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राजस्थान पुलिस द्वारा भोपाल के दोनों पत्रकारों को छोड़ने से देशभर के पत्रकारों ने जताई राहत- सत्ता हारी, कलम जीती!

राजस्थान की डिप्टी मुख्यमंत्री दिया कुमारी से जुड़े कथित ब्लैकमेलिंग मामले में गिरफ्तार भोपाल के दो पत्रकार हरीश दिवेकर और आनंद पांडे को आखिरकार राजस्थान पुलिस ने सम्मानपूर्वक रिहा कर दिया है।

दोनों पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद देशभर में जबरदस्त विरोध और निंदा हुई थी। कई वरिष्ठ पत्रकार संगठनों और संपादकों ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।

रिहाई की खबर सामने आने के बाद पत्रकार समुदाय में राहत और खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों ने लिखा — “सत्ता सरकार हारी, कलम की जीत हुई।”

क्या था मामला

राजस्थान पुलिस ने कुछ दिन पहले भोपाल से ‘द सूत्र’ वेब पोर्टल और यूट्यूब चैनल से जुड़े दो पत्रकारों — आनंद पांडे और हरीश दिवेकर — को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने डिप्टी सीएम दिया कुमारी की छवि को धूमिल करने और कथित तौर पर धन उगाही की कोशिश की थी।

एफआईआर में दावा किया गया था कि ‘द सूत्र’ पर एक सुनियोजित तरीके से मानहानिकारक खबरें प्रकाशित की गईं और उन्हें हटाने के एवज में करोड़ों रुपये मांगे गए। पुलिस ने इस आधार पर मामला दर्ज कर पत्रकारों को हिरासत में लिया था।

‘द सूत्र’ का पक्ष

‘द सूत्र’ मीडिया समूह ने गिरफ्तारी को राजस्थान सरकार की दबावपूर्ण कार्रवाई बताया था। संगठन का कहना था कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता को कुचलने की कोशिश है, पर वे न झुकेंगे और न रुकेंगे।

रिहाई के बाद माहौल

दोनों पत्रकारों की सम्मानजनक रिहाई के बाद अब पूरा घटनाक्रम एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पत्रकार संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक जीत बताते हुए कहा कि —

“यह सिर्फ दो पत्रकारों की रिहाई नहीं, बल्कि प्रेस की आज़ादी की जीत है।”

इस पूरे प्रकरण ने सत्ता, मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच के जटिल रिश्ते पर फिर से बहस छेड़ दी है।

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