन्द्र मर गया तो बेटा अब पुलिस भर्ती की कतार में जा कर बैठ गया।

‘एडिटर’ सांघवी पर ‘संपादक’ ओम थानवी की टिप्पणी और मोदीजी का सूट, खूब निकाली भड़ास फेसबुकियों ने

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दस लखिया सूट और एक वरिष्ठ पत्रकार के भाषा प्रेम पर गहरी चोट कर सीधे सीधे शब्दों में कई मायने समझा दिए। और उसी बहाने पीएम पर भी चुटीले शब्दों को बारिश हुई। ओम थानवी लिखते हैं – ” इतवार को हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बंटने वाली पतरी ‘ब्रंच’ में वीर पत्रकार सांघवी लिखते हैं कि मोदीजी का वह नामधारी सूट दस लाख का नहीं था। कितने का था, उन्हें पता नहीं। कोई बात नहीं। लेकिन आगे वे लिखते हैं कि सूट पर नाम हिंदी में कढ़ा होता तो इतनी नुक्ताचीनी शायद नहीं होती।”

लड़खड़ा कर गिरे फोटोजर्नलिस्ट को पीएम ने थाम लिया

नई दिल्ली : जजों और मुख्यमंत्रियों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां फोटो खींचने के दौरान लड़खड़ा कर गिरे एक फोटो जर्नलिस्ट को हाथ से संभाल लिया। सम्मेलन में मोदी वहां बैठे जजों-अतिथियों का अभिवादन स्वीकारते हुए आगे बढ़ रहे थे। उसी दौरान उनकी फोटो लेने के लिए अन्य फोटोग्राफरों …

सपने में मिले मोदी तो मांग लिया मजीठिया कि रामजी भला करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपने मन की बात या यूं कहें मन मुताबिक बात अब लोगों के सपने में जाकर कहने लगे हैं। शायद उनका रेडियो से भी भरोसा उठने लगा है। मेरे आज के सपने से तो यही लग रहा है।

केजरीवाल पर संपादक ओम थानवी और नरेंद्र मोदी पर पत्रकार दयानंद पांडेय भड़के

Om Thanvi : लोकपाल को वह क्या नाम दिया था अरविन्द केजरीवाल ने? जी, जी – जोकपाल! और जोकपाल पैदा नहीं होते, अपने ही हाथों बना दिए जाते हैं। मुबारक बंधु, आपके सबसे बड़े अभियान की यह सबसे टुच्ची सफलता। अगर आपसी अविश्वास इतने भीतर मैल की तरह जम गया है तो मेल-जोल की कोई राह निकल आएगी यह सोचना मुझ जैसे सठियाते खैरख्वाहों की अब खुशफहमी भर रह गई है। ‘साले’, ‘कमीने’ और पिछवाड़े की ‘लात’ के पात्र पार्टी के संस्थापक लोग ही? प्रो आनंद कुमार तक? षड्यंत्र के आरोपों में सच्चाई कितनी है, मुझे नहीं पता – पर यह रवैया केजरीवाल को धैर्यहीन और आत्मकेंद्रित जाहिर करता है, कुछ कान का कच्चा भी।

पलटीमार मोदी सरकार : करप्शन घपले घोटाले की गुमनाम शिकायतों की जांच नहीं की जाएगी

ये लीजिए…. मोदी सरकार की एक और पलटी. दरअसल, पलटी तो महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मारी है, लेकिन अगर तकनीकी तौर पर मुखिया यानी मुख्यमंत्री को साइड कर दें तो सरकार एक तरह से मोदी की ही है और उन्हीं के नाम पर चुन कर आई है. उन्हीं का चेहरा देखकर राज्य के लोगों ने भाजपा को वोट दिया था. इसलिए इस पलटी को मोदी की पलटी कहना गलत नहीं होगा. मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान चीख-चीख कर कहा था कि उनकी सरकार आई, तो भ्रष्टाचार की गुमनाम शिकायतों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा और सबसे बड़ा झूठ मिल गया है!

Yashwant Singh :  भारत को अपना 21वीं सदी का सबसे बड़ा झुट्ठा मिल गया है. वह हैं माननीय नरेंद्र मोदी. जाहिर है, जब झुट्ठा मिल गया तो सबसे बड़ा झूठ भी खोज निकाला गया है. वह है- ‘अच्छे दिन आएंगे’ का नारा. नरेंद्र आम बजट में चंदा देने वाले खास लोगों को दी गयी 5% टैक्स की छूट… इसकी भरपाई वोट देने वाले आम लोगों से 2% सर्विस टैक्स बढा कर की जाएगी.. मोदी सरकार पर यूं ही नहीं लग रहा गरीब विरोधी और कारपोरेट परस्त होने के आरोप. खुद मोदी के कुकर्मों ने यह साबित किया है कि उनकी दशा-दिशा क्या है. इन तुलनात्मक आंकड़ों को कैसे झूठा करार दोगे भक्तों… अगर अब भी मोदी भक्ति से मोहभंग न हुआ तो समझ लो तुम्हारा एंटीना गड़बड़ है और तुम फिजूल के हिंदू मुस्लिम के चक्कर में मोदी भक्त बने हुए हो. तुम्हारी ये धर्मांधता जब तुम्हारे ही घर के चूल्हे एक दिन बुझा देगी शायद तब तुम्हें समझ में आए. कांग्रेस की मनमोहन सरकार से भी गई गुजरी मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का वक्त आ गया है… असल में संघ और भाजपा असल में हिंदुत्व की आड़ में धनिकों प्रभुओं एलीटों पूंजीपतियों कार्पोरेट्स कंपनियों मुनाफाखोरों की ही पार्टी है। धर्म से इनका इतना भर मतलब है कि जनता को अल्पसंख्यक बहुसंख्यक में बाँट कर इलेक्शन में बहुमत भर सीट्स हासिल कर सकें। दवा से लेकर मोबाइल इंटरनेट घर यात्रा तक महंगा कर देना कहाँ के अच्छे दिन हैं मोदी जी। कुछ तो अपने भासड़ों वादों का लिहाज करो मोदी जी। आप तो मनमोहन सोनिया राहुल से भी चिरकुट निकले मोदी जी।

प्रधानमंत्री मोदी भूमि अधिग्रहण मामले में रणनीतिक चूक के शिकार हुए

भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आते ही जिस तरह भूमि अधिग्रहण को लेकर एक अध्यादेश प्रस्तुत कर स्वयं को विवादों में डाल दिया है, वह बात चौंकाने वाली है। यहां तक कि भाजपा और संघ परिवार के तमाम संगठन भी इस बात को समझ पाने में असफल हैं कि जिस कानून को लम्बी चर्चा और विवादों के बाद सबकी सहमति से 2013 में पास किया गया, उस पर बिना किसी संवाद के एक नया अध्यादेश और फिर कानून लाने की जरूरत क्या थी? इस पूरे प्रसंग में साफ दिखता है कि केन्द्र सरकार के अलावा कोई भी पक्ष इस विधेयक के साथ नहीं है।

बड़बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रिंट मीडियाकर्मियों के मजीठिया वेतनमान विवाद पर चुप क्यों हैं!

मजीठिया वेतनमान को लेकर प्रेस मालिक संविधान और कानून की हत्या कर रहे है। बड़बोले प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें सब कुछ जानकर भी चुप है। ऐसा लगता है कि प्रेस मालिक देश के संविधान और कानून से बढ़कर है। इतना ही नहीं जो पत्रकार कोर्ट जा रहा है उन्हें संस्थान से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। कानून की ऐसी दुर्गती और कहां देखने को मिल सकती है। जिसका पालन समाज के सबसे जागरूक वर्ग के बीच ही नहीं हो रहा है। 

कांग्रेस राज के मुकाबले मोदी राज में ज्यादा करप्ट और तानाशाह है डीएवीपी

: मोदी सरकार की बदनामी का कारण बन रहा है DAVP : सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्‍तर्गत आने वाले भारत के सबसे बड़े भ्रष्‍ट व तानाशाही पूर्ण रवैया वाली सरकारी एजेंसी जिसे डीएवीपी कहा जाता है, ने पूरे देश के इम्‍पैनलमेंट किये गये समाचार पत्रों की लिस्‍ट 11 फरवरी 2015 को जारी की है. DIRECTORATE OF ADVERTISING AND VISUAL PUBLICITY यानि DAVP भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्‍तर्गत आता है. यह विभाग देश भर के हर छोटे व बड़े समाचार पत्रों को विज्ञापन हेतु इम्‍पैनल करता है. बडे अखबारों को छोडकर लघु व मध्‍यम समाचार पत्रों को साल भर में बड़ी मुश्‍किल से दो विज्ञापन देता है. वह भी 400 वर्गसेमी के.

एनडीटीवी प्राइम टाइम में Ravish Kumar और अभय दुबे ने भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली को पूरी तरह घेर लिया

Shambhunath Shukla : एक अच्छा पत्रकार वही है जो नेता को अपने बोल-बचन से घेर ले। बेचारा नेता तर्क ही न दे पाए और हताशा में अंट-शंट बकने लगे। खासकर टीवी पत्रकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। बीस जनवरी को एनडीटीवी पर प्राइम टाइम में Ravish Kumar और अभय दुबे ने भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली को ऐसा घेरा कि उन्हें जवाब तक नहीं सूझ सका। अकेले कोहली ही नहीं कांग्रेस के प्रवक्ता जय प्रकाश अग्रवाल भी लडख़ड़ा गए। नौसिखुआ पत्रकारों को इन दिग्गजों से सीखना चाहिए कि कैसे टीवी पत्रकारिता की जाए और कैसे डिबेट में शामिल वरिष्ठ पत्रकार संचालन कर रहे पत्रकार के साथ सही और तार्किक मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं। पत्रकार इसी समाज का हिस्सा है। राजनीति, अर्थनीति और समाजनीति उसे भी प्रभावित करेगी। निष्पक्ष तो कोई बेजान चीज ही हो सकती है। मगर एक चेतन प्राणी को पक्षकार तो बनना ही पड़ेगा। अब देखना यह है कि यह पक्षधरता किसके साथ है। जो पत्रकार जनता के साथ हैं, वे निश्चय ही सम्मान के काबिल हैं।

किसान मर रहे हैं, मोदी सपने दिखाते जा रहे हैं, मीडिया के पास सत्ता की दलाली से फुर्सत नहीं

Deepak Singh :  प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बनने के बाद कौन सुध लेता हैं किसानों की? महाराष्ट्र में और केंद्र में दोनों जगह भाजपा की सरकार पर हालत जस के तस। यह हाल तब हैं जब नरेंद्र मोदी को किसानों का मसीहा बता कर प्रचार किया गया। आखिर क्यों नई सरकार जो दावा कर रही हैं की दुनिया में देश का डंका बज रहा हैं पर उस डंके की गूंज गाँव में बैठे और कर्ज के तले दबे गरीब और हताश किसान तक नहीं पहुँच पाई? क्यों यह किसान आत्महत्या करने से पहले अपनी राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं कर पाया की सरकार आगे आएगी और कुछ मदद करेगी?

पूंजीपतियों की पक्षधरता के मामले में कांग्रेसी ममो के बाप निकले भाजपाई नमो!

: इसीलिए संघ और सरकार ने मिलजुल कर खेला है आक्रामक धर्म और कड़े आर्थिक सुधार का खेल : जनविरोधी और पूंजीपतियों की पक्षधर आर्थिक नीतियों को तेजी से लागू कराने के लिए धर्म पर बहस को केंद्रित कराने की रणनीति ताकि जनता इसी में उलझ कर रह जाए : सुधार की रफ्तार मनमोहन सरकार से कही ज्यादा तेज है। संघ के तेवर वाजपेयी सरकार के दौर से कहीं ज्यादा तीखे है । तो क्या मोदी सरकार के दौर में दोनों रास्ते एक दूसरे को साध रहे हैं या फिर पूर्ण सत्ता का सुख एक दूसरे को इसका एहसास करा रहा है कि पहले उसका विस्तार हो जाये फिर एक दूसरे को देख लेंगे।

मेरे साथ न्याय नहीं हुआ, बुलाया गया तो मोदी के साथ रहने दिल्ली जाऊंगी : जसोदा बेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन का कहना है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है और उन्हें वे सुविधाएं नहीं मिली हैं, जो एक पीएम की पत्नी होने के नाते उन्हें मिलनी चाहिए थीं। यदि उन्हें बुलाया जाता है तो वह दिल्ली मोदी के साथ रहने जाएंगी। सोमवार को मेहसाणा में स्कूटर की पिछली सीट पर बैठकर घर लौट रहीं जसोदाबेन से जब एक न्यूज चैनल के पत्रकार ने पूछा कि उन्होंने आरटीआई आवेदन क्यों दिया है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला है और कोई सुविधा भी नहीं मिल रही है।

मोदी की तरह मुलायम ने भी मुस्लिम विहीन गांव गोद लिया!

लखनऊ : मुलायम सिहं यादव द्वारा आजमगढ़ के मुस्लिम आबादी विहीन तमौली गांव को गोद लिए जाने पर रिहाई मंच ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुलायम सिंह भी मोदी की राह पर चल रहे है। मंच ने आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस के सर्वे के आधार पर मोदी ने जिस तरह से वाराणसी के मुस्लिम आबादी विहीन जयापुर गांव को गोद लिया ठीक उसी सर्वे पर मुलायम ने भी मुस्लिम विहीन आबादी वाले गांव को ही चुना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर साबित हुए झूठे, जीवित लोगों को मरा बता संवेदना भी जता दी

आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लेने की जो वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी थी वह गलत निकली है। प्रधानमंत्री ने जयापुर गांव में बोलते वक्त कहा था कि इस गांव को गोद लेने के मेरे फैसले के पीछे मीडिया ने कई मनगढ़ंत वजहें गिनायी थी। लेकिन इस गांव को गोद लेने की जो वजहें मीडिया ने बतायी वह सब गलत है। लेकिन बड़ी बात यह है कि जो वजह पीएम मोदी ने बतायी वह भी गलत निकली है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जयापुर गांव में बिजली हादसे की वजह से पांच लोगों की मौत हो गयी थी। इस वजह से उन्होंने बुरे वक्त से गुजर रहे इस गांव को गोद लेने का फैसला लिया था। पीएम ने अपने भाषण के दौरान इमोशनल अपील करते हुए कहा था कि बुरे वक्त में वो आपके साथ है। साथ ही उन परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त भी की थी।

मोदी की बनारस यात्रा : स्मृति ईरानी से मात खाकर हर्षवर्धन को औकात बोध हो गया!

Sheetal P Singh : प्रधानमंत्री की आज होने वाली बनारस यात्रा से “ट्रामा सेन्टर” के शिलान्यास कार्यक्रम को रद्द कराने में मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी कामयाब हो गईं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन अपनी सारी कोशिशों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनाने में नाकामयाब साबित हुए। उन्होंने पिछले कार्यक्रम (जो टल गया था, अब हो रहा है) में इसे सबसे प्रमुख कार्यक्रम तय कराया था। क़रीब २०० करोड़ की लागत से बीएचयू में बना ट्रामा सेंटर पिछले डेढ़ साल से उद्घाटक की प्रतीक्षा कर रहा है।

केजरीवाल की खांसी और मोदी की चायवाले की पोलिटिकल मार्केटिंग के मायने

Vineet Kumar : मैं मान लेता हूं कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी खांसी की पॉलिटिकल मार्केटिंग की..शुरुआत में जो खांसी हुई और उसके प्रति लोगों की जो संवेदना पैदा हुई, उसे उन्होंने सिग्नेचर ट्यून में बदल दिया..ये अलग बात है कि बनावटी खांसी के लिए भी कम एफर्ट नहीं लगाने पड़ते..लेकिन एक दूसरा शख्स अपने को चाय बेचनेवाला बताता है, बचपन के संघर्ष के किस्से सुनाता है जो कि उसकी असल जिंदगी से सालों पहले गायब हो गए तो आप हायपर इमोशनल होकर देश की बागडोर उनके हाथों सौंप देते हैं.

तो क्या मोदी ने संविधान के अनुच्छेद 51A(h) का उल्लंघन किया है!

Virendra Yadav : ‘दि हिन्दू ‘ (1 नवंबर) में प्रकाशित अपने इस महत्वपूर्ण लेख में करण थापर ने ध्यान आकर्षित किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(h) में वैज्ञानिक समझ को विकसित करना हर नागरिक का कर्तव्य बताया गया है. करण थापर का प्रश्न है कि क्या एक चिकित्सालय का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री का मिथकों के हवाले से यह कहना उचित है कि भारत में महाभारत काल में ही जेनेटिक साईंस थी क्योंकि कर्ण कुंती के गर्भ से नही पैदा हुए थे और यह भी कि यदि उस काल में प्लास्टिक सर्जरी न होती तो गणेश का मस्तक हाथी का क्यों होता?

370 एकड़ वन जमीन सौंपकर उद्योगपति अडानी का कुछ एहसान चुका दिया मोदी जी ने

Yashwant Singh : मुंबई मिरर में आज खबर है कि मोदी की सरकार ने अपने प्रिय उद्योगपति मिस्टर अदानी के गोंडिया पावर प्रोजेक्ट के लिए 370 एकड़ वन जमीन की स्वीकृति दे दी है. यानि 370 एकड़ जंगल की जमीन पर अब अदानी का अधिकार होगा और उनका पावर प्रोजेक्ट चलेगा. अदानी को इस प्रस्ताव पर स्वीकृति पूरे छह साल तक इंतजार के बाद मिली है. यानि जब मोदी जी केंद्र में आए हैं तभी अदानी के प्रस्ताव पर ओके की मुहर लग गई है. और, इस प्रकार अदानी साब ने मोदी के लिए चुनाव में जो जो किया, उसका छोटा सा एहसान मोदी जी ने चुका दिया है. पावर प्रोजेक्ट चले, बिजली बढ़े, इस पर किसी को एतराज न होगा. लेकिन सवाल वही है कि आम जन का भला करने के नाम पर आई मोदी सरकार सबसे तेजी से उद्योगपतियों की जेब भरने में लगी है.

रेल में खेल (1) : ‎मोदी ‎सरकार‬ को इस ब्लंडर की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी

Priyanka Dubey : हम फ्रीलांसर होकर भी हर छोटी से छोटी पेमेंट का एक चौथाई टैक्स भरते हैं. आम लोगों के टैक्स से सरकार काम करती है. हमारे खून पसीने की कमाई से ट्रेन चलाएंगे. और बैठेंगे उसमें प्रीमियम लोग? पहले ही जनरल डब्बे कम कर दिए गए हैं. अब सरकार यह चाहती है की गरीब अपने घर पैदाइश और मौत में न जा पाए? धीरे धीरे जनरल डब्बे खत्म कर दिए जाएंगे और स्लीपर में तत्काल का टिकट आम इंसान खरीद नहीं पाएगा. पूरा भारत व्यापारियों और उद्योगपतियों से भरा गुजरात नहीं है जो जन सुविधा के हर साधन के निजीकरण पर तुले हुए हैं. उम्मीद है कि ‎मोदी ‎सरकार‬ को अपने इस पोलिटिकल और स्ट्रेटेजिक ब्लंडर की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.

पत्रकार प्रियंका दुबे के फेसबुक वॉल से.

इत्ता सारा सफ़ेद धन आवे कहाँ से जो हर अख़बार टीवी ख़रीद लेवे?

Om Thanvi : इसके बावजूद समर्थन के लिए दोस्तों और दुश्मनों के सामने याचक बने बैठे हैं? … और मितरो, इतना (सफेद) धन आवे कहाँ से है?

सोशल मीडिया के मित्रों ने मुझे मोदी विरोधी कहते हुए हमला बोल दिया : अमोल पालेकर

हां, मैंने नोटा का बटन दबाया और बूथ के बाहर खड़े मीडिया को अपनी स्याही लगी बायें हाथ की उंगली उठा कर दिखा दिया. जी हां, मेरे विचार इन स्वार्थी लोगों से नहीं मिलते! मेरी ऐसी इच्छा भी नहीं है कि मेरे बारे में छोटी-छोटी बात दूसरे लोग जानें. शायद यही वजह है कि मुझे सोशल मीडिया और मोदी विरोधी मान लिया गया. आज ‘ब्रांडिंग’ के दौर में एक खास विचारधारा के लोग मुझ पर ठप्पा लगाने से नहीं चूक रहे. ये गजब है. या तो आप मोदी के समर्थक हैं या फिर मोदी विरोधी हैं. जिस समय मैंने ये कहा कि मोदी की आलोचना उनके कद को और ऊंचा कर देगी, मेरे आजाद ख्याल दोस्तों ने मुझे  मोदी का पक्षकार मान लिया और जिस क्षण मैंने ‘सेकुलर’ पर बात की, मेडिसन स्क्वायर से सोशल मीडिया के मित्रों ने मुझे  मोदी विरोधी कहते हुए हमला बोल दिया.

ब्लैकमनी पर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना कांग्रेसी चरित्र दिखा दिया

Mukesh Yadav : कौन करेगा इस न्यूज़ को ब्रेक? क्या कोई करेगा? ब्लैकमनी पर मोदी सरकार ने भी आज सुप्रीम कोर्ट में अपना कांग्रेसी चरित्र दिखा ही दिया!! सरकार कहती है कि काला धन रखने वालो के नाम उजागर नहीं कर सकते!! वही कांग्रेसी जवाब और वजह! हालांकि जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में इन धनपशुओं के नाम उपलब्ध होंगे!..इतना ही काफी होता; अगर मीडिया स्वतंत्र होता!! इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म शायद इन नामों को जनता तक पहुँचाने की जुर्रत करता! लेकिन आज ऐसा मीडिया समूह खोजना मुश्किल है, जो मोदी के नाम से खौफ न खाता हो? रही बात पत्रकारों की तो उनकी सीमाएं जग जाहिर हैं। नौकरी से निकाल दिए जाओगे- वाले जुमले का खौफ ही उनके लिए काफी है, नहीं? ऐसे में कौन जोखिम उठाए?

चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार…

Yashwant Singh : चाहे जो कहो… सड़ी हुई कांग्रेसी सरकारों से ज्यादा सक्रिय है भाजपा की मोदी सरकार… कांग्रेसी सरकारों में वामपंथियों और सोशलिस्टों को अच्छी खासी नौकरी, लाटरी, मदद, अनुदान, पद, प्रतिष्ठा टाइप की चीजें मिल जाया करती थी… अब नहीं मिल रही है तो साले ये हल्ला कर रहे हैं … पर तुलनात्मक रूप से निष्पक्ष होकर देखो तो भाजपा की मोदी सरकार जनादेश के दबाव में है और बेहतर करने की कोशिश करती हुई दिख रही है… हां, अगर जनता ने भाजपा को जिताया है तो भाजपा अपने एजेंडे को लागू करेगी ही.. वो एजेंडा हमको आपको पसंद आता हो या न आता हो, ये अलग बात है… पर सक्रियता और जनपक्षधरता को लेकर कांग्रेस व भाजपा में से किसी एक की बात करनी हो तो कहना पड़ेगा कि भाजपा सरकार ज्यादा सक्रिय और ज्यादा सकारात्मक है.

मोदी की रैली में पुलिस ने पत्रकारों को अंदर जाने से रोका, चपरासी को पास थमा गायब हुए भाजपा के पीआरओ

मोदी मीडिया की परवाह नहीं करते, ये बात तो सुर्खियों में है ही। यहां संगठन के निचले स्तर पर भी यह झलकने लगा है। बुधवार को हरियाणा के यमुनानगर में हुई मोदी की रैली में पत्रकारों को अपमान का वो घूंट पीना पड़ा, जो वो इस जन्म में तो भूलेंगे नहीं। रैली के लिए पत्रकारों को पास देने का जो जिम्मा स्थानीय भाजपा के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सपरा को दिया गया था, वो ही जनाब ऐन मौके पर पास देने की बजाए गायब हो गए।

मोदी सरकार को कुंभकर्ण कहकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

खुद को काफी मेहनती और सक्षम समझने वाली नरेंद्र मोदी की सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मिथकीय पात्र कुंभकर्ण और 19वीं सदी की एक कहानी के चर्चित कामचोर पात्र ‘रिप वान विंकल’ से की है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार इन दोनों पात्रों की तरह ही बर्ताव कर रही है। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को डांट लगाने की दौरान केंद्र सरकार को भी इन दोनों विशेषणों से नवाजते हुए फटकारा। सुप्रीम कोर्ट की त्यौरियां केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय की लापरवाहियों पर चढ़ी हुई हैं। गुरुवार का मामला एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसे पर्यावरण मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करना था।

नरेंद्र मोदी कांग्रेसी हो गए हैं!

Dayanand Pandey : कांग्रेस मुक्त भारत की दहाड़ लगाने वाले नरेंद्र मोदी आहिस्ता-आहिस्ता उसी रहगुज़र के आशिक हो चले दीखते हैं। आप दीजिए गांधी, नेहरू, पटेल और इंदिरा जी को भी इज़्ज़त और बख्शिए उन्हें नूर भी! इस के हक़दार हैं यह लोग। खादी-वादी , हिंदी-विंदी, अमरीका, चीन, जापान , भूटान और नेपाल भी ठीक है, बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि दे कर शिव सेना की हवा भी निकालिए लेकिन इन गगनचुंबी बातों की बिना पर, नित नई डिप्लोमेसी की बुनियाद पर असली मुद्दों से आंख तो मत चुराइए जनाबे आली! नहीं तो जनता आंख से काजल निकाल लेना भी जानती है।

प्रधानमंत्री जनधन योजना के नंबर नहीं लग रहे

Bhoopendra Singh : आज एक आदमी मिला। बोला, मैंने जागरण अखबार पढ़ा। उसमें प्रधानमंत्री जनधन योजना के बारे में जानकारी लेने के लिए दो टोल फ्री नंबर दिए हैं। पर दोनों ही नंबर नहीं लग रहे। मैंने भी उक्त दोनों नंबर कई दफा डायल किए। सच में नहीं लग रहे। एक व्यस्त है तो दूसरे पे रिंगटोन के सिवा कुछ नहीं आ रहा।

‘अच्छे दिन’ का नारा लगा मोदी केंद्र की सत्ता तक पहुंचे पर इन साढ़े चार महीने में हालात बद से बदतर हुए हैं

Shambhu Nath Shukla : केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बने साढ़े चार महीने होने को जा रहे हैं। मैने आज तक मोदी के कामकाज पर कोई टिप्पणी नहीं की और न ही कभी उनके वायदों की खिल्ली उड़ाई। मैं न तो हड़बड़ी फैलाने वाला अराजक समाजवादी हूं न एक अभियान के तहत मोदी पर हमला करने वाला कोई माकपाई। यह भी मुझे पता था कि मेरे कुछ भी कहने से फौरन मुझ पर कांग्रेसी होने का आरोप मढ़ा जाता। लेकिन अब लगता है कि मोदी के कामकाज पर चुप साधने का मतलब है कि आप जानबूझ कर मक्खी निगल रहे हैं। ‘समथिंग डिफरेंट’ और ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का नारा लगाकर मोदी केंद्र की सत्ता तक पहुंचे पर असलियत यह है कि इन साढ़े चार महीने में हालात बद से बदतर हुए हैं।

मोदी की अदभुत चतुराई, ताकि जनता भूल जाए महंगाई

Om Thanvi :  छोड़िए। मैं मोदीजी पर कुछ नहीं बोल रहा। एनडीटीवी के संजीदा पत्रकार Umashankar Singh की एक अहम जानकारी वाली पोस्ट महज साझा कर रहा हूँ। इसका संपादित अंश जनसत्ता अखबार में प्रकाशित है। जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.