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सुख-दुख

वक्त: सुब्रत राय के दौर का सबसे ताकतवर शख्स ओपी श्रीवास्तव आज सलाखों के पीछे तनहा है!

संजय शर्मा-

जिंदगी भर ऐशो-आराम में डूबे रहे ओपी श्रीवास्तव. सत्ता के गलियारों में उनका नाम असर के साथ लिया जाता था.

सुब्रत राय की मौत के बाद जैसे ही सहारा साम्राज्य की परतें खुलनी शुरू हुईं, घराने की कई अनकही कहानियाँ बाहर आने लगीं. कभी रहस्यमयी और अभेद्य दिखने वाला यह साम्राज्य अचानक सवालों के घेरे में आ गया.

छोटे भाई जयब्रत राय दुबई शिफ्ट हो गए. सुब्रत राय के दोनों बेटे भी विदेश में जा बसे. एक दुबई और दूसरा लंदन. भारत में जो साम्राज्य खड़ा हुआ था, उसके वारिस धीरे-धीरे देश की सीमाओं से बाहर चले गए.

सुब्रत राय के दौर में ओपी श्रीवास्तव को सबसे ताकतवर शख्स माना जाता था. फैसलों की मेज पर उनकी कुर्सी हमेशा आगे रहती थी. कारोबार, नेटवर्क और राजनीतिक पहुंच. हर जगह उनकी पकड़ बताई जाती थी.

इसी बीच सहारा के बुरे दिन शुरू हुए. अदालतों की सख्ती, जांच एजेंसियों की सक्रियता और संपत्तियों पर ताले लगने लगे. कभी शान से खड़ी इमारतों पर सन्नाटा छा गया. जिन संपत्तियों पर कभी सत्ता और पूंजी का रौब दिखता था, वहां कानूनी नोटिसों की मोहरें लगने लगीं.

कहा जाता है कि कुछ ऐसी संपत्तियां भी थीं जिनकी जानकारी सीमित दायरे में ही थी. उन पर सबसे अधिक पकड़ ओपी श्रीवास्तव की मानी जाती थी. लेकिन वक्त का पहिया जब पलटा तो कहानी भी बदल गई.

समय का खेल देखिए. जो शख्स कभी सीधे मुख्यमंत्री से बात करता था, वही आज जेल की सलाखों के पीछे तनहा है. कभी जिनके इशारों पर फैसले होते थे, आज उनकी जमानत तक पर सियासी और कानूनी रस्साकशी जारी है.

सत्ता, संपत्ति और संबंध. तीनों का समीकरण बदलते देर नहीं लगती. कल तक जो ताकत का प्रतीक था, आज वही सिस्टम की पकड़ में है. यही वक्त की सच्चाई है. कुर्सियां स्थायी नहीं होतीं. हालात बदलते हैं और ताकत का ताज कभी भी फिसल सकता है.

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