मनीष सिंह-
अडानी का कोई दोष नहीं है.. विमान के क्रेश के बाद सोशल मीडिया के लालबुझक्कड़ भौहें ऊंची कर, फुसफुसा कर बतिया रहे है- जानते हो, अहमदाबाद एयरपोर्ट का मेंटेनेंस का ठेका किसका है?
अरे भाई, अडानी का है। लेकिन उसका क्रैश से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है।
एयरपोर्ट में कई एजेंसी लगी होती है। जैसे आपकी तलाशी लेने और सुरक्षा व्यवस्था का काम CISF याने सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्युरिटी फोर्स करती है। ये अर्धसैनिक बल है।
हवाई यातायात का नियंत्रण, विमानों से सम्पर्क, लैंडिंग टेक ऑफ का निमंत्रण, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, याने AAI करता है। जो DGCA के अन्तर्गत आता है। ये नागर विमानन मंत्रालय का विभाग है।
प्लेन्स का मेन्टेनेंस, वह कम्पनी करती है, जिसे एयरलाइन ने ठेका दिया हो। टिकट काउंटर, बोर्डिंग मैनेजमेंट, लगेज हैंडलिंग, सम्बन्धी एयरलाइन का स्टाफ करता है। पेट्रोल के डिपो इंडियन ऑयल जैसी कोई सरकारी कम्पनी चलाती है।
तो भला अडानी का किस बात का ठेका लिया है फिर? पूछिये..
तो भैया, अडानी पूरे एयरपोर्ट में झाड़ू पोंछा लगवाता है। शौचालय साफ करवाता है। शीशे चमकाता है। बल्ब बदलता है। साबुन, पर्दे, ऐसी कूलर, कुर्सी, गद्दे, एस्केलेटर में ग्रीसिंग, तेल पानी डालना आदि-आदि काम वह करता है। और वसूली करता है।
पार्किंग की वसूली, याने पार्किंग ठेका वह देगा। जो दुकानें बनी हैं उनके रेंट की वसूली, याने वहां जो 400 का समोसा खाते हैं, उसमे 300 अडानी ले जाते हैं। वे दूसरे वेंडर्स और एयरलाइन से टिकट कियोस्क/ऑफिस, कार टैक्सी, फॉरेक्स वालों को जगह देना, की रेंट वसूली भी करते हैं।
और आपसे भी वसूली करते हैं। जो टिकट आप 5000 का खरीदते हैं, उसमें ढाई हजार ही प्लेन चालक अपने पास रख पाता है। बाकी का सरकार औऱ अडानी उससे उगाही करके फिफ्टी-फिफ्टी कर लेते हैं।
इसे अच्छी अंग्रेजी में टैक्सेस एंड फी कहा जाता है। तो कुल जमा गौतम भाई, अपने एविएशन सेक्टर के रामू काका हैं। सिक्योरिटी, एयर ट्रैफिक, प्लेन मेंटेनेंस आदि टेक्निकल काम उनके बूते का नहीं। और उन्हें करने दिया भी नहीं जाता।
तो सोशल मीडिया के लालबुझक्कड़ जो भौहें ऊंची कर, फुसफुसा कर, अहमदाबाद एयरपोर्ट का मेंटेनेंस का ठेका बतिया रहे हैं। जान लें। अडानी का दूर दूर तक कोई दोष नहीं है..
रामजी तिवारी-
अहमदाबाद मिरर की यह खबर 13 दिसंबर 24 की है जब यही अहमदाबाद लंदन की फ्लाइट में तकनीकी खराबी को देखते हुए उड़ान रद्द कर दी गई थी।

6 महीने में कल 12 जून को यह दर्दनाक वीभत्स हादसा हुआ।
हम भारतीयों को निजीकरण के हवाले किया जा चुका है और हमको यह भी अच्छे से पता है कि यह भ्रष्ट तंत्र अपनी जिम्मेदारी से बच जाएगा।


