भड़ास संपादक यशवंत ने खोला पत्ता, बताया कि वो क्यों चाहते हैं राहुल गांधी PM बनें!

Yashwant Singh : सवर्ण घरों के तमाम चूतिये बेरोजगार टहल रहे हैं, लेकिन वोट देंगे मोदी को। क्या कि पाकिस्तान को ठोंक दिया, मुसलमानों को ठीक कर दिया। जब नौकरी चाकरी के बारे में पूछो तो दांत चियार लेते हैं। दिन भर खोजते हैं कोई बीयर पिलाने, गोश्त खिलाने वाली ‘पार्टी’ मिल जाए। कृपया हमें …

मोदीजी, वैचारिक असहमति रखने वाले मीडियाकर्मी को आप गाली देने वाला पत्रकार नहीं बोल सकते : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : पीएम पद पर बैठे व्यक्ति को वैचारिक असहमति का सम्मान करना चाहिए. वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी के साथ जैसी हरकत मोदीजी ने की, उससे विनोद कापड़ी की नहीं बल्कि खुद मोदीजी की छवि का सत्यानाश हुआ है. लोग कहने लगे हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की इतनी छोटी सोच… …

अस्पताल से घर लौटे यशवंत ने एफबी पर लिखा- डाक्टर ने मदिरा से मुक्ति के लिए कह दिया है!

गुड मॉर्निंग. फोर्टिस की एक युवा महिला डॉक्टर ने रहस्य खोला कि आपको सीने में भारीपन के कारण बार बार अस्पताल में भर्ती होने के पीछे वजह मदिरा है। हर बार ecg में हृदय नॉर्मल आता है। सारा दोष गैस के सिर जाता है। डॉक्टर के मुताबिक मुझे क्रोनिक गैस्ट्रो रोग मदिरा और मिर्च की …

साधना न्यूज वर्सेज भड़ास : तीस हजारी कोर्ट पहुंचे यशवंत का कचहरीनामा पढ़ें

Yashwant Singh आज कचहरी का दाना पानी उड़ाया। चांपना न्यूज़ नाम से भड़ास पर जो व्यंग्य छपा था, साधना न्यूज़ वालों ने उसको लेकर मुकदमा किया हुआ है। आज उनके गवाह का क्रॉस था जिसे बखूबी अंज़ाम दिया सीनियर वकील हिमाल अख्तर भाई ने। भड़ास का ये केस हिमाल भाई बिल्कुल मुफ्त में लड़ रहे …

दिल्ली को गरियाने वाले राजीव नयन बहुगुणा जब राजधानी आए यशवंत से मिलने तो लिफ्ट में फंस गए, पढ़िए एक अर्धसत्य!

Yashwant Singh : वे दिल्ली को जब तब गाली देते रहते हैं। कंक्रीट, पोल्यूशन, असभ्यता, संवेदनहीनता, व्यभिचार, लूट, शोषण, बर्बरता आदि के आरोप फेसबुक पर लिख लिख के दिल्ली और दिल्ली वालों को निकृष्टतम साबित करते रहते हैं। कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सरवाइकल का दर्द खत्म होने पर यशवंत ने क्या पाठ पढ़ा, आप भी पढ़ें

Yashwant Singh : सरवाईकल का दर्द कुछ रोज से काबू हो गया। अपने आप। दर्द के दर्जन भर दिनों में आधा दर्जन शहरों, गांवों, कस्बों में घूमा। कहीं आराम न किया। इसलिए कुछ न दवा ने काम किया। इस दर्द में दवाएं काम करती भी नहीं, केवल मन बहलाती हैं। गर्दन सीधा रखो अभियान दबंगई …

सरवाइकल के भयंकर दर्द की चपेट में यशवंत, देखें लोग क्या-क्या दे रहे सलाह!

Yashwant Singh : सरवाइकल का दर्द क्या होता है, कोई मुझसे पूछे। दाहिने हिस्से के सिर से लेकर गर्दन पीठ कंधा हाथ तक में दर्द की लहरें उठ रहीं हैं। लैपटॉप, मोबाइल पर झुक कर देर तक काम और ढेर सारे तकिए लगाकर सोने की बुरी आदत ने फाइनली सीवियर सर्वाइकल पेन को निमंत्रित कर …

‘पीहू’ आज हो रही रिलीज, यशवंत बता रहे दो साल की हिरोइन वाली इस फिल्म को क्यों देखें!

Yashwant Singh : एक अदभुत और ऐतिहासिक फ़िल्म ‘पीहू’ आज देश भर में रिलीज हो रही है। फ़िल्म समीक्षकों ने जमकर स्टार बरसाए हैं। मैं इसलिए ये फ़िल्म फर्स्ट डे नहीं देखने जा रहा कि इस फ़िल्म को एक वरिष्ठ पत्रकार Vinod Kapri ने बनाया है, जो अब मेरे मित्र और बड़े भाई हैं। मैं …

यशवंत का भड़ासी चिंतन : कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है…

Yashwant Singh मुझे कभी कभी लगता है कि हम सब एक बेहतर सभ्यता लाए जाने से ठीक पहले के अराजक और असुंदर दौर के जीव-जंतु हैं जो जल्द खुद को अपनी करनी से विलुप्त कर लेंगे। उसके काफी समय बाद धरती पर फिर से जीवन प्रकट होगा और उस दौर के मनुष्य टाइप सबसे बुद्धिमान …

मीडिया पर कोबरापोस्ट की डाक्यूमेंट्री रिलीज, इसमें भड़ास वाले यशवंत भी! देखें वीडियो

Journalist Speak: Cobrapost documentary in solidarity with The UN #truthneverdies campaign! जाने-माने खोजी पत्रकार अनिरुद्ध बहल के नेतृत्व में संचालित मीडिया कंपनी ‘कोबरापोस्ट’ ने इन दिनों दुनिया भर में मीडिया और मीडिया वालों की खराब स्थिति सुधारने को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा चलाई जा रही मुहिम ‘सच कभी मरता नहीं’ का हिस्सा बनते हुए …

आज का दिन यशवंत के लिए क्यों रहा बेहद उदास करने वाला, पढ़ें

Yashwant Singh भड़ास पर किसी किसी दिन खबरें लगाते, संपादित करते, रीराइट करते, हेडिंग सोचते, कंटेंट में डूबते हुए अक्सर कुछ क्षण के लिए लगता है जैसे मेरा अस्तित्व खत्म हो गया है. खुद को खुद के होने का एहसास ही नहीं रहता. आज का दिन ऐसा ही रहा. दिल दुखी कर देने वाली खबरों …

आरक्षण मसला bjp का ‘शाहबानो केस’ है… खुद के किए धरे में जल जावेंगे! देखें वीडियो

Yashwant Singh  आरक्षण मसला bjp का ‘शाहबानो केस’ है… खुद के किए धरे में जल जावेंगे। अरे जब आपका बेस वोटर सवर्ण था तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला काहें पलटा? कहीं ऐसा न हो, माया मिली न राम वाली स्थिति हो जाए। हालात तो फिलहाल ऐसे हैं कि— ”ऐ मोदी, सवर्ण तुझे जीने नहीं देंगे …

शेव कराने पार्लर पहुंचे यशवंत को एक माडर्न हजाम ने क्या से क्या बना दिया! देखें तस्वीरें

Yashwant Singh : कल शेव कराने गया तो पार्लर में एक मॉडर्न सोच वाला ज्ञानी वर्कर मिला। उसने मेरे मूंछ बाल दाढ़ी को समुचित दशा-दिशा देने का दृढ़ प्रतिज्ञ इरादा जाहिर किया। उसके फेंकूपने वाले तेवर के भ्रम जाल में ऐसा किंकर्तव्यविमूढ़ सा हुआ कि सहमति में सिर हिलाते गया। कृपया हमें अनुसरण करें और …

यशवंत के माफीनामे पर विनोद कापड़ी ने यूं दिखाई दरियादिली…

Vinod Kapri : प्रिय यशवंत, ये एक जीवन जीने के लिए ही कम है। इसमें नफरत और कड़वाहट की गुंजाइश ही कहाँ होती है ? और वो मेरी तरफ से कभी थी ही नहीं… हाँ… हालात कुछ बने कि बात पुलिस और कोर्ट तक पहुँची… कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यशवंत ने कापड़ी दम्पति से मांगी माफी, तल्खी खत्म

विनोद कापड़ी दंपति से रिश्तों की तल्खी अब और नहीं… विनोद कापड़ी जी वरिष्ठ पत्रकार हैं, अब तो फिल्मकार भी हैं। हम दोनों में एक समानता रही है कि हम दोनों ही कवि और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन डंगवाल जी के प्रिय रहे हैं। उन्हीं परिचय से करीब 11 साल पहले मैंने विनोद कापड़ी जी से …

निर्दोष युवक को इनामी बदमाश में तब्दील कर दिया बुलंदशहर पुलिस ने!

जब शासन सत्ता की तरफ से पुलिस को इनकाउंटर करने की खुली छूट दे दी जाती है तो उसका साइड इफेक्ट बड़ा भयावह होता है. कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारी पैसे लेकर निर्दोष युवकों को इनामी बदमाश में तब्दील करने के लिए दिन-रात ‘मेहनत’ करने लगते हैं. बुलंदशहर के सौरभ अपने मां-पिता की इकलौती संतान हैं. …

कल्पेश याग्निक अपनी एक रिपोर्टर से बातचीत वाले वायरल हुए आडियो के कारण बेहद तनाव में थे!

yashwant singh कल रात ‘गॉडफादर पार्ट 2’ देख रहा था. सुबह करीब ढाई बजे के लगभग फिल्म खत्म हुई तो सोेने जाने से पहले यूं ही ह्वाट्सअप पर एक सरसरी नजर मारने लगा. देखा तो दो मैसेज कल्पेश याग्निक के हार्ट अटैक से मरने के आए पड़े थे. मुझे विश्वास नहीं हुआ. मैसेज भेजने वाले …

जेल में मर्डर : उस कैदी को वियाग्रा खिलाकर निपटा दिया गया था!

Yashwant Singh : चूंकि मैं ‘जानेमन जेल’ नामक किताब का लेखक हूं और 68 दिन जेल का नमक खाने का मौका पा चुका हूं इसलिए जेल में मुन्ना बजरंगी के मर्डर के बारे में एक्सपर्ट कमेंट देना अपना कर्तव्य समझता हूं. कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यशवंत सीख रहे वीडियो एडिटिंग, देखें उनकी पहली वीडियो स्टोरी

Yashwant Singh : प्रिंट मीडिया का आदमी रहा हूं. कंपोजिंग, एडिटिंग, रिपोर्टिंग, पेज मेकिंग आदि में एक दशक तक जीता-मरता रहा. फिर वेब मीडिया में आया तो यहां आनलाइन लिखने-पढ़ने, खबर-फोटो अपलोड करने के अलावा एचटीएमएल, कोडिंग से लेकर टेंपलेट्स, माड्यूल्स, प्लगइन, सर्वर आदि तक सीखने-जानने की कोशिश करते एक दशक बिता दिया. अब विजुवल मीडिया को सीखने की बारी है. वैसे भी स्मार्टफोन और फ्री डाटा के कारण विजुवल मीडिया में जबरदस्त क्रांति का दौर है. सो इसमें कदम रखते हुए अब वीडियो एडिटिंग सीख रहा हूं.

प्रेस क्लब आफ इंडिया के चुनाव में यशवंत हारे, देखें नतीजे

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Yashwant Singh : टोटल 1750 वोट पड़े हैं जिनमें 500 वोटों की गिनती हो चुकी है। इस आधार पर कहें तो सत्ताधारी पैनल क्लीन स्वीप की तरफ है। मैनेजिंग कमेटी के लिए जो 16 लोग चुने जाने हैं उनमें 500 वोटों के आधार पर मेरी पोजीशन 23 नम्बर पर है। चमत्कार की कोई गुंजाइश आप पाल सकते हैं। मैंने तो हार कुबूल कर लिया है। प्रेस क्लब के इस चुनाव में शामिल होकर इस क्लब को गहरे से जानने का मौका मिला जो मेरे लिए एक बड़ा निजी अनुभव है। नामांकन करने से लेकर बक्सा सील होने, बैलट वाली मतगणना देखना सुखद रहा। अब साल भर तैयारी। अगले साल फिर लड़ने की बारी। सपोर्ट के लिए आप सभी को बहुत बहुत प्यार। इतना समर्थन देखकर दिल जुड़ा गया। ये अलग बात है कि जो क्लब के टोटल वोटर है, उनमें बड़ी संख्या में मुझसे और मैं उनसे अपरिचित हूं। साल भर में इन सबसे जुड़ने की कोशिश किया जाएगा और अगली साल ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से लड़ा जाएगा।

कल मतगणना शुरू होने के ठीक बाद उपरोक्त स्टेटस यशवंत ने फेसबुक पर डाला था.

पीसीआई चुनाव : यशवंत को आख़िर क्यों जितायें दिल्ली के पत्रकार!

Naved Shikoh : यशवंत को आख़िर क्यों जितायें दिल्ली के पत्रकार! क्योंकि ये ऐसा पत्रकार ने जो ब्रांड अखबारों की नौकरी छोड़कर शोषित पत्रकारों की लड़ाई लड़ रहा है। इस क्रान्तिकारी पत्रकार ने अपने कॅरियर को दांव पर लगाकर, वेतन गंवाया.. तकलीफें उठायीं. मुफलिसी का सामना किया.. जेल गये.. सरकारों से दुश्मनी उठायी… ताकतवर मीडिया समूहों के मालिकों /उनके मैनेजमेंट से टकराये हैं ये। छोटे-बड़े अखबारों, न्यूज चैनलों में पत्रकारों का शोषण /महीनों वेतन ना मिलना/बिना कारण निकाल बाहर कर देना.. इत्यादि के खिलाफ कितने पत्रकार संगठन सामने आते हैं? कितने प्रेस क्लब हैं जहां पत्रकारों की इन वाजिब समस्याओं के समाधान के लिए कोई कदम उठाया जाता है!

प्रेस क्लब आफ इंडिया के नाकारा प्रबंधन से नाराज भड़ास संपादक यशवंत ने चुनाव लड़ने का दिया संकेत

Yashwant Singh : गजब है प्रेस क्लब आफ इंडिया. दूर के ढोल सुहावने वाला मामला इस पर पूरी तरह फिट बैठता है. दिल्ली के रायसीना रोड पर स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया का नाम सुनने पर वैसे तो दिमाग में एक अच्छी-खासी छवि बनती-उभरती है लेकिन अगर आप इसके मेंबर बन गए और साल भर आना-जाना यहां कर दिया तो आपको यह किसी मछली बाजार से कम न लगेगा. हर साल चुनाव होते हैं. प्रेस क्लब को अच्छे से संचालित करने के वास्ते पदाधिकारी चुने जाते हैं लेकिन लगता ही नहीं कि यहां कोई संचालक मंडल भी है या कोई पदाधिकारी भी हैं. दो उदाहरण देते हैं. प्रेस क्लब आफ इंडिया का चुनाव डिक्लेयर हो गया है. इस बाबत कुछ रोज पहले प्रेस क्लब के सूचना पट पर नोटिस चिपका दिया गया. लेकिन यह सूचना मेल पर नहीं भेजी गई. मुझे तो नहीं मिली. अब तक नहीं मिली है.

भाजपा यानि भ्रष्टाचारियों को बचाने और मीडिया पर अंकुश लगाने वाली पार्टी! (देखें वीडियो)

राजस्थान की भाजपा सरकार ने एक काला कानून बनाने की तैयारी कर ली है. इसक कानून के बन जाने के बाद भ्रष्टों के खिलाफ कोई खबर मीडिया वाले न लिख सकते हैं और न दिखा सकते हैं. महारानी वसुंधरा राजे फिलहाल लोकतंत्र को मध्ययुगीन राजशाही में तब्दील करने पर आमादा हैं. जितना विरोध कर सकते हैं कर लीजिए वरना कल को विरोध करने लायक हम सब बचेंगे ही नहीं क्योंकि देश बहुत तेजी से आपातकाल और तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है. ज्यादातर बड़े मीडिया हाउसेज बिक चुके हैं. जो बचे हैं उनको धमका कर और पाबंदी लगाकर चुप कराया जा रहा है. राजस्थान सरकार का काला कानून पाबंदी लगाकर मीडिया को चुप कराने की साजिश का एक हिस्सा है.

आइए, सच्ची दिवाली मनाएं, मन के अंधेरे घटाएं

दिवाली में दिए ज़रूर जलाएं, लेकिन खुद के दिलो-दिमाग को भी रोशन करते जाएं. सहज बनें, सरल बनें, क्षमाशील रहें और नया कुछ न कुछ सीखते-पढ़ते रहें, हर चीज के प्रति संवेदनशील बनें, बने-बनाए खांचों से उबरने / परे देखने की कोशिश करें, हर रोज थोड़ा मौन थोड़ा एकांत और थोड़ा ध्यान जरूर जिएं.

दी वायर और सिद्धार्थ वरदराजन की पत्रकारीय राजनीति पर शक करिए और नज़र रखिए, वजह बता रहे हैं यशवंत सिंह

Yashwant Singh : भाजपा ने सबको सेट कर रखा है। अब कांग्रेस वाले कुछेक पोर्टलों से काम चला रहे हैं तो इतनी बेचैनी क्यों। मुकदमा ठोंक के भाजपा ने रणनीतिक गलती की है। मुद्दे को देशव्यापी और जन-जन तक पहुंचा दिया। एक वेबसाइट को करोङों की ब्रांडिंग दे दी। तहलका वालों ने कांग्रेस परस्ती में बहुत-सी भाजपा विरोधी ‘महान’ पत्रकारिता की। मौका मिलते ही भाजपा शासित गोआ में तरुण तेजपाल ठांस दिए गए। उनके साथ हवालात में क्या क्या हुआ था, उन दिनों गोआ में तैनात रहे बड़े पुलिस अधिकारी ऑफ दी रिकार्ड बता सकते हैं।

इन खबरों के कारण भड़ास संपादक यशवंत पर हमला किया भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने!

साढ़े छह साल पुरानी ये वो खबरें है जिसको छापे जाने की पुरानी खुन्नस में शराब के नशे में डूबे आपराधिक मानसिकता वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी ने किया था भड़ास संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला… इसमें सबसे आखिरी खबर में दूसरे हमलावर अनुराग त्रिपाठी द्वारा स्ट्रिंगरों को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशाट है जिसके आखिर में उसका खुद का हस्ताक्षर है… ये दोनों महुआ में साथ-साथ थे और इनकी कारस्तानियों की खबरें भड़ास में छपा करती थीं… बाद में दोनों को निकाल दिया गया था…

भड़ास4मीडिया पर पहला मुकदमा मृणाल पांडेय के सौजन्य से एचटी मीडिया ने किया था

बेकार बैठीं मृणाल पांडेय को मिल गया चर्चा में रहने का नुस्खा!

Yashwant Singh : मृणाल पांडेय ने जो लिखा कहा, उस पर बहुत लोग लिख कह रहे हैं. कोई पक्ष में कोई विपक्ष में. आजकल का जो राजनीतिक विमर्श है, उसमें अतिवादी टाइप लोग ही पूरा तवज्जो पा रहे हैं, महफिल लूट रहे हैं. सो इस बार मृणाल पांडेय ही सही. मेरा निजी अनुभव मृणाल को लेकर ठीक नहीं. तब भड़ास4मीडिया की शुरुआत हुई थी. पहला पोर्टल या मंच या ठिकाना था जो मेनस्ट्रीम मीडिया के बड़े-बड़े मठाधीश संपादकों को चैलेंज कर रहा था, उनकी हरकतों को उजागर कर रहा था, उनकी करनी को रिपोर्ट कर रहा था.

यशवंत हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं, भगवान उन्हें दीर्घायु दें

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह पर हमले की खबर पढ़कर मन बहुत व्यथित हुआ। साथ ही इससे बहुत खिन्नता भी उपजी, आज के पत्रकारिता जगत के स्वरूप को लेकर। यशवंत सिंह पर हमला करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से दिवालिया हैं। यह बात भी तय है कि वे तर्क और सोचविहीन हैं।

पत्रकार कहे जाने वालों का यशवंत जैसे एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है : अविकल थपलियाल

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है…

Anoop Gupta : पत्रकार यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर हमला किया गया और पुलिस की चुप्पी तो समझ आती है, प्रेस क्लब की चुप्पी के मायने क्या हैं। अगर यशवंत का विरोध करना ही है तो लिख कर कीजिये, बोल कर कीजिए, हमला करके क्या साबित किया जा रहा है। मेरा दोस्त है यशवंत, कई बार मेरे मत एक नहीं होते, ये जरूरी भी नहीं है लेकिन हम आज भी दोस्त हैं। चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए विरोध से बाहर निकलने की जरूरत है।