सलमान खान को अवैध तरीके से जमानत दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

एडवोकेट उमेश शर्मा और पत्रकार यशवंत सिंह मीडिया को जनहित याचिका के बारे में जानकारी देते हुए.


एक बड़ी खबर दिल्ली से आ रही है. सलमान खान को मिली जमानत खारिज कर उन्हें जेल भेजे जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आज एक जनहित याचिका दायर की गई. यह याचिका चर्चित मीडिया पोर्टल Bhadas4Media.com के संपादक यशवंत सिंह की तरफ से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने दाखिल की. याचिका डायरी नंबर 16176 / 2015 है. जनहित याचिका के माध्यम से इस बात को अदालत के सामने लाया गया है कि सेशन कोर्ट बॉम्बे ने इस मामले में पहले से निर्देशित कानून का पालन जानबूझ कर नहीं किया जिसकी वजह से सलमान खान को बेल आराम से मिल गयी और इससे भारत के पढ़े-लिखे लोग सन्न है. हर तरफ कोर्ट पर सवाल उठाए जाने लगे. सोशल मीडिया पर कोर्ट के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियों की बाढ़ सी आ गई.

लोग सवाल उठाने लगे कि क्या किसी अदृश्य और बड़ी राजनीतिक ताकत के इशारे पर न्यायपालिका सिर के बल पलट गई और ऐसे ऐसे कारमाने किए कि न्यायपालिका पर से लोगों का भरोसा उठ गया. यह प्रश्न मूल रूप से उठाया गया है कि क्या कानून सभी के लिए बराबर है? अगर ऐसा है तो सेशन कोर्ट के जज साहब ने एक दिन में ही दोनों आदेश क्यों पारित किया जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में ही कहा था कि ऐसे मामलों में अदालत को दोनों आदेश दो दिनों में पारित करने चाहिये. Allauddin Mian vs State of Bihar [1989 SCC (3) 5] के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया प्रावधान इस प्रकार है-

“We think as a general rule the Trial Courts should after recording the conviction adjourn the matter to a future date and call upon both the prosecu- tion as well as the defence to place the relevant material bearing on the question of sentence before it and thereafter pronounce the sentence to be imposed on the offender. In the present case, as pointed out earlier, we are afraid that tile learned Trial Judge did not attach sufficient importance to the mandatory requirement of sub-section (2) of Section 235 of the Code.”

सेशन कोर्ट के जज साहब के ऐसा करने की वजह से आर्डर की कॉपी उसी दिन उपलब्ध नहीं हो सकी और हाई कोर्ट ने इसी तर्क के आधार पर बेल दे दिया. ऐसा प्रतीत होता है कि यह साब जान बूझ कर सलमान को फायदा पंहुचाने के लिए किया गया और उनको फायदा पंहुचा भी दिया गया. सेशन कोर्ट के जज साहब शाम को सात बजे तक अपने द्वारा जान बूझ कर की गई गलती से सृजित होने वाले बेल आर्डर का इंतजार क्यों करते रहे और क्या उन्होंने ऐसा पहले कभी किया है. क्या हाई कोर्ट बिना फैसले की कॉपी के अपील सुन सकती है और सजा टाल सकती है? कोई भी अपील हाई कोर्ट के सामने बिना फैसले के कॉपी को सलंग्न किए बिना अदालत के सामने रखी ही नहीं जाती है तो इसमें ऐसा क्यों किया गया और क्या पहले ऐसा किया गया है और क्या आगे ऐसा किया जायेगा? क्या हाई कोर्ट सलमान खान के अपील को पंद्रह जुलाई को फैसले के लिये भेज सकता है और इस बात की परवाह किये बिना कि हजारों अपीलें लाइन में लगी अपने सुनवाई का इंतजार कर रहीं हैं और उनके मुलजिम जेलों में बैठे हैं. क्या अदालतें जो समानता का अधिकार दिलवाती हैं वो खुद समानता के अधिकार का हनन कर सकती हैं. जनहित याचिका के साथ सोशल मीडिया में न्यायालय के खिलाफ की गईं नकारात्मक टिप्पणियों की प्रति भी संलग्न की गई है ताकि कोर्ट आइना देख सके.

याचिका को लेकर पत्रकार यशवंत सिंह और अधिवक्ता उमेश शर्मा के बयान इन वीडियो लिंक पर क्लिक करके देख सुन सकते हैं: 1- https://goo.gl/efqsMc   xxx  2-  https://goo.gl/Q0xghP   xxx 3-  https://goo.gl/0lp1Vv    

ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें:

Umesh Sharma, Adv: 09868235388; e-mail: legalhelplineindia@gmail.com

Yashwant Singh, Petitioner: 09999966466; email: yashwantdelhi@gmail.com

PRESS RELEASE

The present PIL (Diary No. 16176 / 2015) has been filed by Yashwant Singh, journalist who is concerned about the criminal justice system of India being manipulated by rich and influential persons. The petition raises an important question of equality before law being followed and practised by the courts in letter and spirit. Salman Khan, the famous film star was convicted and sentenced in 304, Part-II, 337,338 IPC read with Section 134(A) (B), 187, 181, 185 MV Act and punishment of 5 years and few months was awarded on him on 6/5/2015 by the Sessions Court Bombay. 

The Sessions Court passed the order of conviction and the order of sentencing on the same day which is in violation of judgement of Supreme Court of India which directs as under: Allauddin Mian vs State of Bihar [1989 SCC (3) 5]

“We think as a general rule the Trial Courts should after recording the conviction adjourn the matter to a future date and call upon both the prosecu- tion as well as the defence to place the relevant material bearing on the question of sentence before it and thereafter pronounce the sentence to be imposed on the offender. In the present case, as pointed out earlier, we are afraid that tile learned Trial Judge did not attach sufficient impor- tance to the mandatory requirement of sub-section (2) of Section 235 of the Code.”

High Court of Bombay entertaining the Criminal Appeal without the copy of the judgement and sentencing order in mentioning on the same day i.e. 6/5/2015 and granting a stay on surrender. Sessions court waiting for the order of the High Court till 7.30 PM in the evening in very unusual manner. Can the Session court cite any such example where it waited till 7.30 PM in the evening after sentencing the convict. It was done just because a celeberity was involved despite the fact that his guilt was established before the court and he was awarded the severiest punishment by the Sessions Court. Another irregularity is the fixing of the Criminal Appeal filed by Salman Khan for final disposal on 15 July, 2015 despite the fact that several appeals are awaiting listing and hearing since long and some of the convicts are languishing in jail for years.

This all violates the equal treatment of all before the law and is an example of hostile discrimination to the poor masses of the country who can not afford expensive lawyers and remain suffering. The rich and influential can manipulate the law for their benefit which is evident from this case.

For more details contacts

Umesh Sharma, Adv: 09868235388; e-mail: legalhelplineindia@gmail.com

Yashwant Singh, Petitioner: 9999966466; email: yashwantdelhi@gmail.com


जनहित याचिका में क्या कुछ लिखा गया है, यह जानने-पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें:

Yashwant Versus Salman

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Comments on “सलमान खान को अवैध तरीके से जमानत दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

  • Mitra Ranjan says:

    कानून की नजरों में सब समान हैं का ढोल पीटने वाली न्यायपालिका किस कदर इलीट व्यवस्था की अनुगामी होती जा रही है, ये किसी से छुपा नहीं है। सलमान साहब को फटाफट जमानत मिल जा रही है कि वो बेहद मानवीय संवेदनाओं से लबरेज इनसान हैं. जयललिता मैडम सारे आरोपों से मुक्ति पा जा रही हैं. आसाराम बापू और नारायण साईं से जुड़े गवाहों की हत्या जारी है.… लेकिन वो भी आज नहीं तो कल आरोपों से मुक्त होने की दिशा में बढे जा रहे हैं –उधर आदिवासियों, दलितों और किसानों के पक्ष में लड़ने-भिड़ने वालों पर पुलिसिया दमन और राज्य प्रायोजित हिंसा जारी है लेकिन न्याय की आँखें बंद हैं। …. बिहार से लेकर आंध्र प्रदेश तक, यूपी से लेकर छत्तीसगढ़ तक आम जन की जिंदगी तबाह करने पर आमादा विकास रथ का पहिया कॉरपोरेट घरानों और हमारे राजनेताओं के अगुआई में निर्बाध गति से चल रहा है। विरोधियों को कभी नक्सली तो कभी राजद्रोही करार देकर हवालात भेज दिया जा रहा है। लेकिन हमारे न्याय व्यवस्था नीर-क्षीर विवेक प्रदर्शित करते हुए आँख-कान बंद किये पडी है।

    ऐसे में सलमान खान के अनैतिक जमानत के खिलाफ दायर याचिका निश्चय ही एक बढ़िया पहल है। यह कोई व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि न्याय के वर्ग-चरित्र के खिलाफ गरीबों के पक्ष में ली जाने वाली पहलकदमी है …. उम्मीद है यशवंत जी द्वारा शुरू की गयी इस मुहिम के तहत ज्यादा से ज्यादा लोग साथ आएंगे।

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  • JASWANT JI

    eK BAAT KI CHARCHA AUR HONI CHAHIYE…KE LAKHO CASES PENDING HOTE HUA BHI INKE 1 MAHINE (ONE MONTH) KE CHUTTI HO JAATI HAI…KYU HOTI HAI ?? KYA HE SCHOOL HAI ?? 😆

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  • Should applaud. This is the face how the Judicial System discriminates in AAM and ELITE class. Same is the fate of DA Case (T’nadu). This is the opportunity to have a rethink. Thanx 2 Yash—-Ji, for taking pain for this public cause.

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  • narender vats says:

    yaswant bhai mai lagatar ghinoni patrkaria se door jana chahta hu.ab aapki tarah mujhe bhi pange lene ki aadat hai. salmaan bada star hai. wo agar kuch logo ko kuchal de to kya fark padta hai. media ek eisi takat hai jo court ka faisla aane se pahle hee ye faisla tayaar kar deta hai ki kisi ko jai bhijwana ya use bail dilani hai. hamara media esa hi to kar raha hai, kisi ko jail jana tay ho jata hai to media use bail dila sakta hai. ye to aapne dekh hee liya hoga. jail taane se pahale uska jamkar mahimamandan kar do. ushe dharmatma banakar pesh kar do. fir kisi bhi judge ke haath to kaamp jayenge. meri story ka heading hoga, dharmatma ko jail. wah re desh de media. jai hind, jai joudge or jai salmaan.

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  • Dharam Chand Yadav says:

    Yaswant bhai bahut badiya h aapka fesla. Judicial System ko bhi aaina dikhana jaruri ho gya h. Badhai

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